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📢 "Polity Study Adda पर आपका स्वागत है! 📜 राजव्यवस्था रटना छोड़ दो, अब समझने की बारी है! 📜 यहाँ आपको TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET/JRF और UPSC, State PCS, SSC व अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए Political Science के प्रमाणित नोट्स और महत्वपूर्ण MCQs मिलेंगे। 📜"
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Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

Polity Study Adda पर TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET, UPSC, SSC सहित सभी One-Day प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजनीति विज्ञान और भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण MCQs और नोट्स पढ़ें। 'राजव्यवस्था रटने का नहीं, समझने का विषय है' — इसी मूल विचार के साथ, यह सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच है।

यहाँ हम संपूर्ण राजनीति विज्ञान से संबंधित उच्च-स्तरीय MCQs, विस्तृत नोट्स और तथ्यपूर्ण आर्टिकल्स नियमित रूप से अपलोड करते हैं। संविधान के अनुच्छेदों, शासन व्यवस्था और जटिल राजनीतिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाना ही हमारा लक्ष्य है।

यह एक निजी एजुकेशनल (शैक्षिक) पोर्टल है जिसे विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) विषय के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी सफलता का परचम लहराना चाहते हैं।

Polity Study Adda की मुख्य विशेषताएँ

  • विषयवार विस्तृत आर्टिकल्स: भारतीय राजव्यवस्था, राजनीतिक चिंतक, सिद्धांत, लोक प्रशासन और IR की संपूर्ण सामग्री।
  • उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): हर टॉपिक पर आधारित अति महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Questions) और Mock Tests।
  • परीक्षा-उपयोगी शॉर्ट नोट्स: त्वरित रिवीजन (Quick Revision) के लिए टू-द-पॉइंट (To-the-point) आर्टिकल्स।
  • सरल और स्पष्ट भाषा: कठिन से कठिन विषय को भी आसान शब्दों में समझाने का प्रयास।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग क्यों करना चाहिए?

राजनीति विज्ञान अक्सर छात्रों को केवल अनुच्छेदों (Articles) और अधिनियमों को याद रखने वाला विषय लगता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए आपको इसका उपयोग करना चाहिए क्योंकि:

  • यहाँ रटने के बजाय देश की व्यवस्था समझने पर जोर दिया जाता है।
  • यह TGT/PGT/LT और UGC NET के विस्तृत सिलेबस को कवर करता है, जिससे One-Day परीक्षाएँ स्वतः ही आसान हो जाती हैं।
  • परीक्षा के बदलते पैटर्न के अनुसार नवीनतम सामग्री लगातार अपडेट होती है।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग हम कैसे कर सकते हैं?

  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर Indian Polity, Political Thinker या Theory के सेक्शन में जाएं।
  • सर्च करें: किसी विशेष विषय (जैसे- मूल अधिकार, प्लेटो) के लिए सर्च बॉक्स का उपयोग करें।
  • रिवीजन और प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के बाद उसी विषय के MCQs और Mock Tests को हल करें।

प्रतियोगी परीक्षाओं में 'राजनीति विज्ञान' विषय का क्या महत्व है?

भारत में सिविल सेवा और शिक्षक भर्ती (Teaching Exams) जैसे क्षेत्रों में राजव्यवस्था की भूमिका निर्णायक होती है:

  • सामान्य अध्ययन (GS) का आधार: UPSC और State PCS में राजव्यवस्था (Polity) से संविधान और गवर्नेंस पर कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • स्कोरिंग विषय: यदि कॉन्सेप्ट क्लियर हों, तो राजनीति विज्ञान में पूरे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • सामाजिक और कानूनी समझ: यह विषय हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और देश की कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।

हम परीक्षाओं में राजनीति विज्ञान में अच्छे अंक कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

  • क्रमबद्ध अध्ययन: अनुच्छेदों को रटने के बजाय भागों और संबंधित अवधारणाओं के साथ पढ़ें।
  • मानक स्रोत: केवल प्रामाणिक पुस्तकों और Polity Study Adda जैसे सटीक प्लेटफॉर्म्स पर अध्ययन करें।
  • MCQs की प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के तुरंत बाद उससे जुड़े अधिक से अधिक बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें।
  • शॉर्ट नोट्स: एग्जाम के अंतिम दिनों के लिए खुद के की-वर्ड्स (Keywords) वाले नोट्स बनाएं।

भारत में सरकारी नौकरियां लोगों को क्यों पसंद हैं?

हमारे देश में सरकारी नौकरी (Government Job) को लेकर युवाओं में एक अलग ही जुनून देखने को मिलता है। इसे केवल एक रोज़गार नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता माना जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • करियर और जॉब सिक्योरिटी: प्राइवेट सेक्टर की अनिश्चितता के उलट, सरकारी सेवा में नौकरी जाने का डर न के बराबर होता है।
  • शानदार वेतन और सुविधाएं: आकर्षक सैलरी के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया (HRA) और मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं।
  • समाज में प्रतिष्ठा: सरकारी अफसर या शिक्षक बनने पर समाज और रिश्तेदारों के बीच सम्मान और रुतबा बढ़ता है।
  • तनावमुक्त पारिवारिक जीवन: फिक्स वर्किंग आवर्स और सरकारी छुट्टियों के कारण आप अपने परिवार को क्वालिटी टाइम दे पाते हैं।

सरकारी नौकरी हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

सरकारी नौकरी पाना रातों-रात का चमत्कार नहीं है; इसके लिए सही दिशा, अटूट धैर्य और स्मार्ट स्टडी की जरूरत होती है:

  • अपना फोकस साफ रखें: सबसे पहले तय करें कि आपको टीचिंग फील्ड (TGT, PGT, NET) में जाना है या प्रशासनिक सेवा (UPSC, PCS) में।
  • पाठ्यक्रम (Syllabus) से चिपके रहें: ऑफिशियल सिलेबस का प्रिंटआउट लें और पिछले 5-10 सालों के प्रश्न-पत्रों (Previous Year Papers) का बारीकी से अध्ययन करें।
  • प्रामाणिक अध्ययन सामग्री: 10 अलग-अलग किताबें पढ़ने से बेहतर है कि 1 अच्छी किताब को 10 बार पढ़ें। पॉलिटी के लिए Polity Study Adda के सटीक नोट्स फॉलो करें।
  • रोज़ाना प्रैक्टिस: सिर्फ थ्योरी पढ़ने से काम नहीं चलेगा। जो टॉपिक पढ़ें, तुरंत उसके MCQs हल करें और मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को सुधारें।

Polity Study Adda आपकी कैसे मदद कर सकता है?

  • सिलेबस-आधारित सामग्री: TGT, PGT, UPSC, NET/JRF के लेटेस्ट सिलेबस के अनुसार कंटेंट।
  • समय की बचत: आपको कई किताबें छानने की जरूरत नहीं, सभी प्रामाणिक स्रोतों का निचोड़ मिलता है।
  • मार्गदर्शन: किस परीक्षा के लिए क्या और कितना पढ़ना है, इसका सही मार्गदर्शन।

Polity Study Adda पर हमें भरोसा क्यों करना चाहिए?

  • तथ्यों की प्रामाणिकता: हमारा कंटेंट मानक राजनीतिक पुस्तकों और प्रामाणिक स्रोतों से अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है।
  • छात्र-हित सर्वोपरि: हमारा उद्देश्य भ्रामक जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्र की सफलता को सुनिश्चित करना है।
  • लगातार अपडेट्स: हम पुरानी सामग्री पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार कंटेंट को अपडेट करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

उत्तर: यह एक निजी शैक्षिक (Educational) पोर्टल है जो विशेष रूप से 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) और 'भारतीय राजव्यवस्था' (Indian Polity) विषय की तैयारी कर रहे छात्रों (TGT, PGT, UPSC, NET आदि) के लिए बनाया गया है।

Q2. क्या यह एक सरकारी वेबसाइट है?

उत्तर: नहीं, यह एक निजी (Private) प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को मुफ्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।

Q3. यह वेबसाइट किन परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?

उत्तर: मुख्य रूप से Teaching Exams (TGT, PGT, LT Grade, UGC NET) और Civil Services (UPSC, State PCS, SSC, Railway) के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।

Q4. क्या यहाँ मुझे लोक प्रशासन (Public Administration) के नोट्स मिलेंगे?

उत्तर: हाँ, भारतीय राजव्यवस्था और राजनीतिक विचारकों के साथ-साथ आपको लोक प्रशासन और अन्तर्राष्ट्रीय संबंध (IR) के भी विस्तृत नोट्स और MCQs यहाँ प्राप्त होंगे।

Q5. क्या वेबसाइट पर केवल थ्योरी (Theory) पढ़ाई जाती है?

उत्तर: नहीं, थ्योरी के साथ-साथ आपकी प्रैक्टिस के लिए उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective MCQs) और मॉक टेस्ट भी उपलब्ध है।

Q6. क्या वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी प्रामाणिक है?

उत्तर: बिल्कुल, यहाँ उपलब्ध कराई गई सभी अध्ययन सामग्री मानक और प्रामाणिक राजनीतिक पुस्तकों के गहन अध्ययन के बाद ही तैयार की जाती है।

Q7. मैं इस वेबसाइट पर किसी विशेष टॉपिक की मांग कैसे कर सकता हूँ?

उत्तर: आप 'Contact Us' पेज पर जाकर या सीधे PolityStudyAdda@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से हमें अपने सुझाव और डिमांड भेज सकते हैं।

Q8. क्या पॉलिटी स्टडी अड्डा का कोई यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया ग्रुप है?

उत्तर: हाँ, आप वेबसाइट के फुटर (सबसे नीचे) में दिए गए लिंक के माध्यम से हमारे Telegram, WhatsApp और YouTube चैनल आदि से जुड़ सकते हैं।

Q9. भारत में सरकारी नौकरी (Government Job) की इतनी मांग क्यों है?

उत्तर: जॉब सिक्योरिटी, बेहतर वेतन, भत्ते और समाज में उच्च सम्मान के कारण सरकारी नौकरी युवाओं की पहली पसंद होती है।

Q10. मैं शिक्षक या सिविल सेवा परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

उत्तर: सिलेबस के अनुसार रणनीति बनाकर पढ़ने, प्रामाणिक स्रोतों (जैसे Polity Study Adda) का उपयोग करने और नियमित MCQs की प्रैक्टिस करने से सफलता निश्चित है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

'Polity Study Adda' पर प्रकाशित सभी अध्ययन सामग्री, नोट्स, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और अन्य सूचनाएं केवल छात्रों की परीक्षा की तैयारी और उनके त्वरित मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई हैं। इन्हें कानूनी दस्तावेज़ या अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि हमारी टीम ने सभी तथ्यों और उत्तरों को मानक पुस्तकों के आधार पर पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक रखने का हर संभव प्रयास किया है, लेकिन हम अनजाने में हुई किसी भी मानवीय त्रुटि, टाइपिंग की गलती या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

प्रश्नों के उत्तर और आयोग (Commissions) के संबंध में विशेष सूचना —
राजनीति विज्ञान जैसे विस्तृत विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में अक्सर यह देखा जाता है कि अलग-अलग भर्ती आयोग (Commissions) कभी-कभी एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तरों को सही मान लेते हैं, या विवाद की स्थिति में एक से अधिक विकल्पों को सही ठहरा देते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि किसी प्रश्न का उत्तर एक आयोग के अनुसार कुछ और होता है, जबकि दूसरे आयोग के अनुसार कुछ और। आधिकारिक 'उत्तर कुंजी' (Official Answer Key) और हमारे द्वारा दिए गए उत्तरों में भिन्नता होने की स्थिति में 'Polity Study Adda' किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

छात्रों को स्पष्ट रूप से सलाह दी जाती है कि किसी भी उत्तर या तथ्य की अंतिम पुष्टि के लिए वे संबंधित विभाग/आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, उनकी उत्तर कुंजी और मान्यता प्राप्त मानक पुस्तकों (Standard Books) का ही संदर्भ लें। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी संगठन या आयोग से संबद्ध नहीं है; यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और निजी शैक्षिक मंच है।

नवीन लोक प्रशासन, विकास प्रशासन एवं तुलनात्मक लोक प्रशासन

नवीन लोक प्रशासन, विकास प्रशासन एवं तुलनात्मक लोक प्रशासन
नवीन लोक प्रशासन, विकास प्रशासन एवं तुलनात्मक लोक प्रशासन
Study Material Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत इस विशेष लेख में नवीन लोक प्रशासन (NPA), विकास प्रशासन (Development Administration) और तुलनात्मक लोक प्रशासन का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें नवीन लोक प्रशासन के उदय के कारण (मिन्नोब्रुक सम्मेलन), विकास प्रशासन की अवधारणा, और विशेष रूप से फ्रेड रिग्स (Fred Riggs) के प्रमुख मॉडलों (साला मॉडल, कृषिका-औद्योगिका मॉडल, और प्रिज्मीय समाज) को बहुत ही आसान भाषा में समझाया गया है। यह हस्तलिखित नोट्स UPSC, PCS, PGT, TGT, GIC और NET-JRF (राजनीति विज्ञान) परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

1. नवीन लोक प्रशासन (New Public Administration - NPA)

नवीन लोक प्रशासन से आशय लोक प्रशासन के सिद्धान्त, विचारधारा या आन्दोलन से है जो परम्परागत सिद्धान्तों या विचारों में कुछ रूपान्तरण करता है तथा कुछ पुराने विचारों को हटा देता है तथा कुछ नए विचारों को जोड़ता है। जैसे- प्रासंगिकता, मूल्यपरकता, समानता व न्याय तथा सामाजिक परिवर्तन।

■ उदय की पृष्ठभूमि

1960 के दशक में औद्योगीकरण एवं नगरीकरण का आरम्भ हुआ जिसके कारण सम्पन्नता तो बढ़ी लेकिन अनेक सामाजिक समस्याएँ भी अमेरिकी समाज में विद्यमान थीं। जैसे- आर्थिक असमानता, गरीबी, प्रदूषण, गन्दी बस्तियाँ आदि। अमेरिकी संस्थाओं के प्रति अविश्वास की भावना, वियतनाम युद्ध के पश्चात् समस्याएँ, 'वाटरगेट' में भ्रष्टाचार उजागर होना आदि। अतः इन समस्याओं के प्रति लोक प्रशासन को संवेदनशील बनाने के लिए अनेक सेमिनारों एवं सम्मेलनों का आयोजन हुआ जिसमें कुछ निम्नलिखित हैं:

  • ① 1967 में हनी प्रतिवेदन: इसका उद्देश्य था लोक सेवकों को उच्च शिक्षा प्रदान करना।
  • ② 1967 में फिलाडेल्फिया सम्मेलन: इसका उद्देश्य लोक प्रशासन के सिद्धान्तों एवं व्यवहार का विकास करना था।
  • ③ 1968 में मिन्नोब्रुक का प्रथम सम्मेलन: जिसके अध्यक्ष ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo) थे। इसी सम्मेलन के द्वारा नव लोक प्रशासन का व्यवस्थित विकास हुआ। (यह अमेरिका के युवा वर्ग का आन्दोलन था)।
  • ④ 1971 में फ्रैंक मैरिनी की पुस्तक: 'To wards a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective' प्रकाशित हुई।
  • ⑤ 1971 में ड्वाइट वाल्डो की पुस्तक: 'Public Administration in a Time of Turbulence' महत्वपूर्ण रही।

उपर्युक्त सम्मेलन एवं पुस्तके नवीन लोक प्रशासन के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसमें मिन्नोब्रुक सम्मेलन का विशेष हाथ रहा।

2. नवीन लोक प्रशासन के प्रमुख लक्ष्य/विशेषताएं

नवीन लोक प्रशासन में निम्नलिखित लक्ष्यों (उद्देश्यों) पर विशेष बल दिया गया:

① प्रासंगिकता (Relevance) लोक प्रशासन को सामाजिक समस्याओं के निराकरण के लिए उपयोगी होना चाहिए न कि केवल अध्ययन के रूप में सीमित रहना चाहिए, जैसा कि परम्परागत लोक प्रशासन बौद्धिक चिन्तन एवं मनन तक सीमित था।
② सामाजिक समानता एवं न्याय पर बल (Social Equity) इसे अमीर और गरीब के बीच के अन्तर को कम करने पर बल देना चाहिए, सामाजिक न्याय की स्थापना करना चाहिए। अर्थात् गरीबों के हितों में कार्य करना चाहिए ताकि विषमता को हर क्षेत्र में मिटाया जा सके। परंपरागत लोक प्रशासन में केवल तटस्थता पर बल दिया गया था, जिसके कारण विषमता एवं अन्याय का वातावरण पैदा हुआ।
③ मूल्य परकता पर बल (Values) सरकार को सेवायें प्रदान करते समय आम जनता के मूल्यों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि प्रशासन का उद्देश्य जनहित है अर्थात् विशेष रूप से गरीबों का हित।
④ सामाजिक परिवर्तन पर बल (Social Change) जहाँ परम्परागत लोक प्रशासन समाज की यथा स्थिति (Status quo) को बनाये रखना चाहता था, वहीं नवीन लोक प्रशासन ने सामाजिक परिवर्तन पर बल दिया, अतः लोक प्रशासन को गरीब के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए ताकि आर्थिक विषमता को दूर करके अमीर और गरीब के बीच खाई को पाटा जा सके।

नोट: नवीन लोक प्रशासन के इस विचार ने लोक प्रशासन को समाज के लिए प्रासंगिक और क्रियानिष्ठ बनाया। फलस्वरूप लोक प्रशासन समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ। ध्यान रहे कि नवीन लोक प्रशासन की विचारधारा राजनीतिशास्त्र में उत्तर-व्यवहारवाद (Post-Behavioralism) की विचारधारा के अनुरूप है।

3. विकास प्रशासन (Development Administration)

विकास प्रशासन का जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ। यह अपेक्षाकृत नया है, इसका मुख्य लक्ष्य - विकासशील देशों का विकास करना है। विकास शब्द का कोई विशिष्ट अर्थ नहीं है और अलग-अलग लोगों ने इसको अलग-अलग रूप दिया है, जैसे:

  • अर्थशास्त्रियों ने: विकास को आधुनिक उत्पादकता के रूप में व्यक्त किया।
  • समाजशास्त्रियों ने: इसे सामाजिक परिवर्तन के रूप में देखा है।
  • लोक प्रशासकों ने: इसे आधिकारिक तत्त्व, प्रशासनिक कुशलता एवं क्षमता के रूप में मानते हैं।
ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार: "विकास को उच्चतर, पूर्णान्तर एवं प्रौढ़ स्थिति की ओर बढ़ना बताया है।"

एडवर्ड वीडनर के अनुसार: "विकास प्रशासन राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति के लिए संगठन के कार्य का वर्णन करता है, यह कार्योन्मुखी व लक्ष्योन्मुखी पर विशेष बल देता है।"

फ्रेड रिग्स के अनुसार: "विकास प्रशासन का सम्बन्ध विकास कार्यक्रमों का प्रशासन बड़े संगठनों खास कर सरकार की प्रणालियों, विकास लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन करने से है।"

■ विकास प्रशासन का उदय एवं विशेषताएं

विकास प्रशासन शब्द का पहली बार प्रयोग सन् 1955 में एक भारतीय अध्येता U.L. गोस्वामी ने अपने लेख 'The structure of Development Administration in India' में किया। विकास प्रशासन की अवधारणा सर्वप्रथम एडवर्ड वीडनर ने प्रतिपादित किया, उन्होंने विकास प्रशासन को लक्ष्योन्मुखी तथा परिवर्तनोन्मुखी बताया।

विकास प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. परिवर्तनोन्मुखी (Change-oriented)
  2. प्रजातांत्रिक मूल्यों से सम्बद्धता
  3. प्रशासनिक कार्य कुशलता
  4. आधुनिकीकरण (Modernization)
  5. जन आकांक्षाओं की पूर्ति
  6. आर्थिक विकास
  7. नौकरशाही का भय

■ लोक प्रशासन का विकास: विभिन्न चरण (एक दृष्टि में)

चरण काल (समय) मुख्य विशेषता / बल
पहला चरण 1887 - 1926 कानूनी प्रकृति पर बल। राजनीति से लोक प्रशासन का विभाजन सिद्धान्त।
द्वितीय चरण 1927 - 1937 वैज्ञानिक प्रकृति पर बल दिया गया।
तीसरा चरण 1938 - 1947 मानवीय प्रकृति, मानवता + नैतिकता को जोड़ा गया।
चौथा चरण 1948 - 1970 लोक प्रशासन पर संकट पुनः उत्पन्न, लोक प्रशासन राजनीति की ओर चला गया।
पाँचवा चरण 1971 - 1990 अन्तर्विषयक उपागम, स्वायत्तता का जन्म हुआ। व्यवहारवादी उपागम का जन्म।
छठा चरण 1991 से अब तक सोवियत संघ का विघटन - उदारवाद का जन्म। लोक प्रशासन अब निजी प्रशासन की ओर अग्रसर हो रहा है।

■ विकास प्रशासन के उदय का मूल कारण

विकास प्रशासन के उदय का मूल कारण था कि साम्राज्यवादी ताकतों ने विकासशील देशों को लम्बे समय तक गुलाम बनाया और उनका सामाजिक, आर्थिक शोषण किया। इसलिए जब एशिया, अफ्रीका व लैटिन अमेरिकी देश राष्ट्र-राज्य के रूप में अस्तित्व में आये तो उनके विकास की समस्याएं प्रारम्भ हुईं। अतः विकास प्रशासन का सम्बन्ध इन्हीं विकासशील देशों के विकास से सम्बन्धित है।

विकास एक बहुआयामी धारणा है, इसका सम्बन्ध किसी देश के सामाजिक, आर्थिक विकास से है लेकिन आज इसमें सभी प्रकार के विकास समाहित हैं। न केवल प्रशासन जनता का विकास करे, बल्कि प्रशासन का भी विकास हो! अर्थात् संस्थागत परिवर्तन और प्रशासनिक विकास दोनों को शामिल किया गया है।

■ विकास प्रशासन का विश्लेषण

विकास प्रशासन का विश्लेषण करने के पश्चात् निम्नलिखित बिन्दु उभरकर आते हैं:

  • विकास प्रशासन उच्चतर स्थिति होने की अग्रसर प्रक्रिया है।
  • विकास प्रशासन निरन्तर और गतिशील प्रक्रिया है।
  • विकास प्रशासन निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का एक प्रयास है।
  • विकास प्रशासन तीसरी दुनिया के देशों की समस्याओं का हल करने की एक प्रक्रिया है। विकास प्रशासन सिर्फ 'विकास का ही प्रशासन' नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक विकास भी है, अर्थात् प्रशासन का भी ही विकास है।
  • विकास प्रशासन पिछड़े समाज के परिवर्तन एवं आधुनिकीकरण के साथ-साथ बहुमुखी विकास हेतु एक शास्त्र यन्त्र है।

प्रशासनिक विकास vs विकास प्रशासन

प्रशासनिक विकास एक नवीन अवधारणा है जिसका अर्थ है 'प्रशासन को निरन्तर क्रियाशील बनाना'। वैसे तो विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास आपस में एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं लेकिन दोनों में सूक्ष्म अन्तर भी है। विकास प्रशासन का दृष्टिकोण व्यापक है—यह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व तकनीकी सभी प्रकार के विकास से सम्बन्धित है। जबकि प्रशासनिक विकास केवल प्रशासन के विकास से सम्बन्धित है। अतः हम कह सकते हैं कि विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास एक दूसरे के पूरक हैं क्योंकि ऐसा प्रशासन जिसका स्वयं ही विकास न हुआ हो और वह जाति, धर्म, भाषा से लिप्त तथा भ्रष्टाचार से लिप्त हो, वह कभी जनता का विकास नहीं कर सकता। अतः प्रशासन जनता का विकास करें। इसके लिए आवश्यक है कि उसका भी विकास हो।

फ्रेड रिग्स (Fred Riggs) से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य:
फ्रेड रिग्स ने इसे लोकप्रिय बनाया (तुलनात्मक)। फ्रेड रिग्स मुख्य रूप से निम्न उपागमों से संबंधित हैं:
  • I. पारिस्थितिक उपागम
  • II. आनुभविक उपागम
  • III. विकास प्रशासन
विकासशील देश को रिग्स ने 'प्रिस्मय समाज' (Prismatic Society) की श्रेणी में रखा है।

4. तुलनात्मक लोक प्रशासन एवं फ्रेड रिग्स

तुलनात्मक लोक प्रशासन के अन्तर्गत विशेष रूप से विकासशील देशों का अध्ययन किया जाता है। इसके अध्ययन को आगे बढ़ाने का पहला व्यवस्थित प्रयास 1952 में किया गया। अमेरिका स्थित Public Administration Clearing House ने एक सम्मेलन किया। अमेरिकन पोलिटिकल साइंस एसोसिएशन ने इसका मदद किया।

तुलनात्मक लोक प्रशासन समूह (CAG - Comparative Administrative Group) की स्थापना 1960 में अमेरिका में हुआ। फ्रेड रिग्स (Fred Riggs) आरम्भ से लेकर 1970 तक इसके अध्यक्ष रहे, बाद में रिचर्ड गेबल इसके अध्यक्ष बने। फ्रेड रिग्स ने तुलनात्मक लोक प्रशासन में निम्नलिखित तीन प्रवृत्तियां बताई:

  • आदर्शात्मक से आनुभविक (Normative to Empirical) की ओर।
  • विशिष्टता से सामान्यपरकता (Ideographic to Nomothetic) की ओर।
  • गैर-पारिस्थितिकीय से पारिस्थितिकीय (Non-ecological to Ecological) की ओर।

■ फ्रेड रिग्स का पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण

यह शब्द जीव-विज्ञान से लिया गया है। फ्रेड रिग्स ने प्रशासनिक प्रक्रिया को एक व्यवस्था माना है जिसका अपना परिवेश होता है जिसमें यह कार्य करता है और जिसके साथ यह अंतःक्रिया करता है। फ्रेड रिग्स ने सामाजिक व्यवस्था एवं प्रशासन के बीच अन्तर्क्रिया का अध्ययन किया। अर्थात्, प्रशासन और समाज के बीच अन्तःक्रिया को समझना चाहिए।

तुलनात्मक लोक प्रशासन गैर-पश्चिमी देशों में अर्थात् विकासशील देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाएं, पश्चिमी देशों के परम्पराओं से भिन्न हैं। इसलिए पहले से निर्मित मॉडल विकासशील देशों के समस्याओं को समझने में नाकाम रहे। इसी सन्दर्भ में नए मॉडलों को विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई जिसमें फ्रेड रिग्स का नाम मुख्य है।

5. फ्रेड रिग्स के प्रमुख मॉडल (Fred Riggs Models)

[A] समाज के प्रकार (Types of Society)

फ्रेड रिग्स की रुचि विकासशील एवं संक्रमणकालीन दौर से गुजरते हुए समाजों में थी। उन्होंने समाज को तीन भागों में बांटा:

① बहु-प्रक्रियात्मक समाज
(Fused Society)
रिग्स ने साम्राज्यवादी चीन तथा क्रान्तिपूर्व स्याम (थाईलैंड) को चुना। ऐसे समाज में एक ही संरचना सारे कार्य सम्पन्न करती है। राजनीतिक व प्रशासनिक संरचनाएँ भिन्न-भिन्न नहीं होतीं। सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं रहती।
② अल्प-प्रक्रियात्मक समाज
(Diffracted Society)
यह विकसित देश का समाज है। यह समाज सार्वभौमिक सिद्धान्तों पर आधारित होता है अर्थात् इसके व्यवहार में भेद-भाव नहीं होता। यह बाजार आधारित व्यवस्था है (Marktis Model)। इसमें खुली वर्ग संरचना है। (यूरोपीय वर्ग का समाज)।
③ समपार्श्वीय समाज
(Prismatic Society)
बहु-प्रक्रियात्मक और अल्प-प्रक्रियात्मक के बीच के समाज को समपार्श्वीय समाज कहा है। यह विकासशील देशों का समाज है, जो लम्बे समय तक गुलाम रहे हैं। इसमें अति पिछड़े समाज और झगड़े समाज दोनों के गुण पाये जाते हैं।

[B] साला मॉडल (Sala Model)

फ्रेड रिग्स ने मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित 'नौकरशाही' को विकासशील देशों के लिए अपर्याप्त बताया। अतः रिग्स ने 'साला मॉडल' एवं समपार्श्वीय समाज (Prismatic Society) का मॉडल प्रतिपादित किया।

'साला' स्पेनिश भाषा का शब्द है जिसका प्रयोग लैटिन अमेरिकी देशों में सरकारी कार्यालयों (Office) के लिए किया जाता है। अल्प-प्रक्रियात्मक समाज में इसे 'ब्यूरो' (Bureau) तथा बहु-प्रक्रियात्मक समाज में इसे 'चेम्बर' (Chamber) कहा जाता है।

समपार्श्वीय (Prismatic) समाज की 3 विशेषताएं:
1. विजातीयता (Heterogeneity): एक ही समय में आधुनिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं का सह-अस्तित्व।
2. औपचारिकता (Formalism): कानूनों और वास्तविकता के बीच भारी अंतर (कानून कुछ और, होता कुछ और है)।
3. अति आच्छादन (Overlapping): आधुनिक संरचनाओं के ऊपर पारंपरिक संरचनाओं का हावी होना।

सरकारी अधिकारी प्रतियोगी परीक्षा के अनुसार चुने जाते हैं किन्तु चयन में भाई-भतीजावाद एवं घूस चलता है। साला अधिकारी, समाज कल्याण की अपेक्षा अपनी निजी उन्नति पर अधिक ध्यान देता है। उनका व्यवहार पुरातनवाद तथा रुढ़िवाद से प्रभावित होता है। जिसके कारण वे नियमों और कानूनों को सही ढंग से क्रियान्वित नहीं कर पाते हैं।

[C] कृषिका-औद्योगिका मॉडल (Agraria-Industria Model)

रिग्स ने पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण के आधार पर विकासशील देशों का अध्ययन करने के लिए कृषिका-औद्योगिका मॉडल प्रस्तुत किया। अर्थात् समाज को दो भागों में बांटा।

कृषि प्रधान समाज को कृषिका मॉडल कहा जो कि बहु-प्रक्रियात्मक समाज में पाया जाता है, और

औद्योगिक प्रधान समाज को औद्योगिका मॉडल कहा जो कि अल्प-प्रक्रियात्मक समाज में पाया जाता है।

और समपार्श्वीय समाज में दोनों का मिश्रण होता है अर्थात् कृषिका-औद्योगिका मॉडल कहलाता है, इसलिए ऐसे समाज की अर्थव्यवस्था प्रायः मिश्रित होती है।

रिग्स के अनुसार —

"एक निश्चित बिन्दु पर समाज कृषिकीय से औद्योगिक में रूपान्तरित होते हैं।"

रिग्स ने 1957 में समाज को मुख्य रूप से दो भागों (कृषि प्रधान और उद्योग प्रधान) में बाँटा और उनके बीच निम्न अंतर स्पष्ट किए:

आधार कृषिका समाज (Agraria) औद्योगिका समाज (Industria)
मूल्य/मानक आरोपित मूल्य (Ascriptive values) उपलब्धि प्रधान मानक (Achievement)
दृष्टिकोण विशिष्टता (Particularism) होती है सार्वभौमिकता (Universalism) होती है
गतिशीलता सीमित सामाजिक और क्षेत्रीय गतिशीलता उच्चतर सामाजिक और क्षेत्रीय गतिशीलता
वर्ग संरचना भेदीय वर्गीकरण की उपस्थिति समतावादी वर्ग की उपस्थिति

बाद में रिग्स ने अनुभव किया कि संक्रमणकालीन देशों में यह अध्ययन सहायक नहीं है, अतः सन् 1957 में 'ट्रांसिसिया' (Transitia) नामक साम्यावस्था मॉडल का विकास किया जो मिश्रित प्रतिनिधित्व करता है।

[D] बाजार-कैंटीन मॉडल (Bazaar-Canteen Model)

समपार्श्वीय समाज में अर्थव्यवस्था को रिग्स ने बाजार कैंटीन व्यवस्था का नाम दिया। रिग्स का मानना है कि इस प्रकार के समाज में कुछ ऐसे विशेषताएँ पायी जाती हैं जो कि अल्प-प्रक्रियात्मक और बहु-प्रक्रियात्मक समाज में नहीं पाया जाता, जैसे- मूल्यों का समूहन, अभिजन वर्ग का हस्तक्षेप आदि।

नोट:

रिग्स ने विशेष रूप से तुलनात्मक लोक प्रशासन को जन्म विकासशील देशों को ध्यान में रखकर दिया क्योंकि यह समाज संक्रमणकालीन परिस्थितियों से गुजर रहा था। लम्बे समय के बाद गुलामी की दासता से मुक्त इनकी समाज व आर्थिक स्थिति छिन्न-भिन्न हो गई। अब ये अपना विकास करना चाहते हैं लेकिन विकास नहीं कर पा रहे हैं, अतः यहाँ लोक प्रशासन की स्थिति विकसित देशों से भिन्न होगी।

रिग्स ने विकासशील देशों के लिए समपार्श्वीय समाज या Prismatic Society का नाम दिया।

रिग्स ने विकासशील देशों की नौकरशाही के लिए 'साला' शब्द प्रयोग किया।

रिग्स ने विकासशील देशों के लिए कृषिका-औद्योगिका मॉडल और बाजार कैंटीन मॉडल का प्रतिपादन किया।

✍️ निष्कर्ष (Conclusion)

नवीन लोक प्रशासन ने जहाँ प्रशासन को केवल तथ्यों से निकालकर मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक न्याय से जोड़ा, वहीं विकास प्रशासन ने नवोदित विकासशील राष्ट्रों के आर्थिक और सामाजिक निर्माण का बीड़ा उठाया। इसके साथ ही फ्रेड रिग्स का तुलनात्मक लोक प्रशासन और उनके साला मॉडल व प्रिजमेटिक समाज (Prismatic Society) ने यह सिद्ध कर दिया कि पश्चिमी देशों के प्रशासनिक मॉडल हर जगह सफल नहीं हो सकते। विकासशील देशों की अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होती है (पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण), और प्रशासन को सुधारने के लिए उसी परिवेश के अनुसार मॉडल तैयार करने की आवश्यकता होती है।

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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. नवीन लोक प्रशासन (NPA) का जन्म कब और किस सम्मेलन से माना जाता है?
नवीन लोक प्रशासन का व्यवस्थित जन्म 1968 के 'प्रथम मिन्नोब्रुक सम्मेलन' से माना जाता है, जिसकी अध्यक्षता ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo) ने की थी।
Q2. नवीन लोक प्रशासन के 4 मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
इसके 4 मुख्य लक्ष्य हैं: 1. प्रासंगिकता (Relevance), 2. मूल्य परकता (Values), 3. सामाजिक समानता (Social Equity), और 4. सामाजिक परिवर्तन (Social Change)।
Q3. 'विकास प्रशासन' (Development Administration) शब्द का पहली बार प्रयोग किसने किया?
इस शब्द का पहली बार प्रयोग भारतीय अध्येता यू. एल. गोस्वामी (U.L. Goswami) ने 1955 में अपने एक लेख में किया था। बाद में एडवर्ड वीडनर ने इसकी अवधारणा का प्रतिपादन किया।
Q4. फ्रेड रिग्स (Fred Riggs) ने विकासशील देशों के समाज को क्या नाम दिया?
फ्रेड रिग्स ने विकासशील (संक्रमणकालीन) देशों के समाज को 'समपार्श्वीय समाज' (Prismatic Society) का नाम दिया।
Q5. साला (Sala) मॉडल क्या है?
साला मॉडल फ्रेड रिग्स द्वारा दिया गया एक प्रतिमान है, जो विकासशील देशों की नौकरशाही (Bureaucracy) का वर्णन करता है। इसमें भाई-भतीजावाद, औपचारिकता और अति-आच्छादन जैसे गुण पाए जाते हैं।
Q6. प्रिजमेटिक (Prismatic) समाज की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
इसकी 3 प्रमुख विशेषताएं हैं: विजातीयता (Heterogeneity), औपचारिकता (Formalism), और अति आच्छादन (Overlapping)।
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