थॉमस हॉब्स के राजनीतिक विचार और सामाजिक समझौता सिद्धांत नोट्स

थॉमस हॉब्स के राजनीतिक विचार और सामाजिक समझौता सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन नोट्स, जो TGT, PGT, LT, GIC और NET/JRF परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं
पश्चिमी राजनीतिक विचारक: थॉमस हॉब्स (1588-1679)
Study Material Overview: Polity Study Adda के इस विशेष लेख में प्रसिद्ध पश्चिमी राजनीतिक विचारक थॉमस हॉब्स (Thomas Hobbes) के राजनीतिक दर्शन का प्रामाणिक व विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसमें उनके जीवन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (इंग्लैण्ड का गृहयुद्ध), मानव स्वभाव, प्राकृतिक अवस्था, सामाजिक समझौता (Social Contract), निरंकुश सम्प्रभुता (Absolute Sovereignty) और उनकी महान पुस्तक 'लेवियाथन' (Leviathan) का शानदार फ्लोचार्ट्स के माध्यम से वर्णन किया गया है। यह लेख UPSC, PCS, TGT, PGT, LT, GIC, UGC NET/JRF (Political Science) आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यन्त उपयोगी है।

✦ 1. थॉमस हॉब्स: जीवन परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

थॉमस हॉब्स (1588-1679) को "प्रथम व्यक्तिवादी" विचारक और निरंकुश राजतंत्र (Absolute Monarchy) के प्रबल समर्थक के रूप में जाना जाता है।

  • जन्म: 5 अप्रैल 1588 को इंग्लैण्ड के माल्म्सबरी (Malmesbury) नामक स्थान पर एक पादरी के घर हुआ था।
  • उपनाम: अपने निरंकुश विचारों के कारण वे हमेशा आलोचना के पात्र रहे। आलोचकों ने हॉब्स को "माल्म्सबरी का दैत्य" (Monster of Malmesbury) की संज्ञा दी थी।
पोप ग्लेसियस II का प्रसिद्ध कथन:

"एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं।"

संसद अधिकार
⟷
राजा

सत्ता के परमाधिकारों को लेकर इंग्लैण्ड में जनतंत्र (संसद) और राजतंत्र (राजा) के बीच भारी संघर्ष छिड़ा हुआ था।

  • भय का वातावरण: तत्कालीन इंग्लैण्ड में जेम्स प्रथम (1566-1625) का शासन था, जो राजा के दैवीय अधिकारों में विश्वास करता था। हॉब्स के पिता भी राजा के दरबार में पादरी थे, अतः उनका झुकाव राजतंत्र की ओर था।
  • जिस समय हॉब्स अपनी माँ के गर्भ में थे, उस समय स्पेनिश आर्मेडा के आक्रमण का भय और सत्ता का संघर्ष चरम पर था। इसी भय के वातावरण के कारण हॉब्स का जन्म समय से दो माह पूर्व ही हो गया।
  • अतः "भय" हॉब्स के जीवन की आधारशिला बन गया।
लेवियाथन में हॉब्स का प्रसिद्ध कथन:

"मैं और मेरा भय दोनों जुड़वा भाई हैं।" (I and fear were born twins)

✦ 2. इंग्लैण्ड का गृहयुद्ध एवं हॉब्स का पलायन

1625 में जेम्स प्रथम के बाद चार्ल्स प्रथम (Charles I) ने सत्ता संभाली। वह एक निरंकुश राजा था। किसान और व्यापारी के प्रतिनिधि संसद में बैठते थे। मंत्रियों की नियुक्ति, कराधान के निर्धारण आदि में राजा संसद की सलाह लेता था। राजा ने संसद की सलाह को नजरअंदाज किया और उसने जनता पर ऐसे टैक्स लगा दिए जिसके लिए उसने संसद से कोई परामर्श नहीं लिया। फलस्वरूप संसद सदस्य राजा की नीतियों का विरोध करने लगे।

वर्ष (Year) ऐतिहासिक घटनाक्रम (Historical Events)
1629 संसद राजा का विरोध कर रही थी, इसलिए राजा ने संसद को भंग कर दिया और अगले 11 वर्षों तक बिना संसद के ही शासन चलाया।
1640 संसद पुनः बुलाई गई। इतिहास में इसे Long Parliament (लंबी संसद) कहा जाता है। संसद सदस्यों ने नीतियों का पुनः विरोध किया, जिसके दुष्परिणाम स्वरूप राजा ने जनता के 5 समर्थकों को बंदी बनाकर जेल भेज दिया।
1642-1649 इंग्लैण्ड में भयंकर गृहयुद्ध (Civil War) / खूनी क्रान्ति छिड़ गई। 1649 की क्रांति को खूनी क्रांति कहा जाता है। यह विश्व की पहली क्रांति है।(ध्यान रहे: गौरवपूर्ण क्रान्ति 1688 में हुई थी जो रक्तहीन थी)।
1649 क्रान्ति के दौरान जनता ने निरंकुश राजा चार्ल्स प्रथम को फाँसी दे दी। उसके पुत्र चार्ल्स द्वितीय को इंग्लैण्ड से बाहर निकाल दिया गया और वह फ्रांस भाग गया। सत्ता ऑलिवर क्रॉमवेल (Oliver Cromwell) ने संभाली।
1651 राजा के समर्थक मारे जाने लगे। हॉब्स ने 1 माह पहले ही राजा के समर्थन में पम्पलेट बाँटा था, अतः वह भी जान बचाकर फ्रांस भाग गया। वहां पहुंचकर वह चार्ल्स द्वितीय से भी मिला था। फ्रांस में ही हॉब्स ने अपनी महान पुस्तक 'लेवियाथन' (Leviathan) 1651 मे लिखी, जो फ्रांसीसी विचारक गोडोल्फिन (Godolphin) को समर्पित है।
क्लैरेण्डन (Clarendon) की कड़ी आलोचना:

हॉब्स ने अपनी पुस्तक में मानव स्वभाव को बुरा बताया है, इसलिए उसने एक निरंकुश राजतंत्र को अपरिहार्य बताया था। क्लैरेण्डन ने लेवियाथन को जलाते हुए लिखा— "ऐसी युक्तियों से राजतंत्र का समर्थन करने वाले हॉब्स यदि पैदा न होता तो ज्यादा अच्छा था। आज तक मैंने कोई ऐसी पुस्तक नहीं पढ़ी जिसमें इतना अधर्म और राजद्रोह पाया जाता हो।"

हॉब्स की पुस्तक 'लेवियाथन' (Leviathan) के कारण उसका फ्रांस में व्यापक विरोध हुआ। इस विरोध के कारण हॉब्स को फ्रांस छोड़ने के लिए कहा गया। हॉब्स लम्बे समय तक इधर-उधर भटकने के बाद, 1660 में जब चार्ल्स द्वितीय ने इंग्लैण्ड की सत्ता संभाली, तो हॉब्स वापस लौट आया। राजा ने उसे सम्मानित किया और आजीवन पेंशन दी, परन्तु उसकी सम्पूर्ण राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया। अंततः हॉब्स ने अपने जीवन के अंतिम समय में राजनीति विज्ञान, भौतिक विज्ञान, इतिहास इत्यादि पुस्तक पढ़ते हुए अपना जीवन बिताया तथा 91 वर्ष की अवस्था में 1679 ईस्वी में मृत्यु को प्राप्त हो गया।

✦ 3. मानव स्वभाव (Human Nature) का विश्लेषण

हॉब्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'लेवियाथन' में अपने राजनीतिक विचारों का प्रतिपादन किया। इसके अंतर्गत उन्होंने मानव स्वभाव, प्राकृतिक अवस्था, सामाजिक समझौता, नागरिक समाज या राज्य का जन्म तथा राज्य-व्यक्ति के बीच संबंधों का उल्लेख किया।

हॉब्स ने मानव स्वभाव और धर्मनिरपेक्षता की वैज्ञानिक व्याख्या की (जो मैकियावली नहीं कर सका था) और चर्च को भी राज्य के अधीन कर दिया।

  • हॉब्स गैलीलियो के यांत्रिकी सिद्धान्त (Mechanical Theory) में विश्वास करता था।
  • उसने मनुष्य को भी एक 'जड़ पदार्थ' के रूप में देखा जिसके केन्द्र में अहंकार (Ego) होता है।
  • इसी अहंकार के कारण मनुष्य के भीतर गतियाँ संचालित होती हैं, जिससे इच्छा (Desire) और अनिच्छा (Aversion) नामक दो भाव उत्पन्न होते हैं। जिसके कारण आकर्षण एवं विकर्षण संचालित होता है। जिसके कारण लोग एक दूसरे से प्रेम या घृणा करते हैं।
अहंकार
(Ego)
मानव का केन्द्र
इच्छा ➔ आकर्षण ➔ प्रेम ➔ पाना चाहता है
अनिच्छा ➔ विकर्षण ➔ घृणा ➔ दूर भागना चाहता है

हॉब्स ने अपने जन्म से ही इंग्लैण्ड का जो परिदृश्य देखा था, उसके कारण उसके दिमाग में यह बात बैठ गया था कि मानव का स्वभाव अच्छा नहीं होता। जैसा कि उसने मानव स्वभाव का वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट किया था। उसके कारण उसने मानव स्वभाव का नैराश्यवादी (Pessimistic) चित्रण किया।

मानव दुःख / संघर्ष के तीन मुख्य कारण:
  1. प्रतिस्पर्धा (Competition): इसके कारण लोगों में संघर्ष पैदा होता है।
  2. अविश्वास (Diffidence): इसके कारण लोगों में भय पैदा होता है।
  3. यश / अहंकार (Glory): इसके कारण लोगों में लालच पैदा होता है।

हॉब्स के शब्दों में— "मनुष्य अहंकारी, आत्माभिमानी व स्वार्थी प्राणी है। वह एक असामाजिक, झगड़ालू एवं दुष्कर्मी प्राणी है।"

✦ 4. प्राकृतिक अवस्था (State of Nature)

राज्य (सत्ता) के निर्माण से पूर्व की अवस्था को हॉब्स ने प्राकृतिक अवस्था कहा है। यह पूर्णतः सत्ता-विहीन, राज्य-विहीन व समाज-विहीन अवस्था थी।

प्राकृतिक
अवस्था
सत्ता-विहीन समाज
  • चूँकि हॉब्स ने मानवीय स्वभाव को बुरा बताया था, इसलिए प्राकृतिक अवस्था भी अत्यधिक भयानक थी। यह "सबका सबके विरुद्ध युद्ध की अवस्था" (War of all against all) थी।
  • इसमें रहने वाले सभी मनुष्य बुद्धि और शारीरिक शक्ति में लगभग समान थे, और इसी कारण सभी को एक-दूसरे पर अविश्वास था। (इसलिए व्यक्ति दूसरे को अपनी ओर आता हुआ देखता है, तो उसे ऐसा लगता है कि वह हमें मारने आ रहा है, इसलिए वह उसे मारने से पहले ही मार देता था)।
  • प्रसिद्ध कथन: हॉब्स के अनुसार प्राकृतिक अवस्था में मानव का जीवन "असहाय (अकेला), पाशविक, दीन-हीन, मलिन और क्षणभंगुर" था।
  • इस अवस्था में उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, निजी सम्पत्ति, तथा कला-संस्कृति सबका पूर्णतः अभाव था।
  • जिसकी लाठी उसकी भैंस: यहाँ न्याय-अन्याय का कोई स्थान नहीं था। 'शक्ति ही सत्ता है' तथा 'मत्स्य न्याय' (बड़ी मछली छोटी को खाती है) का सिद्धान्त प्रचलित था।
प्राकृतिक अधिकार (Natural Right):

हॉब्स के अनुसार, इस घोर अराजक प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य को केवल एक ही अधिकार प्राप्त था— शक्ति का अधिकार जिसका मुख्य उद्देश्य केवल प्राण रक्षा (आत्मरक्षा) था।

✦ 5. प्राकृतिक कानून (Natural Laws)

हॉब्स ने कहा है कि प्राकृतिक अवस्था में भले ही कोई विशेष प्राकृतिक अधिकार न हो, लेकिन वहाँ प्राकृतिक कानून प्रचलित है। हॉब्स ने प्राकृतिक कानून को "बुद्धिमत्ता की विधियाँ" (Dictates of right reason) कहा है।

"प्राकृतिक कानून बुद्धि के आदेश या अध्यादेश हैं, जो इस बात को प्रेरित करते हैं कि जो कार्य जीवन में बाधक व प्राण के लिए घातक हो, वह कार्य हमें नहीं करना चाहिए।"

हॉब्स ने कुल 19 प्राकृतिक कानूनों की चर्चा की है, जिनमें से निम्नलिखित 3 सबसे प्रमुख हैं:

  • प्रथम: प्राकृतिक अवस्था से बाहर निकलने के लिए सब लोगों को एक समझौता करना चाहिए (शांति की खोज)।
  • द्वितीय: सब व्यक्तियों को अपने अधिकारों का समर्पण और शर्त तय कर देना चाहिए।
  • तृतीय: हम सभी को किए गए समझौते का पालन करना चाहिए।

विशेष तथ्य: हॉब्स ने प्राकृतिक कानून और नागरिक कानून में अंतर किया है। प्राकृतिक कानून राज्य के उदय से पूर्व का है, जबकि नागरिक कानून सम्प्रभु की आज्ञा है।

✦ 6. हॉब्स का सामाजिक समझौता (Social Contract)

हॉब्स की प्राकृतिक अवस्था पूर्व-सामाजिक व पूर्व-राजनीतिक है। हॉब्स के अनुसार सामाजिक समझौते का आधार बुद्धि है, भय नहीं। प्राकृतिक अवस्था की अराजकता से बाहर निकलने के लिए मनुष्यों ने आपस में यह समझौता किया।

समझौते का स्वरूप:

हॉब्स के अनुसार, प्राकृतिक अवस्था में रहने वाले सभी व्यक्ति एक जगह इकट्ठा हुए और एक व्यक्ति ने दूसरे से कहा— "मैं अपने अधिकार और शक्तियों का समर्पण इस व्यक्ति (या व्यक्तियों के समूह) को कर रहा हूँ, इसी शर्त पर तुम भी कर दो।" इस प्रकार इस समझौते के परिणामस्वरूप एक निरंकुश राजतंत्र या कुलीनतंत्र का जन्म हुआ।

  • हॉब्स के अनुसार, एक ही सामाजिक समझौता हुआ और उसी से राज्य, सरकार और नागरिक समाज तीनों का जन्म हुआ।
  • तीनों को मिलाकर हॉब्स ने 'कॉमनवेल्थ' (Commonwealth) की संज्ञा दी।
  • समझौता जनता (व्यक्तियों) ने आपस में किया है, राजा (सम्प्रभु) इस समझौते का हिस्सा नहीं है, अतः वह किसी शर्त से बंधा हुआ नहीं है।

✦ 7. राज्य का स्वरूप एवं सम्प्रभुता (Sovereignty)

हॉब्स दोनों का (राजतंत्र और जनतंत्र) समर्थक था लेकिन मुख्य रूप से उसने निरंकुश राजतंत्र पर अपना विचार दिया। हॉब्स ने राज्य या राजा को सम्प्रभु या लेवियाथन कहा है।

  • चूँकि एक ही समझौते से राज्य और सरकार बने, अतः राजा वह है जिसने राज्य व सरकार में कोई अंतर नहीं किया।
  • हॉब्स के अनुसार, समझौता बिना शर्त है, अतः राजा प्रजा की बात मानने के लिए बाध्य नहीं है। हॉब्स ने राज्य या राजा को लेवियाथन कहा।
  • हॉब्स के अनुसार, राजा या राज्य की सम्प्रभुता अविभाज्य, निरंकुश, असीम और अहस्तान्तरणीय है।
  • सम्प्रभु सभी कानूनों से ऊपर है। वह जनता पर मनमाने कर (Tax) लगा सकता है और किसी को भी प्राणदण्ड दे सकता है।
  • कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों राजा में ही समाहित हैं। यहाँ तक कि चर्च भी राज्य के अधीन है।
राज्य व व्यक्ति के बीच सम्बन्ध (विद्रोह का अधिकार):

हॉब्स के अनुसार यद्यपि प्रजा राजा का विरोध नहीं कर सकती, लेकिन अपवाद स्वरूप यदि राजा प्रजा के प्राणों की रक्षा न कर पाये, तो ऐसी स्थिति में प्रजा राजा का विरोध कर सकती है। यही हॉब्स के दर्शन में व्यक्ति को साध्य (End) तथा राज्य को साधन (Means) मान लेना तथा उनके व्यक्तिवादी होने का मुख्य कारण है, क्योंकि सामाजिक समझौते का सिद्धान्त आत्मरक्षा का अधिकार चाहता है।

हॉब्स ने प्राकृतिक कानून और नागरिक कानून में अंतर किया है। प्राकृतिक कानून राज्य के उदय के पूर्व है क्योंकि नागरिक कानून संप्रभु की आज्ञा है।

✦ 8. प्रमुख कथन (Important Quotations)

विचारक महत्वपूर्ण कथन / टिप्पणी
हॉब्स (Hobbes)
  • "तलवार के बिना समझौता कोरे शब्द हैं।"
  • "सबसे निकृष्ट राज्य सबसे उत्कृष्ट अराजकता से अच्छा है।"
  • "शब्द सिक्कों की गिनतियाँ हैं, परन्तु वे मूर्खों के लिए आभूषण (रुपये) हैं।"
गैटल (Gettel) "हॉब्स के अतिरिक्त अन्य कोई ऐसा विचारक पैदा नहीं हुआ जिसने सम्प्रभुता के बारे में इतना अतिवादी दृष्टिकोण अपनाया हो।"
सेबाइन (Sabine)
  • "अंग्रेजी भाषा भाषियों ने जितने महत्वपूर्ण विचारकों को जन्म दिया कदाचित हॉब्स उनमें महानतम है।"
  • "हॉब्स के दर्शन को सबसे महान एवं क्रांतिकारी बनाने वाला विचार उसका व्यक्तिवाद है।"
ओकशॉट (Oakeshott) "अब तक लिखी गई पुस्तकों में लेवियाथन सबसे महानतम ग्रन्थों में एक है।"
वाहन (Vaughan) "हॉब्स का समझौता स्वतंत्रता का एक पत्र न होकर दासता का एक बंधन पत्र है।"
बाइन (Bain) बाइन ने लेवियाथन को "नश्वर देव" (Mortal God) की संज्ञा दी है।
जोसेफ वायलातो (Joseph Vialatoux) इन्होंने हॉब्स को "सर्वाधिकारवाद का प्रथम सिद्धान्तकार" कहा है।
गूँच (Gooch) "लेवियाथन अति मानवीय आकार का पुलिसमैन है।"

✦ 9. संपूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)

थॉमस हॉब्स के सम्पूर्ण राजनीतिक दर्शन का विश्लेषण करने के पश्चात् यह निष्कर्ष निकलता है कि वे एक ऐसे युगप्रवर्तक विचारक थे, जिन्होंने मध्यकालीन मान्यताओं को दरकिनार कर आधुनिक राजनीतिक चिंतन की वैज्ञानिक नींव रखी।

  • यद्यपि हॉब्स को निरंकुश राजतंत्र (Absolute Monarchy) का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है, किन्तु उनके दर्शन का मूल बिंदु व्यक्तिवाद (Individualism) है।
  • उन्होंने राज्य की उत्पत्ति का कारण किसी दैवीय शक्ति (ईश्वर) को नहीं माना, बल्कि मनुष्यों के आपसी समझौते और 'आत्मरक्षा' (Self-preservation) की आवश्यकता को बताया।
  • हॉब्स का 'लेवियाथन' एक ऐसा विशाल और शक्तिशाली यंत्र (राज्य) है, जिसका एकमात्र उद्देश्य मानव के स्वार्थी, झगड़ालू एवं पाशविक स्वभाव को नियंत्रित करके समाज में शान्ति व व्यवस्था स्थापित करना है।
  • हॉब्स ने राजनीति को धर्म से पूरी तरह अलग किया और मध्यकालीन परम्पराओं पर प्रहार करते हुए चर्च (धर्म) को भी राज्य के पूर्ण अधीन कर दिया।
निष्कर्ष का सार:

हॉब्स के दर्शन में "व्यक्ति साध्य (End) है और राज्य केवल उसकी सुरक्षा का एक साधन (Means)।" लेवियाथन (सम्प्रभु) कितना भी निरंकुश क्यों न हो, उसका अस्तित्व और औचित्य तभी तक है जब तक वह व्यक्तियों के प्राणों की रक्षा कर सके। इसी विरोधाभास (निरंकुशता के भीतर व्यक्तिवाद के बीज) के कारण हॉब्स को पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के महानतम विचारकों में गिना जाता है।

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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. थॉमस हॉब्स की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है?
थॉमस हॉब्स की सबसे महान और प्रसिद्ध पुस्तक 'लेवियाथन' (Leviathan) है, जिसे उन्होंने 1651 में फ्रांस प्रवास के दौरान लिखा था।
Q2. हॉब्स के अनुसार प्राकृतिक अवस्था (State of Nature) कैसी थी?
हॉब्स के अनुसार प्राकृतिक अवस्था बहुत भयानक थी। यह "सबका सबके विरुद्ध युद्ध" की अवस्था थी, जहाँ मनुष्य का जीवन एकाकी, दीन-हीन, पाशविक और क्षणभंगुर था।
Q3. हॉब्स के सामाजिक समझौते में सम्प्रभु (Sovereign) की स्थिति क्या है?
हॉब्स के समझौते में राजा या सम्प्रभु समझौते का हिस्सा नहीं है। समझौता जनता ने आपस में किया है, इसलिए सम्प्रभु निरंकुश है और किसी भी शर्त से बंधा हुआ नहीं है।
Q4. क्या हॉब्स के राज्य में व्यक्ति को विद्रोह का अधिकार प्राप्त है?
सामान्यतः नहीं। लेकिन आत्मरक्षा (Self-preservation) के अधिकार के तहत, यदि राजा व्यक्ति के प्राणों की रक्षा न कर सके या स्वयं उसकी जान लेना चाहे, तो व्यक्ति विद्रोह कर सकता है।
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