जे. एस. मिल (J. S. Mill): राजनीतिक विचार, स्वतंत्रता और 50 Premium MCQs Test
| जे. एस. मिल (J. S. Mill): 50 Premium MCQs Test |
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| Mock Test Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत यह प्रीमियम मॉक टेस्ट जे. एस. मिल के जीवन, उपयोगितावाद में संशोधन, स्वतंत्रता पर विचार (On Liberty), सकारात्मक उदारवाद और प्रतिनिधि लोकतंत्र पर आधारित है। इसमें UPSC, PCS, RO/ARO, TGT, PGT और NET/JRF स्तर के कथन-कारण, कूट मिलान और 5-विकल्पों (A, B, C, D, E) वाले 50 अति महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं। |
1. पाश्चात्य राजनीतिक चिन्तन में किस विचारक को 'अंतिम उपयोगितावादी' (Last Utilitarian) और 'प्रथम व्यक्तिवादी' (First Individualist) के नाम से जाना जाता है?
सही उत्तर: C) जे. एस. मिल (J. S. Mill)
व्याख्या: जे. एस. मिल ने बेंथम के उपयोगितावाद में नैतिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का इस प्रकार समावेश किया कि उपयोगितावाद का मूल स्वरूप ही बदल गया, इसीलिए उन्हें अंतिम उपयोगितावादी और प्रथम व्यक्तिवादी कहा जाता है।
व्याख्या: जे. एस. मिल ने बेंथम के उपयोगितावाद में नैतिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का इस प्रकार समावेश किया कि उपयोगितावाद का मूल स्वरूप ही बदल गया, इसीलिए उन्हें अंतिम उपयोगितावादी और प्रथम व्यक्तिवादी कहा जाता है।
2. जे. एस. मिल का जन्म 21 मई 1806 को लंदन में किसके घर हुआ था, जो स्वयं बेंथम के परम अनुयायी थे?
सही उत्तर: B) जेम्स मिल (James Mill)
व्याख्या: जे. एस. मिल का जन्म लंदन में जेम्स मिल के घर हुआ था। उनके पिता बेंथम के शिष्य थे, अतः मिल भी अपने पिता के मार्ग का अनुसरण करते हुए प्रारंभ में बेंथम के शिष्य बने।
व्याख्या: जे. एस. मिल का जन्म लंदन में जेम्स मिल के घर हुआ था। उनके पिता बेंथम के शिष्य थे, अतः मिल भी अपने पिता के मार्ग का अनुसरण करते हुए प्रारंभ में बेंथम के शिष्य बने।
3. बचपन से ही अत्यंत मेधावी रहे जे. एस. मिल ने मात्र 8 वर्ष की अवस्था में किन प्राचीन यूनानी विद्वानों की पुस्तकों का अध्ययन कर लिया था?
सही उत्तर: A) प्लेटो और हेरोडोटस
व्याख्या: मात्र 8 वर्ष की आयु में ही मिल ने प्लेटो के संवादों और हेरोडोटस के इतिहास का मूल ग्रीक भाषा में अध्ययन कर लिया था, जिससे उनमें बचपन से ही नैतिकता का पर्याप्त विकास हो गया।
व्याख्या: मात्र 8 वर्ष की आयु में ही मिल ने प्लेटो के संवादों और हेरोडोटस के इतिहास का मूल ग्रीक भाषा में अध्ययन कर लिया था, जिससे उनमें बचपन से ही नैतिकता का पर्याप्त विकास हो गया।
4. जे. एस. मिल ने 25 वर्ष की अवस्था में किस संस्था में एक क्लर्क (Clerk) के रूप में नौकरी प्रारम्भ की और अपनी प्रतिभा के बल पर 'सचिव' (Secretary) के पद तक पहुँचे?
सही उत्तर: C) ईस्ट इण्डिया कम्पनी में
व्याख्या: मिल ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी में क्लर्क से शुरुआत कर सचिव पद तक कार्य किया और 1858 में कम्पनी के समाप्त होने तक इससे जुड़े रहे।
व्याख्या: मिल ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी में क्लर्क से शुरुआत कर सचिव पद तक कार्य किया और 1858 में कम्पनी के समाप्त होने तक इससे जुड़े रहे।
5. ईस्ट इण्डिया कम्पनी में नौकरी के दौरान मिल की मुलाकात किस प्रतिभाशाली महिला से हुई, जिनसे 20 वर्षों की मित्रता के बाद उन्होंने विवाह किया और अपनी पुस्तक 'On Liberty' उन्हें समर्पित की?
सही उत्तर: B) श्रीमती हैरियट टेलर
व्याख्या: हैरियट टेलर के प्रथम पति जॉन टेलर की मृत्यु के बाद मिल ने उनसे विवाह किया। 3 नवंबर 1858 को हैरियट की मृत्यु हो गई। मिल के नारीवादी और उदारवादी विचारों पर उनका गहरा प्रभाव था।
व्याख्या: हैरियट टेलर के प्रथम पति जॉन टेलर की मृत्यु के बाद मिल ने उनसे विवाह किया। 3 नवंबर 1858 को हैरियट की मृत्यु हो गई। मिल के नारीवादी और उदारवादी विचारों पर उनका गहरा प्रभाव था।
6. "मेरे लेखों में जो सर्वोत्तम है, वह उसकी प्रेरक और आंशिक रूप से लेखिका भी है। उसकी सद्-असद् की उत्कृष्ट भावना ही मेरी सफल प्रेरणा रही, अतः उसकी प्रशंसा ही मेरा पुरस्कार है।" मिल ने ये भावपूर्ण शब्द किसके लिए और किस पुस्तक में लिखे हैं?
सही उत्तर: A) अपनी पत्नी हैरियट टेलर के लिए - 'On Liberty' में
व्याख्या: मिल ने अपनी अमर कृति 'ऑन लिबर्टी' अपनी दिवंगत पत्नी श्रीमती हैरियट टेलर को समर्पित करते हुए प्रस्तावना में ये शब्द लिखे थे।
व्याख्या: मिल ने अपनी अमर कृति 'ऑन लिबर्टी' अपनी दिवंगत पत्नी श्रीमती हैरियट टेलर को समर्पित करते हुए प्रस्तावना में ये शब्द लिखे थे।
7. 1857 की क्रांति के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी को समाप्त करने का विधेयक लाने वाले किस ब्रिटिश प्रधानमंत्री से क्रुद्ध होकर मिल ने कहा था— "मैं उसे फाँसी पर चढ़ता देखकर 20 मील पैदल चलना स्वीकार करूँगा"?
सही उत्तर: C) लॉर्ड पामर्स्टन (Lord Palmerston)
व्याख्या: जब प्रधानमंत्री लॉर्ड पामर्स्टन ने कम्पनी को कारण बताओ नोटिस दिया और उसे समाप्त करने का विधेयक पेश किया, तो कम्पनी के सचिव रहे मिल ने अत्यंत दुखी होकर यह कथन कहा था।
व्याख्या: जब प्रधानमंत्री लॉर्ड पामर्स्टन ने कम्पनी को कारण बताओ नोटिस दिया और उसे समाप्त करने का विधेयक पेश किया, तो कम्पनी के सचिव रहे मिल ने अत्यंत दुखी होकर यह कथन कहा था।
8. सन् 1865 में जे. एस. मिल किस पार्टी की तरफ से ब्रिटिश संसद के सदस्य (MP) चुने गए थे?
सही उत्तर: C) उदार दल (Liberal Party)
व्याख्या: ईस्ट इण्डिया कम्पनी की समाप्ति के बाद 1865 में मिल उदार दल (Liberal Party) से सांसद बने। वे सांसदों की स्वतंत्र विवेकशीलता के प्रबल पक्षधर थे।
व्याख्या: ईस्ट इण्डिया कम्पनी की समाप्ति के बाद 1865 में मिल उदार दल (Liberal Party) से सांसद बने। वे सांसदों की स्वतंत्र विवेकशीलता के प्रबल पक्षधर थे।
9. "जब पार्लियामेन्ट में मिल का भाषण होता है, तो मुझे लगता है कि किसी संत का प्रवचन हो रहा है।" जे. एस. मिल के नैतिक और विद्वत्तापूर्ण भाषणों पर यह टिप्पणी किस ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने की थी?
सही उत्तर: B) लॉर्ड ग्लैडस्टोन (Lord Gladstone)
व्याख्या: मिल संसद में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नैतिक सिद्धांतों पर लंबा बोलते थे, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन ने उन्हें 'संत के प्रवचन' की संज्ञा दी थी।
व्याख्या: मिल संसद में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नैतिक सिद्धांतों पर लंबा बोलते थे, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन ने उन्हें 'संत के प्रवचन' की संज्ञा दी थी।
10. जे. एस. मिल की मृत्यु 8 मई 1873 को कहाँ हुई थी?
सही उत्तर: C) अविगनान (Avignon, फ्रांस) में
व्याख्या: मिल की पत्नी हैरियट टेलर की मृत्यु फ्रांस के अविगनान में हुई थी, और मिल ने भी अपने अंतिम दिन वहीं बिताए तथा 8 मई 1873 को वहीं उनकी मृत्यु हुई।
व्याख्या: मिल की पत्नी हैरियट टेलर की मृत्यु फ्रांस के अविगनान में हुई थी, और मिल ने भी अपने अंतिम दिन वहीं बिताए तथा 8 मई 1873 को वहीं उनकी मृत्यु हुई।
11. सूची-I (जे. एस. मिल की पुस्तकें) को सूची-II (उनके मुख्य विषय) के साथ सुमेलित करें:
a. On Liberty
1. नारी अधीनता का विरोध व महिला मताधिकार
b. Principles of Political Economy
2. नकारात्मक स्वतंत्रता व व्यक्तिवाद का ग्रन्थ
c. Subjection of Women (1869)
3. भारित मतदान व आनुपातिक प्रतिनिधित्व
d. Representative Government
4. सामाजिक-आर्थिक विषमता मिटाने हेतु राज्य का हस्तक्षेप
सही उत्तर: B) a-2, b-4, c-1, d-3
व्याख्या: 'ऑन लिबर्टी' स्वतंत्रता पर, 'पॉलिटिकल इकोनॉमी' आर्थिक क्षेत्र में राज्य के सकारात्मक हस्तक्षेप पर, 'सब्जेक्शन ऑफ वीमेन' नारी अधिकारों पर और 'रिप्रेजेंटेटिव गवर्नमेंट' प्रतिनिधि लोकतंत्र पर केंद्रित है।
व्याख्या: 'ऑन लिबर्टी' स्वतंत्रता पर, 'पॉलिटिकल इकोनॉमी' आर्थिक क्षेत्र में राज्य के सकारात्मक हस्तक्षेप पर, 'सब्जेक्शन ऑफ वीमेन' नारी अधिकारों पर और 'रिप्रेजेंटेटिव गवर्नमेंट' प्रतिनिधि लोकतंत्र पर केंद्रित है।
12. नारी अधीनता का कड़ा विरोध करने वाली तथा महिला अधिकारों का समर्थन करने वाली मिल की प्रसिद्ध पुस्तक 'Subjection of Women' किस वर्ष प्रकाशित हुई थी?
सही उत्तर: D) 1869 ई.
व्याख्या: 'Subjection of Women' 1869 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें मिल ने महिलाओं की पराधीनता को समाप्त कर उन्हें पुरुषों के समान अधिकार व मताधिकार देने की वकालत की थी।
व्याख्या: 'Subjection of Women' 1869 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें मिल ने महिलाओं की पराधीनता को समाप्त कर उन्हें पुरुषों के समान अधिकार व मताधिकार देने की वकालत की थी।
13. कथन (Assertion) और कारण (Reason):
कथन (A): जे. एस. मिल पहले विचारक हैं जिन्होंने नकारात्मक उदारवाद को सकारात्मक उदारवाद में बदलने का उल्लेखनीय प्रयास किया, फिर भी वे सकारात्मक उदारवाद के 'जनक' नहीं बन पाए।
कारण (R): मिल ने सामाजिक-आर्थिक विषमता को मिटाने के लिए आर्थिक क्षेत्र में तो राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन किया, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में 'अहस्तक्षेप की नीति' को ही बनाये रखा।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): मिल ने सामाजिक-आर्थिक विषमता को मिटाने के लिए आर्थिक क्षेत्र में तो राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन किया, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में 'अहस्तक्षेप की नीति' को ही बनाये रखा।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: मिल ने 'Principles of Political Economy' में आर्थिक विषमता दूर करने हेतु राज्य को सकारात्मक संस्था माना, किंतु राजनीतिक/व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अहस्तक्षेप रखने के कारण वे पूर्ण सकारात्मक उदारवाद के जनक (जो टी. एच. ग्रीन माने जाते हैं) नहीं बन सके।
व्याख्या: मिल ने 'Principles of Political Economy' में आर्थिक विषमता दूर करने हेतु राज्य को सकारात्मक संस्था माना, किंतु राजनीतिक/व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अहस्तक्षेप रखने के कारण वे पूर्ण सकारात्मक उदारवाद के जनक (जो टी. एच. ग्रीन माने जाते हैं) नहीं बन सके।
14. "उपयोगितावाद पर लगाये गये आरोपों से उपयोगितावाद को बचाने के लिए उसने (मिल ने) उपयोगितावाद को ही एक तरफ फेंक दिया।" यह प्रसिद्ध टिप्पणी किस विचारक की है?
सही उत्तर: B) सी. एल. वेपर (C. L. Wayper)
व्याख्या: वेपर ने यह टिप्पणी इसलिए की क्योंकि मिल ने बेंथम के उपयोगितावाद का बचाव करते-करते उसमें नैतिकता और गुणात्मकता जोड़कर उसका मूल ढाँचा ही समाप्त कर दिया।
व्याख्या: वेपर ने यह टिप्पणी इसलिए की क्योंकि मिल ने बेंथम के उपयोगितावाद का बचाव करते-करते उसमें नैतिकता और गुणात्मकता जोड़कर उसका मूल ढाँचा ही समाप्त कर दिया।
15. बहु-कथन प्रश्न: बेंथम और जे. एस. मिल के उपयोगितावाद में अंतर के सन्दर्भ में सही कथनों का चयन करें:
1. बेंथम का उपयोगितावाद केवल राजनीतिक है, जबकि मिल ने उसमें नैतिकता का समावेश किया।
2. बेंथम का दृष्टिकोण मात्रात्मक था, जबकि मिल ने इसे गुणात्मकता पर आधारित किया।
3. बेंथम ने बाह्य/भौतिक सुखों पर बल दिया, जबकि मिल ने आंतरिक सुख को अधिक महत्वपूर्ण माना।
4. बेंथम का उपयोगितावाद स्वार्थी है, जबकि मिल ने इसे परमार्थ पर आधारित किया।
सही कूट:
2. बेंथम का दृष्टिकोण मात्रात्मक था, जबकि मिल ने इसे गुणात्मकता पर आधारित किया।
3. बेंथम ने बाह्य/भौतिक सुखों पर बल दिया, जबकि मिल ने आंतरिक सुख को अधिक महत्वपूर्ण माना।
4. बेंथम का उपयोगितावाद स्वार्थी है, जबकि मिल ने इसे परमार्थ पर आधारित किया।
सही उत्तर: E) 1, 2, 3 और 4 सभी सत्य हैं
व्याख्या: उपर्युक्त चारों बिंदु बेंथम के मूल उपयोगितावाद में जे. एस. मिल द्वारा किए गए प्रमुख संशोधनों को सटीक रूप से दर्शाते हैं।
व्याख्या: उपर्युक्त चारों बिंदु बेंथम के मूल उपयोगितावाद में जे. एस. मिल द्वारा किए गए प्रमुख संशोधनों को सटीक रूप से दर्शाते हैं।
16. जहाँ बेंथम ने 'सुख' (Pleasure) को जीवन का साध्य (End) और अन्य सभी वस्तुओं को साधन माना था, वहीं जे. एस. मिल ने किसे जीवन का सर्वोच्च 'साध्य' माना?
सही उत्तर: C) स्वतंत्रता (Liberty) को
व्याख्या: मिल ने 'स्वतंत्रता' को जीवन का मुख्य साध्य (End) माना और कहा कि शेष सभी वस्तुएं, यहाँ तक कि 'सुख' भी जीवन का एक साधन (Means) मात्र है।
व्याख्या: मिल ने 'स्वतंत्रता' को जीवन का मुख्य साध्य (End) माना और कहा कि शेष सभी वस्तुएं, यहाँ तक कि 'सुख' भी जीवन का एक साधन (Means) मात्र है।
17. "बेंथम का दर्शन साधुओं के समाज में साधुता को और भेड़िये के समाज में भेड़ियेपन को बढ़ावा देता है, लेकिन मेरा मानना है कि समाज कैसा भी हो उसका आधार साधुता ही होना चाहिए।" यह कथन किसका है?
सही उत्तर: B) जे. एस. मिल
व्याख्या: मिल ने बेंथम के केवल 'मात्रात्मक' (बहुमत के सुख) दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए यह कथन कहा था ताकि उपयोगितावाद में नैतिकता (साधुता) को स्थापित किया जा सके।
व्याख्या: मिल ने बेंथम के केवल 'मात्रात्मक' (बहुमत के सुख) दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए यह कथन कहा था ताकि उपयोगितावाद में नैतिकता (साधुता) को स्थापित किया जा सके।
18. विश्वप्रसिद्ध कथन: "एक असंतुष्ट सुकरात एक संतुष्ट मूर्ख से श्रेष्ठ है, एक असंतुष्ट मानव एक संतुष्ट सूकर (सूअर) से श्रेष्ठ है।" जे. एस. मिल का यह कथन क्या सिद्ध करता है?
सही उत्तर: B) कि सुखों में केवल मात्रा का ही नहीं, बल्कि 'गुण' (Quality) का भी भेद होता है।
व्याख्या: बेंथम के अनुसार यदि सुख की मात्रा समान है तो पुष्पिन का खेल और कविता बराबर हैं, किंतु मिल ने इसका खण्डन करते हुए उच्च कोटि के मानसिक और नैतिक सुख को श्रेष्ठ बताया।
व्याख्या: बेंथम के अनुसार यदि सुख की मात्रा समान है तो पुष्पिन का खेल और कविता बराबर हैं, किंतु मिल ने इसका खण्डन करते हुए उच्च कोटि के मानसिक और नैतिक सुख को श्रेष्ठ बताया।
19. किस विचारक ने जेरेमी बेंथम के भौतिकवादी और मात्रात्मक उपयोगितावाद को 'सूकर का दर्शन' (Pig Philosophy) कहकर पुकारा था, जिसे बाद में मिल ने भी प्रकारान्तर से स्वीकार किया?
सही उत्तर: A) थॉमस कार्लाइल (Thomas Carlyle)
व्याख्या: कार्लाइल ने बेंथम के सुखवाद को 'सूकर का दर्शन' (सूअरों का दर्शन) कहा था क्योंकि उसमें केवल बाह्य और शारीरिक सुखों की मात्रा पर जोर दिया गया था।
व्याख्या: कार्लाइल ने बेंथम के सुखवाद को 'सूकर का दर्शन' (सूअरों का दर्शन) कहा था क्योंकि उसमें केवल बाह्य और शारीरिक सुखों की मात्रा पर जोर दिया गया था।
20. "मैं वह पीटर (Peter) हूँ जो अपने गुरु के तर्कों को स्वीकार नहीं करता।" यह प्रसिद्ध कथन किसका है और यहाँ 'गुरु' से किसका तात्पर्य है?
सही उत्तर: B) जे. एस. मिल का कथन - गुरु जेरेमी बेंथम के लिए
व्याख्या: बेंथम के शिष्य होने के बावजूद मिल ने बेंथम के मात्रात्मक सुख और स्वतंत्रता-विरोधी तर्कों को अस्वीकार कर दिया और स्वयं को ऐसा पीटर (ईसा मसीह का शिष्य) बताया जो अपने गुरु के तर्कों को नहीं मानता।
व्याख्या: बेंथम के शिष्य होने के बावजूद मिल ने बेंथम के मात्रात्मक सुख और स्वतंत्रता-विरोधी तर्कों को अस्वीकार कर दिया और स्वयं को ऐसा पीटर (ईसा मसीह का शिष्य) बताया जो अपने गुरु के तर्कों को नहीं मानता।
21. जे. एस. मिल ने अपनी किस प्रसिद्ध पुस्तक में यह अमर कथन लिखा है कि "व्यक्ति अपने मस्तिष्क एवं शरीर पर सम्प्रभु है" (Over himself, over his own body and mind, the individual is sovereign)?
सही उत्तर: C) On Liberty
व्याख्या: 'ऑन लिबर्टी' में मिल ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रबल समर्थन करते हुए व्यक्ति को अपने मस्तिष्क (विचार) और शरीर (कार्य) का पूर्ण स्वामी घोषित किया।
व्याख्या: 'ऑन लिबर्टी' में मिल ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रबल समर्थन करते हुए व्यक्ति को अपने मस्तिष्क (विचार) और शरीर (कार्य) का पूर्ण स्वामी घोषित किया।
22. मिल के कथन "व्यक्ति अपने मस्तिष्क एवं शरीर पर सम्प्रभु है" में 'मस्तिष्क की स्वतंत्रता' से क्या अभिप्राय है?
सही उत्तर: B) विचार, भाषण एवं अभिव्यक्ति की असीमित स्वतंत्रता
व्याख्या: मस्तिष्क की स्वतंत्रता का अर्थ विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से है। इस मामले में मिल असीमित स्वतंत्रता के पक्षधर थे और पागल, मूर्ख तथा सनकियों को भी बोलने की पूरी आज़ादी देना चाहते थे।
व्याख्या: मस्तिष्क की स्वतंत्रता का अर्थ विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से है। इस मामले में मिल असीमित स्वतंत्रता के पक्षधर थे और पागल, मूर्ख तथा सनकियों को भी बोलने की पूरी आज़ादी देना चाहते थे।
23. "दस सनकियों में से नौ निरर्थक बुद्धू हो सकते हैं, लेकिन दसवाँ व्यक्ति (सनकी) समाज के लिए इतना महत्वपूर्ण हो सकता है जो सम्पूर्ण व्यक्ति मिलकर भी नहीं हो सकते।" यह कथन किस विचारक का है?
सही उत्तर: C) जे. एस. मिल
व्याख्या: मिल का मानना था कि समाज में लीक से हटकर सोचने वाले (सनकी समझे जाने वाले) लोगों की आवाज़ को कभी नहीं दबाना चाहिए, क्योंकि उन्हीं में से कोई एक समाज को नई दिशा दे सकता है।
व्याख्या: मिल का मानना था कि समाज में लीक से हटकर सोचने वाले (सनकी समझे जाने वाले) लोगों की आवाज़ को कभी नहीं दबाना चाहिए, क्योंकि उन्हीं में से कोई एक समाज को नई दिशा दे सकता है।
24. "यदि सम्पूर्ण समाज एक तरफ हो और एक अकेला व्यक्ति एक तरफ हो, तो भी समाज को यह अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह उस व्यक्ति को चुप करा दे।" मिल का यह कथन किसका समर्थन करता है?
सही उत्तर: B) अल्पमत/व्यक्ति की विचार एवं अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता का
व्याख्या: मिल के अनुसार सच्चाई का दमन समाज की सबसे बड़ी हानि है, इसलिए पूरी मानव जाति को भी किसी एक असहमत व्यक्ति का मुँह बंद करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
व्याख्या: मिल के अनुसार सच्चाई का दमन समाज की सबसे बड़ी हानि है, इसलिए पूरी मानव जाति को भी किसी एक असहमत व्यक्ति का मुँह बंद करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
25. जे. एस. मिल ने व्यक्ति के 'कार्य करने की स्वतंत्रता' (शरीर की स्वतंत्रता) को किन दो भागों में बाँटा है?
सही उत्तर: C) स्व-विषयक कार्य और पर-विषयक कार्य
व्याख्या: स्व-विषयक कार्य वे हैं जिनका प्रभाव केवल करने वाले व्यक्ति पर पड़ता है (इसमें राज्य हस्तक्षेप नहीं करेगा), और पर-विषयक कार्य वे हैं जिनका प्रभाव समाज या दूसरों पर पड़ता है (इसमें राज्य हस्तक्षेप कर सकता है)।
व्याख्या: स्व-विषयक कार्य वे हैं जिनका प्रभाव केवल करने वाले व्यक्ति पर पड़ता है (इसमें राज्य हस्तक्षेप नहीं करेगा), और पर-विषयक कार्य वे हैं जिनका प्रभाव समाज या दूसरों पर पड़ता है (इसमें राज्य हस्तक्षेप कर सकता है)।
26. मिल के अनुसार, मानव जाति या राज्य किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता (स्व-विषयक क्षेत्र) में केवल किस एकमात्र आधार पर हस्तक्षेप कर सकता है?
सही उत्तर: C) आत्मरक्षा (Self-protection) के आधार पर
व्याख्या: मिल का स्पष्ट कथन है कि "मानव जाति व्यक्ति की स्वतंत्रता में केवल एक आधार पर हस्तक्षेप कर सकती है और वह है आत्मरक्षा (अर्थात् दूसरों को हानि से बचाना - Harm Principle)।"
व्याख्या: मिल का स्पष्ट कथन है कि "मानव जाति व्यक्ति की स्वतंत्रता में केवल एक आधार पर हस्तक्षेप कर सकती है और वह है आत्मरक्षा (अर्थात् दूसरों को हानि से बचाना - Harm Principle)।"
27. जे. एस. मिल के स्वतंत्रता सम्बन्धी विचारों की आलोचना करते हुए किस महान विचारक ने उन्हें 'खोखली स्वतंत्रता का वाहक' (Prophet of Empty Liberty) कहा है?
सही उत्तर: A) सर अर्नेस्ट बार्कर (Ernest Barker)
व्याख्या: अर्नेस्ट बार्कर ने मिल को 'खोखली स्वतंत्रता और अमूर्त व्यक्ति का पैगम्बर' कहा क्योंकि मिल ने मनुष्य के कार्यों को स्व-विषयक और पर-विषयक में बाँटने का अव्यावहारिक प्रयास किया और अधिकारों का कोई ठोस सामाजिक आधार नहीं दिया।
व्याख्या: अर्नेस्ट बार्कर ने मिल को 'खोखली स्वतंत्रता और अमूर्त व्यक्ति का पैगम्बर' कहा क्योंकि मिल ने मनुष्य के कार्यों को स्व-विषयक और पर-विषयक में बाँटने का अव्यावहारिक प्रयास किया और अधिकारों का कोई ठोस सामाजिक आधार नहीं दिया।
28. कथन (Assertion) और कारण (Reason):
कथन (A): जे. एस. मिल द्वारा मानव कार्यों को 'स्व-विषयक' और 'पर-विषयक' रूप में किया गया विभाजन आलोचकों द्वारा अमान्य कर दिया गया।
कारण (R): आधुनिक युग में मनुष्य को एक 'सामाजिक प्राणी' के रूप में देखा जाता है, इसलिए उसके किसी भी व्यक्तिगत कार्य का समाज पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है; अतः दोनों कार्यों में स्पष्ट अंतर करना असंभव है।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): आधुनिक युग में मनुष्य को एक 'सामाजिक प्राणी' के रूप में देखा जाता है, इसलिए उसके किसी भी व्यक्तिगत कार्य का समाज पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है; अतः दोनों कार्यों में स्पष्ट अंतर करना असंभव है।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: समाज में रहने वाले व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्णतः एकाकी नहीं होता, इसलिए स्व-विषयक और पर-विषयक कार्यों के बीच की रेखा अत्यंत काल्पनिक और धुंधली है।
व्याख्या: समाज में रहने वाले व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्णतः एकाकी नहीं होता, इसलिए स्व-विषयक और पर-विषयक कार्यों के बीच की रेखा अत्यंत काल्पनिक और धुंधली है।
29. विभिन्न विचारधाराओं से श्रेष्ठ तत्वों को ग्रहण करने के कारण जे. एस. मिल के व्यापक दृष्टिकोण की तुलना किस भारतीय संत की वाणी ("सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय") से की जाती है?
सही उत्तर: B) कबीरदास (कबीरपंथी दृष्टिकोण)
व्याख्या: मिल का दृष्टिकोण संकीर्ण न होकर अत्यंत व्यापक और समन्वयवादी था; उन्होंने उपयोगितावाद की कमियों को छोड़कर उसमें नैतिकता और आदर्शवाद के श्रेष्ठ तत्वों को समाहित किया।
व्याख्या: मिल का दृष्टिकोण संकीर्ण न होकर अत्यंत व्यापक और समन्वयवादी था; उन्होंने उपयोगितावाद की कमियों को छोड़कर उसमें नैतिकता और आदर्शवाद के श्रेष्ठ तत्वों को समाहित किया।
30. जहाँ बेंथम और अन्य व्यक्तिवादियों ने राज्य और समाज को एक 'कृत्रिम संस्था' (Artificial Institution) माना, वहीं जे. एस. मिल ने राज्य को कैसी संस्था माना है?
सही उत्तर: C) स्वाभाविक एवं सकारात्मक संस्था
व्याख्या: मिल ने राज्य और समाज को यांत्रिक या कृत्रिम न मानकर एक 'स्वाभाविक संस्था' माना जो मानव इच्छा (गुण) का परिणाम है और सामाजिक-आर्थिक कल्याण का सकारात्मक कार्य करता है।
व्याख्या: मिल ने राज्य और समाज को यांत्रिक या कृत्रिम न मानकर एक 'स्वाभाविक संस्था' माना जो मानव इच्छा (गुण) का परिणाम है और सामाजिक-आर्थिक कल्याण का सकारात्मक कार्य करता है।
31. बहु-कथन प्रश्न: राज्य की सकारात्मक एवं कल्याणकारी भूमिका के सन्दर्भ में जे. एस. मिल के विचारों की पहचान करें:
1. राज्य को सामाजिक-आर्थिक विषमता मिटाने का प्रयास करना चाहिए।
2. राज्य को सामाजिक सुधार और निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने का कार्य करना चाहिए।
3. मिल जमींदारी उन्मूलन के प्रबल पक्षधर हैं।
4. मिल किराये (लगान/Rent) के सिद्धान्त के विरोधी हैं।
सही कूट:
2. राज्य को सामाजिक सुधार और निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने का कार्य करना चाहिए।
3. मिल जमींदारी उन्मूलन के प्रबल पक्षधर हैं।
4. मिल किराये (लगान/Rent) के सिद्धान्त के विरोधी हैं।
सही उत्तर: E) 1, 2, 3 और 4 सभी सत्य हैं
व्याख्या: आर्थिक क्षेत्र में मिल ने अहस्तक्षेप की नीति को त्याग दिया था और निःशुल्क शिक्षा, श्रमिक कल्याण, जमींदारी उन्मूलन तथा बिना मेहनत के मिलने वाले लगान (किराये) के विरोध का समर्थन किया था।
व्याख्या: आर्थिक क्षेत्र में मिल ने अहस्तक्षेप की नीति को त्याग दिया था और निःशुल्क शिक्षा, श्रमिक कल्याण, जमींदारी उन्मूलन तथा बिना मेहनत के मिलने वाले लगान (किराये) के विरोध का समर्थन किया था।
32. जे. एस. मिल ने अपनी पुस्तक 'Representative Government' में प्रतिनिधि लोकतंत्र की सफलता के लिए किसे अनिवार्य माना है?
सही उत्तर: B) नागरिकों के उच्च चरित्र, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता (गुणात्मकता) को
व्याख्या: बेंथम के विपरीत मिल ने लोकतंत्र को मात्रा के बजाय 'गुणात्मकता' पर आधारित किया और कहा कि लोकतंत्र हर देश (विशेषकर पिछड़े देशों) में सफल नहीं हो सकता, इसके लिए चरित्रवान नागरिक जरूरी हैं।
व्याख्या: बेंथम के विपरीत मिल ने लोकतंत्र को मात्रा के बजाय 'गुणात्मकता' पर आधारित किया और कहा कि लोकतंत्र हर देश (विशेषकर पिछड़े देशों) में सफल नहीं हो सकता, इसके लिए चरित्रवान नागरिक जरूरी हैं।
33. जे. एस. मिल के अनुसार मताधिकार (Right to Vote) केवल उन्हीं नागरिकों को दिया जाना चाहिए जो:
सही उत्तर: B) पढ़ना, लिखना और गिनना (गणित) तीनों जानते हों
व्याख्या: मिल अज्ञानी भीड़ के शासन से डरते थे, इसलिए उन्होंने मताधिकार से पहले सार्वभौमिक शिक्षा की शर्त रखी और कहा कि मतदाता को पढ़ना, लिखना और सामान्य गणित (गिनना) आना ही चाहिए।
व्याख्या: मिल अज्ञानी भीड़ के शासन से डरते थे, इसलिए उन्होंने मताधिकार से पहले सार्वभौमिक शिक्षा की शर्त रखी और कहा कि मतदाता को पढ़ना, लिखना और सामान्य गणित (गिनना) आना ही चाहिए।
34. "मतों को तौला जाना चाहिए, गिना जाना नहीं।" (Votes should be weighed, not counted.) इस प्रसिद्ध कथन के माध्यम से जे. एस. मिल ने किस मतदान प्रणाली का प्रतिपादन किया?
सही उत्तर: B) भारित मतदान या गुणित मतदान (Weighted / Plural Voting)
व्याख्या: मिल का मानना था कि एक विद्वान और एक कम पढ़े-लिखे व्यक्ति का मत समान नहीं हो सकता। अतः अधिक शिक्षित और योग्य व्यक्तियों को एक से अधिक मत (भारित मत) देने का अधिकार होना चाहिए।
व्याख्या: मिल का मानना था कि एक विद्वान और एक कम पढ़े-लिखे व्यक्ति का मत समान नहीं हो सकता। अतः अधिक शिक्षित और योग्य व्यक्तियों को एक से अधिक मत (भारित मत) देने का अधिकार होना चाहिए।
35. "नारियों को मताधिकार इसलिए नहीं मिलना चाहिए कि वे राजनीति में भागीदार बनें, बल्कि उन्हें इसलिए मिलना चाहिए कि वे कुशासन से बचें।" महिला मताधिकार के पक्ष में यह सशक्त तर्क किसने दिया था?
सही उत्तर: C) जे. एस. मिल
व्याख्या: बेंथम ने महिलाओं को मताधिकार से वंचित रखा था, किंतु जे. एस. मिल ने महिलाओं को पुरुषों के कुशासन और घरेलू/सामाजिक शोषण से बचाने के लिए महिला मताधिकार का पुरजोर समर्थन किया।
व्याख्या: बेंथम ने महिलाओं को मताधिकार से वंचित रखा था, किंतु जे. एस. मिल ने महिलाओं को पुरुषों के कुशासन और घरेलू/सामाजिक शोषण से बचाने के लिए महिला मताधिकार का पुरजोर समर्थन किया।
36. मतदान की प्रक्रिया के सन्दर्भ में जे. एस. मिल ने किसका समर्थन किया था?
सही उत्तर: B) खुले मतदान (Open Ballot) का
व्याख्या: बेंथम गुप्त मतदान के पक्षधर थे, परंतु मिल का मानना था कि मतदान एक सार्वजनिक कर्तव्य (Public Trust) है, इसलिए मतदाता को जनता के सामने निडर होकर 'खुला मतदान' करना चाहिए।
व्याख्या: बेंथम गुप्त मतदान के पक्षधर थे, परंतु मिल का मानना था कि मतदान एक सार्वजनिक कर्तव्य (Public Trust) है, इसलिए मतदाता को जनता के सामने निडर होकर 'खुला मतदान' करना चाहिए।
37. विधायिका (संसद) में बहुमत के अत्याचार से अल्पसंख्यकों (Minorities) के हितों की रक्षा और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए मिल ने किस प्रणाली का समर्थन किया?
सही उत्तर: C) आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation)
व्याख्या: मिल ने थॉमस हेयर द्वारा प्रतिपादित 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' का प्रबल समर्थन किया ताकि संसद में केवल बहुसंख्यकों का ही नहीं, बल्कि शिक्षित अल्पसंख्यकों का भी प्रतिनिधित्व हो सके।
व्याख्या: मिल ने थॉमस हेयर द्वारा प्रतिपादित 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' का प्रबल समर्थन किया ताकि संसद में केवल बहुसंख्यकों का ही नहीं, बल्कि शिक्षित अल्पसंख्यकों का भी प्रतिनिधित्व हो सके।
38. "दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है जो पशुओं से कुछ ही बेहतर हैं।" जे. एस. मिल ने यह निराशावादी कथन किस संदर्भ में कहा था?
सही उत्तर: A) लोकतंत्र में अज्ञानी और अशिक्षित बहुमत की कमियों को उजागर करने के लिए
व्याख्या: मिल के अनुसार एक अच्छा लोकतंत्र वह है जिसमें सभी भागीदारी करें, लेकिन समाज में सभी लोग नैतिक और बौद्धिक रूप से विकसित नहीं होते; इसी अज्ञानता के डर से उन्होंने भारित मतदान का सुझाव दिया था।
व्याख्या: मिल के अनुसार एक अच्छा लोकतंत्र वह है जिसमें सभी भागीदारी करें, लेकिन समाज में सभी लोग नैतिक और बौद्धिक रूप से विकसित नहीं होते; इसी अज्ञानता के डर से उन्होंने भारित मतदान का सुझाव दिया था।
39. "यदि डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) को डंडाक्रेसी (भीड़तंत्र) में तब्दील होने से बचाना है, तो जनता के हाथ में सतर्कता का सदाबहार डण्डा होना चाहिए जिससे समय-समय पर शक्ति के अन्धे और सत्ता के दीवाने इन राजनीतिज्ञों की जनता खबर ले सके।" यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
सही उत्तर: C) जे. एस. मिल
व्याख्या: मिल ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूक 'लोकमत' (Public Opinion) को सर्वाधिक महत्व देते हुए यह चेतावनी दी थी कि जनता को हमेशा सतर्क रहकर नेताओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।
व्याख्या: मिल ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूक 'लोकमत' (Public Opinion) को सर्वाधिक महत्व देते हुए यह चेतावनी दी थी कि जनता को हमेशा सतर्क रहकर नेताओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।
40. जे. एस. मिल के लोकतंत्र सम्बन्धी विचारों (जैसे भारित मतदान, शैक्षणिक योग्यता आदि) की आलोचना करते हुए किस विचारक ने उन्हें 'अनिच्छुक या असंतुष्ट प्रजातंत्रवादी' (Reluctant Democrat) कहा है?
सही उत्तर: B) सी. एल. वेपर (C. L. Wayper)
व्याख्या: मिल लोकतंत्र का समर्थन तो करते थे, परंतु बहुमत के शासन (भीड़तंत्र) से डरते भी थे और समान मताधिकार के विरोधी थे; इसीलिए वेपर ने उन्हें 'अनिच्छुक प्रजातंत्रवादी' कहा।
व्याख्या: मिल लोकतंत्र का समर्थन तो करते थे, परंतु बहुमत के शासन (भीड़तंत्र) से डरते भी थे और समान मताधिकार के विरोधी थे; इसीलिए वेपर ने उन्हें 'अनिच्छुक प्रजातंत्रवादी' कहा।
41. "मिल लोकमत के दमा घोटू (दमघोंटू) के प्रभाव से प्रभावित हैं।" जे. एस. मिल पर यह आलोचनात्मक टिप्पणी किसने की है?
सही उत्तर: C) सी. एल. वेपर (Wayper)
व्याख्या: मिल को हमेशा यह भय सताता रहता था कि बहुमत का जनमत (लोकमत) कहीं व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रतिभा का गला न घोंट दे; इसी मानसिकता पर वेपर ने यह टिप्पणी की थी।
व्याख्या: मिल को हमेशा यह भय सताता रहता था कि बहुमत का जनमत (लोकमत) कहीं व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रतिभा का गला न घोंट दे; इसी मानसिकता पर वेपर ने यह टिप्पणी की थी।
42. सूची-I (प्रसिद्ध कथन/उपाधि) को सूची-II (संबंधित विचारक) के साथ सुमेलित करें:
a. खोखली स्वतंत्रता का वाहक (मिल के लिए)
1. थॉमस कार्लाइल
b. अनिच्छुक प्रजातंत्रवादी (मिल के लिए)
2. लॉर्ड ग्लैडस्टोन
c. सूकर का दर्शन (बेंथम के लिए)
3. अर्नेस्ट बार्कर
d. मिल का भाषण संत के प्रवचन जैसा है
4. सी. एल. वेपर
सही उत्तर: A) a-3, b-4, c-1, d-2
व्याख्या: बार्कर ने मिल को 'खोखली स्वतंत्रता का वाहक' कहा, वेपर ने 'अनिच्छुक प्रजातंत्रवादी' कहा, कार्लाइल ने बेंथम के दर्शन को 'सूकर का दर्शन' कहा और ग्लैडस्टोन ने मिल के भाषण को 'संत का प्रवचन' कहा था।
व्याख्या: बार्कर ने मिल को 'खोखली स्वतंत्रता का वाहक' कहा, वेपर ने 'अनिच्छुक प्रजातंत्रवादी' कहा, कार्लाइल ने बेंथम के दर्शन को 'सूकर का दर्शन' कहा और ग्लैडस्टोन ने मिल के भाषण को 'संत का प्रवचन' कहा था।
43. बेंथम की मृत्यु के बाद जे. एस. मिल को स्वतंत्रता पर अपनी पुस्तक 'On Liberty' लिखने की आवश्यकता मुख्य रूप से क्यों पड़ी?
सही उत्तर: B) क्योंकि 'अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख' के नाम पर प्रशासनिक मशीनरी का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा था।
व्याख्या: बेंथम को स्वतंत्रता शब्द से चिढ़ थी और उसने सुरक्षा को महत्व दिया था। किंतु मिल ने देखा कि बहुमत के सुख के नाम पर राज्य का हस्तक्षेप व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा बन रहा है, अतः उन्होंने स्वतंत्रता की रक्षा के लिए 'On Liberty' लिखी।
व्याख्या: बेंथम को स्वतंत्रता शब्द से चिढ़ थी और उसने सुरक्षा को महत्व दिया था। किंतु मिल ने देखा कि बहुमत के सुख के नाम पर राज्य का हस्तक्षेप व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा बन रहा है, अतः उन्होंने स्वतंत्रता की रक्षा के लिए 'On Liberty' लिखी।
44. बहु-कथन प्रश्न: जेरेमी बेंथम और जे. एस. मिल के लोकतांत्रिक विचारों की तुलना में कौन-से कथन सत्य हैं?
1. बेंथम ने 'एक व्यक्ति, एक वोट' का समर्थन किया, जबकि मिल ने 'भारित मतदान' का समर्थन किया।
2. बेंथम 'गुप्त मतदान' के पक्षधर थे, जबकि मिल 'खुले मतदान' के पक्षधर थे।
3. बेंथम ने महिलाओं को मताधिकार से वंचित रखा, जबकि मिल महिला मताधिकार के प्रबल समर्थक थे।
4. बेंथम का मानना था कि लोकतंत्र हर देश में संभव है, जबकि मिल के अनुसार यह केवल चरित्रवान नागरिकों वाले देशों में ही सफल हो सकता है।
सही कूट:
2. बेंथम 'गुप्त मतदान' के पक्षधर थे, जबकि मिल 'खुले मतदान' के पक्षधर थे।
3. बेंथम ने महिलाओं को मताधिकार से वंचित रखा, जबकि मिल महिला मताधिकार के प्रबल समर्थक थे।
4. बेंथम का मानना था कि लोकतंत्र हर देश में संभव है, जबकि मिल के अनुसार यह केवल चरित्रवान नागरिकों वाले देशों में ही सफल हो सकता है।
सही उत्तर: D) 1, 2, 3 और 4 सभी सत्य हैं
व्याख्या: लोकतंत्र और मतदान प्रणाली के इन चारों ही बिंदुओं पर गुरु (बेंथम) और शिष्य (जे. एस. मिल) के विचार एक-दूसरे के ठीक विपरीत थे।
व्याख्या: लोकतंत्र और मतदान प्रणाली के इन चारों ही बिंदुओं पर गुरु (बेंथम) और शिष्य (जे. एस. मिल) के विचार एक-दूसरे के ठीक विपरीत थे।
45. जे. एस. मिल के अनुसार 'पर-विषयक कार्य' (Other-Regarding Actions) कौन-से होते हैं?
सही उत्तर: B) वे कार्य जिनका सम्बन्ध दूसरों से है और जिनसे समाज पर प्रभाव पड़ता है...
व्याख्या: मिल के अनुसार जब किसी व्यक्ति के कार्य से दूसरे लोगों की स्वतंत्रता या सुरक्षा बाधित होती है (पर-विषयक कार्य), तो राज्य को तुरंत हस्तक्षेप करके उसे रोकना चाहिए।
व्याख्या: मिल के अनुसार जब किसी व्यक्ति के कार्य से दूसरे लोगों की स्वतंत्रता या सुरक्षा बाधित होती है (पर-विषयक कार्य), तो राज्य को तुरंत हस्तक्षेप करके उसे रोकना चाहिए।
46. जे. एस. मिल से पूर्व प्रचलित 'नकारात्मक उदारवाद' (Negative Liberalism) की मुख्य मान्यता क्या थी?
सही उत्तर: A) कि राज्य केवल सुरक्षा, शांति व्यवस्था और न्याय का कार्य करे...
व्याख्या: नकारात्मक उदारवाद राज्य को केवल 'पुलिस राज्य' या 'आवश्यक बुराई' मानता था। मिल ने आर्थिक विषमता को देखते हुए इस धारणा को बदला और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में राज्य के सकारात्मक हस्तक्षेप की वकालत की।
व्याख्या: नकारात्मक उदारवाद राज्य को केवल 'पुलिस राज्य' या 'आवश्यक बुराई' मानता था। मिल ने आर्थिक विषमता को देखते हुए इस धारणा को बदला और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में राज्य के सकारात्मक हस्तक्षेप की वकालत की।
47. जे. एस. मिल ने राज्य को एक 'स्वाभाविक संस्था' मानते हुए उसकी उत्पत्ति का आधार किसे बताया है?
सही उत्तर: C) मानव इच्छा (Human Will) को, जो मात्रा का नहीं बल्कि 'गुण' का द्योतक है
व्याख्या: मिल के अनुसार राज्य कोई यांत्रिक मशीन नहीं है, बल्कि यह मानवीय इच्छा और नैतिक गुणों का परिणाम है। यही विचार आगे चलकर टी. एच. ग्रीन के कथन ("राज्य का आधार शक्ति नहीं इच्छा है") की प्रेरणा बना।
व्याख्या: मिल के अनुसार राज्य कोई यांत्रिक मशीन नहीं है, बल्कि यह मानवीय इच्छा और नैतिक गुणों का परिणाम है। यही विचार आगे चलकर टी. एच. ग्रीन के कथन ("राज्य का आधार शक्ति नहीं इच्छा है") की प्रेरणा बना।
48. जे. एस. मिल ने लोकतंत्र के सफल संचालन और नागरिकों के राजनीतिक प्रशिक्षण के लिए किस संस्था को अत्यधिक महत्व दिया है?
सही उत्तर: B) स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) को
व्याख्या: मिल ने स्थानीय स्वशासन को लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला मानते हुए इसे अत्यधिक महत्व दिया ताकि आम नागरिकों में सार्वजनिक कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
व्याख्या: मिल ने स्थानीय स्वशासन को लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला मानते हुए इसे अत्यधिक महत्व दिया ताकि आम नागरिकों में सार्वजनिक कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
49. कथन (Assertion) और कारण (Reason):
कथन (A): 1865 में उदार दल से सांसद बनने के बाद, अगले चुनाव में जे. एस. मिल को किसी भी राजनीतिक पार्टी ने टिकट नहीं दिया।
कारण (R): मिल संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांसदों की स्वतंत्र विवेकशीलता पर बल देते थे तथा दलगत अनुशासन से बंधने के बजाय नैतिक सिद्धांतों पर बिना रुके बोलते थे।
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कारण (R): मिल संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांसदों की स्वतंत्र विवेकशीलता पर बल देते थे तथा दलगत अनुशासन से बंधने के बजाय नैतिक सिद्धांतों पर बिना रुके बोलते थे।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: मिल राजनीतिक पार्टियों के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार नहीं थे और अपनी स्वतंत्र विवेकशीलता से काम लेते थे, जिसके कारण व्यावहारिक राजनीति में दलों ने उन्हें अगली बार उम्मीदवार नहीं बनाया।
व्याख्या: मिल राजनीतिक पार्टियों के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार नहीं थे और अपनी स्वतंत्र विवेकशीलता से काम लेते थे, जिसके कारण व्यावहारिक राजनीति में दलों ने उन्हें अगली बार उम्मीदवार नहीं बनाया।
50. निष्कर्ष (Conclusion): पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के इतिहास में जे. एस. मिल का सबसे बड़ा और युगांतरकारी योगदान क्या माना जाता है?
सही उत्तर: C) उन्होंने बेंथम के शुष्क उपयोगितावाद में नैतिकता का संचार किया और उदारवाद को कल्याणकारी दिशा में मोड़ दिया।
व्याख्या: जे. एस. मिल ने उपयोगितावाद और आदर्शवाद तथा नकारात्मक उदारवाद और कल्याणकारी राज्य के बीच एक सेतु का कार्य किया। व्यक्तिगत स्वतंत्रता, महिला मताधिकार और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर उनके विचार आज भी लोकतांत्रिक विश्व की धरोहर हैं।
व्याख्या: जे. एस. मिल ने उपयोगितावाद और आदर्शवाद तथा नकारात्मक उदारवाद और कल्याणकारी राज्य के बीच एक सेतु का कार्य किया। व्यक्तिगत स्वतंत्रता, महिला मताधिकार और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर उनके विचार आज भी लोकतांत्रिक विश्व की धरोहर हैं।
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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. किसे 'अंतिम उपयोगितावादी' और 'प्रथम व्यक्तिवादी' कहा जाता है?
उत्तर: जे. एस. मिल (J. S. Mill) को 'अंतिम उपयोगितावादी' और 'प्रथम व्यक्तिवादी' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने बेंथम के उपयोगितावाद में नैतिकता और स्वतंत्रता का समावेश कर उसका मूल स्वरूप ही बदल दिया।
Q2. "एक असंतुष्ट सुकरात एक संतुष्ट मूर्ख से श्रेष्ठ है।" यह कथन किसका है?
उत्तर: यह विश्वप्रसिद्ध कथन जे. एस. मिल का है। इसके माध्यम से उन्होंने बेंथम के मात्रात्मक सुख के स्थान पर 'गुणात्मक और नैतिक सुख' का प्रबल समर्थन किया।
Q3. जे. एस. मिल को 'खोखली स्वतंत्रता का वाहक' किसने कहा है?
उत्तर: महान विचारक अर्नेस्ट बार्कर (Ernest Barker) ने मिल द्वारा मानवीय कार्यों को स्व-विषयक और पर-विषयक में बाँटने की आलोचना करते हुए उन्हें 'खोखली स्वतंत्रता का वाहक' (Prophet of Empty Liberty) कहा है।
Q4. सी. एल. वेपर (Wayper) ने मिल के लोकतंत्र सम्बन्धी विचारों को क्या संज्ञा दी है?
उत्तर: सी. एल. वेपर ने मिल को 'अनिच्छुक या असंतुष्ट प्रजातंत्रवादी' (Reluctant Democrat) कहा है, क्योंकि मिल ने सभी को समान मताधिकार न देकर शिक्षितों के लिए भारित मतदान (Plural Voting) का समर्थन किया था।
Q5. जे. एस. मिल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'On Liberty' किसे समर्पित की थी?
उत्तर: जे. एस. मिल ने अपनी अमर कृति 'On Liberty' अपनी अत्यंत प्रतिभाशाली पत्नी श्रीमती हैरियट टेलर (Harriet Taylor) को समर्पित की थी, जिन्हें वे अपने लेखों की प्रेरक मानते थे।
Q6. "मतों को तौला जाना चाहिए, गिना जाना नहीं।" इस कथन से मिल का क्या आशय है?
उत्तर: इस कथन के माध्यम से जे. एस. मिल ने भारित मतदान (Weighted / Plural Voting) का समर्थन किया, जिसका अर्थ है कि अधिक शिक्षित और योग्य व्यक्तियों को सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक मत देने का अधिकार होना चाहिए।
