राजनीतिक दल, दलीय व्यवस्था और वर्गीकरण: सम्पूर्ण नोट्स

राजनीति विज्ञान की परीक्षा के लिए 'राजनीतिक दल, दलीय व्यवस्था और वर्गीकरण' विषय के सम्पूर्ण नोट्स
राजनीतिक दल, दलीय व्यवस्था और वर्गीकरण: सम्पूर्ण नोट्स
Study Material Overview: प्रस्तुत लेख में राजनीति विज्ञान के अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय— 'राजनीतिक दल (Political Parties)' तथा 'दलीय व्यवस्था (Party System)' का समग्र एवं विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसमें राजनीतिक दल का अर्थ, निर्माण के 4 आवश्यक तत्त्व, प्रजातन्त्र में दलों की भूमिका, और उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्तों (संस्थागत, ऐतिहासिक संकट, विकासवादी) का गहराई से विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही, मॉरिस डुवर्जर, सारटोरी, रॉबर्ट मिचेल्स, एंथनी डाउन्स, लेनिन जैसे प्रमुख विचारकों के दलीय सिद्धान्तों और उनके वर्गीकरण (काकस, शाखा, प्रकोष्ठ, मिलिशिया) का सटीक समावेश किया गया है। अंत में एकदलीय, द्विदलीय और बहुदलीय व्यवस्था के गुण-दोष तथा भारतीय राजनीतिक दलों की प्रमुख विशेषताओं व विकास क्रम को परीक्षा की दृष्टि से स्पष्ट रूप से समझाया गया है।
📌 विषय सूची (Table of Contents)

✦ 1. राजनीतिक दल: अर्थ एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यद्यपि राजनीतिक दल सभी प्रकार की शासन व्यवस्थाओं में पाये जाते हैं, लेकिन लोकतन्त्र के लिये ये अपरिहार्य हैं। राजनीतिक दल लोकतन्त्र में प्राणवायु (Oxygen) के रूप में कार्य करते हैं और इन्हें लोकतन्त्र की रीढ़ की हड्डी (Backbone) माना जाता है। यद्यपि प्रत्यक्ष लोकतन्त्र में दलविहीन व्यवस्था पाई जाती है।

  • राजनीतिक दलों का उदय सर्वप्रथम ब्रिटेन में हुआ।
  • प्रारम्भ में उन्हें 'टोरी' (Tory) व 'व्हिग' (Whig) कहा गया, जो आगे चलकर क्रमशः अनुदारवादी (Conservative) तथा उदारवादी (Liberal) दल के नाम से जाने गए।

प्राथमिक एवं अन्तिम उद्देश्य: राजनीतिक दल का प्राथमिक उद्देश्य जनमत का निर्माण करना है और अन्तिम उद्देश्य सत्ता की प्राप्ति है।

✦ 2. राजनीतिक दल निर्माण के 4 आवश्यक तत्त्व

किसी भी राजनीतिक दल के निर्माण के लिये निम्नलिखित चार तत्त्वों का होना आवश्यक है:

  1. औपचारिक संगठन (Formal Organization): राजनीतिक दल कानून के अन्तर्गत संगठित होते हैं। प्रत्येक राजनीतिक दल का एक 'संविधान' होता है, उसी आधार पर राजनीतिक दल कार्य करते हैं। यही 'संविधान' ही उनका घोषणा पत्र होता है।
  2. विचारधारा में एकरूपता: राजनीतिक तथा आर्थिक मामलों में सदस्यों के बीच एकरूपता होनी चाहिए। वस्तुतः राजनीतिक व आर्थिक मतभेदों के चलते ही विभिन्न प्रकार के राजनीतिक दल बनते हैं।
  3. संवैधानिक साधनों में विश्वास: राजनीतिक दल सत्ता प्राप्ति के लिए सदैव संवैधानिक (शांतिपूर्ण व वैधानिक) साधनों का प्रयोग करते हैं।
  4. राष्ट्रीय हित का संवर्धन: राजनीतिक दल का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रीय हित को बढ़ावा देना होता है।

निष्कर्ष: कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि राजनीतिक दल ऐसे व्यक्तियों का संगठन/समूह होता है जो औपचारिक रूप से संगठित होकर एक साथ रहते हैं तथा संवैधानिक साधनों के माध्यम से सत्ता की प्राप्ति का प्रयत्न करते हैं, लेकिन उनका अन्तिम उद्देश्य राष्ट्रीय हित का संवर्धन ही होता है।

✦ 3. राजनीतिक दलों के 4 मुख्य कार्य (Functions)

  1. राजनीतिक दल का मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना तथा उसे बनाये रखना है।
  2. राजनीतिक दल एक औपचारिक संगठन होता है, यही संगठन उसे विविध बिखरे हुए राजनीतिक आन्दोलनों से अलग करता है।
  3. राजनीतिक दल सामान्य विषयों पर वोट देते हैं तथा सरकारी नीतियों पर अपना विचार व्यक्त करते हैं।
  4. राजनीतिक दल राजनीतिक आवश्यकताओं से सम्बन्धित होते हैं तथा चुनावों में अपनी वैधानिक पहचान रखते हैं।

✦ 4. प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों की भूमिका / महत्त्व

  • स्वस्थ लोकमत/जनमत का निर्माण करना।
  • राजनीतिक दल चुनावों के संचालन के लिये आवश्यक हैं।
  • राजनीतिक दलों के द्वारा ही सरकार का निर्माण होता है।
  • राजनीतिक दल कानूनों का निर्माण करते हैं।
  • राजनीतिक दल सरकार के विभिन्न विभागों में समन्वय बनाते हैं।
  • राजनीतिक दल जनता की समस्याओं को सरकार तक ले जाते हैं तथा सरकार की नीतियों को जनता तक पहुँचाते हैं; अतः ये जनता व सरकार के बीच 'कड़ी' (Link) का कार्य करते हैं।

Note (महत्वपूर्ण तथ्य): ध्यान रहे कि 'नेता / नेतृत्व' राजनीतिक दल का एक अनिवार्य तत्त्व है, लेकिन गुट/दबाव समूह दल का तत्त्व नहीं है।

✦ 5. राजनीतिक दलों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-1)

ह्यूवर (Hoover) के अनुसार:
"राजनीतिक दल प्रजातन्त्र के यन्त्र में तेल के तुल्य हैं।"

लार्ड ब्राइस (Lord Bryce) के अनुसार:
"जिस प्रकार ज्वार और भाटा महासागर के जल को ताजा एवं तरंगित रखता है, उसी प्रकार राजनीतिक दल राष्ट्र के दिमाग को ताजा व तरंगित रखते हैं।"

"राजनीतिक दल अनिवार्य हैं, कोई स्वतन्त्र देश उनके बिना नहीं रह सकता, कोई भी यह नहीं बता सकता कि उनके बिना प्रतिनिधि सरकार किस प्रकार चलायी जा सकती है।"

"लोकमत को प्रशिक्षित करने तथा उसे निर्माण तथा अभिव्यक्त करने में राजनीतिक दलों के द्वारा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कार्य किया जाता है।"

एडमंड बर्क (Edmund Burke) के अनुसार:
"राजनीतिक दल प्रणाली चाहे पूर्ण रूप से भले के लिए हो या बुरे के लिए, लेकिन प्रजातन्त्रात्मक राष्ट्र के लिए अपरिहार्य है।"

(नोट: बर्क को राजनीतिक दल का सर्वश्रेष्ठ प्रवक्ता माना जाता है। उनका मानना था कि निर्वाचित प्रतिनिधि को संपूर्ण राष्ट्रीय हित के बारे में सोचना चाहिए। बर्क ने राजनीतिक दलों की 'संघात्मक' परिभाषा दी है।)

फाइनर (Finer) के अनुसार:
"राजनीतिक दलों के बिना निर्वाचक या तो नितान्त असहाय हो जायेंगे या फिर वे असम्भव नीतियों को छिन्न-भिन्न कर देंगे, जिससे राजनीतिक तंत्र नष्ट हो जायेगा।"

✦ 6. राजनीतिक दलों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-2)

चार्ल्स मेरियम (Charles Merriam):
अपनी पुस्तक 'अमेरिकन पार्टी सिस्टम' में इन्होंने दलों के कार्य बताए: पदाधिकारी वर्ग का चुनाव करना, लोक नीति का निर्माण करना, सरकार का संचालन या आलोचना करना, राजनीतिक शिक्षण व व्यक्ति-सरकार के बीच मध्यस्थता करना।
डब्लू. मुनरो (W. Munro):
"स्वतन्त्र राजनीतिक दलों का शासन प्रजातन्त्रीय शासन का ही दूसरा नाम है। जहां अनेक राजनीतिक दल नहीं रहे वहां प्रजातन्त्रीय शासन कभी नहीं रहा।"

"सार्वजनिक प्रश्नों पर समान रूप से सोचने वाले लोगों का समूह... यह राजनीतिक जीवन की तरल विकृतियों की अपेक्षा उसके आदर्शों की अधिक अभिव्यक्ति करता है।"
  • लीकॉक (Leacock): "दलबंदी एक ऐसी चीज है जो लोकतन्त्र को सम्भव बनाती है।"
  • अलेक्जेंडर पोप (Alexander Pope): "राजनीतिक दल कुछ व्यक्तियों के लाभ के लिये बहुत से लोगों का पागलपन है।"
  • लॉवेल (Lowell): "राजनीतिक दल - विचारों का दलाल (Brokers of ideas) है।"
  • लास्की (Laski): "राजनीतिक दल तानाशाही से हमारी रक्षा करते हैं।"
  • जीन ब्लोण्डेल (Jean Blondel): "राजनीतिक दल समूहीकरण परन्तु विशेष प्रकार के समूहीकरण होते हैं, ऐसा इसलिए कि इनका स्वरूप विस्तृत है और सदस्यता खुली होती है।"

■ राजनीतिक दल की प्रमुख परिभाषाओं के प्रकार

विचारक का नाम परिभाषा का प्रकार
एडमंड बर्क (Edmund Burke) संघात्मक/वैचारिक परिभाषा
शूम्पीटर (Schumpeter) कार्यात्मक परिभाषा
एल्डर्सवेल्ड (Eldersveld) व्यवहारवादी परिभाषा
राबर्ट सी. बोन (Robert C. Bone) संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक परिभाषा
ला पालोम्बारा (La Palombara) यथार्थवादी परिभाषा

✦ 7. राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त

दल व्यवस्था के आधार पर राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के मुख्य रूप से तीन सिद्धान्त माने जाते हैं:

  1. संस्थागत सिद्धान्त (Institutional Theory): इसके अन्तर्गत संसद, संघात्मक व्यवस्था और निर्वाचन प्रणाली का अध्ययन किया जाता है।
  2. ऐतिहासिक संकट का सिद्धान्त (Historical Crisis Theory): ला पालोम्बारा और मायरन वीनर ने राजनीतिक विकास के दौरान उत्पन्न होने वाले संकटों को दल निर्माण का कारण माना है।
  3. विकासवादी सिद्धान्त (Developmental Theory): यह सिद्धान्त समाज के आधुनिकीकरण और विकास के साथ दलों की उत्पत्ति को जोड़ता है।
ऐतिहासिक संकट (Historical Crisis) के 3 प्रमुख रूप
1. वैधता का संकट
(Crisis of Legitimacy)
2. सहभागिता का संकट
(Crisis of Participation)
3. एकीकरण का संकट
(Crisis of Integration)

✦ 8. राजनीतिक दलों के अध्ययन के दृष्टिकोण / उपागम

राजनीतिक दल राजनीतिक व्यवस्था के विभिन्न अंग हैं। आज राजनीतिक दलों की राजनीतिक व्यवस्था में केन्द्रीय भूमिका है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में एक से अधिक राजनीतिक दल होते हैं ताकि सत्ता प्राप्ति के लिये वे परस्पर प्रतिस्पर्द्धा कर सकें।

आज राजनीतिक दलों के अध्ययन के नये-नये दृष्टिकोण सामने आए हैं। इसके अध्ययन से जुड़े प्रमुख विचारकों में एल्डर्सवेल्ड, लेजरसफेल्ड, ला पालोम्बारा, सारटोरी, लुसियन पाई, जीन ब्लोण्डेल आदि का नाम आता है।

■ मुख्य रूप से 2 दृष्टिकोण / उपागम:

  1. व्यवस्था उपागम (System Approach): इसमें राजनीतिक दलों को व्यवस्था का 'अभिन्न अंग' मान लिया जाता है। इसके बाद आगत-निर्गत (Input-Output) मॉडल के आधार पर राजनीतिक दलों का अध्ययन किया जाता है।
  2. संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम (Structural-Functional Approach): इसमें राजनीतिक दलों के 'कार्यों' के आधार पर उनका अध्ययन किया जाता है। जैसे—नेताओं की भर्ती/चुनाव, चुनाव प्रचार, प्रत्याशियों का चयन आदि कार्यों को आधार मानकर अध्ययन किया जाता है।

✦ 9. राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के सिद्धान्त (Theories of Origin)

राजनीतिक दल आधुनिकता की सन्तान हैं, यह दल राजनीति का संगठनात्मक उपकरण होने के कारण लोकतान्त्रिक व्यवस्था के साथ-साथ प्रायः सभी प्रकार की व्यवस्था में पाये जाते हैं।

ला पालोम्बारा (La Palombara) और मायरन वीनर (Myron Weiner) ने राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के निम्न तीन सिद्धान्त बताए हैं:

1. संस्थात्मक सिद्धान्त
(Institutional Theory)
2. ऐतिहासिक संकट का सिद्धान्त
(Historical Crisis Theory)
3. विकासवादी सिद्धान्त
(Developmental Theory)
  • इसके अनुसार राजनीतिक दलों की उत्पत्ति में संस्थाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
  • प्रमुख संस्थाएं: संसद, संघात्मक व्यवस्था और निर्वाचन प्रणाली।
  • डुवर्जर (Duverger) ने अपनी पुस्तक 'Political Parties' में निर्वाचन प्रणालियों को राजनीतिक दलों तथा दलीय प्रणालियों के बीच घनिष्ठ कारण माना है।
  • जब किसी राज्य में प्रजातान्त्रिकरण होता है, तो कई संकट आते हैं, उनका सामना करने के लिए दलों की उत्पत्ति होती है।
  • ला पालोम्बारा, मायरन वीनर, लिपसेट तथा रोक्कन का मानना है कि संकटों ने दल निर्माण में भूमिका निभाई है।
  • तीन प्रमुख संकट: (i) वैधता का संकट, (ii) सहभागिता का संकट, (iii) प्रादेशिक एकीकरण का संकट।
  • राजनीतिक दलों को आधुनिकीकरण का सन्तान माना जाता है।
  • औद्योगिक क्रान्ति के परिणामस्वरूप यातायात व संचार का विकास हुआ, जिससे शहरीकरण व शिक्षा का विकास हुआ।
  • जनसहभागिता की मांग करने वाले जनसमूह कांग्रेस तथा साम्यवादी दल के रूप में उभरे।
  • भारत, कनाडा, फ्रांस व चीन में राजनीतिक दलों की उत्पत्ति इसी प्रकार हुई।

पीटर मर्केल (Peter Merkl) का योगदान: इन्होंने अपनी पुस्तक 'Modern Comparative Politics' में राजनीतिक दलों की उत्पत्ति में संसद, संघात्मक व्यवस्था और ऐतिहासिक संकट को महत्त्वपूर्ण बताया है। पीटर मर्केल ने राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के विकासवादी सिद्धान्त को 'सामुदायिक सिद्धान्त' (Integration Theory) का नाम दिया।

✦ 10. सारटोरी (Sartori) द्वारा राजनीतिक दलों का वर्गीकरण

सारटोरी (Sartori) ने राजनीतिक दलों का वर्गीकरण करते समय निम्नलिखित तीन आधार प्रस्तुत किये हैं:

🔢
1. राजनीतिक दलों की संख्या
(Number of Political Parties)
🧠
2. दलों की विचारधारा की प्रकृति
(Nature of Ideology)
📏
3. वैचारिक सीमा / फासला
(Ideological Distance)

✦ 11. मॉरिस डुवर्जर (Maurice Duverger) का विस्तृत वर्गीकरण

फ्रेंच विचारक मॉरिस डुवर्जर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Political Parties' (1951) में राजनीतिक दलों का व्यापक और संरचनात्मक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया है। डुवर्जर का कहना है कि राजनीतिक दल कोई समुदाय नहीं बल्कि समुदायों का समूह है और पूरे राष्ट्र में फैले हुए छोटे-छोटे समूहों जैसे काकस, शाखा और सेल का संघ है। यह संबंधित शाखाओं से जुड़ा है। डुवर्जर ने राजनीतिक दलों के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर तत्वों के व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। उसने दलों के माध्यम से कार्य कर रहे प्रत्येक संगठन को अप्रत्यक्ष दल कहकर पुकारा है। इन्होंने दलों के संगठन, सदस्यता और उत्पत्ति के आधार पर विस्तृत वर्गीकरण प्रस्तुत किया है।

(A) संगठन के 4 बुनियादी तत्त्व (4 Basic Elements of Party Structure)

डुवर्जर ने राजनीतिक दलों के संगठन के चार बुनियादी तत्त्व बताए हैं:

  1. काकस / कमेटी (Caucus): यह महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों का एक छोटा संगठन है, जिसकी शक्ति संख्या पर नहीं बल्कि गुणवत्ता पर आधारित होती है। इसका विशेष महत्त्व चुनाव के समय होता है (सामान्य चुनाव के समय इसकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण होती है)।
  2. शाखा (Branch): यह काकस की अपेक्षा कम केन्द्रित प्रणाली है, इसके सदस्य अधिक विस्तृत होते हैं। इसमें दलों के नेता जनता के पास (सदस्यों के पास) जाते हैं और सदस्यता बढ़ाने का प्रयास करते हैं। (यह जनता को सरकार से जोड़ती है)।
  3. प्रकोष्ठ / सेल (Cell): यह फासीवादी तथा साम्यवादी दलों का आविष्कार है। यह शाखा की अपेक्षा छोटा होता है। इनकी दिलचस्पी चुनावी गतिविधियों की अपेक्षा गुप्त गतिविधियों में अधिक होती है। (यह गुप्त रूप से कार्य करता है)।
  4. मिलिशिया / नागरिक सेना (Militia): यह भी फासीवादी या तानाशाही दलों का आविष्कार है। ये एक विशेष प्रकार की 'प्राइवेट सेना' होते हैं। जैसे: हिटलर ने 'ब्राउन शर्ट्स' (Brown Shirts), मुसोलिनी ने 'ब्लैक शर्ट्स' (Black Shirts) तथा माओ ने 'लाल सेना' (Red Army) का निर्माण किया था। (यह सैन्य प्रकृति का होता है)।

(B) सदस्यता / प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण

डुवर्जर ने सदस्यता की प्रकृति के आधार पर दलों को दो प्रकारों में बाँटा है:

1. कैडर / संवर्ग पार्टी (Cadre Party)
  • कम्युनिस्ट पार्टी का निर्माण इसी आधार पर होता है।
  • इसमें चुनाव का महत्त्व कम होता है और आदेश 'ऊपर से नीचे' (Top-down) आते हैं। इसमें प्रतिनिधियों का चुनाव नीचे से ऊपर की ओर होता है।
  • नीतियों व कार्यक्रमों के निर्माण में प्रमुख व्यक्ति ही महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
2. जनदल / मास पार्टी (Mass Party)
  • ये मुख्य रूप से चुनाव लड़ने के लिए बनाए जाते हैं।
  • वर्तमान लोकतन्त्र में पार्टियाँ इसी 'जनदल' के नाम से जानी जाती हैं।
  • इसमें सदस्यता खुली होती है और संख्याबल पर जोर दिया जाता है।

(C) उत्पत्ति / विकास के आधार पर वर्गीकरण

उत्पत्ति तथा विकास के आधार पर डुवर्जर ने राजनीतिक दलों के दो प्रकार बताये हैं:

  • भीतर से उपजे दल (Internally created parties) - डुवर्जर ने इन्हें आन्तरिक उत्पत्ति वाला दल कहा है।
  • बाहर से उपजे दल (Externally created parties) - डुवर्जर ने इन्हें बाह्य उत्पत्ति वाला दल पुकारा है।

✦ 12. दलीय व्यवस्था के प्रकार (Types of Party Systems)

विभिन्न देशों में राजनीतिक दलों की संख्या और प्रभाव के आधार पर दलीय व्यवस्था को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है:

प्रणाली का प्रकार विशेषता / अर्थ प्रमुख उदाहरण
1. एक दलीय व्यवस्था
(One Party System)
ऐसे देश जहाँ केवल एक ही दल विशेष रूप से प्रभावशाली होता है, अन्य किसी दल का विशेष महत्त्व नहीं होता।

इसके दो उप-प्रकार हैं:
(i) एक दलीय प्रधान प्रणाली: जहाँ अन्य दल हैं लेकिन एक ही दल का दबदबा रहता है।
(ii) एक दलीय सर्वाधिकारवादी प्रणाली: जहाँ संविधान द्वारा ही केवल एक दल (साम्यवादी दल) को मान्यता प्राप्त होती है।
भारत (1989 तक कांग्रेस एक दलीय प्रधान के रूप में प्रसिद्ध रही)।

चीन (साम्यवादी देश)।
2. द्वि-दलीय व्यवस्था
(Bi-Party System)
जहाँ सत्ता मुख्य रूप से दो प्रमुख दलों के बीच ही केन्द्रित होती है। इंग्लैण्ड (UK) व संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)।
3. बहु-दलीय व्यवस्था
(Multi-Party System)
जहाँ दो से अधिक दल सक्रिय होते हैं। यह व्यवस्था मुख्यतः विकासशील देशों में पाई जाती है क्योंकि वहाँ धर्म, भाषा, जाति, क्षेत्र आदि के आधार पर कई दल बन जाते हैं। फ्रांस, भारत, स्विट्जरलैंड आदि।

✦ 13. द्वि-दलीय व्यवस्था (Bi-Party System) के गुण व दोष

ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जहाँ मुख्य रूप से दो राजनीतिक दल पाये जाते हैं, अन्य दल भी हो सकते हैं लेकिन उनका कोई विशेष प्रभाव नहीं होता, उसे द्वि-दलीय व्यवस्था कहते हैं। इसका सबसे श्रेष्ठ उदाहरण USA व UK (अमेरिका व ब्रिटेन) हैं।

■ द्वि-दलीय व्यवस्था के गुण (Merits)

  1. यह संसदीय प्रणाली के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती है।
  2. इसमें सरकार का स्थायित्व होता है।
  3. इसमें शासन में सरलता तथा दृढ़ता रहती है।
  4. इसमें विपक्ष की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। (इंग्लैण्ड में विपक्ष को 'छाया मंत्रिमण्डल' (Shadow Cabinet) कहा जाता है। अमेरिका में विपक्ष को 'निष्ठावान विपक्ष' कहा जाता है)।
  5. इसमें सरकार की सफलता व असफलता जनता के सामने स्पष्ट रहती है।

■ द्वि-दलीय व्यवस्था के दोष (Demerits)

  • मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित होने का डर रहता है।
  • मतदाताओं के पास विकल्पों का अभाव होता है (पसंद का अभाव)।
  • बहुमत दल की तानाशाही की संभावना।
  • राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बँट जाता है।

✦ 14. बहु-दलीय प्रणाली (Multi-Party System) के गुण व दोष

ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जिसमें दो से अधिक राजनीतिक दल पाये जाते हैं, बहु-दलीय प्रणाली कहलाती है। उदाहरण: भारत, फ्रांस, इटली आदि।

गुण (Merits)
  • मतदाता को पर्याप्त विकल्प मिल जाते हैं।
  • संसद में सब प्रकार के प्रतिनिधित्व प्राप्त हो जाते हैं।
  • तानाशाह सरकार की सम्भावना नहीं रहती है।
दोष (Demerits)
  • इसमें स्थायी दलीय व्यवस्था नहीं रहती (स्थायित्व का अभाव)।
  • कमजोर सरकारों का निर्माण होता है।
  • नीति निर्माण में विलम्ब व अनिश्चितता रहती है।
  • शासन सम्बन्धी दक्षता का अभाव रहता है।

✦ 15. दलीय व्यवस्था के सिद्धान्त (Theories of Party System)

विभिन्न विचारकों ने दलीय व्यवस्था की प्रकृति व कार्यप्रणाली को स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रमुख सिद्धान्त दिए हैं:

विचारक सिद्धान्त का नाम
रॉबर्ट मिचेल्स (Robert Michels) दलों का गुटतन्त्रीय सिद्धान्त (अल्पतन्त्र का लौह नियम)
एंथनी डाउन्स (Anthony Downs) दलीय सिद्धान्त (आर्थिक/समचतुष्कोणीय सिद्धान्त)
सारटोरी (Sartori) ध्रुवीय सिद्धान्त
डुवर्जर (Duverger) दलीय सिद्धान्त (संरचनात्मक)
लेनिन (Lenin) दलीय सिद्धान्त (साम्यवादी/लोकतांत्रिक केन्द्रवाद)

✦ 16. लेनिन, मिचेल्स और डाउन्स के सिद्धान्तों की व्याख्या

■ लेनिन का दलीय सिद्धान्त

लेनिन का कहना था कि साम्यवादी दल ऐसा दल है जहाँ प्रतिस्पर्द्धा का अभाव रहता है, क्योंकि यहाँ प्रतिस्पर्द्धा की आवश्यकता नहीं होती। साम्यवादी दल सम्पूर्ण जनता का प्रतिनिधित्व करता है।

लेनिन ने दलीय संगठन का निरूपण किया और 'लोकतांत्रिक केन्द्रवाद' (Democratic Centralism) शब्द का प्रयोग किया। इसका अर्थ है कि दल के सारे आदेश मजदूर वर्ग के प्रति उत्तरदायी होंगे। दल में कठोर अनुशासन होगा। निर्णय पूरे लोकतान्त्रिक वाद-विवाद के द्वारा लिये जायेंगे, लेकिन यदि एक बार कोई निर्णय ले लिया जाता है तो उसे पूरे अनुशासन के साथ लागू किया जायेगा।

■ रॉबर्ट मिचेल्स का गुटतन्त्रीय सिद्धान्त (Iron Law of Oligarchy)

रॉबर्ट मिचेल्स ने अपनी पुस्तक 'Political Parties' में अल्पतन्त्र या गुटतन्त्र का लौह नियम (Iron Law of Oligarchy) प्रतिपादित किया। इन्होंने कहा कि नेतृत्व का गुण एक वर्ग (गुट) में ही होता है, वही सम्पूर्ण दल का नेतृत्व करेगा। रॉबर्ट मिचेल्स मानते हैं कि 'सब दलों में पाया जाता है कि कुछ लोग ही शासन करते हैं और चुनाव में विशिष्ट वर्ग का अदला-बदली होती है'।

■ एंथनी डाउन्स का दलीय सिद्धान्त

इन्होंने चुनाव प्रतियोगिता के सिद्धान्त का निरूपण किया। इनके अनुसार राजनीतिक दल अधिकतम वोट बटोरने का साधन हैं। मतदाता विचारधारात्मक स्तर पर भिन्न-भिन्न दिशाओं में बंटे होते हैं और प्रत्येक राजनीतिक दल उन मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने का प्रयास करते हैं।

डाउन्स के इस विश्लेषण को 'तर्क संगत चयन ढांचा' (Rational Choice Framework) कहा जाता है (इसे समचतुष्कोणीय सिद्धान्त भी कहते हैं)।

✦ 17. सारटोरी (Sartori) का ध्रुवीय सिद्धान्त

सारटोरी ने अपनी पुस्तक 'Parties and Party Systems: A Framework for Analysis' में बहुदलीय प्रणाली का विश्लेषण प्रस्तुत किया। और दो तरह की बहुदलीय प्रणाली में अन्तर किया:

  1. संयमित (Moderate) बहु-दलीय प्रणाली: इसमें भी कई दल होते हैं लेकिन ध्रुवीकरण कम होता है।
  2. ध्रुवीकृत (Polarized) बहु-दलीय प्रणाली: ऐसी बहु-दलीय प्रणाली में ५ से अधिक दल हो सकते हैं, परन्तु उनकी दलीय पहचान इतने सारे विरोधी फासले नहीं खाती, चाहे वह शक्ति तीन या चार दलों तक सीमित रहती है।

निष्कर्ष: ध्रुवीकृत बहुदलीय प्रणाली राजनीतिक गतिहीनता को जन्म देती है, जो कभी-कभी लोकतन्त्र को ही छिन्न-भिन्न कर देती है। सारटोरी ने प्रसार एवं अप्रसार दलीय व्यवस्था में अन्तर किया।

✦ 18. डुवर्जर (Duverger) का सिद्धान्त

डुवर्जर ने अपने सिद्धान्त में दलों की उत्पत्ति की विस्तृत व्याख्या की है:

1. भीतर से उपजे दल (Internally Created Parties)

इन्हें डुवर्जर ने 'प्राकृतिक दल' भी कहा है। ये प्रायः आन्तरिक उत्पत्ति वाले दल होते हैं, जो किसी मुद्दे पर होने वाले वाद-विवाद के दौरान परस्पर विरोधी विचार रखने के कारण बनते हैं। जैसे— इंग्लैण्ड तथा फ्रांस में राजनीतिक दलों की उत्पत्ति मताधिकार के समय संसद के भीतर जन्म लेने से हुई।

2. बाहर से उपजे दल (Externally Created Parties)

ये संसद के बाहर जन्म लेते हैं, इनमें कठोर अनुशासन तथा केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति होती है। अपने सदस्यों पर नियन्त्रण रखने के लिये इनमें प्रायः एक विशाल संगठन पहले से उपलब्ध रहता है। ये दल 'भीतर से उपजे दलों' की अपेक्षा कम प्रभावशली रहते हैं।

डुवर्जर का नियम (Duverger's Law): डुवर्जर ने 'निर्वाचन प्रणालियों और दलीय व्यवस्था' में घनिष्ठ सम्बन्ध माना है। डुवर्जर ने समाजशास्त्रीय सिद्धान्त प्रतिपादित किया और बताया कि 'साधारण बहुमत प्रणाली (First-Past-The-Post)' द्विदलीय प्रणाली बनाने का काम करती है।
(बोन ने डुवर्जर के स्वाभाविक दोहरेपन की आलोचना की है)।

✦ 19. राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दल और गठबंधन सरकार

■ राष्ट्रीय दल (National Parties)

राष्ट्रीय दल वे होते हैं जिनका कार्यक्रम राष्ट्र स्तर के विषयों पर आधारित होता है, जो लगभग सभी राज्यों में चुनाव लड़ते हैं तथा केन्द्रीय सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। जिन्हें एक तय 'मानक' मतों से समर्थन प्राप्त होता है। (भारत में राष्ट्रीय दलों को दो भागों में बाँटा जाता है):

  1. विचारधारा वाले दल: ये ऐसे दल होते हैं जिनकी एक विचारधारा होती है, जिसके आधार पर वे राष्ट्रहित का पोषण करते हैं। जैसे— BJP (दक्षिणपंथी) और कम्युनिस्ट पार्टी (वामपंथ) के विचार से प्रभावित है।
  2. बिना विचारधारा वाले दल: ऐसे राजनीतिक दल जिनकी कोई निश्चित विचारधारा नहीं होती और समय एवं परिस्थितियों के अनुसार ये राष्ट्रहित का पालन करना चाहते हैं। जैसे— भारत में कांग्रेस।

■ क्षेत्रीय दल (Regional Parties)

ऐसे दल जो सामान्यतः एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र में क्षेत्रीय हितों को बढ़ावा देने की बात करते हैं। ये राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा क्षेत्रीय हितों को अधिक महत्त्व देते हैं। ये संकुचित हितों से प्रभावित होते हैं और ये विशेष रूप से राष्ट्रीय दलों के विरोधी होते हैं। भारत में ये जाति, भाषा व क्षेत्र पर आधारित होते हैं।

■ गठबंधन सरकार की सफलता की शर्तें

  • गठबंधन चुनाव के पूर्व हो।
  • गठबंधन में किसी एक दल की तानाशाही न हो।
  • गठबंधन के नेता को प्रत्येक दल के साथ समन्वय बनाना चाहिए।
  • प्रायः गठबंधन दलों के सभी सोच राष्ट्रीय होना चाहिए।

✦ 20. भारतीय राजनीतिक दलों की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में दलीय प्रणाली की कुछ अपनी विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो इसे अन्य देशों (जैसे अमेरिका या ब्रिटेन) से अलग बनाती हैं:

1. विचारधारा का अभाव
अधिकार दलों की कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं है।
2. करिश्माई नेतृत्व
नेताओं के व्यक्तिगत करिश्मे पर दल निर्भर करते हैं।
3. जाति, धर्म, भाषा पर आधारित
दलों का गठन सामाजिक पहचान के आधार पर।
4. धन व बल का प्रयोग
चुनावों में धन और बाहुबल का अत्यधिक प्रयोग।
5. दल-बदल की प्रवृत्ति
नेताओं का स्वार्थवश पार्टियाँ बदलना।
6. आन्तरिक लोकतन्त्र का अभाव
पार्टियों के भीतर चुनाव व लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की कमी।
  • निर्दलीयों की बढ़ती संख्या।

■ भारत में राजनीतिक दलों का विकास क्रम

भारत में राजनीतिक दलों का विकास कोई एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि समय-समय पर वे बनते रहे।

  • 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने अपना संविधान पहली बार बनाया।
  • 1925 में साम्यवादी (Communist) पार्टी ने राजनीतिक रूप धारण किया।
  • 1949: DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) की स्थापना।
  • 1964: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की स्थापना।
  • 1977: जनता पार्टी का उदय।
  • 1981: BJP (भारतीय जनता पार्टी) की स्थापना (जनसंघ से)।
  • 1983: तेलुगु देशम पार्टी (TDP)।
  • 1984: BSP (बहुजन समाज पार्टी)।
  • 1985: AGP (असम गण परिषद)।
  • 1992: समाजवादी पार्टी (SP)।

इस प्रकार राजनीतिक दल अस्तित्व में आते गए।

✍️21. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)

उपर्युक्त समग्र विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दल (Political Parties) लोकतन्त्र की प्राणवायु और रीढ़ की हड्डी हैं। यद्यपि इनका प्राथमिक उद्देश्य सत्ता की प्राप्ति होता है, परन्तु एक स्वस्थ लोकतन्त्र में ये जनमत के निर्माण और राष्ट्रीय हितों के संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के सन्दर्भ में संस्थागत, ऐतिहासिक संकट और विकासवादी सिद्धान्त यह प्रमाणित करते हैं कि दल समय, परिस्थिति और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार जन्म लेते हैं।

सारटोरी द्वारा दलीय विचारधारा और मॉरिस डुवर्जर द्वारा संगठन (काकस, शाखा, प्रकोष्ठ, मिलिशिया) के आधार पर किया गया वर्गीकरण दलीय व्यवस्था की आन्तरिक संरचना को समझने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, रॉबर्ट मिचेल्स (गुटतन्त्र का लौह नियम) और एंथनी डाउन्स (तर्क संगत चयन) के सिद्धान्त दलों की व्यावहारिक राजनीति को उजागर करते हैं।

जहाँ द्वि-दलीय व्यवस्था शासन में स्थायित्व प्रदान करती है, वहीं भारत और फ्रांस जैसे देशों में पाई जाने वाली बहु-दलीय व्यवस्था समाज के सभी वर्गों (भाषा, धर्म, जाति) को उचित प्रतिनिधित्व देती है। भारतीय सन्दर्भ में, क्षेत्रीय दलों का उदय और गठबंधन सरकारों (Coalition Governments) की राजनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतन्त्र में सत्ता का विकेन्द्रीकरण और जनसहभागिता निरन्तर बढ़ती जा रही है, भले ही इसके साथ दल-बदल और विचारधारा के अभाव जैसी चुनौतियाँ भी मौजूद हों।

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अगर आपने राजनीतिक दल, दलीय व्यवस्था और विचारकों के सिद्धान्त को अच्छी तरह से समझ लिया है, तो प्रैक्टिस करने के लिए हमने आपके लिए MCQs प्रैक्टिस सेट तैयार किया है।

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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. राजनीतिक दल का प्राथमिक और अन्तिम उद्देश्य क्या होता है?
राजनीतिक दल का प्राथमिक उद्देश्य 'जनमत का निर्माण' करना होता है तथा उसका अन्तिम उद्देश्य चुनाव लड़कर 'सत्ता की प्राप्ति' करना होता है।
Q2. 'अल्पतन्त्र का लौह नियम' (Iron Law of Oligarchy) का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया?
यह सिद्धान्त रॉबर्ट मिचेल्स (Robert Michels) ने अपनी पुस्तक 'Political Parties' में दिया था। उनके अनुसार दल का नेतृत्व अन्ततः कुछ चुनिंदा विशिष्ट लोगों (गुट) के हाथों में ही आ जाता है।
Q3. मॉरिस डुवर्जर ने संगठन के आधार पर राजनीतिक दलों के कौन-से 4 बुनियादी तत्त्व बताए हैं?
मॉरिस डुवर्जर ने संगठन के 4 बुनियादी तत्त्व बताए हैं: 1. काकस (Caucus), 2. शाखा (Branch), 3. प्रकोष्ठ/सेल (Cell), और 4. मिलिशिया/नागरिक सेना (Militia)।
Q4. राजनीतिक दलों की उत्पत्ति के सन्दर्भ में 'ऐतिहासिक संकट का सिद्धान्त' किसने दिया?
यह सिद्धान्त मुख्य रूप से ला पालोम्बारा (La Palombara) और मायरन वीनर (Myron Weiner) ने दिया, जिसमें तीन प्रमुख संकट बताए गए हैं: वैधता, सहभागिता, और प्रादेशिक एकीकरण का संकट।
Q5. सारटोरी (Sartori) द्वारा बहु-दलीय प्रणाली को किन दो भागों में बाँटा गया है?
सारटोरी ने बहु-दलीय प्रणाली को दो भागों में बाँटा है: 1. संयमित (Moderate) बहु-दलीय प्रणाली (जिसमें ध्रुवीकरण कम होता है) और 2. ध्रुवीकृत (Polarized) बहु-दलीय प्रणाली (जिसमें वैचारिक दूरियाँ बहुत अधिक होती हैं)।
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