| अंतरराष्ट्रीय संबंध: संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) और प्रमुख वैश्विक संगठन |
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| Study Material Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत यह आर्टिकल राजनीति विज्ञान एवं सामान्य ज्ञान के अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations), संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के सभी अंग, प्रमुख संधियां (NPT, CTBT) और महत्वपूर्ण वैश्विक संगठनों (G-4, G-20) का विस्तृत समावेश है। यह मटेरियल UPSC, State PCS, SSC, UGC NET/JRF, TGT, PGT सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। |
- 1. दुनिया का विभाजन (Worlds Classification)
- 2. राष्ट्र संघ (League of Nations)
- 3. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) का परिचय
- 4. UNO के छः प्रमुख अंग (6 Organs of UNO)
- 5. सामाजिक एवं आर्थिक परिषद् के प्रमुख संगठन
- 6. UNO में भारत और VETO पावर का मुद्दा
- 7. संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा (Languages of UNO)
- 8. प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह एवं संधियाँ (G-4, G-7, G-20)
- 9. प्रमुख परमाणु संधियाँ (NPT, NSG, CTBT)
- 10. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Comprehensive Conclusion)
✦ 1. दुनिया का विभाजन (Worlds Classification)
- पहली दुनिया (First World): अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों को पहली दुनिया कहते हैं।
- दूसरी दुनिया (Second World): रूस तथा उसके सहयोगी देशों को दूसरी दुनिया कहते हैं।
- तीसरी दुनिया (Third World): वैसे विकासशील देश जो किसी भी गुट में नहीं गए; उन्हें तीसरी दुनिया या दक्षिणी दुनिया कहते हैं। जैसे- भारत।
✦ 2. राष्ट्र संघ (League of Nations)
- प्रथम विश्वयुद्ध पूर्णतः 1919 की वर्साय की संधि के द्वारा समाप्त हुआ।
- इसकी समाप्ति के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने जिनेवा में 'League of Nations' की स्थापना 10 जनवरी 1920 को की।
- इस संगठन ने उस समय विश्व से मलेरिया उन्मूलन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी।
- इसके पास अपनी कोई सेना नहीं थी और इसका मुख्यालय जिनेवा में था।
- जिस देश को इसका सदस्य बनना था उसे अपनी संसद से पहले अनुमति लेनी होती थी (अमेरिका खुद इसका सदस्य नहीं बन सका क्योंकि उसकी संसद ने अनुमति नहीं दी)।
- यह संगठन जापान द्वारा चीन पर आक्रमण नहीं रोक सका। जब जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया (जिससे द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ), तो यह पूरी तरह विफल रहा और इसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
✦ 3. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO)
- League of Nations की असफलता के बाद UNO की स्थापना की गई।
- इसका मुख्य उद्देश्य तृतीय विश्वयुद्ध को रोकना तथा सभी देशों में आपसी समन्वय व शांति स्थापित करना था।
- UNO के पास अपने सदस्य देशों के सहयोग से अपनी सेना उपस्थित है (जिसे पीसकीपिंग फोर्स कहा जाता है), जो उसे शक्ति प्रदान करती है।
स्थापना: 24 अक्टूबर 1945 को न्यूयॉर्क (USA) में की गई।
संस्थापक सदस्य: रूजवेल्ट (USA), चर्चिल (ब्रिटेन), स्टालिन (रूस), जॉर्ज क्लेमेशो (फ्रांस)।
✦ 4. UNO के छः प्रमुख अंग (6 Organs of UNO)
- न्यास (Trusteeship Council): यह अंग UNO के लिए सदस्य देशों के सहयोग से धन उपलब्ध कराता है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice - ICJ): यह नीदरलैंड के शहर हेग (Hague) में स्थित है। इसमें 15 जज होते हैं और प्रत्येक जज का कार्यकाल 9 वर्ष का होता है। भारतीय जज दलवीर भंडारी वर्तमान में इसमें कार्यरत हैं। (नगेन्द्र सिंह पहले भारतीय जज थे जो इस न्यायालय में पहुँचे थे)।
- सचिवालय (Secretariat): UNO के सभी प्रशासनिक कार्य सचिवालय के अधीन आते हैं। महासचिव इस सचिवालय पर निगरानी रखता है। महासचिव का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। ◆नार्वे के ट्रिग्वे ली (Trygve Lie) इसके पहले महासचिव थे। ★घाना के कोफी अन्नान तथा दक्षिणी कोरिया के वान-की-मुन दो बार महासचिव रहे।
- महासभा (General Assembly): यह UNO का सबसे बड़ा भाग है और UNO के सभी सदस्य देश इसके सदस्य होते हैं। इसे विश्व की लघु संसद कहा जाता है। इसका अधिवेशन वर्ष में कम-से-कम एक बार (सितंबर में न्यूयॉर्क में) अवश्य होता है। वर्तमान में इसमें 193 देश हैं (नवीनतम देश दक्षिणी सूडान- 2011)। विजयालक्ष्मी पंडित इसकी अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। ★ किसी नए देश को UNO के अंग बनाने के लिए महासभा तथा सुरक्षा परिषद से अनुमति लेनी होती है।
- सुरक्षा परिषद् (Security Council): इसका दायित्व पूरे विश्व में शांति स्थापित करना है, इसीलिए इसे दुनिया का Police Man कहते हैं। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं (5 स्थायी और 10 अस्थायी)। अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। स्थायी सदस्यों को विशेष 'Veto' शक्ति प्राप्त है।
Veto प्राप्त 5 देश हैं: (i) अमेरिका (ii) ब्रिटेन (iii) फ्रांस (iv) रूस (v) चीन। - सामाजिक एवं आर्थिक परिषद् (Economic and Social Council): यह परिषद् पूरे विश्व में मानव कल्याणकारी कार्य करती है। इसके अंतर्गत विश्व स्तर के कई प्रमुख संगठन काम करते हैं।
✦ 5. सामाजिक एवं आर्थिक परिषद् के प्रमुख संगठन
| क्र. सं. | संगठन का नाम | स्थापना | मुख्यालय |
|---|---|---|---|
| 1. | अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) | 1919 | जेनेवा |
| 2. | अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) | 1944 | मॉन्ट्रियल |
| 3. | संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) | 1945 | रोम |
| 4. | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) | 1945 | वाशिंगटन DC |
| 5. | विश्व बैंक (World Bank) | 1945 | वाशिंगटन DC |
| 6. | यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रेन फंड (UNICEF) | 1946 | न्यूयॉर्क |
| 7. | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) | 1948 | जेनेवा |
| 8. | विश्व मौसम विभाग (WMO) | 1951 | जेनेवा |
| 9. | अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (IAEA) | 1957 | वियना (ऑस्ट्रिया) |
| 10. | अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार संगठन (IMO) | 1958 | लंदन |
| 11. | संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) | 1965 | न्यूयॉर्क |
| 12. | संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) | 1966 | वियना (ऑस्ट्रिया) |
| 13. | विश्व व्यापार संगठन (WTO) | 1995 | जेनेवा |
| 14. | संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) | 2006 | जेनेवा |
✦ 6. UNO में भारत और VETO पावर का मुद्दा
■ भारत को Veto न मिलने के कारण (विपक्ष में तर्क)
- भारत का UNO में दिया जाने वाला आर्थिक बजट योगदान विकसित देशों की तुलना में बहुत ही कम है।
- कश्मीर मुद्दा अभी भी भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में विवादित बना हुआ है।
- भारत ने अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे CTBT और NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और परमाणु हथियार रखे हुए है।
- सभी वर्तमान वीटो सदस्य भारत को स्थायी सदस्यता देने के पक्ष में नहीं हैं (विशेषकर चीन खुलकर इसका विरोध करता है)।
■ भारत को Veto मिलने के कारण (पक्ष में तर्क)
- भारत का वित्तीय बजट भले ही कम है, किंतु भारत UNO को संकट के समय बड़ी संख्या में दवाइयाँ और वैश्विक शांति अभियानों (Peacekeeping Force) के लिए अपनी सेना उपलब्ध कराता है।
- भारत का स्पष्ट कहना है कि 'कश्मीर' एक द्विपक्षीय मुद्दा है, न कि कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा जिसमें तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप हो।
- भारत की परमाणु नीति "No First Use" (पहले हम प्रयोग नहीं करेंगे) की है, जो केवल देश की सुरक्षा के उद्देश्य से है।
- भारत 1945 से ही UNO का एक प्रतिबद्ध संस्थापक सदस्य रहा है।
- भारत विश्व का सबसे बड़ा, सफल और जीवंत लोकतंत्र है, जो वैश्विक मंच पर स्थायी सदस्यता का हकदार है।
✦ 7. संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा (Languages of UNO)
UNO में मुख्य रूप से 6 भाषाओं को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है, जो निम्नलिखित हैं:
- English (अंग्रेजी)
- French (फ्रेंच)
- Arabic (अरबी) - यह संयुक्त राष्ट्र में शामिल सबसे नवीनतम भाषा है।
- Spanish (स्पेनिश)
- Russian (रूसी)
- Chinese (मंडारिन)
महत्वपूर्ण नोट: इन 6 भाषाओं में से केवल अंग्रेजी (English) तथा फ्रेंच (French) ही UNO की मुख्य 'कार्यकारी' (Working) भाषाएं हैं, जिनमें दैनिक कामकाज होता है।
✦ 8. प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह एवं संधियाँ (G-4, G-7, G-20)
■ G-4 (Group of 4)
- यह चार प्रमुख देशों का एक शक्तिशाली संगठन है।
- यह चारों देश संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में 'स्थायी सदस्यता' (Veto Power) की मांग करते हैं और एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।
- इसकी स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी।
- इसके 4 सदस्य देश हैं: (1) ब्राजील (2) जर्मनी (3) भारत (4) जापान।
■ G-7 (Group of 7)
- यह विश्व के सबसे विकसित और औद्योगिक देशों का संगठन है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी।
- पहले इसमें रूस भी शामिल था, तब इसे G-8 कहा जाता था, लेकिन 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूस को हटा दिया गया।
- वर्तमान सदस्य: कनाडा, अमेरिका (USA), ब्रिटेन (UK), फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान।
■ G-20 (Group of 20)
- इसकी स्थापना वर्ष 1999 में हुई थी।
- यह विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देशों का एक बड़ा मंच है।
- यहाँ 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केन्द्रीय बैंक के गवर्नर और राष्ट्राध्यक्षों की वार्षिक बैठक होती है, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा की जाती है।
✦ 9. प्रमुख परमाणु संधियाँ (NPT, NSG, CTBT)
■ NPT (Nuclear Non-Proliferation Treaty) परमाणु अप्रसार संधि
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की स्थापना 1968 में हुई थी।
- इस भेदभावपूर्ण संधि के अनुसार 1974 से पहले जिन 5 देशों के पास परमाणु बम था केवल वही इसे रख सकते हैं, बाकी अन्य कोई देश परमाणु हथियार नहीं बना सकता।
- भारत ने इस संधि को भेदभावपूर्ण मानते हुए इस पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं।
- NPT के अनुसार अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, रूस, चीन यही परमाणु संपन्न देश हैं।
■ NSG (Nuclear Supplier Group)
- परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की स्थापना 1974 में हुई थी।
- यह वर्तमान में 48 देशों का समूह है जो शांतिपूर्ण कार्यों (जैसे बिजली उत्पादन, चिकित्सा) के लिए सदस्य देशों को यूरेनियम उपलब्ध कराता है। यह उन्हें ही यूरेनियम देता है जो NPT पर हस्ताक्षर किए हैं। जब तक NSG के 48 सदस्य सर्व सहमति से किसी सदस्य को मान्यता नहीं देते हैं तब तक उसे NSG का सदस्य नहीं बनाया जाता है।
- भारत इसका सदस्य बनना चाहता है, लेकिन चीन बार-बार भारत को इसका सदस्य बनने से वीटो लगाकर रोकता है।
■ CTBT (Comprehensive Test Ban Treaty)
- व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) की स्थापना 1996 में हुई थी।
- यह संधि जल, थल, तथा वायु कहीं पर भी नाभिकीय परीक्षण करने पर पूरी तरह से रोक लगाती है।
- भारत ने इस संधि पर भी हस्ताक्षर नहीं किया है, क्योंकि भारत का मानना है कि यह निशस्त्रीकरण की दिशा में एक पूर्ण प्रयास नहीं है। भारत ने भूमिगत (Underground) परमाणु परीक्षण (पोखरण) करके अपनी शक्ति साबित की है।
✦ 10. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Comprehensive Conclusion)
उपर्युक्त 9 बिन्दुओं के विस्तृत अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि 20वीं शताब्दी के विश्वयुद्धों की विभीषिका ने दुनिया को एक मजबूत वैश्विक मंच की आवश्यकता महसूस कराई, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) का उदय हुआ। सम्पूर्ण अध्ययन का समग्र निष्कर्ष निम्नलिखित बिन्दुओं में समझा जा सकता है:
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राष्ट्र संघ से संयुक्त राष्ट्र तक का सफर:
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद स्थापित राष्ट्र संघ (League of Nations) अपनी कमजोरियों (सैन्य शक्ति का अभाव) के कारण द्वितीय विश्वयुद्ध को टालने में विफल रहा। इसके सशक्त विकल्प के रूप में 1945 में UNO की स्थापना हुई, जिसके पास सदस्य देशों के सहयोग से बनी शांति रक्षक सेना है जो इसे अधिक प्रासंगिक और शक्तिशाली बनाती है। -
वैश्विक प्रशासन और 6 प्रमुख अंग:
UNO अपने 6 प्रमुख अंगों के माध्यम से दुनिया का संचालन करता है। जहाँ महासभा 'विश्व की लघु संसद' के रूप में काम करती है, वहीं सुरक्षा परिषद् 'दुनिया के पुलिसमैन' के रूप में अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करती है। इसके साथ ही, सामाजिक एवं आर्थिक परिषद् के अंतर्गत कार्यरत ILO, WHO, IMF और विश्व बैंक जैसे संगठन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, श्रम और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। -
भारत की भूमिका और VETO की दावेदारी:
'तीसरी दुनिया' का नेतृत्व करने वाला और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत ने शुरू से ही UNO में सक्रिय भूमिका निभाई है। G-4 संगठन के माध्यम से भारत सुरक्षा परिषद् में 'स्थायी सदस्यता (Veto Power)' की प्रबल माँग कर रहा है। यद्यपि चीन का वीटो और NPT/CTBT पर हस्ताक्षर न करना इसमें बाधाएँ हैं, लेकिन भारत की शांतिपूर्ण 'No First Use' परमाणु नीति और शांति अभियानों में निरंतर योगदान इसकी दावेदारी को मजबूत बनाते हैं। -
वैश्विक संगठन और परमाणु संधियाँ:
आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति केवल UNO तक सीमित नहीं है, बल्कि G-7 और G-20 जैसे शक्तिशाली आर्थिक समूह विश्व की अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय कर रहे हैं। वहीं, NPT, NSG और CTBT जैसी परमाणु संधियाँ विश्व को परमाणु युद्ध से बचाने का प्रयास तो करती हैं, परंतु इनका भेदभावपूर्ण स्वरूप विकासशील देशों के लिए हमेशा बहस का विषय रहा है।
सार-संक्षेप (Final Word): कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय संबंध शक्ति, सहयोग और कूटनीति का एक अत्यंत जटिल जाल है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) अपने विभिन्न संगठनों और संधियों के माध्यम से भले ही पूरी तरह से युद्धों को समाप्त न कर पाया हो, लेकिन इसने तृतीय विश्वयुद्ध को रोकने और पूरी दुनिया को एक साझा मंच प्रदान करने में निस्संदेह सबसे बड़ी और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
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