दबाव समूह : अर्थ, कार्यप्रणाली एवं वर्गीकरण - सम्पूर्ण नोट्स
| दबाव समूह (Pressure Groups): अर्थ, कार्यप्रणाली एवं वर्गीकरण |
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| Study Material Overview: प्रस्तुत लेख में राजनीति विज्ञान के महत्त्वपूर्ण विषय— 'दबाव समूह (Pressure Groups)' का सम्पूर्ण विश्लेषण किया गया है। इसमें दबाव समूह और राजनीतिक दल के बीच औपचारिक व अनौपचारिक अन्तर को स्पष्ट किया गया है। आर्थर बेंटले, डेविड ट्रूमैन, वी.ओ. की., फाइनर, मायरन वीनर जैसे प्रमुख विचारकों के कथनों और दबाव समूहों के विभिन्न नामकरण (लॉबिंग, हित समूह, प्रभावक गुट) को समझाया गया है। इसके अतिरिक्त, गैब्रियल आमण्ड का 4-सूत्रीय वर्गीकरण (संस्थात्मक, समुदायात्मक, असमुदायात्मक, प्रदर्शनात्मक), दबाव समूहों की कार्यविधि (अनुनय-विनय, सौदेबाजी) और भारतीय राजनीति में उनके अध्ययन से जुड़ी प्रमुख पुस्तकों का परीक्षापयोगी संकलन किया गया है। |
- 1. दबाव समूह: अर्थ एवं राजनीतिक दल से अन्तर
- 2. दबाव समूह का उदय और ऐतिहासिक विकास
- 3. दबाव समूहों के विभिन्न नामकरण और विचारकों के मत
- 4. दबाव समूह और हित समूह में सैद्धांतिक अन्तर
- 5. दबाव समूहों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-1)
- 6. दबाव समूहों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-2)
- 7. लॉबिंग और दबाव समूह की कार्यप्रणाली
- 8. दबाव समूह की परिभाषा एवं प्रमुख विशेषताएँ
- 9. दबाव समूह की कार्यविधि और राजनीतिक दल से विस्तृत अन्तर
- 10. दबाव समूह का वर्गीकरण (Classification of Pressure Groups)
- 11. दबाव समूह के साधन/तरीके और सक्रियता के स्तर
- 12. भारतीय राजनीति में दबाव समूहों का अध्ययन: प्रमुख ग्रन्थ
- 13. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
✦ 1. दबाव समूह (Pressure Groups): अर्थ एवं राजनीतिक दल से अन्तर
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के साथ-साथ दबाव समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फाइनर ने दबाव समूह को 'अज्ञात साम्राज्य' (Anonymous Empire) तथा 'सिंहासन के पीछे की शक्ति' कहा है। कुछ विद्वानों ने इसे 'अदृश्य सरकार' भी कहा है। अमेरिका (USA) में दबाव समूह की कार्यप्रणाली को 'लॉबिंग' (Lobbying) कहा जाता है और वहाँ दबाव समूहों को वैधानिक दर्जा प्राप्त है।
■ दबाव समूह और राजनीतिक दल में मुख्य अन्तर
| दबाव समूह (Pressure Group) | राजनीतिक दल (Political Party) |
|---|---|
| दबाव समूह का संगठन औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों प्रकार का हो सकता है। | राजनीतिक दलों का संगठन सदैव औपचारिक (Formal) ही होता है। |
| ये अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए संवैधानिक तथा असंवैधानिक दोनों प्रकार के साधनों का इस्तेमाल करते हैं। | राजनीतिक दल सिर्फ संवैधानिक (Constitutional) साधनों का ही प्रयोग करते हैं। |
| एक समय में एक व्यक्ति कई दबाव समूहों का सदस्य हो सकता है। | एक समय में एक व्यक्ति केवल एक ही राजनीतिक पार्टी का सदस्य होता है। |
✦ 2. दबाव समूह का उदय और ऐतिहासिक विकास
20वीं शताब्दी में विभिन्न हितों और गतिविधियों का उचित प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से दबाव समूहों का उदय और विकास हुआ। यद्यपि दबाव समूह प्रायः हर प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था में पाये जाते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये ये अपरिहार्य हैं।
- समूह का विचार सर्वप्रथम सन् 1908 में आर्थर बेंटले (Arthur Bentley) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द प्रोसेस ऑफ गवर्नमेंट' (The Process of Government) में दिया।
- डेविड ट्रूमैन (David Truman) ने अपनी पुस्तक 'द गवर्नमेंटल प्रोसेस' (The Governmental Process) में उस पर सुधार किया। तब से दबाव समूह का अध्ययन राजनीति विज्ञान में महत्वपूर्ण हो गया।
- वी. ओ. की. जुनियर (V.O. Key Jr.) के ग्रंथ 'पॉलिटिक्स, पार्टीज एंड प्रेशर ग्रुप्स' का भी ऐतिहासिक दिशा में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एस. ई. फाइनर (S.E. Finer) का मत: एस. ई. फाइनर ने दबाव समूह को 'अनाम साम्राज्य' (Anonymous Empire) कहा है। उन्होंने इसे 'यहाँ तक की तृतीय सदन' (Third Chamber) भी कह डाला। दबाव समूह अपने लोगों के हितों को प्राप्त करने के लिये सत्ता पर दबाव डालते हैं; अतः अप्रत्यक्ष रूप से दबाव समूह राजनीति से जुड़े रहते हैं और राजनीतिक गतिविधियों को अपने प्रभाव के बल पर प्रभावित करना इनका मुख्य उद्देश्य है।
✦ 3. दबाव समूहों के विभिन्न नामकरण और विचारकों के मत
विभिन्न विचारकों ने अपनी अध्ययन पद्धति और दृष्टिकोण के आधार पर दबाव समूहों को अलग-अलग नामों से सम्बोधित किया है:
इन्होंने इसके लिये 'समूह' (Group) शब्द का प्रयोग किया।
इन्होंने इसके लिये 'हित समूह' (Interest Group) कहना पसंद किया।
इन्होंने दबाव समूह के स्थान पर 'प्रभावक गुट' (Promotional Group) शब्द का प्रयोग किया।
इन्होंने दबाव समूह को 'अदृश्य सरकार' (Invisible Government) कहा।
- राउडी (Rowat/Roucek) ने दबाव समूह के स्थान पर 'गैर सरकारी समूह' कहा।
- लोम्बार्डी (Lombardi) ने दबाव समूह को 'निजी समूह' कहा।
- अमेरिका (USA) में दबाव समूह के लिये 'लॉबिंग' (Lobbying) शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका कार्य-क्षेत्र सीमित होता है; यह व्यवस्थापिका में बनने वाले कानूनों को प्रभावित करने तक सीमित है।
✦ 4. दबाव समूह और हित समूह में सैद्धांतिक अन्तर
जीन ब्लोण्डेल, राबर्ट सी. बोन, मायरन वीनर तथा एस. ई. फाइनर ने हित समूह (Interest Group) तथा दबाव समूह (Pressure Group) में कोई अन्तर नहीं किया है। व्यवहारिक रूप से इनमें कोई विशेष अन्तर नहीं माना जाता है, लेकिन सैद्धान्तिक रूप से इनमें निम्न अन्तर देखा जाता है:
- हित समूह जब अपने कार्य के लिये अनुनय-विनय का सहारा लेते हैं, वहीं दबाव समूह सीधे दबाव बनाते हैं।
- हित समूह सत्ता को सीधे प्रभावित नहीं करते, लेकिन दबाव समूह राजनीतिक प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करते हैं।
- दबाव समूह राजनीतिकृत (Politicized) होते हैं, जबकि हित समूह गैर-राजनीतिक होते हैं।
पंचायतें (Panchayats)
ट्रेड यूनियन (Trade Unions)
■ विचारकों द्वारा प्रयुक्त शब्दावली का रेखाचित्र
- S.E. फाइनर ➔ अज्ञात साम्राज्य, सिंहासन के पीछे शक्ति, तृतीय सदन
- बहुलवादी ➔ समूह
- एलेन बॉल ➔ प्रभावक गुट
- राउडी ➔ गैर सरकारी समूह
- डी. डी. मैक्किन ➔ अदृश्य सरकार
- अमेरिका में (दबाव समूह के स्थान पर) ➔ लॉबिंग
✦ 5. दबाव समूहों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-1)
वी. ओ. की. (V.O. Key) के अनुसार:
"ये शब्द (दबाव समूह) ऐसे बदनाम लॉबीबाज तस्वीर मानस पटल पर उभारते हैं जो सदाचार विधायक को जनहित में अपने विवेकानुसार आचरण नहीं करने देता है और उसके पद भ्रष्ट करने के हथकंडे इस्तेमाल करते हैं।"
(संदर्भ: पुस्तक - 'Politics, Parties and Pressure Groups')
मायरन वीनर (Myron Weiner) के अनुसार:
"हित अथवा दबाव समूह वे स्वैच्छिक समूह हैं जो प्रशासकीय ढांचे के बाहर हैं, जो सरकारी कर्मचारियो के नामांकन या नियुक्ति, सार्वजनिक नीतियो को अपनाये जाने, उनके प्रशासन व निर्वाचन को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।"
एच. जिगलर (H. Zeigler) के अनुसार:
"ऐसा संगठित समूह जो अपने सदस्यों को औपचारिक ढंग से सरकारी पदों पर नियुक्त की कोशिश किये बिना, सरकारी निर्णयों के सन्दर्भ को प्रभावित करना चाहता है।"
(संदर्भ: पुस्तक - 'Interest Groups in American Society')
✦ 6. दबाव समूहों पर प्रमुख विचारकों के कथन (भाग-2)
"यह (दबाव समूह) राजनीतिक क्रिया में सम्मिलित व्यक्तियों का संयोजन है जो शासन क्रिया पर बिना औपचारिक नियन्त्रण प्राप्त किये समाज के मूल्यों के आधिकारिक निर्णय में अपने उद्देश्यों को प्राथमिकता के लिए जुड़ते हैं।"
"दबाव समूह ऐसे लोगों का औपचारिक संगठन है जिनके मुख्य सामान्य उद्देश्य एवं स्वार्थपूर्ण जो घटनाओं के क्रम को विशेष रूप से सार्वजनिक नीति के निर्माण और शासन को अपने हित प्रभावित करने का प्रयत्न करे क्योंकि वे अपने हितो की रक्षा व वृद्धि कर सकें।"
- प्रोफेसर जोहरी (J.C. Johari) के मत में: "दबाव समूह राजनीति के साथ लुका-छिपी का खेल खेलते हैं।"
- हरमन फाइनर (Herman Finer) के अनुसार: "जहाँ सिद्धान्त और संगठन से राजनीतिक दल कमजोर होंगे वहाँ दबाव समूह पनपेंगे। जहाँ दबाव समूह शक्तिशाली होंगे वहाँ राजनीतिक दल कमजोर होंगे और जहाँ राजनीतिक दल शक्तिशाली होंगे वहाँ दबाव समूह दबा दिये जायेंगे।"
✦ 7. लॉबिंग और दबाव समूह की कार्यप्रणाली
राबर्ट सी. बोन ने लॉबिंग को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, "व्यक्तियों का ऐसा समूह जो व्यवस्थापिका के सदस्यों को अपने समूह के विशेष हितो के अनुरूप मत देने के लिये प्रभावित करने का अभियान चलाता है।"
एलेन बॉल के मत में न्यायपालिका पर प्रभाव (USA): "अमेरिका में दबाव समूह ऐसे न्यायाधीशों के चुने जाने का प्रबल शील रहते हैं जो बहुराजनीतिक रूप से सक्रिय रहे होते हैं। तो Tested Cases के आधार पर न्यायाधीशों को कुछ निर्णयों को प्रभावित करने के लिये उन पर वैधानिक दलीलें चलाकर न्यायाधीशों पर दबाव डालने की कोशिश करते हैं।"
उपर्युक्त बातो से स्पष्ट है दबाव समूह ऐसे शक्ति दलाल (Power Brokers) होते हैं जो अपने लोगों के संगठन की रक्षा हेतु सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करने की चेष्टा करते हैं। ये सत्ता के बाहर रहकर सत्ता को प्रभावित करते हैं और ऐसा करते समय वे समाज के हितो की अपेक्षा अपने हितो को अधिक वरीयता देते हैं।
✦ 8. दबाव समूह की परिभाषा एवं प्रमुख विशेषताएँ
उपर्युक्त आधार पर दबाव समूह को परिभाषित करते हुए हम कह सकते हैं कि— "यह ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बना एक औपचारिक या अनौपचारिक संगठन है जो शासन सत्ता से दूर होकर भी अपने लोगों के हितो को बनाने के लिये संवैधानिक या असंवैधानिक साधनो का इस्तेमाल करते हैं।"
■ दबाव समूह के लक्षण / विशेषताएँ (Characteristics)
- ये औपचारिक तथा अनौपचारिक रूप से संगठित होते हैं।
- ये संवैधानिक तथा असंवैधानिक साधनो का प्रयोग करते हैं।
- इनके सुनिश्चित और एक समान हित होते हैं।
- इनका उद्देश्य सीमित होता।
- इनकी प्रकृति सर्वव्यापक होती है।
- इनका कार्यकाल अनिश्चित होता है।
- ये राजनीति में परोक्ष (Indirect) भूमिका निभाते हैं।
- इनकी सदस्यता ऐच्छिक (Voluntary) होती है।
- एक समय में एक व्यक्ति कई समूहो का सदस्य हो सकता है।
Note: जीन ब्लोण्डेल, मायरन वीनर, राबर्ट सी. बोन तथा एस. ई. फाइनर दबाव समूह व हित समूह में कोई अन्तर नहीं मानते हैं।
✦ 9. दबाव समूह की कार्यविधि (Methods) और राजनीतिक दल से विस्तृत अन्तर
■ दबाव समूह की कार्यविधि के मुख्य 3 साधन
- अनुनय-विनय (Persuasion)
- सौदेबाजी (Bargaining)
- सीधी कार्यवाही (Direct Action)
■ दबाव समूह व राजनीतिक दल में 4 प्रमुख अन्तर
| राजनीतिक दल (Political Party) | दबाव समूह (Pressure Group) |
|---|---|
| राजनीतिक दल केवल औपचारिक संगठन (Formal Organization) होते हैं। | दबाव समूह औपचारिक व अनौपचारिक दोनों प्रकार के संगठन हो सकते हैं। |
| राजनीतिक दल केवल संवैधानिक साधनों का प्रयोग करते हैं। | दबाव समूह संवैधानिक तथा असंवैधानिक दोनों साधनों का प्रयोग करते हैं। |
| राजनीतिक दलों का उद्देश्य चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना है। | दबाव समूह सत्ता के बाहर रहकर सत्ता पर दबाव डालते हैं। |
| राजनीतिक दलों का स्वरूप क्षेत्रीय व राष्ट्रीय हो सकता है (इनका उद्देश्य व्यापक होता है)। | दबाव समूह ग्रामीण, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय सभी प्रकार के हो सकते हैं (इनका उद्देश्य सीमित होता है)। |
ध्यान दें: एक समय में व्यक्ति केवल एक ही राजनीतिक दल का सदस्य हो सकता है, जबकि एक ही समय में व्यक्ति कई दबाव समूहों का सदस्य हो सकता है।
✦ 10. दबाव समूह का वर्गीकरण (Classification of Pressure Groups)
विभिन्न आधारों पर दबाव समूहों को वर्गीकृत किया गया है। मुख्य रूप से दबाव समूह दो प्रकार के हो सकते हैं:
- लोकार्थी (Public Interest) दबाव समूह: वे होते हैं जो जनहित को ध्यान में रखकर सत्ता पर दबाव डालने का प्रयत्न करते हैं। (जैसे: गोरखा संघ, पर्यावरण संरक्षण संघ, गंगा बचाओ संघ इत्यादि)।
- स्वार्थी (Self-Interest) दबाव समूह: वे होते हैं जो केवल अपने लोगों के हितों को ध्यान में रखकर सत्ता पर दबाव डालते हैं। (जैसे: विद्यार्थी संघ, व्यापारिक संघ, श्रमिक संघ आदि)।
■ गैब्रियल आमण्ड (Gabriel Almond) का 4-सूत्रीय वर्गीकरण
गैब्रियल आमण्ड ने दबाव समूहों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में बाँटा है:
| 1. संस्थात्मक (Institutional) |
2. समुदायात्मक (Associational) |
3. असमुदायात्मक (Non-Associational) |
4. प्रदर्शनात्मक (Anomic) |
|---|---|---|---|
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C.P. भाम्भरी (C.P. Bhambhri) का मत: सी.पी. भाम्भरी के अनुसार, "यदि राजनीतिक नेतृत्व कमजोर होता है तो नौकरशाही के अधिकार में वृद्धि हो जाती है।" (उनकी पुस्तक का नाम: ब्यूरोक्रेसी एण्ड पॉलिटिक्स इन इण्डिया)।
✦ 11. दबाव समूह के साधन/तरीके और सक्रियता के स्तर
दबा समूह अपने लोगों के हितों को प्राप्त करने के लिये कई साधन अपनाते हैं, जिनमें कुछ निम्नलिखित हैं:
- प्रचार-प्रसार के साधन
- गोष्ठियां आयोजित करना या जगह-जगह विभिन्न सम्मेलनों द्वारा
- आंकड़े प्रस्तुत करना
- संसद की लॉबियों में सक्रिय रहना
- रिश्वत, बेईमानी तथा अन्य उपाय भी आजमा सकते हैं
- संसद सदस्यों के मनोनयन में रूचि लेते हैं
- विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन
■ दबाव समूह की सक्रियता के स्तर (Levels of Activity)
- कार्यपालिका के स्तर पर सक्रियता
- विधायिका के स्तर पर सक्रियता
- न्यायपालिका के स्तर पर सक्रियता
- प्रशासन के स्तर पर सक्रियता
- राजनीतिक दलों के स्तर पर सक्रियता
- निर्वाचन के स्तर पर सक्रियता
- द्वि-दलीय व्यवस्था में दबाव समूह का प्रभाव सीमित होता है।
- जबकि बहु-दलीय व्यवस्था वाले देशों में दबाव समूह अधिक शक्तिशाली होते हैं। (यद्यपि U.S.A. में द्विदलीय व्यवस्था है, लेकिन वहां भी दबाव समूह शक्तिशाली है)।
- लोकतंत्र में प्रतियोगी दबाव समूहों का अस्तित्व आवश्यक ही नहीं बल्कि अनिवार्य है।
- संसदीय शासन प्रणाली में कठोर दलीय प्रणाली के कारण दबाव समूह कार्यपालिका और दलीय स्तर पर अधिक सक्रिय रहते हैं।
- अध्यक्षात्मक व्यवस्था में व्यवस्थापिका में कठोर दलीय अनुशासन नहीं होता और कानून निर्माण जेब में व्यवस्थापिका स्वतन्त्र होती है, अतः व्यवस्थापिका पर दबाव समूह का प्रभाव अधिक रहता है।
✦ 12. भारतीय राजनीति में दबाव समूहों का अध्ययन: प्रमुख ग्रन्थ
भारतीय राजनीति के सन्दर्भ में दबाव समूहों के अध्ययन पर आधारित कुछ प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
इनकी रचना 'पॉलिटिक्स ऑफ स्कार्सिटी' (Politics of Scarcity) भारत में दबाव समूहों का राजनीतिक विश्लेषण करने वाली पहली रचना है।
इनका ग्रन्थ 'बिज़नेस एण्ड पॉलिटिक्स इन इण्डिया' (Business and Politics in India) भारतीय राजनीति में व्यापारियों के दबाव समूह का सूक्ष्म अध्ययन प्रस्तुत करता है।
✍️13. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
उपर्युक्त समग्र विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि दबाव समूह (Pressure Groups) आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के अपरिहार्य और 'अदृश्य' अंग हैं। जहाँ राजनीतिक दल सीधे सत्ता प्राप्ति की दौड़ में शामिल होते हैं, वहीं दबाव समूह सत्ता से बाहर रहकर अपने विशिष्ट हितों (Self-Interests) की पूर्ति के लिए सार्वजनिक नीतियों और सरकारी निर्णयों को प्रभावित करते हैं। फाइनर द्वारा इन्हें दिया गया नाम 'अज्ञात साम्राज्य' इनकी कार्यप्रणाली की यथार्थता को दर्शाता है।
इनकी कार्यविधि में अनुनय-विनय, सौदेबाजी, लॉबिंग से लेकर हड़ताल और प्रदर्शन जैसे संवैधानिक एवं असंवैधानिक दोनों साधन शामिल होते हैं। गैब्रियल आमण्ड का वर्गीकरण (संस्थात्मक, समुदायात्मक, असमुदायात्मक, प्रदर्शनात्मक) यह सिद्ध करता है कि दबाव समूह समाज के हर स्तर—नौकरशाही से लेकर मोहल्ला संगठनों तक—फैले हुए हैं।
भारत जैसे बहुलवादी और बहु-दलीय समाज में, जहाँ जाति, धर्म और भाषा के आधार पर अनेकों असमुदायात्मक दबाव समूह सक्रिय हैं, वहाँ इनका प्रभाव और भी अधिक व्यापक हो जाता है। यद्यपि वी.ओ. की. जैसे विचारकों ने इनकी कार्यप्रणाली ('लॉबिंग') की आलोचना की है, किन्तु लोकतन्त्र में विभिन्न वर्गों की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाने और एक 'शक्ति संतुलन' बनाए रखने में इनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। संक्षेप में, दबाव समूह वह शक्ति-दलाल हैं जो राजनीतिक दलों और जनता के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं।
📝 अपनी तैयारी परखें!
अगर आपने दबाव समूह के अर्थ, कार्यप्रणाली और वर्गीकरण को अच्छी तरह से समझ लिया है, तो प्रैक्टिस करने के लिए हमने आपके लिए MCQs प्रैक्टिस सेट तैयार किया है।
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