विश्व के प्रमुख संविधान: ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस - सम्पूर्ण मास्टर नोट्स
| विश्व के प्रमुख संविधान: ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस (सम्पूर्ण मास्टर नोट्स) |
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| Study Material Overview: प्रस्तुत लेख में राजनीति विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय 'विश्व के प्रमुख संविधानों' का एक साथ तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। इसमें ब्रिटेन (संसदीय प्रणाली की जननी), अमेरिका (प्रथम लिखित व अध्यक्षीय प्रणाली) और फ्रांस (अर्द्ध-अध्यक्षात्मक प्रणाली व पंचम गणतंत्र) के संविधानों का सम्पूर्ण विवरण है। लेख में न्यायिक पुनरावलोकन, सीनेटोरियल कर्टसी, लॉबिंग, स्पॉइल्स सिस्टम और 'कॉहैबिटेशन' जैसी अनूठी प्रथाओं को स्पष्ट किया गया है। इसके अतिरिक्त डायसी, मुनरो, लास्की, लावेल और बेजहॉट जैसे विचारकों के कथनों को फैक्ट-चेक के साथ संकलन है। TGT, PGT व UGC NET-JRF परीक्षाओं के लिए यह एक मास्टर नोट्स है। |
- GB भाग 1: ब्रिटेन का संविधान
- 1. यूनाइटेड किंगडम (UK) का राजनीतिक परिचय
- 2. ऐतिहासिक अधिनियम (मैग्नाकार्टा से लेकर आधुनिक सुधार)
- 3. संसदीय सर्वोच्चता एवं न्यायिक पुनरावलोकन का अभाव
- 4. ब्रिटिश संविधान के प्रमुख स्रोत (Sources)
- 5. ब्रिटिश संविधान की 9 प्रमुख विशेषताएं
- 6. सम्राट् (King) और राजमुकुट (Crown) में अन्तर
- 7. ब्रिटिश कैबिनेट व नौकरशाही पर विचारकों के कथन
- 8. ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ लॉर्ड्स व कॉमन्स)
- 9. ब्रिटिश स्पीकर की स्थिति ("Once a speaker...")
- US भाग 2: अमेरिका का संविधान
- 10. अमेरिकी संविधान का उदय
- 11. संविधान के स्रोत व निहित शक्तियों का सिद्धांत
- 12. अमेरिकी संविधान की प्रमुख विशेषताएं
- 13. अमेरिका के प्रमुख संविधान संशोधन (19वाँ, 22वाँ आदि)
- 14. ऐतिहासिक न्यायिक वाद (मार्बरी बनाम मेडिसन)
- 15. अमेरिकी राष्ट्रपति: शक्तियां एवं निर्वाचन (Spoils System)
- 16. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) व सबसे शक्तिशाली सीनेट
- 17. अनूठी प्रथाएं: फिलीबस्टर, सीनेटोरियल कर्टसी, लॉबिंग
- FR भाग 3: फ्रांस का संविधान
- 18. फ्रांस का संविधान (पंचम गणतंत्र) एवं विशेषताएं
- 19. अर्द्ध-अध्यक्षात्मक शासन व प्रशासकीय विधि (Droit Administratif)
- 20. फ्रांस की व्यवस्थापिका (राष्ट्रीय सभा और सीनेट)
- 21. संवैधानिक परिषद (Constitutional Council) और ओम्बुड्समैन
- 22. फ्रांस का राष्ट्रपति: अपार शक्तियां और 'कॉहैबिटेशन' (Cohabitation)
- 23. मौलिक अधिकार एवं संविधान संशोधन की प्रक्रिया
- 24. संसद पर महत्वपूर्ण विचार (बर्गेस का कथन)
- 25. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
✦ 1. यूनाइटेड किंगडम (UK) और ग्रेट ब्रिटेन का राजनीतिक परिचय
विश्व के विभिन्न संविधानों में ब्रिटेन का संविधान सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण माना जाता है। UK (United Kingdom) और ग्रेट ब्रिटेन (Great Britain) में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
- ग्रेट ब्रिटेन के अन्तर्गत इंग्लैण्ड, स्कॉटलैण्ड और वेल्स आते हैं।
- यूनाइटेड किंगडम (UK), ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैण्ड का संयुक्त रूप है।
- 18वीं शताब्दी में UK की राजधानी लन्दन द्वारा आयरलैण्ड का दमन होता रहा। 1920 में आयरलैण्ड का विभाजन हुआ और उत्तरी आयरलैण्ड UK का भाग बना रहा। 1927 से इसे "यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एण्ड नॉर्दर्न आयरलैण्ड" कहा जाने लगा।
इंग्लैण्ड + वेल्स + स्कॉटलैण्ड = ग्रेट ब्रिटेन
ग्रेट ब्रिटेन + उत्तरी आयरलैण्ड = UK (United Kingdom)
ब्रिटेन का संविधान अलिखित तथा विकसित है। ब्रिटेन में कोई नया कानून बनाकर पुराने कानूनों को आसानी से समाप्त किया जा सकता है। पहले ब्रिटेन में सभी संस्थाएं नैतिक थीं, लेकिन धीरे-धीरे जब वह उसी रूप में उसका प्रयोग होने लगा तो वही नैतिक संस्थाएं कानूनी बन गईं। ब्रिटेन में सरकार के तीनों अंगों का विकास हुआ है, निर्माण नहीं। ब्रिटेन मे परम्परा व रीति-रिवाजों का बड़ा महत्व है, जो धीरे-धीरे कानूनी रूप बन गए हैं। वैसे तो ब्रिटेन के संविधान का अधिकांश भाग अलिखित है, लेकिन फिर भी कुछ बातें लिखित है।
✦ 2. ब्रिटिश संविधान के ऐतिहासिक अधिनियम व मील के पत्थर
ब्रिटिश संविधान का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। इसके विकास में निम्नलिखित ऐतिहासिक दस्तावेजों और अधिनियमों (Acts) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:
| वर्ष | ऐतिहासिक घटना / अधिनियम |
|---|---|
| 1215 | मैग्नाकार्टा (Magna Carta): किंग जॉन द्वारा हस्ताक्षरित। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और 'कानून के शासन' की दिशा में पहला कदम था। |
| 1628 | अधिकार पत्र (Petition of Right): सम्राट की शक्तियों पर अंकुश लगाने वाला महत्वपूर्ण प्रपत्र। |
| 1688 | गौरवपूर्ण क्रान्ति (Glorious Revolution): रक्तहीन क्रान्ति जिसने राजा की शक्तियों को सीमित कर संसदीय सर्वोच्चता स्थापित की। |
| 1689 | बिल ऑफ राइट्स (Bill of Rights): संसद की सहमति के बिना कर लगाने या सेना रखने पर रोक। |
| 1911 व 1949 | संसदीय अधिनियम (Parliament Acts): हाउस ऑफ लॉर्ड्स की शक्तियों को अत्यंत सीमित किया गया। |
| 1918 | जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) |
| 1920 | आयरलैण्ड अधिनियम (Government of Ireland Act) |
| 1937 | सम्राट् के मन्त्रिपरिषद् अधिनियम (Ministers of the Crown Act) |
| 1947 | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (Indian Independence Act) |
| 1998 | स्कॉटलैण्ड कानून (Scotland Act) |
| 2000 | सूचना प्राप्ति का कानून (Freedom of Information Act) |
| 2005 | संवैधानिक सुधार एक्ट (Constitutional Reform Act): ब्रिटिश सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। |
| 2006 | वेल्स सरकार अधिनियम (Government of Wales Act) |
विशेष नोट: 1215 का मैग्नाकार्टा, 1628 का अधिकार पत्र और 1689 का बिल ऑफ राइट्स— ये उपर्युक्त घोषणाएं नागरिकों के अधिकारों के प्रपत्र हैं जो समय-समय पर सम्राट द्वारा घोषित किये गए।
✦ 3. ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता एवं न्यायिक पुनरावलोकन का अभाव
ब्रिटेन में संसद की सर्वोच्चता के सिद्धान्त (Parliamentary Sovereignty) को अपनाया गया है, अर्थात् जो कानून संसद बनाती है, वही कानून बन जाता है। बनाये गये इन कानूनों की न्यायिक समीक्षा या न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) ब्रिटिश न्यायालय नहीं कर सकते। हालाँकि, 'प्रदत्त विधान' (Delegated Legislation) के मामलों में न्यायालय को पुनरावलोकन का अधिकार प्राप्त है।
ब्रिटेन में संवैधानिक कानून तथा सामान्य कानून में कोई अन्तर नहीं है। इसलिये वहाँ का संविधान लचीला (Flexible) कहलाता है।
■ ब्रिटिश संविधान व संसद पर प्रमुख विचारकों के कथन
"ब्रिटिश संविधान का कोई अस्तित्व नहीं है।"
"लिखित तथा अलिखित संविधान में अन्तर मात्रा का है, प्रकार का नहीं।"
"ब्रिटिश संसद स्त्री को पुरुष व पुरुष को स्त्री बनाने के सिवाय सब कुछ कर सकती है।"
"यदि संसद के दोनों सदन सम्राट् के मृत्यु वारंट को पारित कर दें तो सम्राट् उस पर हस्ताक्षर कर देगा।"
✦ 4. ब्रिटिश संविधान के प्रमुख स्रोत
- महान अधिकार पत्र (Magna Carta)
- संसदीय अधिनियम (Statutes)
- न्यायिक निर्णय (Judicial Decisions)
- सामान्य विधि (Common Law)
- प्रथाएं एवं परम्पराएं (Conventions)
- संविधान पर लिखी गयी टीकाएं (Commentaries): जैसे ए.वी. डायसी की "Law of the Constitution" और वाल्टर बेजहॉट की "The English Constitution"।
"ब्रिटिश संविधान संयोग तथा विवेक का शिशु है (Child of wisdom and chance)।"
✦ 5. ब्रिटिश संविधान की 9 प्रमुख विशेषताएं
- विकसित संविधान: यह सदियों के विकास का परिणाम है।
- अलिखित व लचीला संविधान: अधिकांश भाग परम्पराओं और रूढ़ियों पर आधारित है।
- संसद की सर्वोच्चता (संसदीय सम्प्रभुता): संसद कोई भी कानून बना या बदल सकती है।
- संसदीय शासन प्रणाली: कार्यपालिका (कैबिनेट) संसद के प्रति उत्तरदायी होती है।
- एकात्मक शासन प्रणाली: सम्पूर्ण शक्ति केन्द्र सरकार में निहित है।
- विधि का शासन (Rule of Law): कानून के समक्ष सभी समान हैं।
- संवैधानिक राजतंत्र व लोकतंत्र का मिश्रण: राजा नाममात्र का है, वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के पास है।
- न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अभाव।
- द्वि-दलीय पद्धति (Two-Party System) का बोलबाला।
✦ 6. ब्रिटिश राजनीतिक व्यवस्था, सम्राट् और राजमुकुट में अन्तर
ब्रिटेन में द्वि-दलीय पद्धति (Two-Party System) पाई जाती है। चूँकि विश्व में सर्वप्रथम संविधान की उत्पत्ति इंग्लैण्ड में ही हुई थी, इसलिए ब्रिटिश संविधान को 'समस्त संविधानों की जननी' कहा जाता है। इसी प्रकार, ब्रिटिश संसद को 'समस्त संसदों की जननी' कहा जाता है। राजनीतिक दलों की सर्वप्रथम उत्पत्ति भी इंग्लैण्ड में ही हुई थी।
■ ब्रिटिश शासन व्यवस्था पर प्रमुख विचारकों के कथन
"ब्रिटिश शासन में जो कुछ दिखाई पड़ता है, वह वास्तव में है नहीं और जो वास्तव में है, वह दिखाई नहीं पड़ता है।"
"राजतन्त्र ने अपने आप को जनता के हाथों बेच दिया है।"
■ सम्राट् (King) और राजमुकुट (Crown) में मौलिक अन्तर
| सम्राट् (The King) | राजमुकुट (The Crown) |
|---|---|
| सम्राट् एक व्यक्ति (Person) है। | राजमुकुट एक संस्था (Institution) है। |
| सम्राट् अस्थायी (Temporary) होता है (मृत्यु हो सकती है)। | राजमुकुट स्थायी (Permanent) होता है (संस्था कभी नहीं मरती)। |
| सम्राट् वैयक्तिक (Individual) है। | राजमुकुट सामूहिक/सार्वजनिक (Collective) है। |
✦ 7. ब्रिटिश कैबिनेट व नौकरशाही पर विचारकों के कथन
ब्रिटेन में लोक सेवाओं (Civil Services) की स्थापना 1855 में मैकाले और ट्रेवेलियन रिपोर्ट की सिफारिश पर हुई थी। ब्रिटिश शासन व्यवस्था, कैबिनेट, प्रधानमंत्री और नौकरशाही (Bureaucracy) के संदर्भ में विचारकों के प्रमुख कथन निम्नलिखित हैं:
"विश्व में कोई भी राजतन्त्र हमेशा हमारे राजतन्त्र से सुरक्षित या जनता द्वारा इतना सम्मान प्राप्त नहीं है।"
"कैबिनेट राजनीति की आधारशिला का मेहराब (Keystone of the political arch) है।"
"ब्रिटिश प्रधानमंत्री एक निर्वाचित तानाशाह (Elected Dictator) है।"
"नौकरशाही की बढ़ती शक्ति नवीन निरंकुशता (New Despotism) है।"
"नौकरशाही मंत्रिमण्डलीय उत्तरदायित्व की आड़ में पनपती है।"
"नौकरशाही में अधिकारियों के कार्यों में बँटवारा किया जाता है।"
"नौकरशाही संसदीय प्रजातंत्र के लिये अपरिहार्य (Indispensable) है।"
✦ 8. ब्रिटिश संसद के अंग (सम्राट्, हाउस ऑफ लॉर्ड्स व कॉमन्स)
यद्यपि ब्रिटिश संसद सम्प्रभु है, फिर भी व्यवहार में उस पर जनमत, परम्परा व रीति-रिवाज़, नैतिकता और अन्तर्राष्ट्रीय कानून व संगठन का प्रतिबन्ध होता है। ब्रिटिश संसद के तीन अंग हैं:
- सम्राट् (The King / Queen)
- हाउस ऑफ लॉर्ड्स (House of Lords): यह संसद का द्वितीय या उच्च सदन है। यह दुनिया का सबसे पुराना सदन है, जिसमें लगभग 1054 सदस्य होते हैं। इनमें 26 आध्यात्मिक (Spiritual) सदस्य होते हैं और शेष आनुवंशिक या आजीवन लार्ड होते हैं। लॉर्ड सभा का अध्यक्ष लॉर्ड चांसलर होता है। लॉर्ड सभा धन विधेयक को अधिकतम एक माह तक रोक सकती है।
- हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons): यह संसद का प्रथम या निम्न सदन है, जिसमें 650 निर्वाचित सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल 5 वर्ष होता है। संसद की सम्पूर्ण वास्तविक शक्ति हाउस ऑफ कॉमन्स में ही निवास करती है।
✦ 9. ब्रिटिश स्पीकर की स्थिति एवं मतदान की आयु
ब्रिटेन में 1969 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई थी।
"एक बार का स्पीकर हमेशा का स्पीकर होता है।"
(Once a speaker, always a speaker)
ब्रिटेन में स्पीकर का पद बहुत ही गरिमामय और तटस्थ होता है। जब कोई व्यक्ति स्पीकर बन जाता है, तो वह अपनी पार्टी से इस्तीफा दे देता है। स्पीकर के बारे में यह कहा जाता है कि "वह न तो किसी पार्टी का होता है, वह सदन की आँख, कान और नाक होता है... वह देखता सब कुछ है, सुनता सब कुछ है, लेकिन बोलता कुछ नहीं है।" अर्थात् वह पूर्णतः निष्पक्ष होकर सदन का संचालन करता है।
✦ 10. अमेरिकी संविधान का ऐतिहासिक उदय
संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) के संविधान का निर्माण एकाएक नहीं हुआ, बल्कि इसका एक लम्बा इतिहास रहा है। पहले यह ब्रिटेन का एक उपनिवेश (Colony) था।
- स्वतंत्रता की घोषणा: 4 जुलाई 1776 को अमेरिका ने औपचारिक रूप से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
- घोषणा पत्र व जेफरसन: अमेरिकी क्रान्ति के जनक थॉमस जेफरसन (Thomas Jefferson) ने स्वतंत्रता का घोषणा पत्र लिखा था। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि "सभी मनुष्य समान उत्पन्न हुए हैं और वे समान अधिकार रखते हैं।"
- जॉन लॉक का प्रभाव: प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक जॉन लॉक (John Locke) को अमेरिकी क्रान्ति का मुख्य प्रेरणास्रोत माना जाता है। उन्होंने ही जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति को 'प्राकृतिक अधिकार' (Natural Rights) बताया था।
25 मई 1787 को फिलाडेल्फिया में एक ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ। इसमें तत्कालीन 13 राज्यों में से 12 राज्यों ने भाग लिया (रोड आइलैंड ने बहिष्कार किया था)। इस सम्मेलन की अध्यक्षता जॉर्ज वाशिंगटन ने की थी। यहीं से U.S.A. के संविधान का निर्माण हुआ, जिसे 1789 में लागू किया गया। यहीं से अमेरिका में 'संघीय व्यवस्था' का जन्म हुआ (वर्तमान में अमेरिका में 50 राज्य हैं)।
✦ 11. अमेरिकी संविधान के विकास के आधार व प्रमुख स्रोत
U.S.A. का मूल संविधान फिलाडेल्फिया सम्मेलन द्वारा निर्मित किया गया था। हालाँकि, समय के साथ इसका विकास निम्नलिखित प्रमुख स्रोतों के माध्यम से हुआ है:
- कांग्रेस के अधिनियम (Acts of Congress): अमेरिकी संसद (कांग्रेस) द्वारा समय-समय पर बनाए गए कानूनों ने संविधान को एक नया विस्तार और स्वरूप प्रदान किया है।
- न्यायिक व्याख्याएं (Judicial Interpretations): अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा समय-समय पर की जाने वाली न्यायिक व्याख्याएं संविधान के विकास का बहुत बड़ा स्रोत हैं।
- निहित शक्तियों का सिद्धान्त (Doctrine of Implied Powers): इस सिद्धान्त ने अमेरिकी संविधान में बहुत सारे नए निर्णयों को शामिल कर लिया है। इसके तहत संघीय सरकार को वे अघोषित शक्तियां भी मिल जाती हैं, जो संविधान में स्पष्ट रूप से लिखी नहीं गई हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक हैं।
"संविधान वही है जो न्यायाधीश कहते हैं।"
(यह कथन अमेरिकी न्यायपालिका की अपार शक्ति और न्यायिक सर्वोच्चता को स्पष्ट करता है।)
✦ 12. अमेरिकी संविधान की 6 प्रमुख विशेषताएं
- निर्मित एवं लिखित संविधान: यह आधुनिक विश्व का प्रथम लिखित और लोकतांत्रिक संविधान है।
- विश्व का सबसे छोटा व कठोर संविधान: इसमें केवल 7 अनुच्छेद (Articles) हैं।
- संघात्मक व अध्यक्षीय प्रणाली: यहाँ शक्ति पृथक्करण (Separation of Powers) और 'नियंत्रण एवं संतुलन' (Checks and Balances) के सिद्धांत को अपनाया गया है।
- मौलिक अधिकारों का समावेश: मूल संविधान में मौलिक अधिकार नहीं थे, इन्हें प्रथम 10 संविधान संशोधनों (Bill of Rights) के द्वारा जोड़ा गया।
- संविधान संशोधन की जटिल प्रक्रिया: अमेरिका में संविधान संशोधन का प्रस्ताव कांग्रेस के दोनों सदन अपने दो-तिहाई (2/3) बहुमत से पास करते हैं। इस प्रस्ताव को तभी पारित माना जाता है जब कम से कम तीन-चौथाई (3/4) राज्यों के विधानमण्डल इसकी पुष्टि (Ratification) कर दें।
✦ 13. अमेरिका के प्रमुख संविधान संशोधन
| संशोधन | प्रावधान / महत्व |
|---|---|
| 19वाँ (1920) | इसके द्वारा अमेरिका में महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया गया। |
| 20वाँ | यह तय किया गया कि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति 20 जनवरी को अपने पद की शपथ लेंगे। |
| 22वाँ (1951) | यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि कोई भी व्यक्ति तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बनेगा (अर्थात् अधिकतम दो कार्यकाल)। |
| 23वाँ (1961) | कोलंबिया राज्य (वाशिंगटन डी.सी.) को निर्वाचक मण्डल में 3 सदस्य चुनने का अधिकार मिला। |
अतिरिक्त जानकारी (Extra Fact): जहाँ अमेरिका में 1920 (19वें संशोधन) में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला, वहीं ब्रिटेन (UK) में 1928 में और स्विट्ज़रलैंड में 1971 में महिलाओं को पूर्ण मताधिकार प्राप्त हुआ था।
✦ 14. ऐतिहासिक न्यायिक वाद (Landmark Cases)
1. मार्बरी बनाम मेडिसन केस (1803): इस ऐतिहासिक केस में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जॉन मार्शल ने राजनीति विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।
2. मैकुलोच बनाम मैरीलैंड केस (1819): इस केस में भी मुख्य न्यायाधीश मार्शल ने 'निहित शक्तियों के सिद्धान्त' (Doctrine of Implied Powers) का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के आ जाने से अमेरिका में संघीय सरकार की शक्तियों में काफी वृद्धि हो गई।
✦ 15. अमेरिकी राष्ट्रपति: निर्वाचन प्रणाली एवं विचारकों के कथन
अमेरिकी राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि परोक्ष (Indirect) रूप से होता है। राज्य की जनता 'निर्वाचक मण्डल' (Electoral College) के सदस्यों का चुनाव करती है, और फिर ये निर्वाचक मण्डल के सदस्य राष्ट्रपति को चुनते हैं।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 538 वोट होते हैं, जो इस प्रकार बँटे हैं:
• 435 प्रतिनिधि (प्रतिनिधि सभा से)
• 100 सीनेटर (सीनेट से)
• 3 प्रतिनिधि (कोलंबिया जिले/वाशिंगटन डी.सी. से)
अमेरिका में नया राष्ट्रपति पुरानी नौकरशाही को हटाकर अपने समर्थकों को नियुक्त करता है, इसे 'Spoils System' कहते हैं। राष्ट्रपति के पास 'पॉकेट वीटो' (Pocket Veto) की शक्ति भी होती है, जिससे वह किसी बिल को बिना हस्ताक्षर किए 10 दिन तक रोक सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति तथा ब्रिटिश प्रधानमंत्री की तुलना करते हुए लास्की ने लिखा है— "अमेरिका का राष्ट्रपति एक सम्राट से कम या एक प्रधानमंत्री से अधिक है, इसके पद के साथ जितनी अधिक सावधानी बरती जाये उतना ही ठीक होता है।"
"वह (अमेरिकी राष्ट्रपति) ऐसा सम्राट है जो स्वयं अपना प्रधानमंत्री है।"
✦ 16. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) व सबसे शक्तिशाली सीनेट
अमेरिकी संसद को 'कांग्रेस' (Congress) के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य कार्य कानून निर्माण करना, कार्यपालिका को सहमति देना तथा वित्तीय कार्य करना है। इसके दो सदन हैं:
- प्रतिनिधि सभा (House of Representatives): यह कांग्रेस का निम्न सदन है। इसमें 435 सदस्य होते हैं, जो जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। इनका कार्यकाल 2 वर्ष का होता है।
- सीनेट (Senate): यह कांग्रेस का द्वितीय या उच्च सदन है। इसमें 100 सदस्य (प्रत्येक राज्य से 2) होते हैं, जिन्हें भी जनता चुनती है। सीनेट की कार्यवाही के लिए गणपूर्ति (Quorum) का होना आवश्यक होता है। यह विश्व का सबसे शक्तिशाली द्वितीय सदन है। अमेरिका का उपराष्ट्रपति सीनेट का पदेन सभापति होता है।
■ अमेरिकी स्पीकर की स्थिति एवं उत्तराधिकार
अमेरिका में स्पीकर (प्रतिनिधि सभा का अध्यक्ष) का पद उतना तटस्थ नहीं होता जितना ब्रिटेन में। वह सर्वसम्मति से नहीं, बल्कि बहुमत दल के द्वारा निर्वाचित किया जाता है। अमेरिका में उत्तराधिकार के क्रम में स्पीकर का पद बहुत महत्वपूर्ण है— यदि अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का पद एक साथ रिक्त हो जाए, तो अध्यक्ष (Speaker) ही राष्ट्रपति का पद संभालता है।
"स्पीकर सदन की आँखें, कान और नाक है, अधिकांशतः उसका मस्तिष्क है।"
■ कानून निर्माण में 'समितियों' की भूमिका
अमेरिका में कानून निर्माण में 'समितियों' (Committees) का बहुत अधिक महत्व है। जब कभी राष्ट्रपति किसी कानून के निर्माण पर बल देता है, तो उस पर समितियाँ ही गहराई से विचार करती हैं।
समितियों की इसी अपार शक्ति के कारण विल्सन ने इन्हें 'लघु विधान सभा' (Little Legislatures) के नाम से पुकारा है।
✦ 17. अनूठी प्रथाएं: फिलीबस्टर, सीनेटोरियल कर्टसी, लॉबिंग
अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में कुछ ऐसी प्रथाएं और शब्दावलियां हैं जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं:
-
फिलीबस्टर (Filibuster): यह अमेरिकी सीनेट की एक अनूठी प्रथा है। इसका अर्थ है सीनेट की कार्यवाही में रुकावट डालने की दृष्टि से किया जाने वाला लम्बा विवाद या भाषण। इसमें सीनेटरों को सदन में बोलने की असीमित स्वतंत्रता होती है।
अतिरिक्त जानकारी: किसी 'फिलीबस्टर' को जबरन समाप्त करने के लिए सीनेट में 'क्लोजर' (Cloture) प्रस्ताव लाया जाता है, जिसे पारित करने के लिए कम से कम 60 सीनेटरों के वोट की आवश्यकता होती है। - सीनेटोरियल कर्टसी (Senatorial Courtesy): इस नियम का अर्थ है कि राष्ट्रपति जिस भी राज्य में वरिष्ठ नियुक्तियां (Appointments) करे, उस राज्य के वरिष्ठ सीनेटरों से पूर्व परामर्श अवश्य ले। यह अमेरिका की एक बहुत ही सुदृढ़ राजनीतिक परम्परा है।
-
लॉबिंग (Lobbying): अमेरिका में दबाव समूहों (Pressure Groups) को लॉबिंग कहते हैं। यह व्यवस्था विधायिका के अंदर कार्य करती है। ये समूह कांग्रेस सदस्यों पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव डालकर अपने हित में कानूनों का निर्माण कराते हैं।
अतिरिक्त जानकारी: वाशिंगटन डी.सी. में स्थित 'के स्ट्रीट' (K Street) को अमेरिका में लॉबिंग और एडवोकेसी ग्रुप्स का सबसे बड़ा केंद्र (Hub) माना जाता है।
■ 'लॉबिंग' के महत्व पर विचारकों के कथन
"लॉबिंग कांग्रेस के पीछे एक और कांग्रेस है।"
इन्होंने लॉबिंग की अपार शक्ति को देखते हुए इसे "कांग्रेस का तृतीय सदन" (Third Chamber of Congress) कहा है।
✦ 18. फ्रांस का संविधान (पंचम गणतंत्र) एवं विशेषताएं
वर्तमान फ्रांस में "पंचम गणतंत्र" (Fifth Republic) लागू है, जिसका नया संविधान 4 अक्टूबर 1958 को लागू हुआ था।
- 1958 के इस फ्रांसीसी संविधान में कुल 92 अनुच्छेद (Articles) हैं।
- यह संविधान फ्रांस को एक धर्मनिरपेक्ष (Secular), लोकतांत्रिक तथा सामाजिक गणतंत्र घोषित करता है।
- अब तक इस संविधान में कुल 24 संशोधन हो चुके हैं। इसमें 2007 का संशोधन (18वाँ) बहुत महत्वपूर्ण है, जिसके द्वारा फ्रांस में मृत्यु दण्ड (Death Penalty) के प्रावधान को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
अतिरिक्त जानकारी (Extra Fact): मूल रूप से (1958 में) फ्रांस के राष्ट्रपति का कार्यकाल 7 वर्ष का तय किया गया था, लेकिन वर्ष 2000 में एक जनमत संग्रह के माध्यम से इसे घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया।
✦ 19. अर्द्ध-अध्यक्षात्मक शासन व प्रशासकीय विधि
फ्रांस में शासन व्यवस्था का एक अनूठा मॉडल अपनाया गया है, जिसकी दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- एकात्मक शासन एवं प्रशासकीय विधि (Administrative Law): फ्रांस में एकात्मक शासन (Unitary System) है, लेकिन प्रशासकीय क्षेत्रों में स्थानीय स्वायत्तता प्रदान की गई है। जहाँ ब्रिटेन में 'विधि का शासन' है, वहीं फ्रांस में 'प्रशासकीय विधि' (Droit Administratif) का बोलबाला है। इसके अंतर्गत सामान्य नागरिकों और सरकारी अधिकारियों के विवादों के लिए अलग-अलग न्यायालय होते हैं।
- अर्द्ध-अध्यक्षात्मक शासन (Semi-Presidential System): फ्रांस में संसदीय और अध्यक्षीय दोनों प्रणालियों का मिश्रण है। यहाँ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों होते हैं और दोनों शक्तिशाली हैं, लेकिन राष्ट्रपति सर्वोच्च होता है।
✦ 20. फ्रांस की व्यवस्थापिका (राष्ट्रीय सभा और सीनेट)
फ्रांस की संसद द्विसदनात्मक है। इसके दोनों सदनों का विवरण इस प्रकार है:
-
राष्ट्रीय सभा (National Assembly): यह फ्रांस का निम्न सदन है, जो प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा 5 वर्ष के लिए चुना जाता है। इसमें कुल 577 सदस्य होते हैं। इसका विभाजन इस प्रकार है:
• 555 सदस्य मेट्रोपॉलिटन (नगरपालिकाओं) क्षेत्रों से
• 15 सदस्य समुद्र पार क्षेत्रों (Overseas) से
• 7 सदस्य अधीनस्थ क्षेत्रों से
यह सदन अत्यधिक शक्तिशाली है; यह अविश्वास प्रस्ताव पारित करके सरकार को कभी भी हटा सकता है। -
सीनेट (Senate): यह उच्च सदन है, जिसका चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मण्डल द्वारा होता है। इसका कभी विघटन नहीं होता (स्थायी सदन)। इसमें 348 सदस्य होते हैं।
Fact Check: 2003 के संशोधन के बाद फ्रांस की सीनेट का कार्यकाल 9 वर्ष से घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया है।
✦ 21. संवैधानिक परिषद (Constitutional Council) और ओम्बुड्समैन
फ्रांस के सर्वोच्च न्यायालय को 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) का अधिकार प्राप्त नहीं है, अर्थात् संसद द्वारा पारित विधेयक को न्यायालय रद्द नहीं कर सकता। इसके विकल्प के रूप में फ्रांस में 'संवैधानिक परिषद' की व्यवस्था है:
- इसमें कुल 9 सदस्य होते हैं (कार्यकाल 9 वर्ष)। इनकी नियुक्ति तीन प्रधानों द्वारा की जाती है: 3 राष्ट्रपति द्वारा, 3 राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष द्वारा, और 3 सीनेट अध्यक्ष द्वारा।
- इसके मुख्य कार्य हैं: कानूनों की संवैधानिकता की जाँच करना, चुनाव विवादों (राष्ट्रपति व संसद) पर निर्णय करना, और जनमत संग्रह (Referendum) के कार्यों का निरीक्षण करना।
इसके अतिरिक्त, नागरिकों और प्रशासन के बीच के मतभेदों को दूर करने के लिए फ्रांस में ओम्बुड्समैन (Ombudsman) की भी व्यवस्था की गई है।
✦ 22. फ्रांस का राष्ट्रपति: अपार शक्तियां और 'कॉहैबिटेशन'
फ्रांस का राष्ट्रपति राज्य का अध्यक्ष अवश्य है, लेकिन वह नाममात्र का नहीं है; उसे अत्यधिक वास्तविक शक्तियां प्राप्त हैं। वह जनता द्वारा सीधे 5 वर्ष के लिए चुना जाता है।
- वह प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और उसी के अनुमोदन पर मन्त्रिपरिषद की नियुक्ति करता है।
- वह मन्त्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है (यह ब्रिटेन से बिलकुल अलग है)।
- वह सरकार तथा सेनाओं का सर्वोच्च कमाण्डर (Commander-in-Chief) है और आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करता है।
- वह संसद को सीधे संदेश भेज सकता है।
फ्रांस की राजनीति की यह एक अनूठी स्थिति है। यदि राष्ट्रपति एक राजनीतिक पार्टी का हो और संसद (राष्ट्रीय सभा) में बहुमत किसी विरोधी पार्टी को मिल जाए, तो राष्ट्रपति को मजबूरी में विरोधी पार्टी के नेता को ही प्रधानमंत्री बनाना पड़ता है। शक्तियों के इस अजीब बँटवारे को ही 'Cohabitation' कहते हैं।
✦ 23. मौलिक अधिकार एवं संविधान संशोधन की प्रक्रिया
■ मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
फ्रांस के संविधान में जनता को विस्तृत अधिकार प्रदान किये गए हैं, जिनमें मुख्य हैं: विचारों की स्वतंत्रता, समानता, सम्पत्ति का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, सरकारी कर्मचारियों का अधिकार, नागरिकों के प्रति उत्तरदायित्व और पर्यावरण चार्टर।
■ संविधान संशोधन प्रक्रिया
फ्रांस में संविधान संशोधन एक जटिल प्रक्रिया है। संशोधन का प्रस्ताव पहले संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित होना आवश्यक है। इसके बाद, इसे अंतिम स्वीकृति के लिए या तो जनमत संग्रह (Referendum) के लिए जनता के पास रखा जाता है, अथवा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Congress) में 3/5 (60%) बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
✦ 24. संसद पर महत्वपूर्ण विचार (बर्गेस का कथन)
— बर्गेस (Burgess)
✍️ 25. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
उपर्युक्त तुलनात्मक और विस्तृत विश्लेषण से यह पूर्णतः स्पष्ट होता है कि विश्व की तीन प्रमुख शासन प्रणालियों— संसदीय (ब्रिटेन), अध्यक्षीय (अमेरिका), और अर्द्ध-अध्यक्षात्मक (फ्रांस)— ने आधुनिक राजनीतिक विज्ञान और संवैधानिक विकास को एक नई दिशा प्रदान की है। ब्रिटेन का संविधान सदियों के क्रमिक विकास, परम्पराओं और रूढ़ियों का परिणाम है; जो अलिखित होते हुए भी अपनी 'संसदीय सम्प्रभुता' (Parliamentary Sovereignty) और 'विधि के शासन' के लिए संपूर्ण विश्व में एक आदर्श माना जाता है।
इसके ठीक विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान आधुनिक विश्व का प्रथम लिखित, निर्मित और सबसे कठोर संविधान है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से 'शक्ति पृथक्करण' (Separation of Powers) और 'नियंत्रण एवं संतुलन' के सिद्धांत पर दृढ़ता से टिकी हुई है। 'न्यायिक पुनरावलोकन' (मार्बरी बनाम मेडिसन), सीनेट की असीम शक्ति, सीनेटोरियल कर्टसी, और 'लॉबिंग' जैसी अनूठी प्रथाएं अमेरिकी शासन प्रणाली को पूरी दुनिया में अद्वितीय बनाती हैं।
इन दोनों मॉडलों (ब्रिटेन और अमेरिका) के बीच एक बेहतरीन सामंजस्य स्थापित करते हुए फ्रांस के 'पंचम गणतंत्र' (1958) ने एक संकर (Hybrid) 'अर्द्ध-अध्यक्षात्मक' शासन प्रणाली प्रस्तुत की। इसमें एक अत्यंत शक्तिशाली राष्ट्रपति के साथ-साथ संसद के प्रति उत्तरदायी प्रधानमंत्री भी होता है। 'प्रशासकीय विधि' (Administrative Law), 'संवैधानिक परिषद' की उपस्थिति और 'कॉहैबिटेशन' (Cohabitation) जैसी राजनीतिक परिस्थितियाँ फ्रांस को ब्रिटेन और अमेरिका से स्पष्ट रूप से अलग करती हैं। राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए इन तीनों व्यवस्थाओं का तुलनात्मक ज्ञान ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की गहराई को समझने की सच्ची कुंजी है।
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