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📢 "Polity Study Adda पर आपका स्वागत है! 📜 राजव्यवस्था रटना छोड़ दो, अब समझने की बारी है! 📜 यहाँ आपको TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET/JRF और UPSC, State PCS, SSC व अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए Political Science के प्रमाणित नोट्स और महत्वपूर्ण MCQs मिलेंगे। 📜"
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Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

Polity Study Adda पर TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET, UPSC, SSC सहित सभी One-Day प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजनीति विज्ञान और भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण MCQs और नोट्स पढ़ें। 'राजव्यवस्था रटने का नहीं, समझने का विषय है' — इसी मूल विचार के साथ, यह सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच है।

यहाँ हम संपूर्ण राजनीति विज्ञान से संबंधित उच्च-स्तरीय MCQs, विस्तृत नोट्स और तथ्यपूर्ण आर्टिकल्स नियमित रूप से अपलोड करते हैं। संविधान के अनुच्छेदों, शासन व्यवस्था और जटिल राजनीतिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाना ही हमारा लक्ष्य है।

यह एक निजी एजुकेशनल (शैक्षिक) पोर्टल है जिसे विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) विषय के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी सफलता का परचम लहराना चाहते हैं।

Polity Study Adda की मुख्य विशेषताएँ

  • विषयवार विस्तृत आर्टिकल्स: भारतीय राजव्यवस्था, राजनीतिक चिंतक, सिद्धांत, लोक प्रशासन और IR की संपूर्ण सामग्री।
  • उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): हर टॉपिक पर आधारित अति महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Questions) और Mock Tests।
  • परीक्षा-उपयोगी शॉर्ट नोट्स: त्वरित रिवीजन (Quick Revision) के लिए टू-द-पॉइंट (To-the-point) आर्टिकल्स।
  • सरल और स्पष्ट भाषा: कठिन से कठिन विषय को भी आसान शब्दों में समझाने का प्रयास।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग क्यों करना चाहिए?

राजनीति विज्ञान अक्सर छात्रों को केवल अनुच्छेदों (Articles) और अधिनियमों को याद रखने वाला विषय लगता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए आपको इसका उपयोग करना चाहिए क्योंकि:

  • यहाँ रटने के बजाय देश की व्यवस्था समझने पर जोर दिया जाता है।
  • यह TGT/PGT/LT और UGC NET के विस्तृत सिलेबस को कवर करता है, जिससे One-Day परीक्षाएँ स्वतः ही आसान हो जाती हैं।
  • परीक्षा के बदलते पैटर्न के अनुसार नवीनतम सामग्री लगातार अपडेट होती है।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग हम कैसे कर सकते हैं?

  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर Indian Polity, Political Thinker या Theory के सेक्शन में जाएं।
  • सर्च करें: किसी विशेष विषय (जैसे- मूल अधिकार, प्लेटो) के लिए सर्च बॉक्स का उपयोग करें।
  • रिवीजन और प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के बाद उसी विषय के MCQs और Mock Tests को हल करें।

प्रतियोगी परीक्षाओं में 'राजनीति विज्ञान' विषय का क्या महत्व है?

भारत में सिविल सेवा और शिक्षक भर्ती (Teaching Exams) जैसे क्षेत्रों में राजव्यवस्था की भूमिका निर्णायक होती है:

  • सामान्य अध्ययन (GS) का आधार: UPSC और State PCS में राजव्यवस्था (Polity) से संविधान और गवर्नेंस पर कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • स्कोरिंग विषय: यदि कॉन्सेप्ट क्लियर हों, तो राजनीति विज्ञान में पूरे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • सामाजिक और कानूनी समझ: यह विषय हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और देश की कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।

हम परीक्षाओं में राजनीति विज्ञान में अच्छे अंक कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

  • क्रमबद्ध अध्ययन: अनुच्छेदों को रटने के बजाय भागों और संबंधित अवधारणाओं के साथ पढ़ें।
  • मानक स्रोत: केवल प्रामाणिक पुस्तकों और Polity Study Adda जैसे सटीक प्लेटफॉर्म्स पर अध्ययन करें।
  • MCQs की प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के तुरंत बाद उससे जुड़े अधिक से अधिक बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें।
  • शॉर्ट नोट्स: एग्जाम के अंतिम दिनों के लिए खुद के की-वर्ड्स (Keywords) वाले नोट्स बनाएं।

भारत में सरकारी नौकरियां लोगों को क्यों पसंद हैं?

हमारे देश में सरकारी नौकरी (Government Job) को लेकर युवाओं में एक अलग ही जुनून देखने को मिलता है। इसे केवल एक रोज़गार नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता माना जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • करियर और जॉब सिक्योरिटी: प्राइवेट सेक्टर की अनिश्चितता के उलट, सरकारी सेवा में नौकरी जाने का डर न के बराबर होता है।
  • शानदार वेतन और सुविधाएं: आकर्षक सैलरी के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया (HRA) और मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं।
  • समाज में प्रतिष्ठा: सरकारी अफसर या शिक्षक बनने पर समाज और रिश्तेदारों के बीच सम्मान और रुतबा बढ़ता है।
  • तनावमुक्त पारिवारिक जीवन: फिक्स वर्किंग आवर्स और सरकारी छुट्टियों के कारण आप अपने परिवार को क्वालिटी टाइम दे पाते हैं।

सरकारी नौकरी हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

सरकारी नौकरी पाना रातों-रात का चमत्कार नहीं है; इसके लिए सही दिशा, अटूट धैर्य और स्मार्ट स्टडी की जरूरत होती है:

  • अपना फोकस साफ रखें: सबसे पहले तय करें कि आपको टीचिंग फील्ड (TGT, PGT, NET) में जाना है या प्रशासनिक सेवा (UPSC, PCS) में।
  • पाठ्यक्रम (Syllabus) से चिपके रहें: ऑफिशियल सिलेबस का प्रिंटआउट लें और पिछले 5-10 सालों के प्रश्न-पत्रों (Previous Year Papers) का बारीकी से अध्ययन करें।
  • प्रामाणिक अध्ययन सामग्री: 10 अलग-अलग किताबें पढ़ने से बेहतर है कि 1 अच्छी किताब को 10 बार पढ़ें। पॉलिटी के लिए Polity Study Adda के सटीक नोट्स फॉलो करें।
  • रोज़ाना प्रैक्टिस: सिर्फ थ्योरी पढ़ने से काम नहीं चलेगा। जो टॉपिक पढ़ें, तुरंत उसके MCQs हल करें और मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को सुधारें।

Polity Study Adda आपकी कैसे मदद कर सकता है?

  • सिलेबस-आधारित सामग्री: TGT, PGT, UPSC, NET/JRF के लेटेस्ट सिलेबस के अनुसार कंटेंट।
  • समय की बचत: आपको कई किताबें छानने की जरूरत नहीं, सभी प्रामाणिक स्रोतों का निचोड़ मिलता है।
  • मार्गदर्शन: किस परीक्षा के लिए क्या और कितना पढ़ना है, इसका सही मार्गदर्शन।

Polity Study Adda पर हमें भरोसा क्यों करना चाहिए?

  • तथ्यों की प्रामाणिकता: हमारा कंटेंट मानक राजनीतिक पुस्तकों और प्रामाणिक स्रोतों से अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है।
  • छात्र-हित सर्वोपरि: हमारा उद्देश्य भ्रामक जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्र की सफलता को सुनिश्चित करना है।
  • लगातार अपडेट्स: हम पुरानी सामग्री पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार कंटेंट को अपडेट करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

उत्तर: यह एक निजी शैक्षिक (Educational) पोर्टल है जो विशेष रूप से 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) और 'भारतीय राजव्यवस्था' (Indian Polity) विषय की तैयारी कर रहे छात्रों (TGT, PGT, UPSC, NET आदि) के लिए बनाया गया है।

Q2. क्या यह एक सरकारी वेबसाइट है?

उत्तर: नहीं, यह एक निजी (Private) प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को मुफ्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।

Q3. यह वेबसाइट किन परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?

उत्तर: मुख्य रूप से Teaching Exams (TGT, PGT, LT Grade, UGC NET) और Civil Services (UPSC, State PCS, SSC, Railway) के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।

Q4. क्या यहाँ मुझे लोक प्रशासन (Public Administration) के नोट्स मिलेंगे?

उत्तर: हाँ, भारतीय राजव्यवस्था और राजनीतिक विचारकों के साथ-साथ आपको लोक प्रशासन और अन्तर्राष्ट्रीय संबंध (IR) के भी विस्तृत नोट्स और MCQs यहाँ प्राप्त होंगे।

Q5. क्या वेबसाइट पर केवल थ्योरी (Theory) पढ़ाई जाती है?

उत्तर: नहीं, थ्योरी के साथ-साथ आपकी प्रैक्टिस के लिए उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective MCQs) और मॉक टेस्ट भी उपलब्ध है।

Q6. क्या वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी प्रामाणिक है?

उत्तर: बिल्कुल, यहाँ उपलब्ध कराई गई सभी अध्ययन सामग्री मानक और प्रामाणिक राजनीतिक पुस्तकों के गहन अध्ययन के बाद ही तैयार की जाती है।

Q7. मैं इस वेबसाइट पर किसी विशेष टॉपिक की मांग कैसे कर सकता हूँ?

उत्तर: आप 'Contact Us' पेज पर जाकर या सीधे PolityStudyAdda@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से हमें अपने सुझाव और डिमांड भेज सकते हैं।

Q8. क्या पॉलिटी स्टडी अड्डा का कोई यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया ग्रुप है?

उत्तर: हाँ, आप वेबसाइट के फुटर (सबसे नीचे) में दिए गए लिंक के माध्यम से हमारे Telegram, WhatsApp और YouTube चैनल आदि से जुड़ सकते हैं।

Q9. भारत में सरकारी नौकरी (Government Job) की इतनी मांग क्यों है?

उत्तर: जॉब सिक्योरिटी, बेहतर वेतन, भत्ते और समाज में उच्च सम्मान के कारण सरकारी नौकरी युवाओं की पहली पसंद होती है।

Q10. मैं शिक्षक या सिविल सेवा परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

उत्तर: सिलेबस के अनुसार रणनीति बनाकर पढ़ने, प्रामाणिक स्रोतों (जैसे Polity Study Adda) का उपयोग करने और नियमित MCQs की प्रैक्टिस करने से सफलता निश्चित है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

'Polity Study Adda' पर प्रकाशित सभी अध्ययन सामग्री, नोट्स, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और अन्य सूचनाएं केवल छात्रों की परीक्षा की तैयारी और उनके त्वरित मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई हैं। इन्हें कानूनी दस्तावेज़ या अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि हमारी टीम ने सभी तथ्यों और उत्तरों को मानक पुस्तकों के आधार पर पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक रखने का हर संभव प्रयास किया है, लेकिन हम अनजाने में हुई किसी भी मानवीय त्रुटि, टाइपिंग की गलती या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

प्रश्नों के उत्तर और आयोग (Commissions) के संबंध में विशेष सूचना —
राजनीति विज्ञान जैसे विस्तृत विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में अक्सर यह देखा जाता है कि अलग-अलग भर्ती आयोग (Commissions) कभी-कभी एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तरों को सही मान लेते हैं, या विवाद की स्थिति में एक से अधिक विकल्पों को सही ठहरा देते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि किसी प्रश्न का उत्तर एक आयोग के अनुसार कुछ और होता है, जबकि दूसरे आयोग के अनुसार कुछ और। आधिकारिक 'उत्तर कुंजी' (Official Answer Key) और हमारे द्वारा दिए गए उत्तरों में भिन्नता होने की स्थिति में 'Polity Study Adda' किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

छात्रों को स्पष्ट रूप से सलाह दी जाती है कि किसी भी उत्तर या तथ्य की अंतिम पुष्टि के लिए वे संबंधित विभाग/आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, उनकी उत्तर कुंजी और मान्यता प्राप्त मानक पुस्तकों (Standard Books) का ही संदर्भ लें। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी संगठन या आयोग से संबद्ध नहीं है; यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और निजी शैक्षिक मंच है।

लोक प्रशासन: अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, उपागम एवं विकास

लोक प्रशासन: अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, उपागम एवं विकास
लोक प्रशासन: अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र, उपागम एवं विकास
Study Material Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत इस लेख में लोक प्रशासन का अर्थ या मूल अवधारणा, परिभाषा, प्रकृति, स्वरूप, क्षेत्र, विभिन्न विद्वानों के कथन, तथा लोक प्रशासन के विभिन्न उपागम (जैसे POSDCORB) आदि का हस्तलिखित नोट्स के आधार पर विस्तार से वर्णन किया गया है। यह PGT, GIC, GDC, UPSC, PCS, NET-JRF परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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1. लोक प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषा

लोक प्रशासन दो शब्द 'लोक' और 'प्रशासन' से बना है। जिसमें 'लोक' का अर्थ है - सरकारी और 'प्रशासन' का अर्थ है - उत्कृष्ट रीति से कार्य करना।

इस प्रकार लोक प्रशासन का अर्थ हुआ - सरकारी कर्मचारी अधिकारियों द्वारा जन-कल्याण हेतु उत्कृष्ट रूप से कार्य करना। लोक प्रशासन के अन्तर्गत सभी प्रकार के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया जाता है। लोक प्रशासन सरकारी प्रशासन है जिसमें नौकरशाही या अधिकारी तन्त्र की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

L.D. ह्वाइट के अनुसार:
"लोक प्रशासन में वे सभी कार्य आ जाते है जिसका उद्देश्य सार्वजनिक नीतियों को पूरा करना या लागू करना होता है।"

L.D. ह्वाइट पुनः लिखते हैं - "किसी प्रयोजन या उद्देश्य के लिए बहुत ही कम मनुष्यों का निर्देशन समन्वय तथा नियन्त्रण ही प्रशासन है।"

2. प्रशासन के उद्देश्य और जन्म

प्रशासन के मूलतः दो उद्देश्य होते है: [1] निश्चित उद्देश्य तथा [2] सहकारी सामूहिक प्रयास। अर्थात् किसी निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किया गया सहकारी सामूहिक प्रयास प्रशासन कहलाता है।

एक गतिविधि के रूप में लोक प्रशासन उतना ही पुराना है जितना की हमारी सभ्यता, लेकिन अध्ययन के विषय के रूप में लोक प्रशासन का जन्म 1887 में वुडरो विल्सन के एक लेख "The study of administration" से हुआ। इस लेख में वुडरो विल्सन ने 'राजनीति सिद्धान्त प्रशासन द्विभाजन सिद्धान्त' दिया। इसलिए वुडरो विल्सन को 'लोक प्रशासन के जनक' के रूप में देखा जाता है।

वुडरो विल्सन के प्रमुख विचार:
"राजनीति का सम्बन्ध 'नीतियों के निर्धारण' से है जो कि राजनीति शास्त्र का विषय है जबकि लोक प्रशासन का सम्बन्ध 'नीतियों के क्रियान्वयन' से है। इसलिए लोक प्रशासन को राजनीतिशास्त्र से अलग होना चाहिए।"

वुडरो विल्सन का प्रसिद्ध कथन है - "कानून को विस्तृत एवं क्रमबद्ध रूप से क्रियान्वित करने का नाम ही लोक प्रशासन है।" ध्यान रहे कि कानून को क्रियान्वित करने की प्रत्येक क्रिया एक प्रशासकीय क्रिया है।

3. प्रमुख विचारकों के कथन

  • 👉 प्रो. डोनहम का कथन: "यदि हमारी सभ्यता असफल होती है तो ऐसा मुख्यतः प्रशासन के पतन के कारण होगा।"
  • 👉 पण्डित नेहरू का कथन: "लोक प्रशासन सभ्य जीवन का रक्षक मात्र ही नहीं वरन् सामाजिक न्याय तथा सामाजिक परिवर्तन का महान साधन है।"
  • 👉 फाइनर के अनुसार: "किसी देश का संविधान चाहे कितना ही अच्छा क्यों न हो और उसके मन्त्री योग्य क्यों न हो परन्तु बिना दक्ष प्रशासन के उस देश में प्रशासन सफल नहीं हो सकता।"

4. लोक प्रशासन के अध्ययन के दृष्टिकोण

लोक प्रशासन के अध्ययन के मुख्य रूप से दो दृष्टिकोण प्रचलित हैं:

लोक प्रशासन
सीमित दृष्टिकोण
(लूथर गुलिक, गैलडन, साइमन)
व्यापक दृष्टिकोण
(L.D. ह्वाइट, विलोबी, F.M. मार्क्स)

[1] सीमित दृष्टिकोण

इसके समर्थकों में लूथर गुलिक, गैलडर और साइमन का नाम आता है। इन सभी का मानना है कि लोक प्रशासन का आशय सरकार की कार्यपालिका शाखा की गतिविधियों से है क्योंकि नीतियों का क्रियान्वयन केवल कार्यपालिका ही करती है।

[2] व्यापक दृष्टिकोण

L.D. ह्वाइट, विलोबी, F.M. मार्क्स, पिफनर आदि विचारको के अनुसार लोक प्रशासन का आशय सरकार की तीनों अंगों - कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका की गतिविधियों से है। लेकिन लोक प्रशासन की पूर्ण व्याख्या फिर भी नहीं होती क्योंकि लोक प्रशासन में प्रबन्ध के कार्य किये जाते है या नहीं इसकी चर्चा नहीं हुई है।

5. प्रबन्धकीय दृष्टिकोण (POSDCORB)

प्रबन्धकीय दृष्टिकोण के समर्थको में - हेनरी फयोल, लूथर गुलिक, लिंडल उर्विक का नाम आता है। इन विचारको का मानना है कि लोक प्रशासन का आशय प्रबन्ध के कार्यो से है क्योंकि बेहतर प्रबन्धन के बिना नीतियों का कुशलतापूर्वक क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता है। प्रबन्ध के कार्यो से आशय POSDCORB से है:

अक्षर (Letter) अंग्रेजी अर्थ हिन्दी अर्थ
P Planning योजना बनाना
O Organization संगठन बनाना
S Staffing सूची करण करना (कर्मचारी नियुक्ति)
D Directing दिशा-निर्देश करना
Co Coordinating समन्वय करना
R Reporting रपट तैयार करना (प्रतिवेदन)
B Budgeting बजट बनाना

उपर्युक्त परिभाषा की आलोचना भी हुई क्योंकि पोस्टकार्ब (POSDCORB) सिद्धान्त ने लोक प्रशासन के अध्ययन में विषय-वस्तु पर ध्यान नहीं दिया। निक्रो जैसे विचारक ने माना कि - लोक प्रशासन से आशय - 'विषय-वस्तु के ज्ञान से है'। जैसे - कृषि, स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा आदि क्या विषय-वस्तु है और इन्हीं को क्रियान्वित करने के लिए प्रबन्ध की आवश्यक होती है।

लेविस मेरियम (Lewis Meriam) - POSDCORB के प्रबल आलोचक:
"लोक प्रशासन का आशय - विषय-वस्तु और प्रबन्ध दोनों होना चाहिए।"

प्रसिद्ध कथन: "लोक प्रशासन कैंची के दो फलकों के समान है, एक फलक का सम्बन्ध 'प्रबन्ध' से है तो दूसरे का सम्बन्ध - 'विषय-वस्तु' से है।"

इसका समर्थन डिमॉक ने किया। लेविस मेरियम के विचारों का समर्थन करते हुए डिमॉक ने लिखा है - "लोक प्रशासन का सम्बन्ध सरकार का क्या और कैसे से है। क्या का सम्बन्ध - 'विषय वस्तु' से है और कैसे का सम्बन्ध - 'प्रबन्ध' से है।" एप्पलबी (Appleby) जैसे विचारको ने लोक प्रशासन का आशय 'नीतियों के क्रियान्वयन' एवं 'नीतियों के निर्माण' दोनों से माना है।

6. लोक प्रशासन के क्षेत्र

प्रारम्भ में लोक प्रशासन का कार्य क्षेत्र काफी सीमित था क्योंकि प्रारम्भ में पुलिस (Police) राज्य का बोल-बाला था। लोक प्रशासन केवल सुरक्षा, शान्ति व्यवस्था और न्याय के कार्यो को क्रियान्वित करता था। लोक कल्याणकारी कार्यो से लोक प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं था। सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्रों में व्यक्ति स्वतन्त्र था।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लोक-कल्याणकारी राज्य का उदय हुआ। अतः लोक प्रशासन के कार्य क्षेत्र में वृद्धि हो गयी अब लोक प्रशासन का क्षेत्र केवल सुरक्षा व्यवस्था, शान्ति व्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहा। विभिन्न कल्याणकारी नीतियों को जनता तक पहुँचाना उसका मुख्य विषय बन गया। आज लोक प्रशासन का क्षेत्र इतना विस्तृत हो गया है कि पालने से लेकर कब्र तक लोक प्रशासन अपनी भूमिका अदा कर रहा है।

7. लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में समानता एवं असमानता

प्रारम्भ में लोक प्रशासन औद्योगिक क्रान्ति के परिणाम स्वरूप निजी प्रशासन के अस्तित्व में आया क्योंकि प्रारंभ में राज्य केवल सुरक्षा, शांति व्यवस्था व न्याय तक ही सीमित था। सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में राज्य का कोई हस्तक्षेप नहीं था। प्रशासन और निजी प्रशासन में समानता पर बल - हेनरी फयोल, लूथर गुलिक, लेण्डल उर्विक और मूने तथा रैले ने दिया।

दोनों में मुख्य समानताएँ

  • दोनों में अपने कार्य को सम्पन्न करने के लिए एक संगठन (Organization) की आवश्यकता होती है क्योंकि अकेले कोई भी व्यक्ति प्रशासनिक कार्यों को संपन्न नहीं कर सकता।
  • दोनों के कार्य-प्रणाली में भी लगभग समानता होती है (नीतियों को बनाने और उन्हें लागू करने के लिए दोनों में विभिन्न चरणों से होकर गुजरना पड़ता है।)।
  • दोनों में अधिकारियों का समान उत्तरदायित्व होता है (किसी कार्यों में गड़बड़ी पाई जाने पर अधिकारियों को ही उत्तरदाई ठहराया जाता है)।
  • दोनों में जन-सम्पर्क (Public Relations) को महत्व दिया जाता है क्योंकि सारी नीतियां व कानून जनता के लिए बनाए जाते हैं।
  • दोनों में अन्वेषण (Research) को महत्व दिया जाता है अर्थात विभिन्न प्रकार की खोज और आविष्कार विभाग के द्वारा किए जाते हैं ताकि अधिक लाभ पहुँचाया जा सके।

उपर्युक्त समानता के बावजूद - साइमन, एप्पलबी और सर जोशिया स्टैम्प लोक प्रशासन और निजी प्रशासन के बीच निम्नलिखित असमानता (Differences) पर बल देते है:

आधार लोक प्रशासन (Public Admin) निजी प्रशासन (Private Admin)
उद्देश्य जन-कल्याण और सेवा की भावना। लाभ कमाना (Profit Motive)।
उत्तरदायित्व जनता के प्रति सार्वजनिक उत्तरदायित्व अधिक। जनता की सन्तुष्टि (ग्राहक) पर बल।
व्यवहार कानूनों के कारण कठोर (एकरूपता)। लचीला और संवेदनशील व्यवहार।
लालफीताशाही नियमों के कारण कार्य में देरी (Red Tapism)। त्वरित निर्णय, लालफीताशाही नहीं।
एकाधिकार राजकीय कार्यों पर एकाधिकार (Monopoly)। प्रतिस्पर्धा (Competition) मौजूद होती है।

दोनों में लाभ के तत्व में अन्तर है जहाँ लोक प्रशासन लाभ के तत्व को ध्यान में रखकर कोई कार्य नहीं करता वहीं निजी प्रशासन केवल लाभ के तत्व को ही ध्यान में रखकर अपनी सम्पूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न करता है।

दोनों में सेवा की भावना में भी अन्तर है, जहाँ लोक प्रशासन सेवा के बजाय औपचारिकता को ध्यान में रखकर अधिक कार्य करता है, वहीं निजी प्रशासन सेवा को अधिक महत्व इसलिए देता है ताकि अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सके।

दोनों के सार्वजनिक उत्तरदायित्व में भी अन्तर है, जहाँ लोक प्रशासन सार्वजनिक उत्तरदायित्व से अधिक अपने विभाग व बड़े अधिकारी के प्रति उत्तरदायी रहता है, वहीं निजी प्रशासन जनता की सन्तुष्टि पर अधिक बल देता है।

दोनों की व्यवहारिकता एवं एकरूपता में भी अन्तर है, जहाँ लोक प्रशासन का व्यवहार संवेदनहीन नजर आता है, वहीं निजी प्रशासन एक संवेदनशील व्यवहार प्रस्तुत करता है ताकि अपने लोगों को अधिक से अधिक लाभ दिलाया जा सके।

एकाधिकार की दृष्टि से भी दोनों में अन्तर दिखाई पड़ता है।

दोनों में कानूनों व नियमों के प्रभाव में भी अन्तर है, जहाँ लोक प्रशासन में कठोर कानूनों पर अधिक बल दिया जाता है, वहीं निजी प्रशासन में काफी कुछ लचीलापन दिखायी पड़ता है।

दोनों में आचारसंहिता पर भी अन्तर दिखाई पड़ता है।

लालफीताशाही को लेकर भी लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में अन्तर है। लालफीताशाही का अर्थ है - कार्य में देरी। यह लोक प्रशासन में देखने को मिलता है, जबकि निजी प्रशासन में यह बहुत कम देखने को मिलता है।

सेवा सुरक्षा की दृष्टि से दोनों में अन्तर है। लोक प्रशासन गुणवत्तापूर्ण सेवायें उपलब्ध कराने में उतना सफल नहीं रहा, लेकिन निजी प्रशासन इन सब विषयों को ध्यान में रखती है।

8. लोक प्रशासन के उपागम

'उपागम' का शाब्दिक अर्थ है - दृष्टिकोण या सिद्धान्त।

उपागम
=
केन्द्रीय समस्या
+
पद्धति (खोज)

'पद्धति' का शाब्दिक अर्थ है - अन्वेषण की वह तकनीक जिसके माध्यम से किसी विषय के बारे में हम एक विश्वसनीय ज्ञान प्राप्त करते है, जैसे :- ऐतिहासिक पद्धति, दार्शनिक पद्धति, वैज्ञानिक पद्धति आदि और जब किसी केन्द्रीय समस्या को किसी पद्धति के माध्यम से हल करके एक दृष्टिकोण देते है तो उसे उपागम कहा जाता है। जैसे- किसी प्रशासन समस्या को हम ऐतिहासिक पद्धति से हल करते हैं तो वह ऐतिहासिक उपागम हो जाता है और नैतिकता पूर्ण तरीके से हल करते हैं तो उसे दार्शनिक उपागम कहा जाता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के पहले लोक प्रशासन में परम्परागत उपागम का बोलबाला था (जिसके अंतर्गत ऐतिहासिक उपागम, दार्शनिक उपागम, कानूनी उपागम व संस्थागत उपागम)। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैज्ञानिक और तुलनात्मक उपागम का बोलबाला हो गया। लोक प्रशासन एक विज्ञान और कला दोनों है। जहाँ विज्ञान का अर्थ - 'उसके ज्ञान से है' और कला का आशय - 'उसके आचरण तथा उसके व्यवहार से है'।

9. लोक प्रशासन का विकास

लोक प्रशासन का जन्म राज्य के उदय के साथ ही हुआ। कौटिल्य का अर्थशास्त्र इसका एक उदाहरण है लेकिन अनुशासन के रूप में या अध्ययन के रूप में इसका विकास आधुनिक काल में हुआ। आधुनिक क्रांति के परिणाम स्वरूप इसका विकास तेजी के साथ हुआ। लोक प्रशासन का जन्म विशेष रूप से अमेरिका में 1887 से माना जाता है। सामाजिक विज्ञान में लोक प्रशासन नया है और इसकी यात्रा का मात्र 139 वर्ष बीता है।

पहला चरण (1887 - 1926)

इस चरण में राजनीति प्रशासन में पृथक्करण की शुरुआत हुई। अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र के प्राध्यापक वुडरो विल्सन की प्रसिद्ध पुस्तक "A study of administration" नामक लेख Political Science Quarterly में छपा।

वुडरो विल्सन को लोक प्रशासन का जनक माना जाता है, उन्होंने 'राजनीति प्रशासन द्वैत सिद्धान्त' का प्रतिपादन किया। जबकि फ्रैंक जे. गुडनाउ (Frank J. Goodnow) को अमेरिकी लोक प्रशासन का जनक माना जाता है। इस चरण में निम्नलिखित तीन बातों पर बल दिया गया:
(I) लोक प्रशासन विषय का जन्म
(II) लोक प्रशासन के कानूनी प्रकृति पर बल
(III) राजनीति प्रशासन पृथक्करण सिद्धान्त

[2] दूसरा चरण - (1927 - 1937)

इस काल को लोक प्रशासन का स्वर्णिम काल माना जा सकता है क्योंकि इसके अंतर्गत लोक प्रशासन में विभिन्न सिद्धान्तों का निर्माण हुआ। इसे सिद्धान्त निर्माण का चरण माना जाता है।

इस चरण में विलोबी की पुस्तक 'Principle of Public Administration', M.P. फारेलेट की पुस्तक 'Creative Experience' और हेनरी फयोल की पुस्तक 'Industrial and General Management' में सिद्धान्तों पर बल दिया गया।

संक्षेप में हम कह सकते हैं कि इस चरण में निम्नलिखित विकास हुआ:

  • प्रशासन के सार्वभौमिक सिद्धान्त पर बल दिया गया।
  • लोक प्रशासन के विद्वानों ने लोक प्रशासन को वैज्ञानिक प्रतिष्ठा दिलाई।
  • लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में समानता माना गया।
  • राजनीति और प्रशासन के अलगाव पर पहले की अपेक्षा अधिक बल दिया गया।
  • लोक प्रशासन के वैज्ञानिक प्रकृति पर बल दिया गया।

कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि लोक प्रशासन पर कैसे पर अधिक बल दिया गया, अर्थात् प्रबन्ध और तकनीक को महत्व दिया गया।

[3] तीसरा चरण - (1938 - 1947)

इस चरण में प्रशासनिक सिद्धान्तों को चुनौती मिली। चेस्टर बर्नार्ड की पुस्तक 'The Functions of the Executive' में किसी भी सिद्धान्त का वर्णन नहीं किया गया।

हर्बर्ट साइमन ने अपनी पुस्तक 'Administrative Behavior' में प्रशासनिक सिद्धान्तों का उपहास उड़ाया, उन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला। हर्बर्ट साइमन ने कहा - "यदि कोई सिद्धान्त वैज्ञानिक हो सकता है तो वह है निर्णयन् सिद्धान्त।" इसी दौरान एल्टन मेयो ने मानवीय सिद्धान्त का विकास किया ताकि सिद्धान्तों को व्यावहारिक बनाया जा सके अर्थात इस सिद्धांत में नैतिकता व मूल्य पर अधिक जोर दिया गया ताकि सिद्धांतों को व्यावहारिक बनाया जा सके।

तीसरे चरण में केंद्रीकरण बनाम विकेंद्रीकरण, पद सोपान बनाम नियंत्रण, और आदेश की एकता जैसे सिद्धांतों का उपहास किया गया।

[4] चतुर्थ चरण - (1948 - 1970)

इसे लोक प्रशासन के पहचान के संकट का काल माना जाता है। यहाँ लोक प्रशासन के स्वतंत्र विषय के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया। यहाँ लोक प्रशासन के वैज्ञानिक एवं सार्वभौमिक सिद्धान्तों को चुनौती दी गई। जिससे लोक प्रशासन के अस्तित्व पर ही संकट आ गया और लोक प्रशासन राजनीति शास्त्र की ओर चला गया। इसे राजनीति प्रशासन एकीकरण चरण कहा जाता है।

यहाँ यह कहा जाने लगा कि लोक प्रशासन का महत्व तब तक था जब तक वह राजनीति शास्त्र का अंग था, यहाँ गिरावट आई है।

[5] पाँचवा चरण - (1971 - 1990)

इस चरण में लोक प्रशासन के अंतर्विषयक उपागम का जन्म हुआ जिसमें लोक प्रशासन को समझने के लिए राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र व मनोविज्ञान जैसे विषयों का सहारा लिया गया।

इस प्रकार तुलनात्मक लोक प्रशासन अस्तित्व में आया। इसके साथ-साथ नवीन लोक प्रशासन और विकास प्रशासन का जन्म हुआ। अतः लोक प्रशासन अब एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित हो गया।

[6] छठा चरण - (1991 - अब तक)

इसे उदारीकरण या निजीकरण का काल कहा जाता है। इस दौरान बाजारीकरण का जन्म हुआ। यहां लोक प्रशासन धीरे-धीरे नियंत्रणों, नियमों आदि को कम करने का प्रयास करने लगा। यहां निम्न बातों पर बल दिया गया:

  • प्रतिस्पर्धा एवं विकास का चयन
  • उदारीकरण
  • मितव्ययिता
  • कार्य-कुशलता एवं प्रभावशीलता
  • नौकरशाही विरोधी
  • नियमों की गुणवत्ता में सुधार
  • पेशेवर प्रबन्ध पर बल
  • लोक
  • विकेंद्रीकरण अर्थात् जन जवाबदेही

10. भारत में लोक प्रशासन का विकास

भारत में लोक प्रशासन का अध्ययन लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के अंतर्गत एक विषय के रूप में 1959 में प्रारम्भ हुआ और लोक प्रशासन के पहले प्रो. M.P. शर्मा थे।

लोक प्रशासन में सबसे पहले डिप्लोमा मद्रास में किया गया। उस्मानिया तथा पंजाब विश्वविद्यालय में सन् 1961 में पृथक लोक प्रशासन की स्थापना हुई।

1963 राजस्थान विश्वविद्यालय और 1968 में सागर विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश में लोक प्रशासन का अध्ययन प्रारम्भ हुआ।

सन् 1947 में हैदराबाद में Administrative Staff College की स्थापना किया गया, यहाँ पर सरकारी एवं गैर सरकारी उच्च पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।

संघ लोक सेवा की परीक्षाओं में लोक प्रशासन विषय 1987 से प्रारम्भ हुआ जबकि उत्तर प्रदेश सेवा आयोग में इसकी शुरुआत 1995 से हुई।

1951 में गोरवाला रिपोर्ट और 1953 एप्पलबी रिपोर्ट के आधार पर सन् 1954 में IIPA - Indian Institute of Public Administration (भारतीय लोक प्रशासन संस्थान) की स्थापना नई दिल्ली में हुआ। यह संस्था लोक प्रशासन के क्षेत्र में शोध, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण देने का कार्य करती है।

अलग समिति ने लोक प्रशासन से सम्बंधित अनिवार्य प्रश्नपत्र को 'सिविल' सेवा परीक्षा में शामिल करने का सुझाव दिया।


महत्वपूर्ण वन-लाइनर प्रश्न (Quick Revision)

महत्वपूर्ण प्रश्न (Questions) उत्तर (Answers)
1. लोक प्रशासन का जनक किसे माना जाता है? वुडरो विल्सन
2. अमेरिकी लोक प्रशासन का जनक किसे कहा जाता है? फ्रैंक जे. गुडनाउ
3. लोक प्रशासन में POSDCORB का विचार किसने दिया? लूथर गुलिक
4. "प्रशासन कैंची के दो फलकों के समान है" यह कथन किसका है? लेविस मेरियम
5. अध्ययन के विषय के रूप में लोक प्रशासन का जन्म कब हुआ? 1887 (अमेरिका)
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