भारतीय संविधान: 22 भाग, 12 अनुसूचियाँ और राष्ट्रीय प्रतीक (सम्पूर्ण विस्तृत नोट्स)
प्रिय छात्रों, 'Polity Study Adda' के इस विशेष लेख में आपका स्वागत है। भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा और विस्तृत लिखित संविधान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, PCS, TGT, PGT, SSC) में यहाँ से हमेशा प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए, संविधान के सभी 22 भागों, 12 अनुसूचियों और राष्ट्रीय प्रतीकों का एकदम गहराई और विस्तार से अध्ययन करते हैं।
✦ 1. भारतीय संविधान के भाग (Parts of Indian Constitution)
संविधान को एक किताब की तरह समझें, जिसके अलग-अलग 'चैप्टर्स' को 'भाग' कहा जाता है। मूल रूप से इसमें 22 भाग थे। आइए प्रत्येक भाग का विस्तार से विश्लेषण करें:
| भाग | अनुच्छेद (Articles) | विषय एवं विस्तृत विवरण (Detailed Explanation) |
|---|---|---|
| भाग-1 | 1 से 4 |
संघ और उसका राज्य क्षेत्र (The Union and its Territory): इसमें स्पष्ट किया गया है कि भारत (अर्थात इंडिया) राज्यों का संघ होगा। यह भाग संसद को यह असीमित शक्ति देता है कि वह किसी नए राज्य का निर्माण कर सकती है, वर्तमान राज्यों की सीमाओं में बदलाव कर सकती है, या किसी राज्य का नाम बदल सकती है। |
| भाग-2 | 5 से 11 |
नागरिकता (Citizenship): भारत में एकल नागरिकता (Single Citizenship) का प्रावधान है (जो ब्रिटेन से प्रेरित है)। यह भाग बताता है कि संविधान लागू होने के समय कौन भारत का नागरिक था, और संसद को नागरिकता के अर्जन (प्राप्ति) और समाप्ति के संबंध में कानून बनाने का पूरा अधिकार देता है। |
| भाग-3 | 12 से 35 |
मौलिक अधिकार (Fundamental Rights): इसे भारतीय संविधान का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। यह अमेरिका (USA) के संविधान से प्रेरित है। इसमें समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा-संस्कृति और संवैधानिक उपचारों (अनुच्छेद 32) का बेहद गहराई से वर्णन है। यह नागरिकों को राज्य के खिलाफ सुरक्षा देता है। |
| भाग-4 | 36 से 51 |
राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP): इन्हें आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य देश में एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना है। ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (लागू करने योग्य) नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मूलभूत हैं। |
| भाग-4 क | 51 क |
मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties): मूल संविधान में यह नहीं था। इसे स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। शुरुआत में 10 कर्तव्य थे, लेकिन वर्तमान में प्रत्येक नागरिक के 11 मौलिक कर्तव्य हैं। |
| भाग-5 | 52 से 151 |
संघ (The Union): यह संविधान का सबसे बड़ा भाग है। इसमें केंद्र सरकार की पूरी कार्यप्रणाली है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, भारत के महान्यायवादी, संसद (लोकसभा-राज्यसभा), सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का विस्तृत उल्लेख इसी में है। |
| भाग-6 | 152 से 237 |
राज्य (The States): इसमें राज्य स्तर की सरकार का ढांचा है। राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य का विधानमंडल (विधानसभा व विधान परिषद) और उच्च न्यायालयों (High Courts) के कार्यों और शक्तियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। |
| भाग-7 | 238 |
निरसित (Repealed): संविधान के 7वें संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा इस भाग को हटा (निरस्त कर) दिया गया है। इसमें प्रथम अनुसूची के भाग 'ख' के राज्य शामिल थे। |
| भाग-8 | 239 से 242 |
संघ राज्य क्षेत्र (Union Territories): इसमें भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे दिल्ली, पुडुचेरी, अंडमान आदि) के प्रशासन, उपराज्यपाल और प्रशासकों की शक्तियों का वर्णन किया गया है। |
| भाग-9 | 243 (क-ण) |
पंचायतें (The Panchayats): इसे 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा स्थापित किया गया। यह ग्रामीण स्तर पर स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज व्यवस्था) की 3-स्तरीय संरचना, चुनाव और उनके अधिकारों की गारंटी देता है। |
| भाग-9 क | 243 (त-यछ) |
नगरपालिकाएं (The Municipalities): इसे 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया। यह शहरों में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के गठन और कार्यों को कानूनी रूप देता है। |
| भाग-9 ख | 243 (यज-यट) |
सहकारी समितियां (Co-operative Societies): इसे 97वें संविधान संशोधन (2011) द्वारा अंतःस्थापित किया गया। इसमें लोगों द्वारा मिल-जुलकर आर्थिक लाभ के लिए बनाई गई समितियों के नियम हैं। |
| भाग-10 | 244 से 244(क) |
अनुसूचित जाति तथा जनजातीय क्षेत्र (Scheduled & Tribal Areas): भारत के कुछ विशेष जनजातीय और पिछड़े इलाकों (जैसे असम, मेघालय आदि) के प्रशासन के लिए विशेष नियम और छूट का वर्णन करता है। |
| भाग-11 | 245 से 263 |
संघ तथा राज्यों के मध्य संबंध (Relations between Union & States): केंद्र और राज्यों के बीच विधायी (कानून बनाने की) और प्रशासनिक शक्तियों का बंटवारा कैसे होगा, इसका बहुत ही बारीकी से वर्णन इस भाग में है। |
| भाग-12 | 264 से 300(क) |
वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद (Finance, Property & Suits): टैक्स का बंटवारा, वित्त आयोग और सबसे महत्वपूर्ण— 'संपत्ति का अधिकार' (अनुच्छेद 300-क) जो पहले मौलिक अधिकार था, उसे कानूनी अधिकार बनाकर इसी भाग में रखा गया है। |
| भाग-13 | 301 से 307 |
भारत के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम: देश के किसी भी राज्य से दूसरे राज्य में स्वतंत्र रूप से व्यापार और माल की आवाजाही सुनिश्चित करने के नियम दिए गए हैं। |
| भाग-14 | 308 से 323 |
संघ तथा राज्यों के अधीन सेवाएं (Services under Union & States): इसमें IAS, IPS जैसी अखिल भारतीय सेवाओं के साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के गठन की विस्तार से चर्चा है। |
| भाग-14 क | 323(क)-323(ख) |
अधिकरण (Tribunals): इन्हें 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। यह प्रशासनिक अधिकारियों के विवादों को जल्दी सुलझाने के लिए विशेष कोर्ट (CAT आदि) की स्थापना करता है। |
| भाग-15 | 324 से 329(क) |
निर्वाचन (Elections): भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग (Election Commission) की स्थापना, उसकी शक्तियां, और मतदान से संबंधित विस्तृत कानून। |
| भाग-16 | 330 से 342 |
कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध: लोकसभा और विधानसभाओं में SC/ST के लिए सीटों का आरक्षण और आंग्ल-भारतीय समुदाय (Anglo-Indians) के विशेष प्रावधानों का उल्लेख। |
| भाग-17 | 343 से 351 |
राजभाषा (Official Language): यह भाग बताता है कि संघ की राजभाषा 'हिंदी' और लिपि 'देवनागरी' होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की भाषा क्या होगी, इसका वर्णन है। |
| भाग-18 | 352 से 360 |
आपात उपबंध (Emergency Provisions): देश में संकट के समय के लिए तीन प्रकार के आपातकाल— राष्ट्रीय आपातकाल (352), राष्ट्रपति शासन (356) और वित्तीय आपातकाल (360) का बहुत ही गहरा विश्लेषण यहाँ है। |
| भाग-19 | 361 से 367 |
प्रकीर्ण (Miscellaneous): इसमें राष्ट्रपति और राज्यपालों को विशेष छूट (विशेषाधिकार) दी गई है कि उनके कार्यकाल के दौरान उन पर क्रिमिनल केस नहीं चलाया जा सकता। |
| भाग-20 | 368 |
संविधान संशोधन (Amendment of Constitution): दक्षिण अफ्रीका से ली गई इस प्रक्रिया के तहत, संसद को संविधान में बदलाव (संशोधन) करने की शक्ति और उसकी पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई है। |
| भाग-21 | 369 से 392 |
अस्थायी, संक्रमणकालीन तथा विशेष उपबंध: कुछ राज्यों (जैसे जम्मू-कश्मीर का पुराना अनुच्छेद 370, महाराष्ट्र, गुजरात आदि) के लिए अस्थायी समय के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। |
| भाग-22 | 393 से 395 |
संक्षिप्त नाम, प्रारंभ और निरसन: यह भाग बताता है कि इस पुस्तक का नाम "भारत का संविधान" होगा, यह 26 जनवरी 1950 को पूर्णतः लागू होगा, और पुराने ब्रिटिश कानूनों को समाप्त कर दिया जाएगा। |
✦ 2. संविधान की 12 अनुसूचियाँ (विस्तार से विश्लेषण)
हमारे मूल संविधान में केवल 8 अनुसूचियां थीं, लेकिन समय-समय पर संशोधनों के माध्यम से इनकी संख्या बढ़कर वर्तमान में 12 हो गई है। अनुसूचियां संविधान के अनुच्छेदों को एक टेबल के रूप में अतिरिक्त जानकारी प्रदान करती हैं।
| अनुसूची | विस्तृत विषय एवं महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| प्रथम अनुसूची |
राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र की सूची: इसमें भारत के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के नाम और उनके न्यायिक क्षेत्र का विस्तार से उल्लेख किया गया है। |
| दूसरी अनुसूची |
विभिन्न पदाधिकारियों के वेतन और भत्ते: इसमें देश के शीर्ष पदों के वेतन का उल्लेख है। जैसे: राष्ट्रपति (5 लाख/माह), उपराष्ट्रपति व लोकसभा अध्यक्ष (4 लाख/माह), राज्यपाल (3.5 लाख), सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (2.8 लाख), और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश / CAG / चुनाव आयुक्त (2.5 लाख)। |
| तीसरी अनुसूची |
शपथ (Oath) का प्रारूप: विभिन्न मंत्री, संसद सदस्य और न्यायाधीश पद ग्रहण करते समय जो शपथ लेते हैं, उसका ड्राफ्ट इसमें लिखा है। महत्वपूर्ण नोट: इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की शपथ का उल्लेख नहीं है (उनकी शपथ अनुच्छेदों में है)। |
| चौथी अनुसूची |
राज्यसभा में सीटों का आवंटन: भारत के किस राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से राज्यसभा में कितने सांसद (MPs) चुनकर जाएंगे, इसका पूरा कोटा इसी अनुसूची में निर्धारित किया गया है। |
| पांचवीं अनुसूची |
अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन: देश के विभिन्न भागों में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों के क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण के लिए विशेष कानून और अधिकार दिए गए हैं। |
| छठी अनुसूची |
पूर्वोत्तर राज्यों का जनजाति प्रशासन: यह केवल चार राज्यों: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (AMTM) के जनजातीय क्षेत्रों के लिए स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous Councils) के गठन का अधिकार देती है। |
| सातवीं अनुसूची |
शक्तियों का विभाजन (3 सूचियाँ): केंद्र और राज्य के बीच काम का बंटवारा तीन सूचियों में है: 1. संघ सूची (Union List): मूल रूप से 97, वर्तमान में 100 विषय (जैसे सेना, पोस्ट ऑफिस, रेल, बैंक)। इस पर कानून केंद्र बनाता है। 2. राज्य सूची (State List): मूल 66, वर्तमान में 61 विषय (जैसे पुलिस, पंचायत, जेल, कृषि)। इस पर कानून राज्य बनाता है। 3. समवर्ती सूची (Concurrent List): मूल 47, वर्तमान में 52 विषय (शिक्षा, वन, जनसंख्या नियंत्रण)। इस पर दोनों कानून बना सकते हैं। |
| आठवीं अनुसूची |
संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएँ: प्रारंभ में इसमें 14 भाषाएँ थीं। वर्तमान में 22 भाषाएँ हैं। 21वां संशोधन (1967)- सिंधी जोड़ी गई। 71वां संशोधन (1992)- नेपाली, मणिपुरी, कोंकणी जोड़ी गई। 92वां संशोधन (2003)- बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गई। |
| नौवीं अनुसूची |
भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन: इसे प्रथम संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ा गया। शुरुआत में इसमें डाले गए विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार लागू करना था। |
| दसवीं अनुसूची |
दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law): इसे 52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा जोड़ा गया। इसके तहत यदि कोई नेता चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदलता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। |
| ग्यारहवीं अनुसूची |
पंचायती राज व्यवस्था: इसे 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया। इसमें ग्रामीण पंचायतों की शक्तियों और जिम्मेदारियों के लिए कुल 29 विषयों का विस्तार से उल्लेख है। |
| बारहवीं अनुसूची |
नगरपालिका और शहरी निकाय: इसे 74वें संविधान संशोधन (1993) द्वारा जोड़ा गया। शहरों के विकास और नगर पालिकाओं के कार्यक्षेत्र के लिए इसमें 18 विषय प्रदान किए गए हैं। |
✦ 3. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Symbols in Detail)
भारत के राष्ट्रीय प्रतीक हमारे देश की विविधता, संस्कृति, शक्ति और अखंडता को दर्शाते हैं। आइए प्रत्येक प्रतीक के बारे में वह सभी महत्वपूर्ण बातें जानें जो परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती हैं:
| प्रतीक का नाम | विस्तृत विशेषताएँ एवं रोचक तथ्य |
|---|---|
| राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) |
भारत के ध्वज को पिंगली वेंकय्या ने डिज़ाइन किया था। इसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया। इसमें तीन रंग की समान चौड़ाई वाली पट्टियां हैं: 1. केसरिया (Saffron): देश की शक्ति, साहस और बलिदान का प्रतीक। 2. सफेद (White): शांति, सत्य और पवित्रता का प्रतीक। 3. हरा (Green): देश की उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता का प्रतीक। सफ़ेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का 'अशोक चक्र' है, जिसमें 24 तीलियाँ होती हैं। यह चक्र निरंतर गतिशीलता और प्रगति का सूचक है। ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है। |
| राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ) |
भारत का राज्य चिह्न सारनाथ (वाराणसी) स्थित अशोक के 'सिंह स्तंभ' से लिया गया है। इसे 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया। इसमें चार शेर एक-दूसरे की ओर पीठ करके बैठे हैं (सामने से केवल तीन दिखाई देते हैं)। ये शेर शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गौरव का प्रतीक हैं। नीचे पट्टी के मध्य में एक 'धर्म चक्र' है, जिसके दाईं ओर एक सांड (वृषभ) और बाईं ओर एक दौड़ता हुआ घोड़ा बना है। स्तंभ के सबसे नीचे देवनागरी लिपि में "सत्यमेव जयते" लिखा है, जिसका अर्थ है 'सत्य की ही जीत होती है'। यह वाक्य 'मुंडकोपनिषद' से लिया गया है। |
| राष्ट्रीय गान (जन-गण-मन) |
इसकी रचना रबींद्रनाथ टैगोर ने मूल रूप से बंगाली भाषा में की थी। संविधान सभा ने इसके हिंदी संस्करण को 24 जनवरी 1950 को अपनाया। इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। इसे गाने का निर्धारित समय 52 सेकंड है, जबकि संक्षिप्त रूप को 20 सेकंड में गाया जाता है। |
| राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) |
इसकी रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने संस्कृत और बंगाली मिश्रित भाषा में अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में की थी। इसे भी 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया। स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत ने क्रांतिकारियों में भारी ऊर्जा भरी थी। इसे पहली बार 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था। इसे गाने में लगभग 65 सेकंड का समय लगता है। |
| राष्ट्रीय पंचांग (कैलेंडर) |
भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर 'शक संवत' (Saka Samvat) पर आधारित है। इसे 22 मार्च 1957 को अपनाया गया। इसका पहला महीना 'चैत्र' होता है और सामान्य वर्ष में इसमें 365 दिन होते हैं। चैत्र का पहला दिन सामान्यतः 22 मार्च (लीप ईयर में 21 मार्च) को पड़ता है। |
| राष्ट्रीय पशु (बाघ) |
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ (Tiger) है। इसका वैज्ञानिक नाम 'पेंथेरा टाइग्रिस' (Panthera tigris) है। बाघ अपनी अपार शक्ति, फुर्ती और भव्यता के लिए जाना जाता है। बाघों के संरक्षण के लिए 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' शुरू किया गया था। |
| राष्ट्रीय विरासत पशु (हाथी) |
भारत सरकार ने अक्टूबर 2010 में हाथी (Elephant) को राष्ट्रीय 'विरासत पशु' (Heritage Animal) घोषित किया। इसका उद्देश्य इस विशाल और बुद्धिमान जीव का संरक्षण करना है। |
| राष्ट्रीय पक्षी (मोर) |
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर (Peacock) है। इसका वैज्ञानिक नाम 'पावो क्रिस्टेटस' (Pavo cristatus) है। मोर भारतीय संस्कृति, अनुग्रह, खुशी और अद्भुत सौंदर्य का प्रतीक है। |
| राष्ट्रीय जलीय जीव (गंगा डॉल्फिन) |
वर्ष 2009 में मीठे पानी की 'गंगा डॉल्फिन' को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया। यह जीव गंगा नदी की शुद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि यह केवल साफ और ताजे पानी में ही जीवित रह सकता है। |
| अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक |
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संविधान के भागों और अनुसूचियों को समझने के बाद, अनुच्छेदों का ज्ञान आवश्यक है। 1 से 395 तक के महत्वपूर्ण अनुच्छेद पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:
👉 सभी अनुच्छेद (1-395) पढ़ेंअक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारतीय संविधान में वर्तमान में कितने भाग और अनुसूचियां हैं?
उत्तर: भारतीय संविधान में मूल रूप से 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में संशोधनों के बाद अनुसूचियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। गणना की दृष्टि से भाग 25 हो गए हैं (जैसे 4क, 9क, 9ख को मिलाकर), लेकिन संख्यात्मक रूप से आज भी अंतिम भाग 22 ही है।
प्रश्न 2: 'सत्यमेव जयते' कहाँ से लिया गया है और इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' प्राचीन भारतीय ग्रंथ 'मुंडकोपनिषद' से लिया गया है। इसका हिंदी अर्थ होता है— "सत्य की ही जीत होती है"। यह भारत के राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ) के ठीक नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है।
प्रश्न 3: 73वें और 74वें संविधान संशोधन का संबंध किन अनुसूचियों से है?
उत्तर: 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जो पंचायती राज (ग्रामीण स्थानीय स्वशासन) से संबंधित है और इसमें 29 विषय हैं। वहीं, 74वें संशोधन (1993) द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई, जो नगर पालिकाओं (शहरी स्थानीय निकाय) से संबंधित है और इसमें 18 विषय हैं।
प्रश्न 4: मूल संविधान में कितने मौलिक कर्तव्य थे?
उत्तर: मूल संविधान में एक भी मौलिक कर्तव्य नहीं था। इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा भाग 4(क) के तहत जोड़ा गया। शुरुआत में 10 कर्तव्य जोड़े गए थे, लेकिन 86वें संशोधन (2002) द्वारा एक और जोड़कर इनकी संख्या 11 कर दी गई।
प्रश्न 5: भारत के राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत में क्या मूल अंतर है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय गान 'जन-गण-मन' है जिसे रबींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था (गाने का समय 52 सेकंड)। जबकि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' है जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में लिखा था (गाने का समय 65 सेकंड)। दोनों को संविधान सभा द्वारा एक ही दिन, 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया था।

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