आदर्शवाद एवं हीगल : द्वन्द्वात्मक प्रत्ययवाद, राजनीतिक विचार 50 MCQs Test
| आदर्शवाद एवं हीगल (Hegel): 50 Premium MCQs Test |
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| Mock Test Overview: Polity Study Adda द्वारा प्रस्तुत यह प्रीमियम मॉक टेस्ट आदर्शवाद (Idealism), जर्मन व ब्रिटिश आदर्शवाद की शाखाओं, हीगल के द्वन्द्वात्मक प्रत्ययवाद (वाद, प्रतिवाद व संवाद) तथा राज्य और स्वतंत्रता संबंधी विचारों पर आधारित है। इसमें UPSC, PCS, RO/ARO, TGT, PGT और NET/JRF स्तर के कथन-कारण, कूट मिलान और 5-विकल्पों (A, B, C, D, E) वाले 50 अति महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं। |
1. पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन में भौतिकवाद (व्यक्तिवाद व उपयोगितावाद) और आदर्शवाद (Idealism) के मध्य मूलभूत अंतर क्या है?
सही उत्तर: B) भौतिकवाद बाह्य सुखों पर बल देते हुए व्यक्ति को साध्य मानता है, जबकि आदर्शवाद आंतरिक एवं नैतिक सुखों पर बल देते हुए राज्य को साध्य और व्यक्ति को साधन मानता है।
व्याख्या: व्यक्तिवादी (हॉब्स, लॉक, रूसो) और उपयोगितावादी (बेंथम, मिल) बाह्य व भौतिक सुखों पर केंद्रित हैं और व्यक्ति को साध्य मानते हैं, जबकि आदर्शवादी (काण्ट, हीगल, ग्रीन) नैतिकता व आंतरिक सुखों पर बल देते हुए राज्य को सर्वोच्च साध्य मानते हैं।
व्याख्या: व्यक्तिवादी (हॉब्स, लॉक, रूसो) और उपयोगितावादी (बेंथम, मिल) बाह्य व भौतिक सुखों पर केंद्रित हैं और व्यक्ति को साध्य मानते हैं, जबकि आदर्शवादी (काण्ट, हीगल, ग्रीन) नैतिकता व आंतरिक सुखों पर बल देते हुए राज्य को सर्वोच्च साध्य मानते हैं।
2. राजनीतिक दर्शन के रूप में 'आदर्शवाद' (Idealism) प्रमुख रूप से किस शताब्दी का दर्शन है और इसका मुख्य विकास किस देश में हुआ?
सही उत्तर: C) 19वीं शताब्दी - जर्मनी में
व्याख्या: आदर्शवाद 19वीं शताब्दी का प्रमुख राजनीतिक दर्शन है, जिसका मुख्य विकास जर्मनी में काण्ट, फिक्टे और हीगल जैसे दार्शनिकों के माध्यम से हुआ।
व्याख्या: आदर्शवाद 19वीं शताब्दी का प्रमुख राजनीतिक दर्शन है, जिसका मुख्य विकास जर्मनी में काण्ट, फिक्टे और हीगल जैसे दार्शनिकों के माध्यम से हुआ।
3. आदर्शवाद का मूल अर्थ है— "जो विचार में है, व्यवहार में नहीं।" इसी कारण आदर्शवाद को अन्य किन नामों से भी जाना जाता है?
सही उत्तर: B) प्रत्ययवाद, रहस्यवाद, कल्पनावाद और नैतिकतावाद
व्याख्या: चूँकि आदर्शवाद भौतिक वस्तु के स्थान पर 'विचार' (Idea/प्रत्यय) और नैतिकता को सर्वोच्च मानता है, इसलिए इसे प्रत्ययवाद, रहस्यवाद, कल्पनावाद और नैतिकतावाद भी कहा जाता है।
व्याख्या: चूँकि आदर्शवाद भौतिक वस्तु के स्थान पर 'विचार' (Idea/प्रत्यय) और नैतिकता को सर्वोच्च मानता है, इसलिए इसे प्रत्ययवाद, रहस्यवाद, कल्पनावाद और नैतिकतावाद भी कहा जाता है।
4. आदर्शवादी विचारकों ने राज्य (State) और व्यक्ति (Individual) के बीच किस प्रकार का सम्बन्ध स्वीकार किया है?
सही उत्तर: C) सावयवी सम्बन्ध (Organic Relationship)
व्याख्या: आदर्शवाद राज्य और व्यक्ति के बीच सावयवी (शरीर और अंग का) सम्बन्ध मानता है, जिसमें राज्य 'सम्पूर्ण' (अंशी/शरीर/परमात्मा) है और व्यक्ति उसका एक 'अंश' (अंग/आत्मा) मात्र है।
व्याख्या: आदर्शवाद राज्य और व्यक्ति के बीच सावयवी (शरीर और अंग का) सम्बन्ध मानता है, जिसमें राज्य 'सम्पूर्ण' (अंशी/शरीर/परमात्मा) है और व्यक्ति उसका एक 'अंश' (अंग/आत्मा) मात्र है।
5. आधुनिक आदर्शवाद का प्रेरणा स्रोत (Source of Inspiration) किस विचारक को माना जाता है और उनकी किस अवधारणा ने आदर्शवाद का आधार तैयार किया?
सही उत्तर: C) जीन-जैक्स रूसो - सामान्य इच्छा (General Will)
व्याख्या: आधुनिक आदर्शवाद के प्रेरणा स्रोत रूसो माने जाते हैं। रूसो द्वारा प्रतिपादित 'सामान्य इच्छा' (जो कि सर्वोच्च, नैतिक और अहस्तान्तरणीय है) ही आगे चलकर काण्ट और हीगल के आदर्शवाद का आधार बनी।
व्याख्या: आधुनिक आदर्शवाद के प्रेरणा स्रोत रूसो माने जाते हैं। रूसो द्वारा प्रतिपादित 'सामान्य इच्छा' (जो कि सर्वोच्च, नैतिक और अहस्तान्तरणीय है) ही आगे चलकर काण्ट और हीगल के आदर्शवाद का आधार बनी।
6. पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन में आधुनिक 'आदर्शवाद का जनक' (Father of Idealism) किसे माना जाता है?
सही उत्तर: A) इमैनुअल काण्ट (Immanuel Kant)
व्याख्या: इमैनुअल काण्ट को आधुनिक आदर्शवाद (तथा जर्मन आदर्शवाद) का जनक माना जाता है। उन्होंने रूसो के नैतिक स्वतंत्रता के विचारों को आगे बढ़ाते हुए आदर्शवाद की नींव रखी।
व्याख्या: इमैनुअल काण्ट को आधुनिक आदर्शवाद (तथा जर्मन आदर्शवाद) का जनक माना जाता है। उन्होंने रूसो के नैतिक स्वतंत्रता के विचारों को आगे बढ़ाते हुए आदर्शवाद की नींव रखी।
7. बहु-कथन प्रश्न: आदर्शवाद की प्रमुख विशेषताओं के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
1. राज्य एक नैतिक, सर्वशक्तिमान और निरंकुश संस्था है।
2. राज्य के परे और राज्य के बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
3. व्यक्ति अपने अधिकार, स्वतंत्रता और नैतिक विकास राज्य में रहकर ही प्राप्त कर सकता है।
4. राज्य केवल एक रात्रि-प्रहरी संस्था है जिसका नैतिकता से कोई संबंध नहीं है।
सही कूट:
2. राज्य के परे और राज्य के बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
3. व्यक्ति अपने अधिकार, स्वतंत्रता और नैतिक विकास राज्य में रहकर ही प्राप्त कर सकता है।
4. राज्य केवल एक रात्रि-प्रहरी संस्था है जिसका नैतिकता से कोई संबंध नहीं है।
सही उत्तर: A) केवल 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 4 असत्य है क्योंकि राज्य को 'रात्रि-प्रहरी' (Night-watchman) व्यक्तिवादी मानते हैं। आदर्शवादी राज्य को एक सर्वोच्च नैतिक संस्था मानते हैं जिसके बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
व्याख्या: कथन 4 असत्य है क्योंकि राज्य को 'रात्रि-प्रहरी' (Night-watchman) व्यक्तिवादी मानते हैं। आदर्शवादी राज्य को एक सर्वोच्च नैतिक संस्था मानते हैं जिसके बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
8. जर्मन आदर्शवाद (परम्परागत आदर्शवाद) से संबंधित विचारकों का सही क्रम क्या है, जिन्होंने इसे प्रारंभ करने से लेकर चरम सीमा तक पहुँचाया?
सही उत्तर: B) काण्ट ➔ फिक्टे ➔ हीगल
व्याख्या: जर्मन आदर्शवाद के जनक काण्ट हैं, फिक्टे ने इसे आगे बढ़ाया और हीगल ने इसे चरम सीमा (पूर्ण आदर्शवाद) पर पहुँचाया।
व्याख्या: जर्मन आदर्शवाद के जनक काण्ट हैं, फिक्टे ने इसे आगे बढ़ाया और हीगल ने इसे चरम सीमा (पूर्ण आदर्शवाद) पर पहुँचाया।
9. किस जर्मन दार्शनिक के विचारों में 'पूर्ण आदर्शवाद' का दर्शन होता है, जिसके कारण उन्हें 'परम प्रत्ययवाद का जनक' (Father of Absolute Idealism) माना जाता है?
सही उत्तर: C) जॉर्ज विल्हेम फ्रेडरिक हीगल (Hegel)
व्याख्या: जहाँ काण्ट के विचारों में व्यक्तिवाद व आदर्शवाद का समन्वय था, वहीं हीगल ने विश्वात्मा (ब्रह्म/पूर्ण विवेक) और राज्य को सर्वोच्च मानकर पूर्ण आदर्शवाद दिया, इसलिए उन्हें 'परम प्रत्ययवाद का जनक' कहा जाता है।
व्याख्या: जहाँ काण्ट के विचारों में व्यक्तिवाद व आदर्शवाद का समन्वय था, वहीं हीगल ने विश्वात्मा (ब्रह्म/पूर्ण विवेक) और राज्य को सर्वोच्च मानकर पूर्ण आदर्शवाद दिया, इसलिए उन्हें 'परम प्रत्ययवाद का जनक' कहा जाता है।
10. ब्रिटिश आदर्शवाद (नव-प्रत्ययवाद / आधुनिक आदर्शवाद) का जनक किसे माना जाता है और इसे चरम पर किसने पहुँचाया?
सही उत्तर: C) जनक: टी. एच. ग्रीन, चरम पर: बोसांके
व्याख्या: ब्रिटिश आदर्शवाद (नव-प्रत्ययवाद) के जनक टी. एच. ग्रीन हैं (जिन्होंने उदारवाद व आदर्शवाद का समन्वय किया), ब्रैडले ने इसे आगे बढ़ाया और बोसांके ने इसे पूर्ण आदर्शवाद (चरम) पर पहुँचाया।
व्याख्या: ब्रिटिश आदर्शवाद (नव-प्रत्ययवाद) के जनक टी. एच. ग्रीन हैं (जिन्होंने उदारवाद व आदर्शवाद का समन्वय किया), ब्रैडले ने इसे आगे बढ़ाया और बोसांके ने इसे पूर्ण आदर्शवाद (चरम) पर पहुँचाया।
11. कथन (Assertion) और कारण (Reason):
कथन (A): जर्मन विचारक काण्ट की तुलना ब्रिटिश विचारक टी. एच. ग्रीन से की जाती है, जबकि हीगल की तुलना बोसांके से की जाती है।
कारण (R): काण्ट और ग्रीन दोनों उदारवादी मूल्यों, अंतर्राष्ट्रीयता और विश्व शांति को महत्व देते हैं, जबकि हीगल और बोसांके दोनों पूर्ण आदर्शवादी एवं उग्र राष्ट्रवादी हैं।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): काण्ट और ग्रीन दोनों उदारवादी मूल्यों, अंतर्राष्ट्रीयता और विश्व शांति को महत्व देते हैं, जबकि हीगल और बोसांके दोनों पूर्ण आदर्शवादी एवं उग्र राष्ट्रवादी हैं।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: काण्ट (व्यक्तिवाद+आदर्शवाद) और ग्रीन (उदारवाद+आदर्शवाद) दोनों समन्वयवादी व विश्व शांति के समर्थक हैं, वहीं हीगल और बोसांके दोनों ही राज्य की निरंकुशता और अंध-राष्ट्रवाद के समर्थक हैं।
व्याख्या: काण्ट (व्यक्तिवाद+आदर्शवाद) और ग्रीन (उदारवाद+आदर्शवाद) दोनों समन्वयवादी व विश्व शांति के समर्थक हैं, वहीं हीगल और बोसांके दोनों ही राज्य की निरंकुशता और अंध-राष्ट्रवाद के समर्थक हैं।
12. ब्रिटेन में विकसित हुए 'नव-प्रत्ययवाद' (British Idealism) का एक प्रमुख व्यावहारिक उद्देश्य क्या माना जाता है?
सही उत्तर: B) जर्मन आदर्शवाद के उग्र प्रभाव से इंग्लैण्ड के उदारवाद एवं पूँजीवाद को बचाना।
व्याख्या: नव-प्रत्ययवाद (ग्रीन आदि) ने आदर्शवाद में उदारवादी मूल्यों का समन्वय किया ताकि जर्मन आदर्शवाद की निरंकुशता से बचा जा सके और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से इंग्लैण्ड के पूँजीवाद की रक्षा की जा सके।
व्याख्या: नव-प्रत्ययवाद (ग्रीन आदि) ने आदर्शवाद में उदारवादी मूल्यों का समन्वय किया ताकि जर्मन आदर्शवाद की निरंकुशता से बचा जा सके और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से इंग्लैण्ड के पूँजीवाद की रक्षा की जा सके।
13. महान दार्शनिक हीगल (Hegel) का जन्म सन् 1770 में कहाँ हुआ था और वे 1818 से मृत्युपर्यन्त (1831) किस विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे?
सही उत्तर: A) जन्म: स्टटगार्ट (दक्षिणी जर्मनी) — प्रोफेसर: बर्लिन विश्वविद्यालय
व्याख्या: हीगल का जन्म 1770 में दक्षिणी जर्मनी के स्टटगार्ट में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था और वे 1818 से 1831 तक बर्लिन विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक रहे।
व्याख्या: हीगल का जन्म 1770 में दक्षिणी जर्मनी के स्टटगार्ट में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था और वे 1818 से 1831 तक बर्लिन विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक रहे।
14. जर्मनी के इतिहास में कहा जाता है कि जिस प्रकार बिस्मार्क 'राजनीति की वाणी' थे तथा वान रून और वान मॉल्टके 'सेना की वाणी' थे, उसी प्रकार 'दर्शन की वाणी' कौन बन गया था?
सही उत्तर: C) हीगल (Hegel)
व्याख्या: बर्लिन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहते हुए हीगल की दार्शनिक ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि बड़े-बड़े शासक उनसे परामर्श लेते थे और उन्हें जर्मनी के 'दर्शन की वाणी' माना गया।
व्याख्या: बर्लिन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहते हुए हीगल की दार्शनिक ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि बड़े-बड़े शासक उनसे परामर्श लेते थे और उन्हें जर्मनी के 'दर्शन की वाणी' माना गया।
15. सूची-I (हीगल की प्रमुख पुस्तकें) को सूची-II (प्रकाशन वर्ष / विषय) के साथ सुमेलित करें:
a. The Phenomenology of Spirit
1. 1821 (प्रमुख राजनीतिक व राज्य सम्बन्धी विचार)
b. The Philosophy of Right
2. 1837 (मरणोपरांत - विश्व इतिहास का दर्शन)
c. Philosophy of History
3. 1807 (चैतन्य/विश्वात्मा का विकास)
सही उत्तर: B) a-3, b-1, c-2
व्याख्या: 'द फेनोमेनोलॉजी ऑफ स्पिरिट' (1807), 'द फिलॉसफी ऑफ राइट' (1821 - जिसमें उनके मुख्य राजनीतिक विचार हैं) और 'फिलॉसफी ऑफ हिस्ट्री' (1837) हीगल की प्रमुख कृतियाँ हैं।
व्याख्या: 'द फेनोमेनोलॉजी ऑफ स्पिरिट' (1807), 'द फिलॉसफी ऑफ राइट' (1821 - जिसमें उनके मुख्य राजनीतिक विचार हैं) और 'फिलॉसफी ऑफ हिस्ट्री' (1837) हीगल की प्रमुख कृतियाँ हैं।
16. "मनुष्य का मस्तिष्क हृदय से ऊँचा है।" हीगल का यह प्रसिद्ध कथन उनके दर्शन के किस पहलू को उजागर करता है?
सही उत्तर: B) उन्होंने अपने दर्शन में हृदय (भावना) के स्थान पर मस्तिष्क अर्थात् 'विवेक' को सर्वाधिक महत्व दिया।
व्याख्या: रूसो जहाँ भावना और अंतःकरण पर बल देते थे, वहीं हीगल ने बौद्धिकता और 'विवेक' (Reason) को सर्वोच्च माना और कहा कि मस्तिष्क हृदय से ऊँचा है।
व्याख्या: रूसो जहाँ भावना और अंतःकरण पर बल देते थे, वहीं हीगल ने बौद्धिकता और 'विवेक' (Reason) को सर्वोच्च माना और कहा कि मस्तिष्क हृदय से ऊँचा है।
17. हीगल के उग्र राष्ट्रवाद (नस्लवाद) के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
सही उत्तर: C) उसका मानना था कि एक समय में एक ही जाति को ईश्वर का साक्षात्कार होता है और यह अवसर 'जर्मन जाति' को प्राप्त है...
व्याख्या: हीगल उग्र राष्ट्रवादी था। उसने जर्मन राष्ट्र-राज्य को ईश्वर की अभिव्यक्ति माना और राष्ट्र के विस्तार तथा जीवंतता के लिए युद्ध को आवश्यक व नैतिक ठहराया।
व्याख्या: हीगल उग्र राष्ट्रवादी था। उसने जर्मन राष्ट्र-राज्य को ईश्वर की अभिव्यक्ति माना और राष्ट्र के विस्तार तथा जीवंतता के लिए युद्ध को आवश्यक व नैतिक ठहराया।
18. "विश्व बन्धुत्व की भावना एक मूर्खतापूर्ण आविष्कार है।" यह कथन किस राजनीतिक दार्शनिक का है?
सही उत्तर: C) हीगल (Hegel)
व्याख्या: हीगल पक्का राष्ट्रवादी था और अंतर्राष्ट्रीयता या विश्व शांति से उसका कोई सरोकार नहीं था; इसीलिए उसने विश्व बन्धुत्व (Cosmopolitanism) की भावना को मूर्खतापूर्ण आविष्कार कहा।
व्याख्या: हीगल पक्का राष्ट्रवादी था और अंतर्राष्ट्रीयता या विश्व शांति से उसका कोई सरोकार नहीं था; इसीलिए उसने विश्व बन्धुत्व (Cosmopolitanism) की भावना को मूर्खतापूर्ण आविष्कार कहा।
19. इतिहास के दर्शन के सन्दर्भ में यह प्रसिद्ध कथन किसका है कि— "इतिहास बुद्धिमानों का मार्ग प्रशस्त करता है और मूर्खों को घसीटता है" तथा "विश्व इतिहास विश्व का निर्णय (न्यायालय) है"?
सही उत्तर: B) हीगल (Hegel)
व्याख्या: हीगल ने ऐतिहासिक एवं विकासवादी पद्धति को महत्व देते हुए इतिहास को विश्वात्मा (विवेक) की यात्रा माना और कहा कि जो इसके नियम को समझते हैं इतिहास उनका मार्ग प्रशस्त करता है और मूर्खों को घसीटता है।
व्याख्या: हीगल ने ऐतिहासिक एवं विकासवादी पद्धति को महत्व देते हुए इतिहास को विश्वात्मा (विवेक) की यात्रा माना और कहा कि जो इसके नियम को समझते हैं इतिहास उनका मार्ग प्रशस्त करता है और मूर्खों को घसीटता है।
20. 20वीं शताब्दी में उदय हुए फासीवाद (Fascism) और हिटलर के नाजीवाद का वैचारिक प्रेरणा स्रोत किसे माना जाता है?
सही उत्तर: C) हीगल के दर्शन और आदर्शवाद (Idealism) को
व्याख्या: राज्य को सर्वशक्तिमान व निरंकुश मानने तथा जर्मन जाति की श्रेष्ठता व युद्ध के महिमामंडन संबंधी जो विचार हीगल ने सैद्धांतिक रूप में दिए थे, हिटलर और मुसोलिनी ने उन्हीं को व्यवहार में उतारा।
व्याख्या: राज्य को सर्वशक्तिमान व निरंकुश मानने तथा जर्मन जाति की श्रेष्ठता व युद्ध के महिमामंडन संबंधी जो विचार हीगल ने सैद्धांतिक रूप में दिए थे, हिटलर और मुसोलिनी ने उन्हीं को व्यवहार में उतारा।
21. हीगल ने अपनी प्रसिद्ध 'द्वन्द्वात्मक पद्धति' (Dialectical Method) का विचार मूल रूप से किस प्राचीन यूनानी दार्शनिक से ग्रहण किया था?
सही उत्तर: A) प्लेटो (Plato) से
व्याख्या: द्वन्द्वात्मक पद्धति (Dialogue/तर्क-वितर्क द्वारा सत्य तक पहुँचना) का प्रयोग प्राचीन यूनान में सुकरात और प्लेटो ने किया था। हीगल ने इसी विचार को प्लेटो से लेकर ऐतिहासिक विकास पर लागू किया।
व्याख्या: द्वन्द्वात्मक पद्धति (Dialogue/तर्क-वितर्क द्वारा सत्य तक पहुँचना) का प्रयोग प्राचीन यूनान में सुकरात और प्लेटो ने किया था। हीगल ने इसी विचार को प्लेटो से लेकर ऐतिहासिक विकास पर लागू किया।
22. हीगल के 'द्वन्द्वात्मक प्रत्ययवाद' (Dialectical Idealism) की प्रक्रिया किन तीन चरणों के माध्यम से पूरी होती है?
सही उत्तर: C) वाद (Thesis), प्रतिवाद (Antithesis) और संवाद (Synthesis)
व्याख्या: हीगल के अनुसार हर विचार (वाद) में कुछ अपूर्णता होती है जिससे उसका विरोधी विचार (प्रतिवाद) जन्म लेता है; दोनों के संघर्ष से असत्य नष्ट होता है और दोनों के सत्य तत्वों से उच्चतर अवस्था (संवाद) बनती है।
व्याख्या: हीगल के अनुसार हर विचार (वाद) में कुछ अपूर्णता होती है जिससे उसका विरोधी विचार (प्रतिवाद) जन्म लेता है; दोनों के संघर्ष से असत्य नष्ट होता है और दोनों के सत्य तत्वों से उच्चतर अवस्था (संवाद) बनती है।
23. द्वन्द्वात्मक प्रक्रिया में जब 'संवाद' (Synthesis) में असत्यता के तत्व आने पर वह पुनः 'वाद' बन जाता है और उत्थान-पतन की यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, तो इसे क्या कहा जाता है?
सही उत्तर: B) निषेध का निषेध (Negation of Negation)
व्याख्या: वाद का निषेध प्रतिवाद करता है और प्रतिवाद का निषेध संवाद करता है। जब तक पूर्ण सत्य (ब्रह्म/राष्ट्र-राज्य) की प्राप्ति नहीं हो जाती, तब तक 'निषेध का निषेध' की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।
व्याख्या: वाद का निषेध प्रतिवाद करता है और प्रतिवाद का निषेध संवाद करता है। जब तक पूर्ण सत्य (ब्रह्म/राष्ट्र-राज्य) की प्राप्ति नहीं हो जाती, तब तक 'निषेध का निषेध' की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।
24. हीगल के द्वन्द्वात्मक विकास के अनुसार 'ऐतिहासिक राज्य विकास' के सन्दर्भ में वाद, प्रतिवाद और संवाद का सही क्रम क्या है?
सही उत्तर: A) वाद: यूनानी नगर-राज्य ➔ प्रतिवाद: धर्म-राज्य ➔ संवाद: राष्ट्र-राज्य
व्याख्या: हीगल ने ऐतिहासिक दृष्टि से यूनानी नगर-राज्य को 'वाद', मध्यकालीन ईसाई धर्म-राज्य को उसका 'प्रतिवाद' और आधुनिक राष्ट्र-राज्य को दोनों के समन्वय रूपी 'संवाद' माना है।
व्याख्या: हीगल ने ऐतिहासिक दृष्टि से यूनानी नगर-राज्य को 'वाद', मध्यकालीन ईसाई धर्म-राज्य को उसका 'प्रतिवाद' और आधुनिक राष्ट्र-राज्य को दोनों के समन्वय रूपी 'संवाद' माना है।
25. हीगल के सर्वाधिक प्रसिद्ध संस्थागत द्वन्द्व में 'परिवार' (Family) वाद है और 'नागरिक समाज' (Civil Society) प्रतिवाद है; इन दोनों के संवाद (Synthesis) से किसका जन्म होता है?
सही उत्तर: C) राष्ट्र-राज्य (State) का
व्याख्या: परिवार (प्रेम व एकता पर आधारित - वाद) और नागरिक समाज (प्रतिस्पर्धा व स्वार्थ पर आधारित - प्रतिवाद) के उच्चतर समन्वय (संवाद) से ही सर्वोच्च नैतिक संस्था 'राज्य' का उदय होता है।
व्याख्या: परिवार (प्रेम व एकता पर आधारित - वाद) और नागरिक समाज (प्रतिस्पर्धा व स्वार्थ पर आधारित - प्रतिवाद) के उच्चतर समन्वय (संवाद) से ही सर्वोच्च नैतिक संस्था 'राज्य' का उदय होता है।
26. हीगल ने शासन प्रणाली के विकास में 'निरंकुश राजतंत्र' को वाद और 'प्रजातंत्र (लोकतंत्र)' को प्रतिवाद माना है। उसके अनुसार इन दोनों का संवाद (सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली) क्या है?
सही उत्तर: C) संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy)
व्याख्या: हीगल ने निरंकुश राजतंत्र (वाद) और प्रजातंत्र (प्रतिवाद) के गुणों के मिलन से बनने वाले 'संवैधानिक राजतंत्र' को संवाद और सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली माना।
व्याख्या: हीगल ने निरंकुश राजतंत्र (वाद) और प्रजातंत्र (प्रतिवाद) के गुणों के मिलन से बनने वाले 'संवैधानिक राजतंत्र' को संवाद और सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली माना।
27. "विकास कभी सीधी रेखा में नहीं होता, बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी रेखा (Zig-Zag Line) में होता है।" हीगल ने विकास की इस प्रक्रिया को समझाने के लिए किसका उदाहरण दिया है?
सही उत्तर: A) एक छोर से दूसरे छोर पर जाने वाले पोत (जहाज / Ship) का
व्याख्या: हीगल के अनुसार जिस प्रकार एक पोत (जहाज) को नदी या समुद्र के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए हवा और लहरों के बीच टेढ़ी-मेढ़ी रेखा में चलना पड़ता है, वैसे ही विश्व का विकास भी वाद-प्रतिवाद की टेढ़ी-मेढ़ी प्रक्रिया से होता है।
व्याख्या: हीगल के अनुसार जिस प्रकार एक पोत (जहाज) को नदी या समुद्र के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए हवा और लहरों के बीच टेढ़ी-मेढ़ी रेखा में चलना पड़ता है, वैसे ही विश्व का विकास भी वाद-प्रतिवाद की टेढ़ी-मेढ़ी प्रक्रिया से होता है।
28. दार्शनिक दृष्टि से हीगल एक 'अद्वैतवादी' (Monist) विचारक है। उसके अनुसार इस संसार का पूर्ण विकास कब होगा?
सही उत्तर: B) जब यह संसार पूर्णता को प्राप्त कर 'ब्रह्म' (विश्वात्मा) में समाहित हो जाएगा।
व्याख्या: अद्वैतवादी होने के कारण हीगल ब्रह्म (विश्वात्मा/Absolute Idea) और उसके विचार के अतिरिक्त अन्य किसी को परम सत्य नहीं मानता; संसार का अंतिम लक्ष्य उसी ब्रह्म में लीन होना है।
व्याख्या: अद्वैतवादी होने के कारण हीगल ब्रह्म (विश्वात्मा/Absolute Idea) और उसके विचार के अतिरिक्त अन्य किसी को परम सत्य नहीं मानता; संसार का अंतिम लक्ष्य उसी ब्रह्म में लीन होना है।
29. किस दार्शनिक के ब्रह्म (या राज्य) के बारे में यह प्रसिद्ध उपमा दी जाती है कि— "उसका ब्रह्म एक ऐसे शेर की गुफा के समान है जिसमें जाते हुए तो सभी दिखाई पड़ते हैं, लेकिन बाहर आते हुए कोई दिखाई नहीं देता"?
सही उत्तर: C) हीगल (Hegel)
व्याख्या: हीगल के दर्शन में सभी संस्थाएँ और व्यक्ति अंततः ब्रह्म (और राजनीतिक रूप से निरंकुश राज्य) में पूरी तरह समाहित हो जाते हैं और उनका स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाता है; इसी पर 'शेर की गुफा' वाली उपमा दी गई है।
व्याख्या: हीगल के दर्शन में सभी संस्थाएँ और व्यक्ति अंततः ब्रह्म (और राजनीतिक रूप से निरंकुश राज्य) में पूरी तरह समाहित हो जाते हैं और उनका स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाता है; इसी पर 'शेर की गुफा' वाली उपमा दी गई है।
30. हीगल का विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक सूत्र है— "सत् ही सत्ता है और सत्ता ही सत् है" (Real is Rational and Rational is Real)। इसका वास्तविक अर्थ क्या है?
सही उत्तर: B) जो बौद्धिक (विवेकपूर्ण) है वह बोधगम्य/वास्तविक है, और जो बोधगम्य/वास्तविक है वह बौद्धिक है।
व्याख्या: हीगल ने ब्रह्म को 'पूर्ण विवेक' माना है। उसके अनुसार जो कुछ भी संसार में वास्तविक रूप से अस्तित्वमान है (जैसे राज्य), वह विवेक (Reason) की ही अभिव्यक्ति है।
व्याख्या: हीगल ने ब्रह्म को 'पूर्ण विवेक' माना है। उसके अनुसार जो कुछ भी संसार में वास्तविक रूप से अस्तित्वमान है (जैसे राज्य), वह विवेक (Reason) की ही अभिव्यक्ति है।
31. "राज्य पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार है (या ईश्वर की शोभायात्रा / पैदल यात्रा / महायात्रा है)।" (The State is the march of God on earth.) यह विश्वप्रसिद्ध कथन किसका है?
सही उत्तर: D) हीगल (Hegel)
व्याख्या: हीगल ने दार्शनिक क्षेत्र में जो स्थान ईश्वर (ब्रह्म) को दिया, राजनीतिक क्षेत्र में वही स्थान राज्य को देते हुए राज्य को पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार घोषित किया।
व्याख्या: हीगल ने दार्शनिक क्षेत्र में जो स्थान ईश्वर (ब्रह्म) को दिया, राजनीतिक क्षेत्र में वही स्थान राज्य को देते हुए राज्य को पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार घोषित किया।
32. बहु-कथन प्रश्न: राज्य (State) के स्वरूप के सन्दर्भ में हीगल के विचारों की पहचान करें:
1. राज्य नैतिकता का विराट रूप है।
2. राज्य पूर्ण विवेक (Absolute Reason) है।
3. राज्य एक सर्वशक्तिमान और निरंकुश संस्था है, जिसके बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
4. राज्य साधारण नैतिकता (जैसे सामान्य अच्छाई-बुराई के नियमों) के अधीन रहकर कार्य करता है।
सही कूट:
2. राज्य पूर्ण विवेक (Absolute Reason) है।
3. राज्य एक सर्वशक्तिमान और निरंकुश संस्था है, जिसके बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
4. राज्य साधारण नैतिकता (जैसे सामान्य अच्छाई-बुराई के नियमों) के अधीन रहकर कार्य करता है।
सही उत्तर: A) केवल 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 4 असत्य है। हीगल के अनुसार राज्य स्वयं सर्वोच्च नैतिकता का सृजक है, इसलिए वह व्यक्तियों पर लागू होने वाली साधारण नैतिकता (अच्छाई-बुराई आदि के नियमों) से बंधा हुआ नहीं है।
व्याख्या: कथन 4 असत्य है। हीगल के अनुसार राज्य स्वयं सर्वोच्च नैतिकता का सृजक है, इसलिए वह व्यक्तियों पर लागू होने वाली साधारण नैतिकता (अच्छाई-बुराई आदि के नियमों) से बंधा हुआ नहीं है।
33. "जिस प्रकार आत्मा अपना सब कुछ परमात्मा में प्राप्त कर सकती है, उसी प्रकार से व्यक्ति अपना सब कुछ राज्य में ही रहकर प्राप्त कर सकता है।" यह कथन किस विचारधारा और किस विचारक का प्रतिनिधित्व करता है?
सही उत्तर: C) आदर्शवाद (परम प्रत्ययवाद) - हीगल
व्याख्या: हीगल ने राज्य की तुलना परमात्मा से और व्यक्ति की तुलना आत्मा से करते हुए कहा कि व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता, अधिकार और व्यक्तित्व का विकास राज्य में लीन होकर ही कर सकता है।
व्याख्या: हीगल ने राज्य की तुलना परमात्मा से और व्यक्ति की तुलना आत्मा से करते हुए कहा कि व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता, अधिकार और व्यक्तित्व का विकास राज्य में लीन होकर ही कर सकता है।
34. हीगल के अनुसार व्यक्ति की सच्ची 'स्वतंत्रता' (Freedom) और अधिकार किसमें निहित हैं?
सही उत्तर: C) केवल 'नैतिक स्वतंत्रता' के रूप में, अर्थात् राज्य के कानूनों के पूर्ण आज्ञापालन में
व्याख्या: हीगल केवल नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक अधिकार को ही मान्यता देता है। चूँकि राज्य पूर्ण विवेक है, इसलिए राज्य की आज्ञा और कानून का पालन करना ही व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता है।
व्याख्या: हीगल केवल नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक अधिकार को ही मान्यता देता है। चूँकि राज्य पूर्ण विवेक है, इसलिए राज्य की आज्ञा और कानून का पालन करना ही व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता है।
35. सम्पत्ति (Property) के सन्दर्भ में हीगल का क्या दृष्टिकोण है?
सही उत्तर: C) सम्पत्ति राज्य व समाज की रचना न होकर 'व्यक्तित्व के विकास का हिस्सा' है...
व्याख्या: हीगल ने सम्पत्ति को मानव व्यक्तित्व की बाह्य अभिव्यक्ति एवं विकास का हिस्सा माना है। साथ ही उसने सचेत किया कि अनियंत्रित लालसा में यह व्यक्तित्व का विनाश भी करती है।
व्याख्या: हीगल ने सम्पत्ति को मानव व्यक्तित्व की बाह्य अभिव्यक्ति एवं विकास का हिस्सा माना है। साथ ही उसने सचेत किया कि अनियंत्रित लालसा में यह व्यक्तित्व का विनाश भी करती है।
36. हीगल ने अपने नैतिक दर्शन में 'कर्तव्य' (Duty) और 'दायित्व' (Responsibility) के मध्य क्या सूक्ष्म अंतर स्पष्ट किया है?
सही उत्तर: A) कर्तव्य 'अधिकार के बदले' होता है, जबकि दायित्व व्यक्ति का 'स्वतः बोध' होता है।
व्याख्या: हीगल के अनुसार कर्तव्य बाह्य रूप से अधिकारों के बदले में जुड़ा होता है, किंतु दायित्व व्यक्ति की आंतरिक चेतना का स्वतः बोध है, जिसमें व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के समाज व राज्य के प्रति समर्पित होता है।
व्याख्या: हीगल के अनुसार कर्तव्य बाह्य रूप से अधिकारों के बदले में जुड़ा होता है, किंतु दायित्व व्यक्ति की आंतरिक चेतना का स्वतः बोध है, जिसमें व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के समाज व राज्य के प्रति समर्पित होता है।
37. "चेतना ही नैतिकता है और चेतना ही विवेक है।" तथा व्यक्ति की योग्यता का लक्ष्य 'सामाजिक हित' होना चाहिए— यह विचार किस दार्शनिक का है?
सही उत्तर: C) हीगल (Hegel)
व्याख्या: हीगल के प्रत्ययवादी दर्शन में चेतना (Spirit/Consciousness) को ही नैतिकता और विवेक का मूल स्रोत माना गया है, जिसकी सर्वोच्च अभिव्यक्ति राष्ट्र-राज्य में होती है।
व्याख्या: हीगल के प्रत्ययवादी दर्शन में चेतना (Spirit/Consciousness) को ही नैतिकता और विवेक का मूल स्रोत माना गया है, जिसकी सर्वोच्च अभिव्यक्ति राष्ट्र-राज्य में होती है।
38. सूची-I (विचारधारा/शाखा) को सूची-II (संबंधित विचारक समूह) के साथ सुमेलित करें:
a. व्यक्तिवादी (संविदावादी)
1. काण्ट, फिक्टे, हीगल
b. उपयोगितावादी
2. ग्रीन, ब्रैडले, बोसांके
c. जर्मन आदर्शवादी
3. हॉब्स, लॉक, रूसो
d. ब्रिटिश आदर्शवादी (नव-प्रत्ययवादी)
4. बेंथम, जे. एस. मिल
सही उत्तर: B) a-3, b-4, c-1, d-2
व्याख्या: हॉब्स, लॉक, रूसो व्यक्तिवादी/संविदावादी हैं; बेंथम व मिल उपयोगितावादी हैं; काण्ट, फिक्टे, हीगल जर्मन आदर्शवादी हैं; और ग्रीन, ब्रैडले, बोसांके ब्रिटिश आदर्शवादी हैं।
व्याख्या: हॉब्स, लॉक, रूसो व्यक्तिवादी/संविदावादी हैं; बेंथम व मिल उपयोगितावादी हैं; काण्ट, फिक्टे, हीगल जर्मन आदर्शवादी हैं; और ग्रीन, ब्रैडले, बोसांके ब्रिटिश आदर्शवादी हैं।
39. हीगल के संस्थागत द्वन्द्व में 'नागरिक समाज' (Civil Society) को 'प्रतिवाद' (Antithesis) की श्रेणी में क्यों रखा गया है?
सही उत्तर: A) क्योंकि परिवार की निःस्वार्थ एकता (वाद) के विपरीत, नागरिक समाज में व्यक्ति अपने आर्थिक स्वार्थों और प्रतिस्पर्धा के लिए कार्य करता है।
व्याख्या: परिवार में प्रेम और परार्थ होता है (वाद), जब व्यक्ति बाहर निकलता है तो नागरिक समाज में आर्थिक स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा होती है (प्रतिवाद), और अंततः राज्य (संवाद) दोनों का उच्चतर नैतिक समन्वय करता है।
व्याख्या: परिवार में प्रेम और परार्थ होता है (वाद), जब व्यक्ति बाहर निकलता है तो नागरिक समाज में आर्थिक स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा होती है (प्रतिवाद), और अंततः राज्य (संवाद) दोनों का उच्चतर नैतिक समन्वय करता है।
40. कथन (Assertion) और कारण (Reason):
कथन (A): हीगल ने अपने दर्शन में अंतर्राष्ट्रीय कानून और विश्व शांति के विचार को अस्वीकार कर दिया और युद्ध को आवश्यक माना।
कारण (R): हीगल के अनुसार राष्ट्र-राज्य पृथ्वी पर सर्वोच्च सत्ता (ईश्वर का अवतार) है, इसलिए किसी भी राष्ट्र-राज्य के ऊपर कोई अंतर्राष्ट्रीय सत्ता नहीं हो सकती।
सही विकल्प चुनें:
कारण (R): हीगल के अनुसार राष्ट्र-राज्य पृथ्वी पर सर्वोच्च सत्ता (ईश्वर का अवतार) है, इसलिए किसी भी राष्ट्र-राज्य के ऊपर कोई अंतर्राष्ट्रीय सत्ता नहीं हो सकती।
सही उत्तर: C) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
व्याख्या: चूँकि हीगल के द्वन्द्वात्मक विकास की अंतिम और सर्वोच्च संस्था 'राष्ट्र-राज्य' है, इसलिए वह राज्य से ऊपर किसी विश्व संघ या अंतर्राष्ट्रीय कानून को स्वीकार नहीं करता।
व्याख्या: चूँकि हीगल के द्वन्द्वात्मक विकास की अंतिम और सर्वोच्च संस्था 'राष्ट्र-राज्य' है, इसलिए वह राज्य से ऊपर किसी विश्व संघ या अंतर्राष्ट्रीय कानून को स्वीकार नहीं करता।
41. आदर्शवाद के अंतर्गत जब राज्य और व्यक्ति की तुलना शरीर और अंग से की जाती है, तो उसमें 'अंशी' (Whole) और 'अंश' (Part) किसे माना जाता है?
सही उत्तर: B) राज्य अंशी (सम्पूर्ण) है और व्यक्ति उसका एक अंश (अंग) मात्र है।
व्याख्या: सावयवी सिद्धांत के अनुसार जिस प्रकार शरीर (अंशी) से अलग होकर हाथ-पैर (अंश/अंग) का कोई महत्व नहीं रहता, उसी प्रकार राज्य (सम्पूर्ण) से बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
व्याख्या: सावयवी सिद्धांत के अनुसार जिस प्रकार शरीर (अंशी) से अलग होकर हाथ-पैर (अंश/अंग) का कोई महत्व नहीं रहता, उसी प्रकार राज्य (सम्पूर्ण) से बाहर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है।
42. जर्मन आदर्शवाद के तीन प्रमुख स्तम्भों— काण्ट, फिक्टे और हीगल के वैचारिक विकास के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही है?
सही उत्तर: B) काण्ट के विचारों में व्यक्तिवाद व आदर्शवाद का समन्वय था, फिक्टे ने उसे आगे बढ़ाया और हीगल ने उसे पूर्ण आदर्शवाद के चरम पर पहुँचा दिया।
व्याख्या: काण्ट ने नैतिक स्वायत्तता से शुरुआत की, फिक्टे ने उसमें जर्मन राष्ट्रवाद का रंग भरा और हीगल ने राज्य को साक्षात ईश्वर का अवतार बताकर पूर्ण आदर्शवाद स्थापित किया।
व्याख्या: काण्ट ने नैतिक स्वायत्तता से शुरुआत की, फिक्टे ने उसमें जर्मन राष्ट्रवाद का रंग भरा और हीगल ने राज्य को साक्षात ईश्वर का अवतार बताकर पूर्ण आदर्शवाद स्थापित किया।
43. ब्रिटिश आदर्शवाद में टी. एच. ग्रीन (T. H. Green) और बोसांके (Bosanquet) के विचारों में मुख्य अंतर क्या है?
सही उत्तर: B) ग्रीन के विचारों में 'उदारवाद व आदर्शवाद का समन्वय' है, जबकि बोसांके के विचारों में हीगल की भाँति 'पूर्ण आदर्शवाद' है।
व्याख्या: ग्रीन ने आदर्शवाद को ब्रिटिश उदारवाद के अनुकूल ढाला, किंतु बोसांके ने पुनः हीगल के उग्र आदर्शवाद की ओर लौटते हुए राज्य की सर्वोच्चता का प्रतिपादन किया।
व्याख्या: ग्रीन ने आदर्शवाद को ब्रिटिश उदारवाद के अनुकूल ढाला, किंतु बोसांके ने पुनः हीगल के उग्र आदर्शवाद की ओर लौटते हुए राज्य की सर्वोच्चता का प्रतिपादन किया।
44. अपनी युवावस्था में हीगल किन दो ऐतिहासिक क्रांतियों से प्रभावित था, यद्यपि बाद में वह जर्मन राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा प्रवक्ता बन गया?
सही उत्तर: B) अमेरिकी क्रांति (1776) और फ्रांसीसी क्रांति (1789)
व्याख्या: हीगल का जन्म 1770 में हुआ था; अपनी युवावस्था में उसने 1776 की अमेरिकी क्रांति और 1789 की फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव देखा, किंतु बाद में नेपोलियन के आक्रमणों और जर्मन एकीकरण की भावना ने उसे कट्टर राष्ट्रवादी बना दिया।
व्याख्या: हीगल का जन्म 1770 में हुआ था; अपनी युवावस्था में उसने 1776 की अमेरिकी क्रांति और 1789 की फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव देखा, किंतु बाद में नेपोलियन के आक्रमणों और जर्मन एकीकरण की भावना ने उसे कट्टर राष्ट्रवादी बना दिया।
45. हीगल ने अपने मुख्य राजनीतिक विचारों और राज्य के नैतिक सिद्धांत का प्रतिपादन अपनी किस प्रसिद्ध पुस्तक (1821) में किया है?
सही उत्तर: C) The Philosophy of Right
व्याख्या: 1821 में प्रकाशित 'द फिलॉसफी ऑफ राइट' हीगल की सबसे प्रमुख राजनीतिक कृति है। (Critique of Pure Reason काण्ट की, Philosophical Theory of the State बोसांके की और Political Obligation ग्रीन की पुस्तक है)।
व्याख्या: 1821 में प्रकाशित 'द फिलॉसफी ऑफ राइट' हीगल की सबसे प्रमुख राजनीतिक कृति है। (Critique of Pure Reason काण्ट की, Philosophical Theory of the State बोसांके की और Political Obligation ग्रीन की पुस्तक है)।
46. हीगल के अनुसार 'ब्रह्म' (विश्वात्मा) को हर कोई क्यों नहीं जान सकता?
सही उत्तर: B) क्योंकि ब्रह्म 'पूर्ण विवेक' (Absolute Reason) है और सभी मनुष्यों के पास पूर्ण विवेक नहीं होता।
व्याख्या: हीगल ने अपने ब्रह्म को 'पूर्ण विवेक' बताया है। चूँकि सामान्य व्यक्तियों में पूर्ण विवेक नहीं होता, इसलिए सभी लोग सीधे ब्रह्म को नहीं जान सकते; राज्य ही उस पूर्ण विवेक का साकार रूप है।
व्याख्या: हीगल ने अपने ब्रह्म को 'पूर्ण विवेक' बताया है। चूँकि सामान्य व्यक्तियों में पूर्ण विवेक नहीं होता, इसलिए सभी लोग सीधे ब्रह्म को नहीं जान सकते; राज्य ही उस पूर्ण विवेक का साकार रूप है।
47. सूची-I (हीगल के द्वन्द्वात्मक चरण) को सूची-II (उनके अर्थ/स्वरूप) के साथ सुमेलित करें:
a. वाद (Thesis)
1. दोनों के सत्य तत्वों का मिलन व उच्चतर अवस्था
b. प्रतिवाद (Antithesis)
2. संवाद में असत्य तत्व आने पर प्रक्रिया का बार-बार दोहराव
c. संवाद (Synthesis)
3. प्रारम्भिक वस्तु या विचार जो पूर्णतः सत्य नहीं होता
d. निषेध का निषेध
4. वाद की प्रतिक्रिया या विरोधाभासी विचार
सही उत्तर: A) a-3, b-4, c-1, d-2
व्याख्या: वाद प्रारंभिक अपूर्ण विचार है, प्रतिवाद उसकी प्रतिक्रिया है, संवाद दोनों के सत्य तत्वों का उच्चतर मिलन है और इस प्रक्रिया की निरंतरता 'निषेध का निषेध' कहलाती है।
व्याख्या: वाद प्रारंभिक अपूर्ण विचार है, प्रतिवाद उसकी प्रतिक्रिया है, संवाद दोनों के सत्य तत्वों का उच्चतर मिलन है और इस प्रक्रिया की निरंतरता 'निषेध का निषेध' कहलाती है।
48. बहु-कथन प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-से कथन हीगल (Hegel) द्वारा कहे गए हैं?
1. "राज्य पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार है।"
2. "सत् ही सत्ता है और सत्ता ही सत् है।"
3. "मनुष्य का मस्तिष्क हृदय से ऊँचा है।"
4. "विकास कभी सीधी रेखा में नहीं होता, बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी रेखा में होता है।"
सही कूट:
2. "सत् ही सत्ता है और सत्ता ही सत् है।"
3. "मनुष्य का मस्तिष्क हृदय से ऊँचा है।"
4. "विकास कभी सीधी रेखा में नहीं होता, बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी रेखा में होता है।"
सही उत्तर: E) 1, 2, 3 और 4 सभी कथन हीगल के हैं
व्याख्या: उपर्युक्त चारों विश्वप्रसिद्ध कथन जर्मन आदर्शवादी दार्शनिक हीगल के हैं, जो उनके राज्य-दर्शन, विवेकवाद और द्वन्द्वात्मक विकासवाद को प्रकट करते हैं।
व्याख्या: उपर्युक्त चारों विश्वप्रसिद्ध कथन जर्मन आदर्शवादी दार्शनिक हीगल के हैं, जो उनके राज्य-दर्शन, विवेकवाद और द्वन्द्वात्मक विकासवाद को प्रकट करते हैं।
49. आगे चलकर किस प्रसिद्ध समाजवादी विचारक ने हीगल की 'द्वन्द्वात्मक पद्धति' को तो ग्रहण कर लिया, किंतु उसके 'प्रत्ययवाद' (Idealism) को उलटकर 'भौतिकवाद' (Materialism) में बदल दिया?
सही उत्तर: B) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने हीगल से ही 'द्वन्द्वात्मक पद्धति' (वाद-प्रतिवाद-संवाद) ली, लेकिन हीगल के 'विचार/चेतना' के स्थान पर 'पदार्थ' (भौतिकवाद) को रखकर 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' का सिद्धांत दिया।
व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने हीगल से ही 'द्वन्द्वात्मक पद्धति' (वाद-प्रतिवाद-संवाद) ली, लेकिन हीगल के 'विचार/चेतना' के स्थान पर 'पदार्थ' (भौतिकवाद) को रखकर 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' का सिद्धांत दिया।
50. निष्कर्ष (Conclusion): पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन में हीगल के 'परम प्रत्ययवाद' (Absolute Idealism) का समग्र मूल्यांकन क्या सिद्ध करता है?
सही उत्तर: C) इसने द्वन्द्वात्मक पद्धति के माध्यम से राष्ट्र-राज्य को 'पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार' स्थापित किया...
व्याख्या: हीगल ने भौतिकवाद को चुनौती देकर राज्य को सर्वोच्च नैतिक गरिमा प्रदान की और द्वन्द्वात्मक पद्धति का अद्वितीय योगदान दिया, किंतु उनके उग्र राष्ट्रवाद और निरंकुश राज्य के विचार ने आगे चलकर फासीवाद को वैचारिक आधार भी प्रदान किया।
व्याख्या: हीगल ने भौतिकवाद को चुनौती देकर राज्य को सर्वोच्च नैतिक गरिमा प्रदान की और द्वन्द्वात्मक पद्धति का अद्वितीय योगदान दिया, किंतु उनके उग्र राष्ट्रवाद और निरंकुश राज्य के विचार ने आगे चलकर फासीवाद को वैचारिक आधार भी प्रदान किया।
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📝 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. आदर्शवाद का जनक और 'परम प्रत्ययवाद' (Absolute Idealism) का जनक किसे माना जाता है?
उत्तर: आधुनिक आदर्शवाद का जनक इमैनुअल काण्ट (Kant) को माना जाता है, जबकि इसे चरम सीमा पर पहुँचाने के कारण जर्मन दार्शनिक हीगल (Hegel) को 'परम प्रत्ययवाद का जनक' माना जाता है।
Q2. "राज्य पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार (या महायात्रा) है।" यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
उत्तर: यह विश्वप्रसिद्ध कथन महान जर्मन आदर्शवादी विचारक जॉर्ज विल्हेम फ्रेडरिक हीगल (Hegel) का है, जिन्होंने राज्य को सर्वोच्च नैतिक संस्था और पूर्ण विवेक माना।
Q3. हीगल के द्वन्द्वात्मक प्रत्ययवाद में संस्थागत विकास के तीन चरण (वाद, प्रतिवाद और संवाद) क्या हैं?
उत्तर: हीगल के अनुसार सामाजिक संस्थाओं के द्वन्द्वात्मक विकास की प्रक्रिया में 'परिवार' वाद (Thesis) है, 'नागरिक समाज' प्रतिवाद (Antithesis) है और 'राष्ट्र-राज्य' संवाद (Synthesis) है।
Q4. ब्रिटिश आदर्शवाद (नव-प्रत्ययवाद) का जनक किसे माना जाता है?
उत्तर: ब्रिटिश आदर्शवाद या नव-प्रत्ययवाद का जनक टी. एच. ग्रीन (T. H. Green) को माना जाता है, जिन्होंने उदारवाद और आदर्शवाद का समन्वय किया, जबकि बोसांके ने इसे चरम पर पहुँचाया।
Q5. "सत् ही सत्ता है और सत्ता ही सत् है" (Real is Rational and Rational is Real) का क्या आशय है?
उत्तर: हीगल के इस दार्शनिक सूत्र का अर्थ है कि जो बौद्धिक (विवेकपूर्ण) है वही वास्तविक (बोधगम्य) है, और जो वास्तविक रूप में अस्तित्वमान है (जैसे राष्ट्र-राज्य) वह पूर्ण विवेक की ही अभिव्यक्ति है।
Q6. हीगल ने अपनी 'द्वन्द्वात्मक पद्धति' का विचार किससे ग्रहण किया था और इसका विकास कैसे होता है?
उत्तर: हीगल ने द्वन्द्वात्मक पद्धति का विचार यूनानी दार्शनिक प्लेटो (Plato) से लिया था। हीगल के अनुसार विकास कभी सीधी रेखा में न होकर वाद, प्रतिवाद और संवाद के माध्यम से टेढ़ी-मेढ़ी रेखा (Zig-Zag Line) में होता है।
