समानता (Equality): 50 अति महत्वपूर्ण
| समानता (Equality): 50 अति महत्वपूर्ण Premium MCQs |
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| Study Material Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत यह प्रीमियम मॉक टेस्ट समानता (Equality) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, नकारात्मक व सकारात्मक दृष्टिकोण, और स्वतंत्रता-समानता के संबंधों पर आधारित है। इसमें TGT, PGT, LT, GIC, UPSC, NET-JRF और PGT स्तर के कथन-कारण, कूट मिलान और 5-विकल्पों (A, B, C, D, E) वाले द्विभाषी (Bilingual) प्रश्न शामिल हैं। |
1. समानता (Equality) की मांग का ऐतिहासिक उदय मुख्य रूप से किस व्यवस्था के विरुद्ध एक प्रतिक्रिया (Reaction) के रूप में हुआ था?
सही उत्तर: B) विशेषाधिकारों पर आधारित समाज (Privilege-based Society)
व्याख्या: प्राचीन और मध्यकालीन समाज में दास प्रथा और सामंती व्यवस्था थी, जहाँ राजा और जागीरदारों को जन्म से 'विशेषाधिकार' (Privileges) प्राप्त थे। समानता का जन्म इन्हीं विशेषाधिकारों को समाप्त करने के लिए हुआ था।
व्याख्या: प्राचीन और मध्यकालीन समाज में दास प्रथा और सामंती व्यवस्था थी, जहाँ राजा और जागीरदारों को जन्म से 'विशेषाधिकार' (Privileges) प्राप्त थे। समानता का जन्म इन्हीं विशेषाधिकारों को समाप्त करने के लिए हुआ था।
2. कथन (Assertion) और कारण (Reason) पर विचार करें:
कथन (A): प्राचीन यूनानी विचारक प्लेटो और अरस्तू (Plato and Aristotle) आधुनिक समानता के प्रबल समर्थक थे।
कारण (R): प्लेटो ने समाज को तीन वर्गों में बाँटा और अरस्तू ने समाज को स्वामी और दास (Master and Slave) में विभाजित किया, जो प्राकृतिक असमानता (Natural Inequality) का समर्थन करता है।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): प्लेटो ने समाज को तीन वर्गों में बाँटा और अरस्तू ने समाज को स्वामी और दास (Master and Slave) में विभाजित किया, जो प्राकृतिक असमानता (Natural Inequality) का समर्थन करता है।
सही उत्तर: C) A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
व्याख्या: प्लेटो और अरस्तू समानता के समर्थक नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज के पदानुक्रम (Hierarchy) को प्राकृतिक माना था। अतः कथन A पूर्णतः गलत है, जबकि कारण R एक सत्य ऐतिहासिक तथ्य है।
व्याख्या: प्लेटो और अरस्तू समानता के समर्थक नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज के पदानुक्रम (Hierarchy) को प्राकृतिक माना था। अतः कथन A पूर्णतः गलत है, जबकि कारण R एक सत्य ऐतिहासिक तथ्य है।
3. "हर मानव के रक्त का रंग एक जैसा है।" (The color of every human's blood is the same). विशेषाधिकारों पर प्रहार करने वाला यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक कथन किसका है?
सही उत्तर: B) स्पार्टाकस (Spartacus)
व्याख्या: रोमन काल में गुलामों (Slaves) के प्रसिद्ध नेता स्पार्टाकस ने दासों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए प्राकृतिक समानता का यह उत्कृष्ट तर्क दिया था।
व्याख्या: रोमन काल में गुलामों (Slaves) के प्रसिद्ध नेता स्पार्टाकस ने दासों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए प्राकृतिक समानता का यह उत्कृष्ट तर्क दिया था।
4. सूची-I (ऐतिहासिक क्रांति) को सूची-II (समानता से संबंधित उनका प्रसिद्ध कथन) से सुमेलित करें:
a. फ्रांसीसी क्रांति
1. हम इस तथ्य को स्वतः सिद्ध स्वीकार करते हैं कि सभी मनुष्य समान हैं।
b. अमेरिकी घोषणा पत्र
2. मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा हुए हैं तथा अधिकारों में भी समान हैं।
c. विनोबा भावे
3. दुनिया में सभी पतित हैं, अमीर कभी झुके नहीं और गरीब कभी उठे नहीं।
सही उत्तर: B) a-2, b-1, c-3
व्याख्या: फ्रांसीसी क्रांति का घोषणापत्र समानता को जन्मजात मानता है। अमेरिकी घोषणापत्र (थॉमस जेफरसन) इसे स्वतः सिद्ध (Self-evident truth) मानता है।
व्याख्या: फ्रांसीसी क्रांति का घोषणापत्र समानता को जन्मजात मानता है। अमेरिकी घोषणापत्र (थॉमस जेफरसन) इसे स्वतः सिद्ध (Self-evident truth) मानता है।
5. 'नकारात्मक समानता' (Negative Equality) का मूल तात्पर्य क्या है, जो 16वीं से 19वीं सदी तक प्रचलित रही?
सही उत्तर: B) सभी प्रकार के विशेषाधिकारों का अंत और 'सबकी समान समानता'...
व्याख्या: नकारात्मक समानता का अर्थ है राज्य जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा (औपचारिक समानता)। यह प्राकृतिक विषमता को बनाए रखते हुए केवल 'कृत्रिम विषमता' को मिटाने की बात करती है।
व्याख्या: नकारात्मक समानता का अर्थ है राज्य जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा (औपचारिक समानता)। यह प्राकृतिक विषमता को बनाए रखते हुए केवल 'कृत्रिम विषमता' को मिटाने की बात करती है।
6. बहु-कथन प्रश्न: सकारात्मक समानता (Positive Equality) के संदर्भ में कौन-से कथन सत्य (True) हैं?
1. यह 20वीं शताब्दी में अस्तित्व में आई और लोक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) से संबंधित है।
2. इसका अर्थ 'सबकी समानता' न होकर "समानों में समानता" (Equality among equals) है।
3. यह केवल राजनीतिक और कानूनी समानता (Political and Legal Equality) तक सीमित है।
4. यह कृत्रिम विषमता के साथ-साथ प्राकृतिक विषमता (Natural Inequality) को भी कम करने का प्रयास करती है।
सही कूट चुनें:
2. इसका अर्थ 'सबकी समानता' न होकर "समानों में समानता" (Equality among equals) है।
3. यह केवल राजनीतिक और कानूनी समानता (Political and Legal Equality) तक सीमित है।
4. यह कृत्रिम विषमता के साथ-साथ प्राकृतिक विषमता (Natural Inequality) को भी कम करने का प्रयास करती है।
सही उत्तर: B) 1, 2 और 4 (1, 2 and 4)
व्याख्या: कथन 3 गलत है। राजनीतिक और कानूनी समानता 'नकारात्मक दृष्टिकोण' से जुड़ी हैं। सकारात्मक समानता मुख्य रूप से सामाजिक और आर्थिक समानता (Social and Economic Equality) पर बल देती है।
व्याख्या: कथन 3 गलत है। राजनीतिक और कानूनी समानता 'नकारात्मक दृष्टिकोण' से जुड़ी हैं। सकारात्मक समानता मुख्य रूप से सामाजिक और आर्थिक समानता (Social and Economic Equality) पर बल देती है।
7. "समानता की उत्पत्ति व्यक्तित्व के विकास के साथ-साथ हुई है जो प्रत्येक मनुष्य में समान है किन्तु इसका विकास अलग-अलग ढंग से हुआ है।" यह कथन किस राजनीतिक विचारक का है?
सही उत्तर: C) अर्नेस्ट बार्कर (Ernest Barker)
व्याख्या: बार्कर ने समानता के सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए कहा था कि बीज रूप में हर मनुष्य समान है, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका विकास अलग-अलग होता है, अतः राज्य को समान अवसर देने चाहिए।
व्याख्या: बार्कर ने समानता के सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए कहा था कि बीज रूप में हर मनुष्य समान है, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका विकास अलग-अलग होता है, अतः राज्य को समान अवसर देने चाहिए।
8. एच. जे. लास्की (H.J. Laski) ने 'सकारात्मक समानता' स्थापित करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें बताई हैं। उनकी 'सर्वप्रथम शर्त' (First condition) कौन-सी है?
सही उत्तर: C) न्यूनतम आवश्यकता की सर्वप्रथम पूर्ति (Fulfillment of basic minimum needs first)
व्याख्या: यद्यपि लास्की ने ऊपर की तीनों शर्तें बताई हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज के हर व्यक्ति की "बुनियादी जरूरतें" (भोजन, कपड़ा) पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अवसर या स्वतंत्रता बेमानी है। अतः यह पहली शर्त है।
व्याख्या: यद्यपि लास्की ने ऊपर की तीनों शर्तें बताई हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज के हर व्यक्ति की "बुनियादी जरूरतें" (भोजन, कपड़ा) पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अवसर या स्वतंत्रता बेमानी है। अतः यह पहली शर्त है।
9. कथन और कारण:
कथन (A): 16वीं से 19वीं शताब्दी के विचारकों ने स्वतंत्रता (Liberty) और समानता (Equality) को परस्पर विरोधी (Opposed) माना था。
कारण (R): उनका तर्क था कि प्रकृति ने ही मनुष्यों को असमान बनाया है। यदि राज्य समानता लाने के लिए हस्तक्षेप करेगा, तो योग्य और सक्षम व्यक्तियों की स्वतंत्रता नष्ट हो जाएगी।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): उनका तर्क था कि प्रकृति ने ही मनुष्यों को असमान बनाया है। यदि राज्य समानता लाने के लिए हस्तक्षेप करेगा, तो योग्य और सक्षम व्यक्तियों की स्वतंत्रता नष्ट हो जाएगी।
सही उत्तर: A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: डी. टॉकविल, लार्ड एक्टन और हेयक जैसे विचारकों का यही मुख्य तर्क था कि "समानता का प्रयास स्वतंत्रता के लिए खतरा है" क्योंकि समानता लाने के लिए राज्य को 'बल प्रयोग' (Coercion) करना पड़ेगा।
व्याख्या: डी. टॉकविल, लार्ड एक्टन और हेयक जैसे विचारकों का यही मुख्य तर्क था कि "समानता का प्रयास स्वतंत्रता के लिए खतरा है" क्योंकि समानता लाने के लिए राज्य को 'बल प्रयोग' (Coercion) करना पड़ेगा।
10. "समानता की उत्कृष्ट अभिलाषा के कारण स्वतंत्रता की आशा ही व्यर्थ हो गई है।" (The excellent hope of equality has made the hope of liberty vain). यह प्रसिद्ध कथन किस विचारक का है?
सही उत्तर: B) लार्ड एक्टन (Lord Acton)
व्याख्या: लार्ड एक्टन 'स्वतंत्रता और समानता को विरोधी मानने वाले दृष्टिकोण' के सबसे प्रमुख प्रवक्ता हैं। उनका यह कथन राजनीति विज्ञान में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला कोट (Quote) है।
व्याख्या: लार्ड एक्टन 'स्वतंत्रता और समानता को विरोधी मानने वाले दृष्टिकोण' के सबसे प्रमुख प्रवक्ता हैं। उनका यह कथन राजनीति विज्ञान में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला कोट (Quote) है।
11. निम्नलिखित में से 'राजनीतिक समानता' (Political Equality) का सबसे सटीक उदाहरण कौन-सा है?
सही उत्तर: B) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और चुनाव लड़ने का समान अधिकार
व्याख्या: राजनीतिक समानता का संबंध राज्य के राजनीतिक कार्यों में भागीदारी से है (जैसे वोट देना)। 'समान वेतन' आर्थिक समानता है। 'कानून के समक्ष समानता' कानूनी समानता है। 'सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश' सामाजिक समानता है।
व्याख्या: राजनीतिक समानता का संबंध राज्य के राजनीतिक कार्यों में भागीदारी से है (जैसे वोट देना)। 'समान वेतन' आर्थिक समानता है। 'कानून के समक्ष समानता' कानूनी समानता है। 'सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश' सामाजिक समानता है।
12. स्वतंत्रता और समानता के सम्बन्ध पर 'सकारात्मक दृष्टिकोण' (Positive View - परस्पर पूरक) का जन्म किस शताब्दी में हुआ और इसके प्रमुख समर्थक कौन हैं?
सही उत्तर: B) 20वीं शताब्दी — लास्की, मैकाइवर, आर. एच. टानी
व्याख्या: 20वीं सदी के समाजवादी और लोक-कल्याणकारी विचारकों ने महसूस किया कि बिना समानता के स्वतंत्रता निरर्थक है। अतः लास्की, टानी और रूसो जैसे विचारकों ने इन्हें 'पूरक' (Complementary) सिद्ध किया।
व्याख्या: 20वीं सदी के समाजवादी और लोक-कल्याणकारी विचारकों ने महसूस किया कि बिना समानता के स्वतंत्रता निरर्थक है। अतः लास्की, टानी और रूसो जैसे विचारकों ने इन्हें 'पूरक' (Complementary) सिद्ध किया।
13. "बिना कुछ समानता के स्वतंत्रता छिछली (Hollow) होगी और स्वतंत्रता के बिना समानता निरर्थक (Meaningless) होगी।" दोनों के मध्य अटूट संबंध बताने वाला यह कथन किसका है?
सही उत्तर: C) एच. जे. लास्की (H.J. Laski)
व्याख्या: लास्की ने सिद्ध किया कि समाज में यदि भारी असमानता है, तो स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं है। एक भूखा आदमी अपनी आज़ादी का क्या करेगा? अतः दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
व्याख्या: लास्की ने सिद्ध किया कि समाज में यदि भारी असमानता है, तो स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं है। एक भूखा आदमी अपनी आज़ादी का क्या करेगा? अतः दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
14. कथन और कारण:
कथन (A): राजनीतिक समानता का संबंध 'उदारवाद' (Liberalism) से है, जबकि आर्थिक समानता का संबंध 'मार्क्सवाद' (Marxism) से है。
कारण (R): उदारवाद ने सदैव 'एक व्यक्ति-एक वोट' और कानून के समक्ष समानता पर बल दिया, जबकि मार्क्सवाद ने उत्पादन के साधनों पर सामूहिक नियंत्रण कर अमीरी-गरीबी मिटाने (आर्थिक समानता) को ही असली समानता माना।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): उदारवाद ने सदैव 'एक व्यक्ति-एक वोट' और कानून के समक्ष समानता पर बल दिया, जबकि मार्क्सवाद ने उत्पादन के साधनों पर सामूहिक नियंत्रण कर अमीरी-गरीबी मिटाने (आर्थिक समानता) को ही असली समानता माना।
सही उत्तर: B) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: यह राजनीति विज्ञान का एक आधारभूत सत्य है। पूँजीवादी/उदारवादी देश राजनीतिक आज़ादी देते हैं, लेकिन आर्थिक विषमता को नजरअंदाज करते हैं। मार्क्सवाद इसका ठीक उलटा करता है, वह आर्थिक समानता को सर्वोपरि रखता है।
व्याख्या: यह राजनीति विज्ञान का एक आधारभूत सत्य है। पूँजीवादी/उदारवादी देश राजनीतिक आज़ादी देते हैं, लेकिन आर्थिक विषमता को नजरअंदाज करते हैं। मार्क्सवाद इसका ठीक उलटा करता है, वह आर्थिक समानता को सर्वोपरि रखता है।
15. "आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक कपोल कल्पना (Fiction / Myth) है।" यह विचार राजनीति विज्ञान के किन दो विचारकों से मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है?
सही उत्तर: C) जी. डी. एच. कोल और एच. जे. लास्की (G.D.H. Cole and H.J. Laski)
व्याख्या: कोल और लास्की (और इसी अर्थ में सी.ई.एम. जोड) का मानना था कि एक गरीब मजदूर जो दिनभर रोटी के लिए संघर्ष करता है, उसके लिए वोट देने की आज़ादी (राजनीतिक स्वतंत्रता) का कोई महत्व नहीं है, वह तो चंद रुपयों में अपना वोट बेच देगा।
व्याख्या: कोल और लास्की (और इसी अर्थ में सी.ई.एम. जोड) का मानना था कि एक गरीब मजदूर जो दिनभर रोटी के लिए संघर्ष करता है, उसके लिए वोट देने की आज़ादी (राजनीतिक स्वतंत्रता) का कोई महत्व नहीं है, वह तो चंद रुपयों में अपना वोट बेच देगा।
16. 'विशिष्ट वर्गीय सिद्धान्त' (Elite Theory) के समर्थक, जैसे पैरेटो (Pareto) और मोस्का (Mosca), समानता के किस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं?
सही उत्तर: B) वे स्वतंत्रता और समानता को एक-दूसरे का विरोधी मानते हैं...
व्याख्या: एलीट थ्योरी (विशिष्ट वर्ग) मानती है कि समाज में हमेशा मुट्ठी भर 'योग्य' लोग (Elite) शासन करेंगे और बाकी 'अयोग्य' (Masses) शासित होंगे। अतः वे पूर्ण समानता को असंभव और स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हैं।
व्याख्या: एलीट थ्योरी (विशिष्ट वर्ग) मानती है कि समाज में हमेशा मुट्ठी भर 'योग्य' लोग (Elite) शासन करेंगे और बाकी 'अयोग्य' (Masses) शासित होंगे। अतः वे पूर्ण समानता को असंभव और स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हैं।
17. "जब तक मनुष्यों की आवश्यकताओं और क्षमताओं में भिन्नता है तब तक व्यवहार की एकरूपता और प्रतिफल की एकरूपता हो ही नहीं सकती।" यह यथार्थवादी कथन किसका है?
सही उत्तर: C) टी. एच. ग्रीन (T.H. Green)
व्याख्या: टी.एच. ग्रीन सकारात्मक उदारवादी हैं। उनका मानना है कि सबको 'समान अवसर' तो मिलने चाहिए, लेकिन चूँकि हर इंसान की क्षमता अलग है, इसलिए 'परिणाम' (Outcome / Reward) कभी भी एकदम बराबर नहीं हो सकता। (यही 'समानों में समानता' का आधार है)।
व्याख्या: टी.एच. ग्रीन सकारात्मक उदारवादी हैं। उनका मानना है कि सबको 'समान अवसर' तो मिलने चाहिए, लेकिन चूँकि हर इंसान की क्षमता अलग है, इसलिए 'परिणाम' (Outcome / Reward) कभी भी एकदम बराबर नहीं हो सकता। (यही 'समानों में समानता' का आधार है)।
18. "समानों में समानता" (Equality among equals) के सिद्धान्त का क्या तात्पर्य है, जिसे 20वीं सदी की 'सकारात्मक समानता' ने अपनाया?
सही उत्तर: C) एक जैसी योग्यता, क्षमता या परिस्थिति वाले व्यक्तियों के साथ...
व्याख्या: यह आधुनिक समानता (भारतीय संविधान का Article 14-18 भी इसी पर आधारित है) का मूल है। एक डॉक्टर और एक मजदूर का वेतन समान नहीं हो सकता, लेकिन दो समान योग्यता वाले डॉक्टरों को समान वेतन मिलना चाहिए। साथ ही विकलांगों को अलग से सुविधा देना (वर्गीकरण) समानता के खिलाफ नहीं है।
व्याख्या: यह आधुनिक समानता (भारतीय संविधान का Article 14-18 भी इसी पर आधारित है) का मूल है। एक डॉक्टर और एक मजदूर का वेतन समान नहीं हो सकता, लेकिन दो समान योग्यता वाले डॉक्टरों को समान वेतन मिलना चाहिए। साथ ही विकलांगों को अलग से सुविधा देना (वर्गीकरण) समानता के खिलाफ नहीं है।
19. बहु-कथन प्रश्न: समानता (Equality) के विकास के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
1. 1649 की इंग्लैंड की खूनी क्रांति (Blood Revolution) ने विशेषाधिकारों पर प्रहार किया।
2. फ्रांसीसी क्रांति (1789) का मुख्य नारा 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुता' था।
3. नकारात्मक समानता राज्य से सकारात्मक सुविधाओं (कल्याण) की मांग करती है।
4. सकारात्मक समानता 'धर्म, भाषा और लिंग' के आधार पर भेदभाव का निषेध करती है।
सही कूट चुनें:
2. फ्रांसीसी क्रांति (1789) का मुख्य नारा 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुता' था।
3. नकारात्मक समानता राज्य से सकारात्मक सुविधाओं (कल्याण) की मांग करती है।
4. सकारात्मक समानता 'धर्म, भाषा और लिंग' के आधार पर भेदभाव का निषेध करती है।
सही उत्तर: B) 1, 2 और 4 (1, 2 and 4)
व्याख्या: कथन 3 गलत है। 'नकारात्मक समानता' राज्य से सकारात्मक सुविधाओं की मांग नहीं करती, बल्कि वह केवल राज्य के भेदभावपूर्ण हस्तक्षेप (विशेषाधिकार) को रोकने की मांग करती है। सकारात्मक समानता सुविधाओं की मांग करती है।
व्याख्या: कथन 3 गलत है। 'नकारात्मक समानता' राज्य से सकारात्मक सुविधाओं की मांग नहीं करती, बल्कि वह केवल राज्य के भेदभावपूर्ण हस्तक्षेप (विशेषाधिकार) को रोकने की मांग करती है। सकारात्मक समानता सुविधाओं की मांग करती है।
20. "लोकतंत्र का विस्तार समानता को जितना बढ़ावा देता है, स्वतंत्रता के लिए उतना ही बड़ा खतरा पैदा कर देता है।"
यह 19वीं सदी का भय (Fear) किस विचारक ने व्यक्त किया था?
सही उत्तर: C) डी. टॉकविल (De Tocqueville)
व्याख्या: टॉकविल ने अपनी पुस्तक 'Democracy in America' में बहुसंख्यकवाद (Majority Tyranny) का भय जताया था। उनका मानना था कि लोकतंत्र 'समानता' लाने के चक्कर में अल्पसंख्यकों या योग्य व्यक्तियों की 'स्वतंत्रता' को कुचल सकता है।
व्याख्या: टॉकविल ने अपनी पुस्तक 'Democracy in America' में बहुसंख्यकवाद (Majority Tyranny) का भय जताया था। उनका मानना था कि लोकतंत्र 'समानता' लाने के चक्कर में अल्पसंख्यकों या योग्य व्यक्तियों की 'स्वतंत्रता' को कुचल सकता है।
21. 'समानता' (Equality) की आधुनिक अवधारणा का सबसे प्रमुख शत्रु (Enemy) किसे माना जाता है?
सही उत्तर: C) विशेषाधिकारों और अनुचित भेदभाव को (Privileges and Unjust Discrimination)
व्याख्या: समानता की पूरी वैचारिक नींव ही जन्म, जाति, धर्म या संपत्ति के आधार पर मिलने वाले 'विशेषाधिकारों' (जैसे सामंतवाद/जातिवाद में) को नष्ट करने पर टिकी है।
व्याख्या: समानता की पूरी वैचारिक नींव ही जन्म, जाति, धर्म या संपत्ति के आधार पर मिलने वाले 'विशेषाधिकारों' (जैसे सामंतवाद/जातिवाद में) को नष्ट करने पर टिकी है।
22. "समानता स्वतंत्रता के लिए आवश्यक है।" (Equality is necessary for liberty). तथा "समानता की एक बड़ी मात्रा स्वतंत्रता के लिए विरोधी न होकर उसके लिए आवश्यक है।"
यह समन्वयवादी विचार किस विद्वान का है?
सही उत्तर: A) आर. एच. टानी (R.H. Tawney)
व्याख्या: आर. एच. टानी ने अपनी पुस्तक 'Equality' (1931) में लार्ड एक्टन के इस विचार का घोर खंडन किया कि ये दोनों विरोधी हैं। टानी ने सिद्ध किया कि बिना समानता के स्वतंत्रता केवल अमीरों की जागीर बन कर रह जाती है।
व्याख्या: आर. एच. टानी ने अपनी पुस्तक 'Equality' (1931) में लार्ड एक्टन के इस विचार का घोर खंडन किया कि ये दोनों विरोधी हैं। टानी ने सिद्ध किया कि बिना समानता के स्वतंत्रता केवल अमीरों की जागीर बन कर रह जाती है।
23. कथन और कारण:
कथन (A): एच. जे. लास्की (H.J. Laski) ने समानता की स्थापना के लिए "विशेष सुविधाओं के अभाव" (Absence of special privileges) को एक अनिवार्य शर्त माना है。
कारण (R): लास्की के अनुसार, यदि समाज में कुछ लोगों को जन्म या धन के आधार पर विशेष सुविधाएं मिलती रहेंगी, तो आम नागरिक कभी भी अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं कर पाएगा, जो कि स्वतंत्रता और समानता दोनों का हनन है।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): लास्की के अनुसार, यदि समाज में कुछ लोगों को जन्म या धन के आधार पर विशेष सुविधाएं मिलती रहेंगी, तो आम नागरिक कभी भी अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं कर पाएगा, जो कि स्वतंत्रता और समानता दोनों का हनन है।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: लास्की ने स्पष्ट कहा है कि समानता का पहला अर्थ ही यही है कि समाज में किसी को भी कोई 'V.I.P.' दर्जा (विशेषाधिकार) प्राप्त न हो। कानून और अवसरों के मामले में सभी को एक समान धरातल (Level playing field) पर रखा जाए।
व्याख्या: लास्की ने स्पष्ट कहा है कि समानता का पहला अर्थ ही यही है कि समाज में किसी को भी कोई 'V.I.P.' दर्जा (विशेषाधिकार) प्राप्त न हो। कानून और अवसरों के मामले में सभी को एक समान धरातल (Level playing field) पर रखा जाए।
24. "जो अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को नागरिक होने के नाते प्राप्त है, वही अधिकार समान मात्रा में मुझे भी प्राप्त होना चाहिए।" यह 'सकारात्मक समानता' की परिभाषा किसने दी?
सही उत्तर: C) एच. जे. लास्की (H.J. Laski)
व्याख्या: लास्की ने नागरिकता (Citizenship) के आधार पर समानता को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य की दृष्टि में सभी नागरिक बराबर हैं। जो सुविधाएं और अधिकार राज्य एक नागरिक को देता है, वे बिना भेदभाव के सभी को मिलने चाहिए।
व्याख्या: लास्की ने नागरिकता (Citizenship) के आधार पर समानता को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य की दृष्टि में सभी नागरिक बराबर हैं। जो सुविधाएं और अधिकार राज्य एक नागरिक को देता है, वे बिना भेदभाव के सभी को मिलने चाहिए।
25. "स्वतंत्रता की समस्या का केवल एक ही हल है और वह केवल समानता में ही निहित है।" (There is only one solution to the problem of liberty and it lies in equality). यह कथन किसका है?
सही उत्तर: B) प्रो. पोलार्ड (Prof. Pollard)
व्याख्या: प्रो. ए. एफ. पोलार्ड ने स्वतंत्रता और समानता को एक-दूसरे का घनिष्ठ पूरक (Complementary) मानते हुए यह सिद्ध किया कि जहाँ समानता नहीं है, वहाँ स्वतंत्रता की रक्षा करना असंभव है।
व्याख्या: प्रो. ए. एफ. पोलार्ड ने स्वतंत्रता और समानता को एक-दूसरे का घनिष्ठ पूरक (Complementary) मानते हुए यह सिद्ध किया कि जहाँ समानता नहीं है, वहाँ स्वतंत्रता की रक्षा करना असंभव है।
26. 'नकारात्मक समानता' (Negative Equality) और 'सकारात्मक समानता' (Positive Equality) के मध्य मूल अंतर क्या है? (बहु-कथन)
1. नकारात्मक समानता केवल "कृत्रिम विषमताओं" (Artificial inequalities) को मिटाने की बात करती है, जबकि सकारात्मक समानता प्राकृतिक विषमताओं (Natural inequalities) को भी कम करने का प्रयास (सुविधाएं देकर) करती है。
2. नकारात्मक समानता राज्य के अहस्तक्षेप (Laissez-faire) का समर्थन करती है, जबकि सकारात्मक समानता राज्य के लोक-कल्याणकारी हस्तक्षेप (Welfare intervention) का समर्थन करती है。
3. नकारात्मक समानता 'सबकी समान समानता' है, जबकि सकारात्मक समानता 'समानों में समानता' है।
सही कूट:
2. नकारात्मक समानता राज्य के अहस्तक्षेप (Laissez-faire) का समर्थन करती है, जबकि सकारात्मक समानता राज्य के लोक-कल्याणकारी हस्तक्षेप (Welfare intervention) का समर्थन करती है。
3. नकारात्मक समानता 'सबकी समान समानता' है, जबकि सकारात्मक समानता 'समानों में समानता' है।
सही उत्तर: D) 1, 2 और 3 तीनों सत्य हैं
व्याख्या: ये तीनों बिंदु नकारात्मक (18वीं सदी) और सकारात्मक (20वीं सदी) समानता के बीच के वैचारिक और व्यावहारिक अंतर को बिल्कुल सटीक रूप से स्पष्ट करते हैं।
व्याख्या: ये तीनों बिंदु नकारात्मक (18वीं सदी) और सकारात्मक (20वीं सदी) समानता के बीच के वैचारिक और व्यावहारिक अंतर को बिल्कुल सटीक रूप से स्पष्ट करते हैं।
27. 'आर्थिक समानता' (Economic Equality) से आधुनिक राजनीति विज्ञान में क्या तात्पर्य है?
सही उत्तर: C) सभी की न्यूनतम प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो और संपत्ति की घोर विषमता न हो।
व्याख्या: लास्की और अन्य आधुनिक विचारकों के अनुसार आर्थिक समानता का अर्थ "सबको बराबर वेतन" देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूख या बुनियादी सुविधाओं के अभाव में न रहे, और अमीर-गरीब के बीच खाई इतनी न हो कि अमीर गरीब को खरीद सके।
व्याख्या: लास्की और अन्य आधुनिक विचारकों के अनुसार आर्थिक समानता का अर्थ "सबको बराबर वेतन" देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूख या बुनियादी सुविधाओं के अभाव में न रहे, और अमीर-गरीब के बीच खाई इतनी न हो कि अमीर गरीब को खरीद सके।
28. "विशेषाधिकारों पर आधारित समाज" (Privilege-based Society) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ समाज को शासक, सैनिक और उत्पादक वर्गों में जन्म/प्रकृति के आधार पर बाँटा गया था। यह विचार किसका था?
सही उत्तर: B) प्लेटो (Plato)
व्याख्या: प्लेटो ने अपनी पुस्तक 'The Republic' में 'आत्मा के तीन गुणों' (विवेक, साहस, तृष्णा) के आधार पर समाज को तीन वर्गों (शासक/दार्शनिक, सैनिक, और उत्पादक) में बाँटा था, जो प्राकृतिक असमानता का परिचायक है।
व्याख्या: प्लेटो ने अपनी पुस्तक 'The Republic' में 'आत्मा के तीन गुणों' (विवेक, साहस, तृष्णा) के आधार पर समाज को तीन वर्गों (शासक/दार्शनिक, सैनिक, और उत्पादक) में बाँटा था, जो प्राकृतिक असमानता का परिचायक है।
29. कथन और कारण:
कथन (A): फ्रांसीसी क्रांतिकारी न तो पागल थे और न ही मूर्ख जो उन्होंने 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुता' का नारा दिया। (आशीर्वादम का कथन)
कारण (R): फ्रांसीसी समाज सामंती और पादरी वर्गों के अत्यधिक 'विशेषाधिकारों' और शोषण से त्रस्त था। आम जनता (Third Estate) ने इसी 'कृत्रिम असमानता' को मिटाने के लिए यह तार्किक नारा दिया था।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): फ्रांसीसी समाज सामंती और पादरी वर्गों के अत्यधिक 'विशेषाधिकारों' और शोषण से त्रस्त था। आम जनता (Third Estate) ने इसी 'कृत्रिम असमानता' को मिटाने के लिए यह तार्किक नारा दिया था।
सही उत्तर: A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: आशीर्वादम ने रूढ़िवादी विचारकों (जैसे बर्क, जो फ्रांसीसी क्रांति को पागलपन कहते थे) को जवाब देते हुए यह स्पष्ट किया था कि फ्रांसीसी क्रांति का नारा बिल्कुल तार्किक था, जो सदियों की असमानता और शोषण का परिणाम था।
व्याख्या: आशीर्वादम ने रूढ़िवादी विचारकों (जैसे बर्क, जो फ्रांसीसी क्रांति को पागलपन कहते थे) को जवाब देते हुए यह स्पष्ट किया था कि फ्रांसीसी क्रांति का नारा बिल्कुल तार्किक था, जो सदियों की असमानता और शोषण का परिणाम था।
30. "हम इस तथ्य को स्वतः सिद्ध स्वीकार करते हैं कि सभी मनुष्य समान हैं" (We hold these truths to be self-evident, that all men are created equal).
यह ऐतिहासिक वाक्य किस घोषणा पत्र (Declaration) से लिया गया है?
सही उत्तर: C) अमेरिकी स्वतंत्रता का घोषणा पत्र 1776 (American Declaration of Independence)
व्याख्या: थॉमस जेफरसन द्वारा लिखित 1776 के अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा पत्र की यह सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है, जिसने आधुनिक दुनिया में "समानता" (Equality) को जन्मजात अधिकार (Natural Right) के रूप में स्थापित किया।
व्याख्या: थॉमस जेफरसन द्वारा लिखित 1776 के अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा पत्र की यह सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है, जिसने आधुनिक दुनिया में "समानता" (Equality) को जन्मजात अधिकार (Natural Right) के रूप में स्थापित किया।
31. 'सामाजिक समानता' (Social Equality) से क्या तात्पर्य है, जिसे 20वीं सदी में बहुत महत्व दिया गया?
सही उत्तर: B) समाज में जाति, धर्म, रंग, लिंग... के आधार पर भेदभाव का निषेध होना।
व्याख्या: सामाजिक समानता यह सुनिश्चित करती है कि समाज में किसी को भी 'नीचा' न समझा जाए। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 (Equality before law) और अनुच्छेद 17 (No discrimination) सामाजिक समानता के बेहतरीन उदाहरण हैं।
व्याख्या: सामाजिक समानता यह सुनिश्चित करती है कि समाज में किसी को भी 'नीचा' न समझा जाए। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 (Equality before law) और अनुच्छेद 17 (No discrimination) सामाजिक समानता के बेहतरीन उदाहरण हैं।
32. निम्नलिखित में से किन विचारकों का युग्म (Pair) स्वतंत्रता और समानता को "एक-दूसरे का विरोधी (Opposed / Incompatible)" मानता है?
सही उत्तर: C) लार्ड एक्टन और डी. टॉकविल (Lord Acton & De Tocqueville)
व्याख्या: 18वीं-19वीं सदी के ये विचारक (जिनमें हेयक और आइज़िया बर्लिन भी शामिल हैं) मानते हैं कि 'समानता' लाने के लिए राज्य को लोगों की 'स्वतंत्रता' पर बलपूर्वक नियंत्रण (हस्तक्षेप) करना पड़ेगा, जो स्वतंत्रता को नष्ट कर देगा।
व्याख्या: 18वीं-19वीं सदी के ये विचारक (जिनमें हेयक और आइज़िया बर्लिन भी शामिल हैं) मानते हैं कि 'समानता' लाने के लिए राज्य को लोगों की 'स्वतंत्रता' पर बलपूर्वक नियंत्रण (हस्तक्षेप) करना पड़ेगा, जो स्वतंत्रता को नष्ट कर देगा।
33. "आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक भ्रम (Illusion) है।" यह विचार किस विद्वान का है?
सही उत्तर: C) सी. ई. एम. जोड (C.E.M. Joad)
व्याख्या: सी. ई. एम. जोड (और इसी तर्ज पर जी. डी. एच. कोल) ने यह सिद्ध किया कि जो व्यक्ति भूखा है, वह अपने 'वोट' (राजनीतिक आज़ादी) का सही इस्तेमाल नहीं कर सकता, पूँजीपति उसे आसानी से खरीद लेंगे। अतः आर्थिक समानता पहले जरूरी है।
व्याख्या: सी. ई. एम. जोड (और इसी तर्ज पर जी. डी. एच. कोल) ने यह सिद्ध किया कि जो व्यक्ति भूखा है, वह अपने 'वोट' (राजनीतिक आज़ादी) का सही इस्तेमाल नहीं कर सकता, पूँजीपति उसे आसानी से खरीद लेंगे। अतः आर्थिक समानता पहले जरूरी है।
34. 'विशिष्ट वर्गीय सिद्धान्त' (Elite Theory) के समर्थक, जैसे मोस्का (Mosca) और पैरेटो (Pareto), समानता की अवधारणा (Concept of Equality) को क्यों नकारते हैं?
सही उत्तर: B) क्योंकि उनका मानना है कि शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से...
व्याख्या: एलीट थ्योरी (विशिष्ट वर्ग सिद्धांत) लोकतांत्रिक समानता को एक 'कल्पना' मानता है। उनके अनुसार समाज हमेशा दो वर्गों (शासन करने वाले योग्य अल्पसंख्यक और शासित होने वाले बहुसंख्यक) में बँटा रहता है, अतः पूर्ण समानता असंभव है।
व्याख्या: एलीट थ्योरी (विशिष्ट वर्ग सिद्धांत) लोकतांत्रिक समानता को एक 'कल्पना' मानता है। उनके अनुसार समाज हमेशा दो वर्गों (शासन करने वाले योग्य अल्पसंख्यक और शासित होने वाले बहुसंख्यक) में बँटा रहता है, अतः पूर्ण समानता असंभव है।
35. बहु-कथन प्रश्न: सकारात्मक समानता (Positive Equality) की प्राप्ति के लिए कौन-से कदम उचित (Justifiable) माने जाते हैं?
1. समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों को विशेष संरक्षण (Special Protection) देना।
2. महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए विशेष प्रावधान (Special Provisions) करना।
3. योग्यता और क्षमता के आधार पर उचित वर्गीकरण (Reasonable Classification) करके अलग-अलग व्यवहार करना।
4. धर्म और जाति के आधार पर राज्य द्वारा किसी एक वर्ग को जन्मजात विशेषाधिकार (Hereditary Privilege) देना।
सही कूट चुनें:
2. महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए विशेष प्रावधान (Special Provisions) करना।
3. योग्यता और क्षमता के आधार पर उचित वर्गीकरण (Reasonable Classification) करके अलग-अलग व्यवहार करना।
4. धर्म और जाति के आधार पर राज्य द्वारा किसी एक वर्ग को जन्मजात विशेषाधिकार (Hereditary Privilege) देना।
सही उत्तर: B) 1, 2 और 3 (1, 2 and 3)
व्याख्या: कथन 4 गलत है। सकारात्मक समानता कमजोरों को ऊपर उठाने (जैसे- आरक्षण) का समर्थन करती है (कथन 1, 2, 3), लेकिन यह किसी को 'जन्म या धर्म' के आधार पर स्थायी विशेषाधिकार (V.I.P. status) देने का सख्त विरोध करती है।
व्याख्या: कथन 4 गलत है। सकारात्मक समानता कमजोरों को ऊपर उठाने (जैसे- आरक्षण) का समर्थन करती है (कथन 1, 2, 3), लेकिन यह किसी को 'जन्म या धर्म' के आधार पर स्थायी विशेषाधिकार (V.I.P. status) देने का सख्त विरोध करती है।
36. एच. जे. लास्की ने समानता की जो तीन प्रमुख शर्तें (Three conditions of equality) बताई हैं, उनमें दूसरा स्थान (Second condition) किसका है?
सही उत्तर: B) सभी के लिए समान अवसरों की उपलब्धि (Availability of equal opportunities)
व्याख्या: लास्की की शर्तें क्रमानुसार इस प्रकार हैं: 1. विशेषाधिकारों का अंत, 2. सबको विकास के समान अवसर, 3. (इन सबसे पहले) सभी की न्यूनतम प्राथमिक आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान) की पूर्ति।
व्याख्या: लास्की की शर्तें क्रमानुसार इस प्रकार हैं: 1. विशेषाधिकारों का अंत, 2. सबको विकास के समान अवसर, 3. (इन सबसे पहले) सभी की न्यूनतम प्राथमिक आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान) की पूर्ति।
37. कथन (A) और कारण (R):
कथन (A): 19वीं सदी का व्यक्तिवाद (Individualism) या नकारात्मक उदारवाद समाज में समानता स्थापित करने में पूर्णतः विफल रहा。
कारण (R): इसने राज्य को केवल एक 'पुलिसमैन' (सुरक्षाकर्मी) तक सीमित कर दिया और समाज को खुली आर्थिक प्रतिस्पर्धा (Open Competition) के लिए छोड़ दिया, जिससे अमीर-गरीब की खाई और गहरी हो गई।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): इसने राज्य को केवल एक 'पुलिसमैन' (सुरक्षाकर्मी) तक सीमित कर दिया और समाज को खुली आर्थिक प्रतिस्पर्धा (Open Competition) के लिए छोड़ दिया, जिससे अमीर-गरीब की खाई और गहरी हो गई।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: 19वीं सदी में 'अहस्तक्षेप' (Laissez-Faire) की नीति के कारण पूँजीपतियों ने मजदूरों का खूब शोषण किया। चूँकि राज्य कमजोरों की मदद नहीं कर सकता था, अतः आर्थिक विषमता चरम पर पहुँच गई।
व्याख्या: 19वीं सदी में 'अहस्तक्षेप' (Laissez-Faire) की नीति के कारण पूँजीपतियों ने मजदूरों का खूब शोषण किया। चूँकि राज्य कमजोरों की मदद नहीं कर सकता था, अतः आर्थिक विषमता चरम पर पहुँच गई।
38. 'समानता' (Equality) की अवधारणा के उदय में किस ऐतिहासिक काल ने यह नारा दिया कि "मानव ही सभी वस्तुओं का मापदण्ड है" (Man is the measure of all things)?
सही उत्तर: C) पुनर्जागरण आन्दोलन / ज्ञानोदय (Renaissance / Enlightenment)
व्याख्या: 15वीं-16वीं सदी के पुनर्जागरण काल (Humanism) ने ईश्वर या धर्म के बजाय 'मनुष्य' (Human) को केंद्र में रखा। इसी से यह चेतना जगी कि सभी मनुष्य जन्म से समान हैं और उनके बीच कोई प्राकृतिक विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए।
व्याख्या: 15वीं-16वीं सदी के पुनर्जागरण काल (Humanism) ने ईश्वर या धर्म के बजाय 'मनुष्य' (Human) को केंद्र में रखा। इसी से यह चेतना जगी कि सभी मनुष्य जन्म से समान हैं और उनके बीच कोई प्राकृतिक विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए।
39. "समानता की उत्पत्ति व्यक्तित्व के विकास के साथ-साथ हुई है जो प्रत्येक मनुष्य में समान है किन्तु इसका विकास अलग-अलग ढंग से हुआ है।" यह कथन बार्कर (Barker) का है।
इस कथन में 'किन्तु इसका विकास अलग-अलग ढंग से हुआ है' से क्या आशय है?
सही उत्तर: B) कि जन्म से सभी समान हैं, लेकिन समाज में प्राप्त 'अवसरों...'
व्याख्या: बार्कर का तर्क यह था कि मानव होने के नाते सभी में विकास की समान सम्भावना (बीज) होती है, लेकिन चूँकि किसी को अच्छी शिक्षा व माहौल (अमीर) मिलता है और किसी को नहीं (गरीब), इसलिए वे असमान हो जाते हैं। अतः राज्य को 'समान अवसर' देने चाहिए।
व्याख्या: बार्कर का तर्क यह था कि मानव होने के नाते सभी में विकास की समान सम्भावना (बीज) होती है, लेकिन चूँकि किसी को अच्छी शिक्षा व माहौल (अमीर) मिलता है और किसी को नहीं (गरीब), इसलिए वे असमान हो जाते हैं। अतः राज्य को 'समान अवसर' देने चाहिए।
40. 'नकारात्मक समानता' (Negative Equality) का एक प्रमुख स्वरूप 'कानूनी समानता' (Legal Equality) है। इसका व्यावहारिक अर्थ क्या है?
सही उत्तर: B) 'कानून के समक्ष समानता' और 'कानून का समान संरक्षण'...
व्याख्या: नकारात्मक समानता 'विधि के शासन' (Rule of Law - A.V. Dicey) पर बल देती है, जिसका मतलब है कि देश का कानून राजा से लेकर रंक तक सब पर एक समान लागू होगा; किसी को कोई V.I.P. छूट नहीं मिलेगी।
व्याख्या: नकारात्मक समानता 'विधि के शासन' (Rule of Law - A.V. Dicey) पर बल देती है, जिसका मतलब है कि देश का कानून राजा से लेकर रंक तक सब पर एक समान लागू होगा; किसी को कोई V.I.P. छूट नहीं मिलेगी।
41. मार्क्सवाद (Marxism) के अनुसार 'आर्थिक समानता' (Economic Equality) की पूर्ण और सच्ची प्राप्ति किस अवस्था में होगी?
सही उत्तर: C) एक वर्गविहीन और राज्यविहीन 'साम्यवादी समाज' में।
व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि जब तक समाज में निजी संपत्ति और राज्य (जो शोषण का यंत्र है) मौजूद हैं, तब तक सच्ची समानता नहीं आ सकती। जब क्रांति के बाद उत्पादन के साधनों पर पूरे समाज का नियंत्रण होगा (साम्यवाद), तभी पूर्ण आर्थिक समानता आएगी।
व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि जब तक समाज में निजी संपत्ति और राज्य (जो शोषण का यंत्र है) मौजूद हैं, तब तक सच्ची समानता नहीं आ सकती। जब क्रांति के बाद उत्पादन के साधनों पर पूरे समाज का नियंत्रण होगा (साम्यवाद), तभी पूर्ण आर्थिक समानता आएगी।
42. कथन और कारण:
कथन (A): 20वीं शताब्दी के विचारकों ने स्वतंत्रता (Liberty) और समानता (Equality) को एक-दूसरे का विरोधी मानने वाले सिद्धान्त को पूर्णतः खारिज (Reject) कर दिया。
कारण (R): लास्की और टानी जैसे विचारकों ने यह अनुभव किया कि 'समानता के अभाव में स्वतंत्रता' केवल मुट्ठीभर अमीरों का विशेषाधिकार बनकर रह जाती है, जिससे बहुसंख्यक गरीब वर्ग का शोषण होता है।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): लास्की और टानी जैसे विचारकों ने यह अनुभव किया कि 'समानता के अभाव में स्वतंत्रता' केवल मुट्ठीभर अमीरों का विशेषाधिकार बनकर रह जाती है, जिससे बहुसंख्यक गरीब वर्ग का शोषण होता है।
सही उत्तर: A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: 20वीं सदी के सकारात्मक दृष्टिकोण का यही आधार था। उन्होंने लार्ड एक्टन (जो मानते थे कि समानता से स्वतंत्रता नष्ट होती है) को गलत साबित किया और कहा कि 'समान अवसर' (समानता) दिए बिना कोई भी कमजोर व्यक्ति 'स्वतंत्र' महसूस नहीं कर सकता।
व्याख्या: 20वीं सदी के सकारात्मक दृष्टिकोण का यही आधार था। उन्होंने लार्ड एक्टन (जो मानते थे कि समानता से स्वतंत्रता नष्ट होती है) को गलत साबित किया और कहा कि 'समान अवसर' (समानता) दिए बिना कोई भी कमजोर व्यक्ति 'स्वतंत्र' महसूस नहीं कर सकता।
43. "दुनिया में सभी पतित हैं, अमीर कभी झुके नहीं और गरीब कभी उठे नहीं।" समाज में व्याप्त कठोर आर्थिक असमानता पर प्रहार करने वाला यह कथन किसका है?
सही उत्तर: C) विनोबा भावे (Vinoba Bhave)
व्याख्या: 'भूदान आन्दोलन' के जनक आचार्य विनोबा भावे ने समाज की इस घोर आर्थिक असमानता और वर्गों के बीच अहंकार (अमीर) व बेबसी (गरीब) की स्थिति को दर्शाते हुए यह मार्मिक कथन कहा था।
व्याख्या: 'भूदान आन्दोलन' के जनक आचार्य विनोबा भावे ने समाज की इस घोर आर्थिक असमानता और वर्गों के बीच अहंकार (अमीर) व बेबसी (गरीब) की स्थिति को दर्शाते हुए यह मार्मिक कथन कहा था।
44. सूची-I (विचारक) को सूची-II (समानता और स्वतंत्रता पर उनका विचार/दृष्टिकोण) से सुमेलित करें:
a. लार्ड एक्टन (Lord Acton)
1. राजनीतिक समानता का संबंध उदारवाद से है।
b. आर. एच. टानी (R.H. Tawney)
2. दोनों एक दूसरे के घोर विरोधी (Opposed) हैं।
c. जॉन लॉक (John Locke)
3. आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक भ्रम है।
d. सी. ई. एम. जोड (C.E.M. Joad)
4. समानता की एक बड़ी मात्रा स्वतंत्रता के लिए आवश्यक (Complementary) है।
सही उत्तर: C) a-2, b-4, c-1, d-3
व्याख्या: लार्ड एक्टन = दोनों विरोधी हैं। टानी = दोनों पूरक (आवश्यक) हैं। जॉन लॉक = उदारवाद (राजनीतिक समानता)। सी.ई.एम. जोड = आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक आज़ादी भ्रम है।
व्याख्या: लार्ड एक्टन = दोनों विरोधी हैं। टानी = दोनों पूरक (आवश्यक) हैं। जॉन लॉक = उदारवाद (राजनीतिक समानता)। सी.ई.एम. जोड = आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक आज़ादी भ्रम है।
45. 'सकारात्मक समानता' (Positive Equality) में "न्यूनतम आवश्यकता की सर्वप्रथम पूर्ति" (Fulfillment of basic minimum needs) से क्या अभिप्राय है?
सही उत्तर: B) समाज के प्रत्येक व्यक्ति को रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ...
व्याख्या: लास्की का मानना था कि "जब तक किसी के पास रोटी नहीं है, तब तक दूसरे को केक खाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।" समाज की पहली जिम्मेदारी हर नागरिक की न्यूनतम मानवीय जरूरतों को पूरा करना है।
व्याख्या: लास्की का मानना था कि "जब तक किसी के पास रोटी नहीं है, तब तक दूसरे को केक खाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।" समाज की पहली जिम्मेदारी हर नागरिक की न्यूनतम मानवीय जरूरतों को पूरा करना है।
46. 1789 की फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) के विषय में कौन-सा कथन पूर्णतः सत्य है?
सही उत्तर: B) इस क्रांति का मुख्य नारा "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" था...
व्याख्या: 1789 की फ्रांस की क्रांति (रूसो के विचारों से प्रेरित) ने सदियों से चले आ रहे पादरी (Clergy) और कुलीन (Nobility) वर्गों के जन्मजात विशेषाधिकारों को उखाड़ फेंका और मानव की समानता का उद्घोष किया। (नोट: 1688 की इंग्लैंड की क्रांति को रक्तहीन/गौरवपूर्ण क्रांति कहा जाता है)।
व्याख्या: 1789 की फ्रांस की क्रांति (रूसो के विचारों से प्रेरित) ने सदियों से चले आ रहे पादरी (Clergy) और कुलीन (Nobility) वर्गों के जन्मजात विशेषाधिकारों को उखाड़ फेंका और मानव की समानता का उद्घोष किया। (नोट: 1688 की इंग्लैंड की क्रांति को रक्तहीन/गौरवपूर्ण क्रांति कहा जाता है)।
47. बहु-कथन प्रश्न: समानता और स्वतंत्रता के बीच 'विरोधी दृष्टिकोण' (Opposing View) के संबंध में सही कथनों का चयन करें:
1. यह दृष्टिकोण 16वीं से 19वीं शताब्दी तक मुख्य रूप से प्रचलित रहा。
2. इसके समर्थकों (लार्ड एक्टन, डी. टॉकविल) का मानना है कि 'समानता' स्थापित करने के लिए राज्य को 'बल प्रयोग' (Coercion) करना पड़ेगा, जिससे स्वतंत्रता छिन जाएगी。
3. यह दृष्टिकोण मानता है कि प्रकृति ने ही मनुष्य को असमान बनाया है, अतः 'पूर्ण समानता' एक अप्राकृतिक कल्पना है。
4. यह दृष्टिकोण लोक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) का प्रबल समर्थन करता है।
सही कूट:
2. इसके समर्थकों (लार्ड एक्टन, डी. टॉकविल) का मानना है कि 'समानता' स्थापित करने के लिए राज्य को 'बल प्रयोग' (Coercion) करना पड़ेगा, जिससे स्वतंत्रता छिन जाएगी。
3. यह दृष्टिकोण मानता है कि प्रकृति ने ही मनुष्य को असमान बनाया है, अतः 'पूर्ण समानता' एक अप्राकृतिक कल्पना है。
4. यह दृष्टिकोण लोक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) का प्रबल समर्थन करता है।
सही उत्तर: C) 1, 2 और 3 (1, 2 and 3)
व्याख्या: कथन 4 गलत है। 'विरोधी दृष्टिकोण' वाले विचारक (व्यक्तिवादी/नव-उदारवादी) 'लोक कल्याणकारी राज्य' का कड़ा विरोध करते हैं क्योंकि उनके अनुसार ऐसा राज्य गरीबों की मदद के लिए अमीरों पर टैक्स लगाता है, जो उनकी 'संपत्ति की स्वतंत्रता' का हनन है।
व्याख्या: कथन 4 गलत है। 'विरोधी दृष्टिकोण' वाले विचारक (व्यक्तिवादी/नव-उदारवादी) 'लोक कल्याणकारी राज्य' का कड़ा विरोध करते हैं क्योंकि उनके अनुसार ऐसा राज्य गरीबों की मदद के लिए अमीरों पर टैक्स लगाता है, जो उनकी 'संपत्ति की स्वतंत्रता' का हनन है।
48. "मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा हुए हैं तथा अपने अधिकारों के विषय में भी स्वतंत्र और समान हैं।"
(Men are born and remain free and equal in rights).
यह पंक्ति इतिहास के किस प्रसिद्ध ऐतिहासिक दस्तावेज़ (Historical Document) की है?
सही उत्तर: B) फ्रांसीसी क्रांति का मानव एवं नागरिक अधिकारों का घोषणा पत्र - 1789
व्याख्या: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के दौरान नेशनल असेंबली द्वारा अपनाए गए घोषणापत्र के अनुच्छेद 1 की यह पहली और सबसे प्रभावशाली लाइन है, जिसने पूरे यूरोप में समानता की लहर ला दी थी।
व्याख्या: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के दौरान नेशनल असेंबली द्वारा अपनाए गए घोषणापत्र के अनुच्छेद 1 की यह पहली और सबसे प्रभावशाली लाइन है, जिसने पूरे यूरोप में समानता की लहर ला दी थी।
49. कथन और कारण:
कथन (A): भारतीय संविधान में 'सकारात्मक समानता' (Positive Equality) को अपनाया गया है, जिसके तहत समाज के कमजोर वर्गों (जैसे SC/ST/OBC और महिलाओं) के लिए आरक्षण (Reservation) का प्रावधान है。
कारण (R): सकारात्मक समानता "समानों में समानता" (Equality among equals) के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को समान स्तर (Level playing field) पर लाने के लिए राज्य द्वारा 'विशेष सुविधा' देना समानता के खिलाफ नहीं, बल्कि वास्तविक समानता स्थापित करने का तरीका है।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): सकारात्मक समानता "समानों में समानता" (Equality among equals) के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को समान स्तर (Level playing field) पर लाने के लिए राज्य द्वारा 'विशेष सुविधा' देना समानता के खिलाफ नहीं, बल्कि वास्तविक समानता स्थापित करने का तरीका है।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: भारत का संविधान (अनुच्छेद 14-18) सिर्फ नकारात्मक समानता (छुआछूत का अंत) ही नहीं देता, बल्कि सकारात्मक समानता (अनुच्छेद 15(4), 16(4) में आरक्षण) भी देता है। इसे राजनीति विज्ञान में "सकारात्मक भेदभाव" (Positive Discrimination / Affirmative Action) कहा जाता है।
व्याख्या: भारत का संविधान (अनुच्छेद 14-18) सिर्फ नकारात्मक समानता (छुआछूत का अंत) ही नहीं देता, बल्कि सकारात्मक समानता (अनुच्छेद 15(4), 16(4) में आरक्षण) भी देता है। इसे राजनीति विज्ञान में "सकारात्मक भेदभाव" (Positive Discrimination / Affirmative Action) कहा जाता है।
50. निष्कर्ष (Conclusion): 20वीं शताब्दी के आधुनिक राजनीति विज्ञान (Modern Political Science) में 'स्वतंत्रता' और 'समानता' के संबंधों को लेकर सर्वमान्य (Universally accepted) निष्कर्ष क्या है?
सही उत्तर: C) दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और एक-दूसरे के पूरक (Complementary) हैं...
व्याख्या: लास्की, रूसो और टानी जैसे विचारकों के तर्कों के बाद आधुनिक दुनिया (लोकतांत्रिक देशों) ने यह स्वीकार कर लिया है कि "Political liberty without economic equality is a myth" (आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक आज़ादी एक भ्रम है)। अतः दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
व्याख्या: लास्की, रूसो और टानी जैसे विचारकों के तर्कों के बाद आधुनिक दुनिया (लोकतांत्रिक देशों) ने यह स्वीकार कर लिया है कि "Political liberty without economic equality is a myth" (आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक आज़ादी एक भ्रम है)। अतः दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
📊 Performance Report
कुल प्रश्न (Total):50
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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. समानता की मांग सबसे पहले किसके विरुद्ध उठी थी?
उत्तर: समानता की मांग प्राचीन एवं मध्यकाल में प्रचलित विशेषाधिकारों (Special Privileges) के विरुद्ध एक प्रतिक्रिया के रूप में उठी थी (जैसे- दासों और सामंतों के युग में)।
Q2. 'नकारात्मक समानता' (Negative Equality) का क्या अर्थ है?
उत्तर: नकारात्मक समानता का अर्थ है— सभी प्रकार के विशेषाधिकारों का अंत और 'सबकी समान समानता' (Formal Equality)। यह 16वीं से 19वीं सदी तक प्रचलित रही और यह राज्य के अहस्तक्षेप की बात करती है।
Q3. 'सकारात्मक समानता' (Positive Equality) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 20वीं सदी की सकारात्मक समानता का अर्थ 'समानों में समानता' (Equality among equals) है। इसमें समाज के वंचित वर्गों (गरीब, विकलांग) को ऊपर उठाने के लिए राज्य द्वारा विशेष सुविधाएं (आरक्षण आदि) दी जाती हैं।
Q4. एच. जे. लास्की (H.J. Laski) ने समानता के लिए कौन-सी 3 शर्तें बताई हैं?
उत्तर: लास्की ने 3 शर्तें बताई हैं: 1. विशेष सुविधाओं का अभाव (No Privileges), 2. समान अवसरों की उपलब्धि (Equal Opportunities), और 3. न्यूनतम आवश्यकताओं की सर्वप्रथम पूर्ति (Fulfillment of basic needs first)।
Q5. स्वतंत्रता और समानता को एक-दूसरे का विरोधी (Opposed) कौन मानता है?
उत्तर: स्वतंत्रता और समानता को परस्पर विरोधी मानने वाले दृष्टिकोण के प्रमुख समर्थकों में लार्ड एक्टन, डी. टॉकविल, एफ. हेयक और आइज़िया बर्लिन (व्यक्तिवादी और नव-उदारवादी विचारक) का नाम आता है।
Q6. स्वतंत्रता और समानता को एक-दूसरे का पूरक (Complementary) कौन मानता है?
उत्तर: 20वीं सदी के सकारात्मक दृष्टिकोण के विचारक इन्हें पूरक मानते हैं। उनका कहना है कि "आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक भ्रम है।" इसके प्रमुख समर्थकों में एच. जे. लास्की, रूसो, आर. एच. टानी और मैकाइवर शामिल हैं।
