विश्व के प्रमुख संविधान: जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड और चीन के सम्पूर्ण नोट्स
| विश्व के प्रमुख संविधान: जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड और चीन (सम्पूर्ण मास्टर नोट्स) |
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| Study Material Overview: प्रस्तुत लेख में राजनीति विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय— जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड और चीन के संविधानों का तुलनात्मक एवं नवीनतम (Updated) विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। इसमें जर्मनी के 'मूल कानून' (1949) की संघात्मक व्यवस्था व 'रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव', और स्विट्ज़रलैंड के 'प्रत्यक्ष लोकतंत्र' व अनूठी 'बहुल कार्यपालिका' (संघीय परिषद) का विस्तृत वर्णन है। इसके अतिरिक्त, चीन की एकदलीय प्रणाली (CPC), माओ की लाल क्रांति, देंग शियाओपिंग का आधुनिकीकरण (थ्री-चाइल्ड पॉलिसी अपडेट सहित) और विश्व की सबसे बड़ी संसद 'राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस' (NPC) से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य इसमें संकलित हैं। TGT, PGT व UGC NET-JRF परीक्षाओं के लिए यह एक अचूक मास्टर-नोट्स है। |
- 🇩🇪 भाग 1: जर्मनी का संविधान
- 1. जर्मनी के संविधान की पृष्ठभूमि व विशेषताएं
- 2. जर्मनी की संसद: बुंडेस्टाग (निम्न सदन) व बुंडेसराट (उच्च सदन)
- 3. चांसलर (P.M.) और 'रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव'
- 4. जर्मनी के राष्ट्रपति का चुनाव एवं शक्तियां
- 5. संवैधानिक न्यायालय व मूल अधिकारों की रक्षा
- 🇨🇭 भाग 2: स्विट्ज़रलैंड का संविधान
- 6. स्विस संविधान का उदय और प्रमुख विशेषताएं (नवीनतम अपडेट सहित)
- 7. स्विट्ज़रलैंड की संसद (संघीय सभा)
- 8. विश्व की अद्वितीय 'बहुल कार्यपालिका' (संघीय परिषद)
- 9. स्विस न्यायपालिका और 'न्यायिक पुनरावलोकन' की सीमाएं
- 10. दलीय प्रणाली व स्विट्ज़रलैंड के अनूठे तथ्य
- 🇨🇳 भाग 3: चीन का संविधान
- 11. चीन के संविधान का ऐतिहासिक विकास (1949 से 1982 तक)
- 12. चीन के वर्तमान संविधान (1982) की प्रमुख विशेषताएं
- 13. देंग शियाओपिंग का 'आधुनिकीकरण' व चीन की जनसांख्यिकी (नीति अपडेट)
- 14. चीन की व्यवस्थापिका: राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस (NPC)
- 15. स्थायी समिति (Standing Committee) और न्यायपालिका
- 16. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
✦ 1. जर्मनी के संविधान की पृष्ठभूमि व विशेषताएं
जर्मनी गणराज्य की स्थापना (एकीकरण के बाद) 1990 में हुई, लेकिन पश्चिमी जर्मनी के 1949 ई. के 'मूल कानून' (Basic Law) को ही सम्पूर्ण जर्मनी का वर्तमान संविधान माना गया है।
- जर्मनी के संविधान में कुल 146 अनुच्छेद हैं।
- जर्मनी गणराज्य में कुल 16 राज्य हैं, जिन्हें जर्मनी में 'लैंडर' (Länder) कहा जाता है।
- जर्मनी एक सामाजिक संघ है और यहाँ की सम्प्रभुता जनता में निहित है।
- जर्मनी ने संसदीय शासन प्रणाली के साथ संघात्मक व्यवस्था को अपनाया है।
- यह एक कठोर संविधान है। संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है।
(अपडेट: 1949 से लेकर अब तक जर्मनी के इस मूल कानून में 65 से अधिक बार संशोधन हो चुके हैं।)
✦ 2. जर्मनी की संसद: बुंडेस्टाग व बुंडेसराट
जर्मनी की संसद (Legislature) द्विसदनात्मक है। इसके दोनों सदनों का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:
| बुंडेस्टाग (Bundestag) — निम्न सदन | बुंडेसराट (Bundesrat) — उच्च सदन |
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| यह संसद का निम्न सदन है, जो सीधे जनता का प्रतिनिधित्व करता है। | यह संसद का उच्च सदन है, जो 'लैंडर' (Länder / राज्यों) का प्रतिनिधित्व करता है। |
| इसके सदस्यों को जनता द्वारा 4 वर्ष के लिए चुना जाता है (कुछ प्रत्यक्ष रूप से और कुछ आनुपातिक प्रतिनिधित्व से)। | इनके सदस्य जनता द्वारा नहीं, बल्कि राज्यों की सरकारों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से भेजे जाते हैं। |
| इसकी मूल (बेस) सदस्य संख्या 598 है। (नवीनतम डेटा: चुनाव प्रणाली में 'ओवरहैंग' सीटों के कारण वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 736 तक पहुँच गई है।) |
इसकी सदस्य संख्या बहुत कम, केवल 69 है। |
| सभी वैधानिक पहल (कानून निर्माण) यहीं से शुरू होती है और बजट भी यहीं पास होता है। यह सबसे शक्तिशाली है। | यह एक स्थायी सदन है (कभी भंग नहीं होता), लेकिन इसकी शक्तियाँ बुंडेस्टाग की तुलना में काफी कम हैं। |
✦ 3. चांसलर (P.M.) और 'रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव'
जर्मनी में संसदीय प्रणाली होने के कारण सरकार की समस्त शक्तियों व अधिकारों का प्रयोग 'चांसलर' (Chancellor) तथा उसके मंत्रिमण्डल द्वारा किया जाता है। (जर्मनी के चांसलर की स्थिति ब्रिटेन या भारत के प्रधानमंत्री के बिलकुल समान होती है)। चांसलर को बुंडेस्टाग (निम्न सदन) द्वारा बहुमत से 4 वर्ष के लिए चुना जाता है।
जर्मनी के संविधान की यह सबसे अनूठी विशेषता है। इसका अर्थ है कि बुंडेस्टाग (संसद) वर्तमान चांसलर को हटाने के लिए केवल तभी 'अविश्वास प्रस्ताव' ला सकती है, जब वह साथ ही किसी नए व्यक्ति (वैकल्पिक चांसलर) के नाम का सुझाव पूर्ण बहुमत से पास कर दे। इसका मुख्य उद्देश्य देश में राजनीतिक अस्थिरता को रोकना है।
✦ 4. जर्मनी के राष्ट्रपति का चुनाव एवं शक्तियां
जर्मनी का राष्ट्रपति केवल एक संवैधानिक मुखिया (नाममात्र का प्रधान) होता है।
- निर्वाचन एवं कार्यकाल: राष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष 'संघीय सभा' (Federal Convention) द्वारा होता है (जिसमें बुंडेस्टाग के सभी सदस्य और उतने ही सदस्य राज्यों की विधानपालिकाओं से आते हैं)। मतदान गुप्त होता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
- महाभियोग: राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है, लेकिन यह तभी लागू होता है जब न्यायालय दोष सिद्ध कर दे।
■ राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियाँ
- उसकी स्थिति ग्रेट ब्रिटेन के सम्राट जैसी है। वह सेना का मुख्य सेनापति (Commander-in-Chief) नहीं होता है। शांतिकाल में सेना का नियंत्रण रक्षा मंत्री के पास और युद्धकाल में चांसलर के पास होता है।
- वह चांसलर के नाम का सुझाव देता है, लेकिन बुंडेस्टाग उसके सुझाव को अस्वीकार कर सकती है।
- वह चांसलर को हटा सकता है, लेकिन तभी जब बुंडेस्टाग किसी नए चांसलर का चुनाव कर दे।
- विशेष परिस्थितियों में वह बुंडेस्टाग (निम्न सदन) को भंग कर सकता है।
✦ 5. संवैधानिक न्यायालय व मूल अधिकारों की रक्षा
जर्मनी में एक स्वतंत्र 'संघीय संवैधानिक न्यायालय' (Federal Constitutional Court) का प्रावधान है।
- न्यायाधीशों का चुनाव संसद के दोनों सदनों (बुंडेस्टाग व बुंडेसराट) द्वारा किया जाता है।
- इनका कार्यकाल 12 वर्ष या 68 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
- न्यायालय का मुख्य कार्य संविधान की व्याख्या करना और संघ व राज्यों के कानूनों की रक्षा करना है। यह संसदीय विषयों पर भी निर्णय करता है।
संविधान में राजनीतिक दलों का स्पष्ट उल्लेख है। दलों को संवैधानिक मूल्यों के आधार पर कार्य करना होता है। यदि कोई दल लोकतंत्र के खिलाफ काम करता है, तो संवैधानिक न्यायालय उस 'दल की समाप्ति' का आदेश दे सकता है।
जर्मनी में नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा इसी संवैधानिक न्यायालय द्वारा की जाती है। नागरिकों के इन अधिकारों को केवल तभी ज़ब्त किया जा सकता है जब देश की मूल व्यवस्था और स्वतंत्रता खतरे में हो। संवैधानिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने का दायित्व सम्पूर्ण जनता पर है। जर्मनी का संविधान एक सबल गणराज्य तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना करता है।
✦ 6. स्विस संविधान का उदय और प्रमुख विशेषताएं
स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) एक संघीय व्यवस्था (Federal System) वाला देश है। इसका मूल संघ 1848 में बना था।
स्विट्ज़रलैंड का पुराना संविधान 1848 (संशोधित 1874) का था जिसमें 123 धाराएं व 3 अध्याय थे (जिसमें 150 वर्षों में लगभग 57 संशोधन हुए थे)। लेकिन वर्तमान में स्विट्ज़रलैंड में 1 जनवरी 2000 से एक पूर्णतः नया संशोधित संविधान लागू किया गया है (जिसे 1999 में अपनाया गया था)। इस नए संविधान में कुल 195 अनुच्छेद हैं।
"स्विट्ज़रलैंड प्रशांति का द्वीप है।"
स्विट्ज़रलैंड को 'विश्व का सबसे प्राचीन प्रजातंत्र' और 'प्रजातंत्र का घर' कहा जाता है। इसे विश्व की सबसे प्रमुख 'राजनीतिक प्रयोगशाला' के नाम से भी जाना जाता है।
■ स्विस संविधान की प्रमुख विशेषताएं
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy): यह विश्व का एकमात्र देश है जहाँ आज भी 'जनमत संग्रह' (Referendum) और 'आरंभक' (Initiative) के माध्यम से जनता सीधे कानून बनाती है।
- निर्मित, लिखित व विस्तृत संविधान। यह एक कठोर संविधान भी है।
- औपचारिक अध्यक्ष का अभाव: यहाँ राष्ट्रपति नाममात्र का या औपचारिक प्रमुख नहीं होता (बल्कि बहुल कार्यपालिका होती है)।
- बहुभाषी तथा धर्मनिरपेक्ष राज्य: यहाँ जर्मन, फ्रेंच, इटैलियन व रोमन भाषाओं को समान दर्जा प्राप्त है।
- प्रशासकीय न्याय (Administrative Justice): फ्रांस की तरह यहाँ भी सामान्य 'विधि के शासन' के बजाय प्रशासकीय न्यायालयों की व्यवस्था है।
✦ 7. स्विट्ज़रलैंड की संसद (संघीय सभा)
स्विट्ज़रलैंड की संसद को 'संघीय सभा' (Federal Assembly) कहा जाता है। इसके दो सदन हैं:
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राष्ट्रीय परिषद (National Council): यह प्रथम (निम्न) सदन है, जिसमें 200 सदस्य होते हैं। यह सम्पूर्ण जनता का प्रतिनिधित्व करती है। प्रत्येक कैंटन (Canton - राज्य) से कम से कम 1 सदस्य राष्ट्रीय परिषद के लिए अवश्य भेजा जाता है। चुनाव 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' से होता है। इसका कार्यकाल 4 वर्ष है (चुनाव हर 4 वर्ष बाद नवंबर माह के अंतिम रविवार को होते हैं)। यह सदन अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन करता है। संसद की प्रत्येक कार्यवाही 4 भाषाओं (जर्मन, फ्रेंच, इटैलियन व रोमन) में प्रकाशित की जाती है।
(नोट: 20 वर्ष की आयु वालों को मतदान का अधिकार है। स्विट्ज़रलैंड में महिलाओं को 1971 में जाकर संघीय स्तर पर मतदान का अधिकार मिला।) - राज्य परिषद (Council of States): यह द्वितीय (उच्च) सदन है। इसमें 46 सदस्य होते हैं। इसमें प्रत्येक कैंटन को समान प्रतिनिधित्व दिया गया है (20 पूर्ण कैंटन से 2-2 सदस्य और 6 अर्ध-कैंटन से 1-1 सदस्य आते हैं)। इसकी गणपूर्ति (Quorum) के लिए 50%+1 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होती है।
✦ 8. विश्व की अद्वितीय 'बहुल कार्यपालिका' (संघीय परिषद)
स्विट्ज़रलैंड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'बहुल कार्यपालिका' (Plural Executive) है, जिसे संघीय परिषद (Federal Council) के नाम से जाना जाता है।
- यहाँ 'संसदीय तथा अध्यक्षात्मक' शासन प्रणाली का एक अनूठा मिश्रण पाया जाता है।
- इस संघीय परिषद में कुल 7 सदस्य (मंत्रिमंडल के समान) होते हैं, जो सात अलग-अलग विभागों का संचालन करते हैं।
- इन सातों सदस्यों का निर्वाचन 'संघीय सभा' (संसद) के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में 4 वर्ष के लिए किया जाता है।
- ये 7 सदस्य अपनी संयुक्त बैठक में आपस में मिलकर एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं।
- राष्ट्रपति: जो व्यक्ति अध्यक्ष चुना जाता है, वही उस वर्ष 'राष्ट्रपति' कहलाता है। इसका कार्यकाल केवल 1 वर्ष होता है। अगले वर्ष कोई दूसरा सदस्य राष्ट्रपति बनता है (बारी-बारी से)।
चूँकि सातों सदस्यों की शक्तियाँ बिल्कुल समान होती हैं, इसलिए इसे दुनिया की एकमात्र अद्वितीय कार्यपालिका कहा जाता है।
✦ 9. स्विस न्यायपालिका और 'न्यायिक पुनरावलोकन' की सीमाएं
स्विट्ज़रलैंड में सर्वोच्च संघीय न्यायालय (Federal Supreme Court) की व्यवस्था है। लेकिन अमेरिका या भारत की तरह इसे 'पूर्ण न्यायिक पुनरावलोकन' की शक्ति प्राप्त नहीं है।
स्विस सर्वोच्च न्यायालय को कैंटनों (राज्यों) द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की जाँच (पुनरावलोकन) करने का अधिकार तो प्राप्त है। यदि कैंटन संविधान के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं तो वह उनके कानून को रोक सकता है। लेकिन, वह 'संघीय सभा' (केंद्रीय संसद) द्वारा निर्मित किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित करके रद्द नहीं कर सकता।
✦ 10. दलीय प्रणाली व स्विट्ज़रलैंड के अनूठे तथ्य
स्विट्ज़रलैंड में बहुदलीय व्यवस्था (Multi-Party System) है। लेकिन यहाँ अन्य देशों की तरह राजनीतिक दलों में कटुता, उग्र भावना या राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली में संघर्ष नहीं पाया जाता; बल्कि दल राष्ट्रीय हित में मिलकर कार्य करते हैं।
- स्विस राजनीति में महत्वाकांक्षी व्यक्ति राजनीति में प्रवेश नहीं करते।
- स्विस राजनीति शांति, स्वस्थ व भ्रष्टाचार-रहित देश की परिचायक है।
- यह विश्व का वह देश है जिसने द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) के दौरान भी स्वयं को पूर्णतः तटस्थ (Neutral) रखा था।
- स्विट्ज़रलैंड को 'पुष्पों वाला देश' (Land of Flowers) भी कहा जाता है।
- UNO की सदस्यता: यह देश बहुत बाद में, वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) का सदस्य बना।
✦ 11. चीन के संविधान का ऐतिहासिक विकास (1949 से 1982 तक)
हम जानते हैं कि चीन में माओ त्से तुंग (Mao Zedong) के नेतृत्व में 1949 ई. में चीनी क्रान्ति (साम्यवादी क्रान्ति) हुई। इस क्रान्ति के परिणामस्वरूप 'जनवादी चीनी गणतंत्र' (People's Republic of China) की स्थापना हुई। इसे चीन की 'लाल क्रान्ति' (Red Revolution) भी कहते हैं।
माओ त्से तुंग को चीनी क्रान्ति का जनक माना जाता है। चीन में अब तक कुल चार संविधान बन चुके हैं:
- पहला संविधान: 1954 में
- दूसरा संविधान: 1975 में
- तीसरा संविधान: 1978 में
- चौथा (और वर्तमान) संविधान: 1982 में बना।
चीन के वर्तमान (1982) संविधान में कुल 138 अनुच्छेद और 4 अध्याय हैं। इस संविधान में 'जनवादी लोकतन्त्र' (People's Democracy) का बोलबाला है।
✦ 12. चीन के वर्तमान संविधान (1982) की 6 प्रमुख विशेषताएं
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लिखित तथा निर्मित संविधान: इसका निर्माण विशेष रूप से नियुक्त एक समिति ('जनवादी कांग्रेस') ने किया था। इसके 4 अध्यायों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
• प्रथम अध्याय: सामान्य सिद्धान्तों का वर्णन।
• द्वितीय अध्याय: नागरिकों के मौलिक अधिकारों तथा कर्तव्यों का वर्णन।
• तृतीय अध्याय: राज्य के अंगों (अर्थात् विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) का वर्णन।
• चतुर्थ अध्याय: राष्ट्रध्वज, राष्ट्रचिह्न और राजधानी का ब्यौरा। - कठोर व लचीलेपन का मिश्रण: सैद्धांतिक दृष्टि से यह एक कठोर संविधान है। संविधान संशोधन का प्रस्ताव राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के 1/5 सदस्यों द्वारा रखा जाता है और इसे 2/3 सदस्यों द्वारा पारित किया जाना आवश्यक है। परंतु व्यावहारिक रूप से (एक दल का वर्चस्व होने के कारण) यह लचीला प्रतीत होता है।
- जनवादी लोकतन्त्र की तानाशाही: चीन में 'लोकतांत्रिक केंद्रवाद' (Democratic Centralism) की स्थापना की गई है।
- एकात्मक शासन प्रणाली: चीन में एकात्मक शासन है जहाँ शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण है। यद्यपि वहाँ प्रादेशिक इकाइयाँ विद्यमान हैं, लेकिन वे सभी 'केंद्र की मशीन' के रूप में ही कार्य करती हैं।
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एक दलीय व्यवस्था (Single Party System): चीन में राजनीतिक दलों को स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है। यहाँ केवल एक दल 'साम्यवादी दल' (Communist Party of China - CPC) का ही एकाधिकार और प्रभुत्व है।
(नोट: चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का 'महासचिव' (General Secretary) देश के राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है।) - मिश्रित अर्थव्यवस्था: चीन में सैद्धांतिक रूप से 'समाजवादी अर्थव्यवस्था' की बात कही गई है, लेकिन वर्तमान में वहाँ पूँजीवादी व्यवस्था (Capitalist System) लागू है। चीन आज 'बाज़ारीकरण' (Marketization) में दुनिया में सबसे आगे है।
✦ 13. देंग शियाओपिंग का 'आधुनिकीकरण' व चीन की जनसांख्यिकी
चीन एक बहु-राष्ट्रीय राज्य (Multi-national State) है। यहाँ 56 राष्ट्रीयताएं (Nationalities) निवास करती हैं। इनमें 93.3% 'हान' (Han) राष्ट्रीयता के लोग हैं, जो पूरी दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीयता है।
चीन में 'खुले द्वार की नीति' और आधुनिकीकरण का जनक देंग शियाओपिंग को माना जाता है। उन्होंने चीन में कृषि, उद्योग, रक्षा और वैज्ञानिक तकनीक— इन चारों क्षेत्रों में 'आधुनिकीकरण' (Four Modernizations) पर ज़ोरदार काम किया।
चीन में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए पहले 'एक संतान की नीति' (One Child Policy) को कठोरता से लागू किया गया था। लेकिन जनसांख्यिकीय असंतुलन (Demographic imbalance) के कारण इसे अपडेट करते हुए 2016 में 'टू-चाइल्ड' और 2021 में 'थ्री-चाइल्ड पॉलिसी' (Three-child policy) लागू कर दी गई है।
✦ 14. चीन की व्यवस्थापिका: राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस (NPC)
चीन की संसद (व्यवस्थापिका) को 'राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस' (National People's Congress - NPC) कहा जाता है।
- यह एकसदनीय (Unicameral) व्यवस्थापिका है।
- यह सदस्यों की संख्या के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी संसद है। वर्तमान में इसमें लगभग 2977 (लगभग 2980) सदस्य हैं।
- संसद के इन सदस्यों को 'डिप्टी' (Deputies) कहा जाता है और इनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
■ राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के प्रमुख कार्य
- संविधान में संशोधन करना।
- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव करना। (ध्यान दें: 1982 के नए संविधान में ही राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के पदों की पुनर्स्थापना की गई है)।
- राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रधानमंत्री तथा उप-प्रधानमंत्रियों का चुनाव करना।
- केंद्रीय सैनिक आयोग का निर्वाचन करना।
- सर्वोच्च जनवादी न्यायालय के सभापति (मुख्य न्यायाधीश) का निर्वाचन करना और उन्हें पद से हटाना।
अतिरिक्त जानकारी (Extra Fact - PGT/NET): चीन के संविधान में वर्ष 2018 में एक ऐतिहासिक संशोधन किया गया, जिसके द्वारा राष्ट्रपति के कार्यकाल की 'दो बार की सीमा' (Two-term limit) को समाप्त कर दिया गया। इस संशोधन ने शी जिनपिंग (Xi Jinping) को आजीवन राष्ट्रपति बने रहने का अधिकार दे दिया है।
✦ 15. स्थायी समिति (Standing Committee) और न्यायपालिका
चीन के नए संविधान के अनुसार, 'राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस' (NPC) का अधिवेशन वर्ष में केवल एक बार होता है। इसलिए इसकी अनुपस्थिति में 'स्थायी समिति' (Standing Committee) एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्था के रूप में कार्य करती है।
इस स्थायी समिति में एक अध्यक्ष, कई उपाध्यक्ष और कुछ अन्य सदस्य होते हैं जिनका चुनाव NPC द्वारा किया जाता है। इसका कार्यकाल भी 5 वर्ष होता है।
■ स्थायी समिति के मुख्य कार्य:
- संविधान की व्याख्या करना और उसके कार्यान्वयन का निरीक्षण (Supervision) करना।
- सैनिक, कूटनीतिक (Diplomatic) और अन्य राजकीय उपाधियां वितरित करने का अधिकार।
- विदेशों से होने वाली संधियों (Treaties) का अनुमोदन तथा आक्रमण पर प्रतिकार करना।
■ चीन की न्यायपालिका (Judiciary)
✍️ 16. सम्पूर्ण निष्कर्ष (Conclusion)
उपर्युक्त विस्तृत विश्लेषण से जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड और चीन की शासन व्यवस्थाओं की वैचारिक एवं संरचनात्मक भिन्नता पूर्णतः स्पष्ट हो जाती है। जर्मनी का 'मूल कानून' (1949) संसदीय प्रणाली और संघात्मक व्यवस्था का एक उत्कृष्ट मॉडल है, जहाँ राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 'रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव' और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक सशक्त 'संवैधानिक न्यायालय' की स्थापना की गई है।
दूसरी ओर, स्विट्ज़रलैंड का संविधान प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) का सर्वोच्च उदाहरण है। इसकी 7 सदस्यीय 'बहुल कार्यपालिका' (संघीय परिषद) विश्व में अद्वितीय है, जो बिना किसी औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष के पूरी तटस्थता और भ्रष्टाचार-रहित तरीके से देश का संचालन करती है।
इन लोकतांत्रिक मॉडलों के विपरीत, चीन का संविधान (1982) एक 'साम्यवादी' और 'एकदलीय तानाशाही' (कम्युनिस्ट पार्टी का वर्चस्व) पर आधारित है। 'लोकतांत्रिक केंद्रवाद' के नाम पर शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण है और न्यायपालिका की कोई स्वतंत्रता नहीं है। विश्व की सबसे बड़ी संसद (राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस) होने के बावजूद, वास्तविक शक्ति पार्टी महासचिव और 'स्थायी समिति' के पास होती है। राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए इन तीनों देशों का यह तुलनात्मक अध्ययन लोकतांत्रिक और सत्तावादी प्रणालियों के बीच के अंतर को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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