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📢 "Polity Study Adda पर आपका स्वागत है!📜राजव्यवस्था रटना छोड़ दो, अब समझने की बारी है! 📜 यहाँ आपको TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET/JRF और UPSC, State PCS, SSC व अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए Political Science के प्रमाणित नोट्स और महत्वपूर्ण MCQs मिलेंगे। 📜"
INDIAN POLITY MCQs
POLITICAL THINKER MCQs
POLITICAL THEORY MCQs
COMPARATIVE POLITICS MCQs
PUBLIC ADMINISTRATION MCQs
INTERNATIONAL RELATION MCQs
INDIAN POLITY NOTES
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Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

Polity Study Adda पर TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET, UPSC, SSC सहित सभी One-Day प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजनीति विज्ञान और भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण MCQs और नोट्स पढ़ें। 'राजव्यवस्था रटने का नहीं, समझने का विषय है' — इसी मूल विचार के साथ, यह सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच है।

यहाँ हम संपूर्ण राजनीति विज्ञान से संबंधित उच्च-स्तरीय MCQs, विस्तृत नोट्स और तथ्यपूर्ण आर्टिकल्स नियमित रूप से अपलोड करते हैं। संविधान के अनुच्छेदों, शासन व्यवस्था और जटिल राजनीतिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाना ही हमारा लक्ष्य है।

यह एक निजी एजुकेशनल (शैक्षिक) पोर्टल है जिसे विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) विषय के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी सफलता का परचम लहराना चाहते हैं।

Polity Study Adda की मुख्य विशेषताएँ

  • विषयवार विस्तृत आर्टिकल्स: भारतीय राजव्यवस्था, राजनीतिक चिंतक, सिद्धांत, लोक प्रशासन और IR की संपूर्ण सामग्री।
  • उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): हर टॉपिक पर आधारित अति महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Questions) और Mock Tests।
  • परीक्षा-उपयोगी शॉर्ट नोट्स: त्वरित रिवीजन (Quick Revision) के लिए टू-द-पॉइंट (To-the-point) आर्टिकल्स।
  • सरल और स्पष्ट भाषा: कठिन से कठिन विषय को भी आसान शब्दों में समझाने का प्रयास।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग क्यों करना चाहिए?

राजनीति विज्ञान अक्सर छात्रों को केवल अनुच्छेदों (Articles) और अधिनियमों को याद रखने वाला विषय लगता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए आपको इसका उपयोग करना चाहिए क्योंकि:

  • यहाँ रटने के बजाय देश की व्यवस्था समझने पर जोर दिया जाता है।
  • यह TGT/PGT/LT और UGC NET के विस्तृत सिलेबस को कवर करता है, जिससे One-Day परीक्षाएँ स्वतः ही आसान हो जाती हैं।
  • परीक्षा के बदलते पैटर्न के अनुसार नवीनतम सामग्री लगातार अपडेट होती है।

Polity Study Adda वेबसाइट का उपयोग हम कैसे कर सकते हैं?

  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर Indian Polity, Political Thinker या Theory के सेक्शन में जाएं।
  • सर्च करें: किसी विशेष विषय (जैसे- मूल अधिकार, प्लेटो) के लिए सर्च बॉक्स का उपयोग करें।
  • रिवीजन और प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के बाद उसी विषय के MCQs और Mock Tests को हल करें।

प्रतियोगी परीक्षाओं में 'राजनीति विज्ञान' विषय का क्या महत्व है?

भारत में सिविल सेवा और शिक्षक भर्ती (Teaching Exams) जैसे क्षेत्रों में राजव्यवस्था की भूमिका निर्णायक होती है:

  • सामान्य अध्ययन (GS) का आधार: UPSC और State PCS में राजव्यवस्था (Polity) से संविधान और गवर्नेंस पर कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • स्कोरिंग विषय: यदि कॉन्सेप्ट क्लियर हों, तो राजनीति विज्ञान में पूरे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • सामाजिक और कानूनी समझ: यह विषय हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और देश की कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।

हम परीक्षाओं में राजनीति विज्ञान में अच्छे अंक कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

  • क्रमबद्ध अध्ययन: अनुच्छेदों को रटने के बजाय भागों और संबंधित अवधारणाओं के साथ पढ़ें।
  • मानक स्रोत: केवल प्रामाणिक पुस्तकों और Polity Study Adda जैसे सटीक प्लेटफॉर्म्स पर अध्ययन करें।
  • MCQs की प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के तुरंत बाद उससे जुड़े अधिक से अधिक बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें।
  • शॉर्ट नोट्स: एग्जाम के अंतिम दिनों के लिए खुद के की-वर्ड्स (Keywords) वाले नोट्स बनाएं।

भारत में सरकारी नौकरियां लोगों को क्यों पसंद हैं?

हमारे देश में सरकारी नौकरी (Government Job) को लेकर युवाओं में एक अलग ही जुनून देखने को मिलता है। इसे केवल एक रोज़गार नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता माना जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • करियर और जॉब सिक्योरिटी: प्राइवेट सेक्टर की अनिश्चितता के उलट, सरकारी सेवा में नौकरी जाने का डर न के बराबर होता है।
  • शानदार वेतन और सुविधाएं: आकर्षक सैलरी के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया (HRA) और मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं।
  • समाज में प्रतिष्ठा: सरकारी अफसर या शिक्षक बनने पर समाज और रिश्तेदारों के बीच सम्मान और रुतबा बढ़ता है।
  • तनावमुक्त पारिवारिक जीवन: फिक्स वर्किंग आवर्स और सरकारी छुट्टियों के कारण आप अपने परिवार को क्वालिटी टाइम दे पाते हैं।

सरकारी नौकरी हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

सरकारी नौकरी पाना रातों-रात का चमत्कार नहीं है; इसके लिए सही दिशा, अटूट धैर्य और स्मार्ट स्टडी की जरूरत होती है:

  • अपना फोकस साफ रखें: सबसे पहले तय करें कि आपको टीचिंग फील्ड (TGT, PGT, NET) में जाना है या प्रशासनिक सेवा (UPSC, PCS) में।
  • पाठ्यक्रम (Syllabus) से चिपके रहें: ऑफिशियल सिलेबस का प्रिंटआउट लें और पिछले 5-10 सालों के प्रश्न-पत्रों (Previous Year Papers) का बारीकी से अध्ययन करें।
  • प्रामाणिक अध्ययन सामग्री: 10 अलग-अलग किताबें पढ़ने से बेहतर है कि 1 अच्छी किताब को 10 बार पढ़ें। पॉलिटी के लिए Polity Study Adda के सटीक नोट्स फॉलो करें।
  • रोज़ाना प्रैक्टिस: सिर्फ थ्योरी पढ़ने से काम नहीं चलेगा। जो टॉपिक पढ़ें, तुरंत उसके MCQs हल करें और मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को सुधारें।

Polity Study Adda आपकी कैसे मदद कर सकता है?

  • सिलेबस-आधारित सामग्री: TGT, PGT, UPSC, NET/JRF के लेटेस्ट सिलेबस के अनुसार कंटेंट।
  • समय की बचत: आपको कई किताबें छानने की जरूरत नहीं, सभी प्रामाणिक स्रोतों का निचोड़ मिलता है।
  • मार्गदर्शन: किस परीक्षा के लिए क्या और कितना पढ़ना है, इसका सही मार्गदर्शन।

Polity Study Adda पर हमें भरोसा क्यों करना चाहिए?

  • तथ्यों की प्रामाणिकता: हमारा कंटेंट मानक राजनीतिक पुस्तकों और प्रामाणिक स्रोतों से अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है।
  • छात्र-हित सर्वोपरि: हमारा उद्देश्य भ्रामक जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्र की सफलता को सुनिश्चित करना है।
  • लगातार अपडेट्स: हम पुरानी सामग्री पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार कंटेंट को अपडेट करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Polity Study Adda वेबसाइट क्या है?

उत्तर: यह एक निजी शैक्षिक (Educational) पोर्टल है जो विशेष रूप से 'राजनीति विज्ञान' (Political Science) और 'भारतीय राजव्यवस्था' (Indian Polity) विषय की तैयारी कर रहे छात्रों (TGT, PGT, UPSC, NET आदि) के लिए बनाया गया है।

Q2. क्या यह एक सरकारी वेबसाइट है?

उत्तर: नहीं, यह एक निजी (Private) प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को मुफ्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।

Q3. यह वेबसाइट किन परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?

उत्तर: मुख्य रूप से Teaching Exams (TGT, PGT, LT Grade, UGC NET) और Civil Services (UPSC, State PCS, SSC, Railway) के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।

Q4. क्या यहाँ मुझे लोक प्रशासन (Public Administration) के नोट्स मिलेंगे?

उत्तर: हाँ, भारतीय राजव्यवस्था और राजनीतिक विचारकों के साथ-साथ आपको लोक प्रशासन और अन्तर्राष्ट्रीय संबंध (IR) के भी विस्तृत नोट्स और MCQs यहाँ प्राप्त होंगे。

Q5. क्या वेबसाइट पर केवल थ्योरी (Theory) पढ़ाई जाती है?

उत्तर: नहीं, थ्योरी के साथ-साथ आपकी प्रैक्टिस के लिए उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective MCQs) और मॉक टेस्ट भी उपलब्ध हैं。

Q6. क्या वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी प्रामाणिक है?

उत्तर: बिल्कुल, यहाँ उपलब्ध कराई गई सभी अध्ययन सामग्री मानक और प्रामाणिक राजनीतिक पुस्तकों के गहन अध्ययन के बाद ही तैयार की जाती है।

Q7. मैं इस वेबसाइट पर किसी विशेष टॉपिक की मांग कैसे कर सकता हूँ?

उत्तर: आप 'Contact Us' पेज पर जाकर या सीधे PolityStudyAdda@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से हमें अपने सुझाव और डिमांड भेज सकते हैं।

Q8. क्या पॉलिटी स्टडी अड्डा का कोई यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया ग्रुप है?

उत्तर: हाँ, आप वेबसाइट के फुटर (सबसे नीचे) में दिए गए लिंक के माध्यम से हमारे Telegram, WhatsApp और YouTube चैनल आदि से जुड़ सकते हैं।

Q9. भारत में सरकारी नौकरी (Government Job) की इतनी मांग क्यों है?

उत्तर: जॉब सिक्योरिटी, बेहतर वेतन, भत्ते और समाज में उच्च सम्मान के कारण सरकारी नौकरी युवाओं की पहली पसंद होती है।

Q10. मैं शिक्षक या सिविल सेवा परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

उत्तर: सिलेबस के अनुसार रणनीति बनाकर पढ़ने, प्रामाणिक स्रोतों (जैसे Polity Study Adda) का उपयोग करने और नियमित MCQs की प्रैक्टिस करने से सफलता निश्चित है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

'Polity Study Adda' पर प्रकाशित सभी अध्ययन सामग्री, नोट्स, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और अन्य सूचनाएं केवल छात्रों की परीक्षा की तैयारी और उनके त्वरित मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई हैं। इन्हें कानूनी दस्तावेज़ या अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि हमारी टीम ने सभी तथ्यों और उत्तरों को मानक पुस्तकों के आधार पर पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक रखने का हर संभव प्रयास किया है, लेकिन हम अनजाने में हुई किसी भी मानवीय त्रुटि, टाइपिंग की गलती या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

प्रश्नों के उत्तर और आयोग (Commissions) के संबंध में विशेष सूचना —
राजनीति विज्ञान जैसे विस्तृत विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में अक्सर यह देखा जाता है कि अलग-अलग भर्ती आयोग (Commissions) कभी-कभी एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तरों को सही मान लेते हैं, या विवाद की स्थिति में एक से अधिक विकल्पों को सही ठहरा देते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि किसी प्रश्न का उत्तर एक आयोग के अनुसार कुछ और होता है, जबकि दूसरे आयोग के अनुसार कुछ और। आधिकारिक 'उत्तर कुंजी' (Official Answer Key) और हमारे द्वारा दिए गए उत्तरों में भिन्नता होने की स्थिति में 'Polity Study Adda' किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

छात्रों को स्पष्ट रूप से सलाह दी जाती है कि किसी भी उत्तर या तथ्य की अंतिम पुष्टि के लिए वे संबंधित विभाग/आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, उनकी उत्तर कुंजी और मान्यता प्राप्त मानक पुस्तकों (Standard Books) का ही संदर्भ लें। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी संगठन या आयोग से संबद्ध नहीं है; यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और निजी शैक्षिक मंच है।

उदारवाद और व्यक्तिवाद: सम्पूर्ण सिद्धांत, प्रकार एवं विचारक | Polity Notes

उदारवाद का सिद्धांत: अर्थ, प्रकार, विकास एवं प्रमुख विचारक
उदारवाद (Liberalism) और व्यक्तिवाद: सम्पूर्ण सिद्धांत
Study Material Overview: Polity Study Adda के इस प्रीमियम पोस्ट में उदारवाद (Liberalism) और व्यक्तिवाद (Individualism) की विचारधारा को पूर्ण विस्तार से समझाया गया है। इस पोस्ट में उदारवाद का अर्थ, इसका वर्गीकरण, नकारात्मक उदारवाद, सकारात्मक उदारवाद, लोककल्याणकारी राज्य, नव-उदारवाद और प्रमुख विचारकों (जॉन लॉक, जेरेमी बेंथम, एडम स्मिथ, हर्बर्ट स्पेंसर, टी.एच. ग्रीन, लास्की, नोज़िक) के सिद्धांतों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है।

1. राजनीतिक विचारधारा: राज्य और व्यक्ति के संबंध

राज्य और व्यक्ति के बीच के सम्बन्धों के अध्ययन को 'राजनीतिक विचारधारा' के नाम से जाना जाता है। राजनीति में इसी विचारधारा का ही विशेष महत्व है, और इसी विचारधारा के मध्य लड़ाई होती है। जिस विचारधारा से जितने ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ जाते हैं, वह विचारधारा उतना ही शक्तिशाली हो जाती है।

व्यक्तिवाद (Individualism) समाजवाद / फासीवाद / आदर्शवाद
  • जो विचारधारा व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानती है, वह 'व्यक्तिवाद' कहलाती है।
  • कुछ विचारधारा ऐसी है जो राज्य को साध्य और व्यक्ति को साधन मानती है। यह व्यक्ति का हित राज्य में देखती है। इसमें समाजवाद, फांसीवाद और आदर्शवाद जैसी विचारधारा आती है।
महत्वपूर्ण बिंदु: लेकिन उदारवाद (Liberalism) एक ऐसी विचारधारा है जो राज्य को साधन और साध्य दोनों रूप में देखती है।

2. उदारवाद (Liberalism): अर्थ, जनक और उदय

उदारवाद के जनक जॉन लॉक (John Locke) माने जाते हैं, इनका जन्म इंग्लैण्ड में हुआ।

  • उदय: वैसे उदारवाद पुनर्जागरण आन्दोलन व धर्मसुधार आन्दोलन की देन है लेकिन 'उदारवाद' शब्द उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में औद्योगिक क्रांति के बाद सुना गया। इसके पहले इसे 'व्यक्तिवाद' के नाम से जाना जाता था।
  • मूलमंत्र: उदारवाद का मूलमंत्र है — स्वतंत्रता (अर्थात सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में स्वतंत्रता)।
  • शाब्दिक अर्थ: उदारवाद विवेक (Reason) पर आधारित है। उदारवाद 'उदार' और 'वाद' दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें 'उदार' का अर्थ है लचीला एवं परिवर्तनशील
  • प्रमुख तत्व: यहाँ उदारवाद से कई तत्वों का बोध होता है जैसे— लोकतंत्र में विश्वास करने वाला, विधि के शासन में आस्था, सहिष्णुता, शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक साधनों में विश्वास।
हम कह सकते हैं कि "उदारवाद विवेक पर आधारित एक ऐसी परिवर्तनशील एवं लचीली व्यवस्था है, जो विधि के शासन में विश्वास करते हुए और लोकतंत्र में आस्था रखते हुए समय एवं परिस्थितियों के अनुसार बदल जाता है।" यही कारण है कि आज उदारवाद के विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं जैसे— नकारात्मक उदारवाद, सकारात्मक उदारवाद, लोक कल्याणकारी राज्य और नव उदारवाद।

उदारवाद ने प्रारम्भ में व्यक्ति को महत्व दिया लेकिन आगे चलकर अपने समूह को महत्व दिया। उदारवाद ने प्रारम्भ में राज्य को एक 'साधन' के रूप में देखा लेकिन आगे चलकर 'साधन और साध्य' दोनों रूप में देखा।

3. उदारवाद का वर्गीकरण व ऐतिहासिक विकासक्रम

उदारवाद का विकासक्रम (Timeline of Liberalism)

1. प्राचीन काल में

  • नकारात्मक उदारवाद (Negative Liberalism)
  • अन्य नाम: परम्परागत उदारवाद / शास्त्रीय / व्यक्तिवाद / चिरसम्मत उदारवाद।

2. मध्यकाल में

  • सकारात्मक उदारवाद (समूहवाद)
  • इसी से लोककल्याणकारी राज्य (समाजवाद) का जन्म हुआ।

3. वर्तमान में

  • नव उदारवाद (Neo Liberalism)
  • इसमें उदारीकरण (सिद्धांत), निजीकरण (प्रक्रिया) और वैश्वीकरण (व्यावहारिक रूप) शामिल हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • प्राचीन काल: तानाशाही व्यवस्था थी, जहाँ राज्य की सर्वोच्चता स्थापित थी।
  • मध्यकाल: सामन्ती व्यवस्था और विशेषाधिकार मूलक व्यवस्था थी (किसान ➔ जमींदार ➔ जागीरदार ➔ राजा ➔ चर्च)। यहाँ भी राज्य की सर्वोच्चता थी।
  • 15वीं व 16वीं शताब्दी: पुनर्जागरण आन्दोलन चला जिसने 'स्वतंत्रता', 'समानता', और 'मानववाद' को जन्म दिया, जिससे व्यक्तिवाद का उदय हुआ।
प्रतिक्रिया का चक्र (Reaction Cycle):
नकारात्मक उदारवाद (व्यक्तिवाद) ने अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ाई ➔ जिसके परिणामस्वरूप मार्क्सवाद (Marxism) आया (जनता शोषित से लड़ने लगी) ➔ सकारात्मक उदारवादियों ने मार्क्सवाद से पूँजीवाद को बचाने के लिए सकारात्मक उदारवाद (लोककल्याणकारी राज्य) का जन्म दिया।

4. नकारात्मक उदारवाद / व्यक्तिवाद (Individualism)

15 वीं व 16 वीं शताब्दी में पुनर्जागरण आन्दोलन और धर्म सुधार आन्दोलन के परिणाम स्वरूप व्यक्तिवाद का जन्म हुआ। यही व्यक्तिवाद औद्योगिक क्रांति के बाद 19 वीं शताब्दी के मध्य में विभिन्न नामों से जाना गया जिसे— शास्त्रीय उदारवाद, परम्परागत उदारवाद या नकारात्मक उदारवाद या चिरसम्मत उदारवाद के नाम से जाना गया।

  • चूँकि प्राचीन काल व मध्यकाल में केवल राज्य की महत्ता को स्थापित किया गया और व्यक्ति की स्वतंत्रता को राज्य में विलीन कर दिया गया। अतः आधुनिक काल में पुनर्जागरण आन्दोलन ने स्पष्ट कर दिया कि "मानव ही सभी वस्तुओं का मापदण्ड है"। और इसी पुनर्जागरण आन्दोलन ने स्वतंत्रता और समानता को जन्म दिया जोकि व्यक्तिवाद का आधार स्तम्भ है।
  • राज्य की प्रकृति: व्यक्तिवाद की मान्यता है कि राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने आपस में मिलकर किया है, अतः राज्य एक कृत्रिम संस्था है। व्यक्तिवाद राज्य को साधन और व्यक्ति को साध्य मानता है।
  • व्यक्तिवाद कहता है: "समाज में रहने वाले व्यक्तियों के बीच कुछ आपसी मतभेद है, उनके बीच संघर्ष है या विवाद है; उसी सबका निपटारा करने के लिए राज्य का निर्माण किया गया है, अतः राज्य वर्गों में सहयोग या सामंजस्य बनाने वाली एक संस्था है।"

राज्य के न्यूनतम कार्य:

व्यक्ति ने राज्य को जो कार्य सौंपा है, राज्य को केवल उन्हीं कार्यो तक ही सीमित रहना चाहिए। व्यक्तिवाद राज्य को केवल आवश्यक कार्यो तक सीमित रखता है, लोक कल्याण का कार्य नहीं सौंपता। व्यक्तिवादियों के अनुसार "राज्य एक आवश्यक बुराई है"। राज्य एक पुलिस मैन (Night Watch man) की भाँति है।

वह कहता है कि व्यक्ति अपने हितो को स्वयं जानता है इसलिए उसे सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में खुला छोड़ देना चाहिए। अर्थात राज्य अहस्तक्षेप (Laissez-Faire) की नीति पर कार्य करे। व्यक्तिवादियों के अनुसार राज्य का आवश्यक कार्य निम्नलिखित है:

  1. सीमाओं की सुरक्षा करना
  2. शांति व्यवस्था बनाये रखना
  3. न्याय प्रदान करना
Note: व्यक्तिवादी राज्य को एक यंत्र की भाँति मानते है। व्यक्तिवादी मानते है प्राकृतिक रूप से सारे व्यक्ति बराबर है। व्यक्तिवादी राज्य व समाज दोनो को कृत्रिम संस्था मानते है (समाज = व्यक्तियों का योग)। सरकार लोक कल्याण के सारे कार्य बंद कर दे।
तीन बातें कहते है व्यक्तिवादी — राज्य एक आवश्यक बुराई है; न्यूनतम अंकुश; राज्य नाइट वाच मैन की तरह है।

यहाँ आवश्यक का अर्थ है सुरक्षा, शांति व्यवस्था और न्याय की स्थापना; तथा बुराई इसलिए है क्योंकि इसका ज्यादा हस्तक्षेप व्यक्ति की स्वतंत्रता को नष्ट कर देता है। ध्यान रहे कि व्यक्तिवादी या नकारात्मक स्वतंत्रता के पक्षधर 'स्वतंत्रता' को अधिक महत्व देते है।

व्यक्तिवाद मानता है कि व्यक्ति को जितनी स्वतंत्रता मिलेगी, व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास उतना ही अधिक करेगा। व्यक्तिवाद या नकारात्मक उदारवाद 'मध्यवर्ग' (उद्योगपति) का दर्शन है। यह पूँजीवाद के हितों का पोषक है। यह बाजारीकरण का समर्थक है।

5. राजनीतिक उदारवाद: जॉन लॉक और जेरेमी बेंथम

नकारात्मक उदारवाद (व्यक्तिवाद) को आगे बढ़ाने का श्रेय मुख्य रूप से दो विचारकों— जॉन लॉक (जनक) और जेरेमी बेंथम को जाता है。

(A) जॉन लॉक (John Locke) के विचार:

  • राजनीतिक उदारवाद के जनक लॉक माने जाते है। बेंथम ने इंग्लैण्ड में उदारवाद को दार्शनिक आधार प्रदान किया, जबकि इसको स्पेंसर ने चरम सीमा पर पहुँचाया।
  • लॉक ने सर्वप्रथम प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्त का प्रतिपादन करके व्यक्ति की महत्ता को स्थापित किया।
  • लॉक ने विशेषाधिकार (भेदभाव) पर प्रहार करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से जीवन, स्वतंत्रता और सम्पत्ति रूपी प्राकृतिक अधिकार समान रूप से प्राप्त है।
  • उसने सम्पत्ति के अधिकार को अधिक महत्व देते हुए उसमें जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार को निहित है।
  • वाहन ने लिखा है कि - लॉक के दर्शन का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की सम्पत्ति की सुरक्षा करना है। लॉक को मध्यवर्ग या पूँजीवाद की विचारधारा का जनक भी माना जाता है।
  • लॉक ने संवैधानिक सरकार, सीमित सरकार, उत्तरदायी सरकार, प्रतिनिधि सरकार, शक्तियों का विभाजन आदि विचारधारा का समर्थन किया।
  • लॉक ने स्पष्ट किया कि राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने आपस में एक समझौता करके किया है, अतः राज्य एक कृत्रिम संस्था है और उसके अधिकार क्षेत्र सीमित है। व्यक्तियों ने राज्य को इसलिए बनाया है कि वह उनके प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करे, यदि वह ऐसा नहीं कर पाता तो जनता बहुमत से सरकार को हटा सकती है।
  • लॉक का मानना है कि राज्य को कानून बनाकर व्यक्ति की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना चाहिए, व्यक्ति की स्वतंत्रता पर अन्य कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए। जैसा कि लॉक का कथन है— "विधि और स्वतंत्रता एक दूसरे के पूरक है।"
  • वाहन ने लिखा है कि - लॉक का सम्पूर्ण विचार व्यक्ति के इर्दगिर्द घूमता है। लॉक का कथन है— "समुदाय (जनता) एक ऐसे गृह स्वामी की तरह है जो अपने लिए पहरेदार की नियुक्ति करता है और फिर वह जाग जाग कर यह देखता रहता है कि पहरेदार कहीं सो तो नहीं गया है। यदि सोता हुआ मिलता है तो उसे हटाकर नये पहरेदार की नियुक्ति कर देता है।"
  • लॉक ने चर्च को राज्य से अलग करके धार्मिक सहिष्णुता के सिद्धान्त का भी प्रतिपादन किया।

(B) जेरेमी बेंथम (Jeremy Bentham) के विचार:

  • राजनीतिक उदारवाद को इंग्लैण्ड में दार्शनिक आधार बेंथम ने प्रदान किया। यद्यपि बेंथम उपयोगितावाद (Utilitarianism) के जनक है और वह 'अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख' की बात करते है।
  • लेकिन व्यक्तिवादियों की भाँति बेंथम भी राज्य के न्यूनतम कार्य के पक्षधर है।
  • बेंथम स्वतंत्रता के विरोधी है क्योंकि 'स्वतंत्रता एक प्राकृतिक अधिकार है'। बेंथम ने सुरक्षा को महत्व दिया और उसमे स्वतंत्रता को निहित माना।
  • बेंथम का कथन है— "लोग सुरक्षा चाहते है, स्वतंत्रता नहीं।" राज्य कानून का निर्माण करके व्यक्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
  • बेंथम का कथन है कि "कानून एक अनिवार्य दोष है।" इसका अर्थ यह है कि कानून सुरक्षा के लिए अनिवार्य है लेकिन अत्याधिक कानून असुरक्षा भी पैदा कर देता है।
  • बेंथम भी व्यक्तिवादियों की भाँति यह मानते है कि 'राज्य व्यक्ति के लिए है न कि व्यक्ति राज्य के लिए'।
  • बेंथम एडम स्मिथ से प्रभावित होकर आर्थिक क्षेत्र में राज्य के 'अहस्तक्षेप' के सिद्धान्त का समर्थन किया।
  • बेंथम ने कहा कि राज्य का आधार समझौता नहीं बल्कि उपयोगिता है; व्यक्तियों ने राज्य का निर्माण इसलिए किया है क्योकि वह एक उपयोगी संस्था है। राज्य का मूल्यांकन केवल एक ही आधार पर हो सकता है कि उसके द्वारा किया गया कार्य अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख के अनुकूल है या नहीं।
  • बेंथम को प्रतिनिधि लोकतंत्र का जनक भी माना जाता है, उन्होंने 'एक व्यक्ति और एक वोट' के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  • बेंथम प्राकृतिक कानून के विरोधी थे व कानूनी/वैधानिक कानून के समर्थक थे। आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितने भी कानून विद्यमान हैं, वह सब बेंथम की देन माने जाते हैं। डायसी का कथन है: "बेंथम विधि का प्रथम प्रतिपादक है।" सर हेनरी मैन का कथन है: "आज तक मैंने ऐसा कानून नहीं देखा जिस पर बेंथम का प्रभाव ना हो।"

वैज्ञानिक व्यक्तिवाद (Scientific Individualism):

  • व्यक्तिवाद की विचारधारा को स्पेंसर (Herbert Spencer) ने चरम सीमा पर पहुँचाया, इसलिए स्पेंसर को वैज्ञानिक व्यक्तिवाद का जनक माना जाता है।
  • राज्य एक आवश्यक बुराई है, राज्य एक पुलिस मैन की भाँति है और राज्य को न्यूनतम कार्य करना चाहिए, इस बात को सभी व्यक्तिवादी मानते है, लेकिन ये तीनों बाते स्पेंसर के नाम के साथ जुड़ गयी।
  • स्पेंसर समाजशास्त्री थे जिन्होंने 'शरीर सिद्धान्त' / 'सावयवी सिद्धान्त' (Organic Theory) दिया (भारतीय विचारधारा में कौटिल्य ने दिया)। समाज = शरीर है, व्यक्ति = अंग है।
  • डार्विन ने जीव विज्ञान के क्षेत्र में वही विचार दिया जो स्पेंसर ने समाजशास्त्र के क्षेत्र में दिया। जो अंग शरीर के अनुसार विकास करता है वही शरीर को लाभ देता है, समाज में रहने वाला व्यक्ति जब समाज में अपने आपको फिट न कर पाये तो उसका होना न होना एक है।
  • स्पेंसर ने "योग्यतम की उत्तरजीविता" (Survival of the fittest) का सिद्धांत दिया।
  • स्पेंसर का कथन: "राज्य और कानून एक दूसरे के विरोधी है।" पुस्तक: "The Man Versus The State" (व्यक्ति बनाम राज्य) और "Social Statics"
  • स्पेंसर तो यहां तक मानते हैं कि विधि और स्वतंत्रता एक दूसरे के विरोधी हैं। स्पेंसर का कथन है:

    "एक व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार जो करना चाहता है, वह करने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते दूसरे व्यक्ति के उसी प्रकार के कार्यों में कोई बाधा न आए।"
  • स्पेंसर ने अपनी पुस्तक Social Statics में कहा है कि एक आदर्श समाज वह समाज होगा जिसमे राज्य नाम की कोई संस्था ही न हो और प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए एकदम स्वतंत्र हो।
Note: ध्यान रहे कि व्यक्तिवादी राज्य को 'अम्पायर' या 'रेफरी' के रूप में देखते है और कहते है कि राज्य को अपने 3 आवश्यक कार्य करते हुए तटस्थ रहना चाहिए, और व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए खुला छोड़ देना चाहिए।

6. आर्थिक उदारवाद और वैज्ञानिक व्यक्तिवाद

आर्थिक उदारवाद (Economic Liberalism):

  • आर्थिक उदारवाद के जनक एडम स्मिथ (Adam Smith) माने जाते है। माल्थस और रिकार्डो इसके समर्थको में है।
  • एडम स्मिथ ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Wealth of Nations" (1776) में 'आर्थिक मानव' और 'लेसेजफेयर' (Laissez-Faire - अहस्तक्षेप) के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।
  • लेसेजफेयर का शाब्दिक अर्थ है— "मुझे अकेला छोड़ दो या चुप रहो"। इसे 'यद्भाव्यम् की नीति' भी कहते है। (अर्थात आर्थिक क्षेत्र में व्यक्ति को स्वतंत्र छोड़ दिया जाय)।
  • एडम स्मिथ का कथन है— "वाणिज्य और स्वतंत्रता एक दूसरे के पूरक है।"
  • एडम स्मिथ राष्ट्रीय आय को व्यक्तियों की आय का योग मानते है। और वह कहते है बाजार में प्रत्येक व्यक्ति को मुक्त प्रतियोगिता करने के लिए खुला छोड़ देना चाहिए। जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय में वृद्धि कर लेगा तो राष्ट्रीय आय में स्वमेव वृद्धि हो जायेगी।
  • इसी को 'नकारात्मक अर्थशास्त्र' भी कहते है। माल्थस ने जनसंख्या सिद्धान्त, रिकार्डो ने लगान सिद्धान्त और मजदूरी के लौह नियम का प्रतिपादन किया।

7. सकारात्मक उदारवाद (Positive Liberalism)

नकारात्मक उदारवाद या पूँजीवाद की विचारधारा ने समाज में दो वर्ग (अमीर और गरीब) को जन्म दे दिया। एक वर्ग मुक्त प्रतियोगिता का लाभ उठाकर अमीर बन गया, लेकिन समाज के अधिकांश व्यक्ति इस प्रतियोगिता में सफल नहीं हो पाये और अत्यधिक गरीब हो गए। इसी का लाभ उठाकर मार्क्सवाद (Marxism) आ गया, जिसने गरीबों के हितों की बात करके अमीरों के विरुद्ध क्रांति करने की सलाह दे डाली। अतः उदारवाद (पूँजीवाद) को मार्क्सवाद से बचाने के लिए नकारात्मक उदारवाद में संशोधन करके 'सकारात्मक उदारवाद' का विचार दिया गया।

सकारात्मक उदारवाद एक ऐसी विचारधारा है जो राज्य को एक सकारात्मक संस्था के रूप में देखती है और मनुष्य को एक 'सामाजिक प्राणी' के रूप में देखती है। इसका मानना है कि राज्य को सामाजिक हित में भी कार्य करना चाहिए।

प्रमुख विचारक और उनके सिद्धांत:

  • जे.एस. मिल (J.S. Mill): नकारात्मक उदारवाद को सकारात्मक उदारवाद में बदलने का पहला उल्लेखनीय प्रयास जे.एस. मिल ने किया। अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'The Principles of Political Economy' में मिल ने लिखा है कि "समाज में सभी व्यक्ति समानता के आधार पर जन्म नहीं लेते, इसलिए सामाजिक-आर्थिक विषमता स्वाभाविक है।" मिल ने कहा कि राज्य को सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में हस्तक्षेप करके इस विषमता को मिटाना चाहिए, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में राज्य के अहस्तक्षेप के सिद्धान्त का समर्थन किया। (मिल राज्य को शिक्षा और सामाजिक सुधार जैसे कार्य सौंपते हैं)।
  • टी.एच. ग्रीन (T.H. Green): ग्रीन ने मिल की कमियों को दूर किया। ग्रीन ने 'सामाजिक मानव' और सकारात्मक/हस्तक्षेपी राज्य का विचार प्रस्तुत किया। ग्रीन का मानना है कि "राज्य एक आवश्यक बुराई न होकर एक सकारात्मक भलाई है।" ग्रीन कहते हैं कि राज्य को अशिक्षा, नशाखोरी और दरिद्रता (गरीबी) जैसी समस्याओं को हल करना चाहिए। ग्रीन नकारात्मक स्वतंत्रता के स्थान पर सकारात्मक स्वतंत्रता का विचार देते हैं। ग्रीन का प्रसिद्ध कथन है— "स्वतंत्रता ऐसे कार्यों को करने या कराने का नाम है जो करने योग्य हो।" (यहाँ 'योग्यता' का अर्थ सामाजिक हित है)।
  • आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक उदारवाद: आर्थिक क्षेत्र में इसका समर्थन जे.एम. कीन्स (J.M. Keynes) ने किया ताकि बाजार में सामंजस्य व संतुलन बनाया जा सके। जे.के. गैलब्रेथ (J.K. Galbraith) ने अपनी पुस्तक 'The Affluent Society' और 'The New Industrial State' में औद्योगिक राज्य और मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) का विचार दिया।

8. लोककल्याणकारी राज्य (Welfare State)

यह भी उदारवाद की देन है। वास्तव में सकारात्मक उदारवाद का विस्तृत रूप ही लोककल्याणकारी राज्य है। लोककल्याणकारी राज्य शब्द का प्रयोग पहली बार मध्य काल में निरंकुश सत्ता के विरुद्ध आर्क विशप टेम्पिल (Archbishop Temple) ने अपनी पुस्तक 'Citizen and Churchman' में किया था। हॉबमैन (Hobman) के अनुसार— "लोककल्याणकारी राज्य उदारवाद और साम्यवाद के मध्य का मार्ग है।"

उदय और बेवरिज रिपोर्ट:

लोककल्याणकारी राज्य का उदय मुख्य रूप से इंग्लैण्ड में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ। इंग्लैण्ड के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली (Clement Attlee) ने 1944 में 'लॉर्ड विलियम बेवरिज' (William Beveridge) की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया। इस रिपोर्ट में समाज की 5 बुराइयों को दूर करने की बात कही गई:

  1. अशिक्षा (Ignorance) दूर करना
  2. बेरोजगारी (Idleness) दूर करना
  3. बीमारी (Disease) दूर करना
  4. अभावाभाव / गंदगी (Squalor) दूर करना
  5. दरिद्रता / गरीबी (Want) दूर करना

सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया और लोककल्याणकारी राज्य का जन्म हो गया। यह अमीरों पर विभिन्न प्रकार के टैक्स लगाकर उनसे धन एकत्रित करता है और गरीबों के कल्याण की योजनाएं बनाकर उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। (विनोबा भावे का कथन: "दुनिया में सभी पतित हैं क्योंकि अमीर कभी झुके नहीं और गरीब कभी उठे नहीं।")

प्रमुख विचारक:

  • हेराल्ड लास्की (H.J. Laski): लास्की पहले राजनीतिक विचारक हैं जिन्होंने विश्व का ध्यान 'पुलिस राज्य' की तरफ से 'लोककल्याणकारी राज्य' की तरफ आकर्षित किया। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'A Grammar of Politics' है। लास्की उद्योगों का राष्ट्रीयकरण करने के पक्षधर हैं। प्रसिद्ध कथन: "राज्य को उद्योगों पर नियंत्रण करना चाहिए, वरना उद्योग ही राज्य पर नियंत्रण कर लेंगे।" लास्की का मानना है कि राज्य को सामाजिक सुरक्षा, मुद्रा, शिक्षा, रोजगार और बीमारी उन्मूलन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
  • हॉबहाउस (Hobhouse): ये सामाजिक उदारवाद के समर्थक हैं। ये लोकतंत्रीय व्यवस्था व सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना चाहते थे।
  • मैकाइवर (MacIver): अपनी पुस्तक 'The Modern State' में लिखा कि आधुनिक राज्य का कार्य विभिन्न संघचरों (समूहों) के हितों में सामंजस्य स्थापित करना है। 'Democracy and Economic Challenge' में कहा कि उद्देश्य ऐसी व्यवस्था करना है जिसमें राज्य की छत्रछाया में सर्वसाधारण अभाव व असुरक्षा से पीड़ित न हो।
  • आर.एच. टॉनी (R.H. Tawney): लोकतंत्रीय समाजवाद के समर्थक। इन्होंने वर्ग संघर्ष और द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के स्थान पर नैतिकता और समाजवाद को आधार बनाया। कथन: "केवल उत्तम मनुष्य ही उत्तम समाज का निर्माण कर सकता है।" इनकी पुस्तकें 'The Acquisitive Society' (पूँजीवाद धन एकत्रित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है जिससे अमीर-गरीब दोनों भ्रष्ट हो जाते हैं) और 'Equality' (समानता का आशय सभ्यता के साधनों का विस्तार है) हैं।

9. समकालीन उदारवाद / नव-उदारवाद (Neo-Liberalism)

इसे 'नव उदारवाद' की संज्ञा दी जाती है। इसकी प्रेरणा उदारीकरण की प्रक्रिया से प्रारम्भ हुई। इसका उदय 1970 के दशक में इंग्लैण्ड में हुआ और व्यावहारिक रूप में 1980 के दशक में दिखाई पड़ा। इसके जनक रॉबर्ट नोज़िक (Robert Nozick) माने जाते हैं।

नव उदारवाद, लोककल्याणकारी राज्य के विरुद्ध एक 'प्रतिक्रिया' के रूप में आया। यह परम्परागत उदारवाद या पूँजीवाद को नये सिरे से स्थापित करने का एक प्रयास है। (मार्गरेट थैचर की नीतियां)।

नव-उदारवाद मुख्य रूप से दो रूपों में विभक्त है:

1. इच्छा स्वातंत्रवाद / स्वेच्छातंत्रवाद (Libertarianism)

  • इसके जनक रॉबर्ट नोज़िक माने जाते हैं। एफ. हेयक, आइज़िया बर्लिन, मिल्टन फ्रीडमैन आदि इसके प्रमुख समर्थक हैं।
  • यह विचारधारा नकारात्मक उदारवाद या पूँजीवाद को नये सिरे से स्थापित करने का प्रयास करती है।
  • इनका मानना है कि लोककल्याणकारी राज्य विषमताओं को मिटाने में असफल रहा है और इससे भ्रष्टाचार तेजी के साथ फैला है। लोक-कल्याणकारी कार्यों से व्यक्ति आलसी और कायर हो जाता है, उसकी कार्य करने की क्षमता घट जाती है और राजस्व घाटा बढ़ जाता है।
  • अतः राज्य को लोक कल्याण का कार्य तत्काल बंद कर देना चाहिए और राज्य को केवल न्यूनतम कार्यों (सुरक्षा, शांति और न्याय) तक सीमित हो जाना चाहिए। राज्य को आर्थिक क्षेत्र में अहस्तक्षेप की नीति अपनानी चाहिए।
  • दो रूप:
    (A) परिमिति या संमत स्वेच्छातंत्रवाद: ये लोग राज्य का पूर्णतः विरोध नहीं करते। रॉबर्ट नोज़िक ने राज्य को 'रात्रि प्रहरी' (Night Watchman) की संज्ञा दी।
    (B) चरम स्वेच्छातंत्रवाद: इसे अराजकतावादी भी कहा जाता है। इसका अर्थ है 'राज्य विहीनता'। ये सभी प्रकार के शासन को अवैध मानते हैं।

2. समकालीन सकारात्मक उदारवाद / समतावाद (Egalitarianism)

  • इसके जनक सी.बी. मैकफर्सन (C.B. Macpherson) माने जाते हैं। जॉन रॉल्स (John Rawls) और जॉन ग्रे (John Gray) इसके समर्थक हैं।
  • यह सकारात्मक उदारवाद और लोककल्याणकारी राज्य का समर्थक है। यह स्वतंत्रता और समानता में सामंजस्य स्थापित करता है।
  • इनका मानना है कि समाज एक श्रृंखला है और श्रृंखला की जो कड़ी कमजोर है उसे मजबूत बनाने के लिए राज्य को (समाज के कमजोर वर्गों के लिए) कार्य करना चाहिए। जहाँ स्वेच्छातंत्रवाद राज्य को नकारात्मक संस्था मानता है, वहीं समतावाद राज्य को एक सकारात्मक संस्था मानता है।

10. अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कार्ल पॉपर

कार्ल पॉपर (Karl Popper):
कार्ल पॉपर ने 'क्रमिक सामाजिक परिवर्तन' या 'खण्डशः सामाजिक परिवर्तन' (Piecemeal Social Engineering) का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। कार्ल पॉपर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Open Society and its Enemies' में मार्क्सवाद को 'मुक्त समाज' (बाजार व्यवस्था) का दुश्मन ठहराया है।
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